Summary
Chapter 3 of the Class 12 Hindi NCERT textbook (Antra), 'Ye Deep Akela' (यह दीप अकेला), प्रयोगवादी कवि सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' (1911-1987) की दो कविताओं — 'यह दीप अकेला' और 'मैंने देखा, एक बूँद' — का पाठ है, जो व्यष्टि-समष्टि और क्षणभंगुरता के भावों को छूता है।
- 'यह दीप अकेला' — व्यष्टि का समष्टि में विलय — स्नेह और गर्व से भरा अकेला दीप 'लघु मानव' का प्रतीक है; 'पर इसको भी पंक्ति को दे दो' — दीप का पंक्ति में विलय व्यक्ति के समाज में समर्पण और आत्मबोध के विश्वबोध में रूपांतरण को दर्शाता है।
- 'मैंने देखा, एक बूँद' — क्षण में मुक्ति — सागर से उछली बूँद ढलते सूरज की आग से क्षणभर रँग जाती है; 'सूने विराट् के सम्मुख हर आलोक-छुआ अपनापन है उन्मोचन नश्वरता के दाग से' — क्षणभंगुरता में ही मुक्ति का दार्शनिक अनुभव है।
- प्रयोगवादी काव्य-भाषा और प्रतीक — दीप, मधु, गोरस, अंकुर और बूँद जैसे प्रतीकों के माध्यम से अज्ञेय भाव व्यक्त करते हैं; उन्होंने शब्दों को नया अर्थ देकर हिंदी काव्य-भाषा का विकास किया, जो प्रयोगवाद की विशेषता है।
Key points & formulas
- 01कवि परिचय: सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' (सन् 1911-1987), जन्म कुशीनगर (उत्तर प्रदेश); क्रांतिकारी आंदोलन में भाग लेने के कारण चार वर्ष जेल और दो वर्ष नजरबंद रहे; दिनमान साप्ताहिक के संस्थापक संपादक।
- 02विधा: कविता — दो कविताएँ ('यह दीप अकेला' और 'मैंने देखा, एक बूँद'); 'यह दीप अकेला' एक प्रयोगवादी कविता है जो 'लघु मानव' के अस्तित्व और महत्त्व पर केंद्रित है।
- 03केंद्रीय भाव — 'यह दीप अकेला': दीप (व्यक्ति) स्नेह भरा, गर्व भरा और अद्वितीय होने पर भी अकेला है; उसे पंक्ति (समाज) में सम्मिलित करने से व्यष्टि का समष्टि में विलय होता है — दीप के लक्ष्य और उद्देश्य का सर्वव्यापीकरण।
- 04केंद्रीय भाव — 'मैंने देखा, एक बूँद': बूँद सागर के झाग से उछलकर ढलते सूरज की आग से क्षणभर रंग जाती है; कवि के अनुसार 'सूने विराट् के सम्मुख हर आलोक-छुआ अपनापन है उन्मोचन नश्वरता के दाग से' — क्षणभंगुरता में मुक्ति का अनुभव।
- 05काव्य-सौंदर्य: कविता में दीप, मधु, गोरस, अंकुर और बूँद जैसे प्रतीकों के माध्यम से भाव व्यक्त किया गया है; अज्ञेय ने 'शब्दों को नया अर्थ देने का प्रयास करते हुए हिंदी काव्य-भाषा का विकास किया है'।
- 06पुरस्कार एवं सम्मान: साहित्य अकादमी पुरस्कार, भारत भारती सम्मान, भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार।
- 07कठिन शब्दार्थ: समिधा = यज्ञ की सामग्री; पनडुब्बा = गोताखोर (जलपक्षी); अयुतः = असंबद्ध, पृथक; नश्वरता = नाशशीलता, मिटना; उन्मोचन = मुक्त करना; गोरस = दूध, दही; कुत्सा = निंदा, घृणा।
- 08प्रमुख काव्य-कृतियाँ: भग्नदूत, चिता, हरी घास पर क्षणभर, इंद्रधनु रौंदे हुए ये, आँगन के पार द्वार, कितनी नावों में कितनी बार; संपूर्ण कविताओं का संकलन 'सदानीरा' नाम से दो भागों में प्रकाशित।
Frequently asked questions
01अज्ञेय कौन थे और उनका पूरा नाम क्या था?
अज्ञेय का पूरा नाम सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन था। उनका जन्म सन् 1911 में कुशीनगर (उत्तर प्रदेश) में हुआ था और निधन 1987 में। वे दिनमान साप्ताहिक के संस्थापक संपादक थे और उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार, भारत भारती सम्मान तथा भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
02'दीप अकेला' का प्रतीकार्थ क्या है?
कविता में 'दीप' व्यक्ति का प्रतीक है जो स्नेह भरा, गर्व भरा और मदमाता है — अर्थात् अपने गुणों और शक्तियों से संपन्न परंतु अकेला। 'पंक्ति' समाज का प्रतीक है। दीप का पंक्ति में विलय 'व्यष्टि का समष्टि में विलय है और आत्मबोध का विश्वबोध में रूपांतरण' है।
03Ye Deep Akela poem ka kendra bhaav kya hai?
कविता का केंद्रीय भाव यह है कि व्यक्ति सर्वगुणसंपन्न होने पर भी उसका समाज के साथ विलय — उसकी समाज में अंतरंगता — ही उसकी शक्ति का सार्वभौमीकरण है। इसीलिए कवि कहता है — 'पर इसको भी पंक्ति को दे दो।'
04व्यष्टि और समष्टि में विलय का क्या अर्थ है?
व्यष्टि अर्थात् व्यक्ति और समष्टि अर्थात् समाज। कविता में बताया गया है कि दीप (व्यक्ति) पंक्ति (समाज) में शामिल होने से अपनी सत्ता को सार्वभौमिक बनाता है। 'दीप का पंक्ति या समूह में विलय ही उसकी ताकत का, उसकी सत्ता का सार्वभौमीकरण है, उसके लक्ष्य एवं उद्देश्य का सर्वव्यापीकरण है।'
05कविता में 'मधु', 'गोरस' और 'अंकुर' की क्या विशेषता बताई गई है?
कविता में 'मधु' को 'स्वयं काल की मौना का युग-संचय', 'गोरस' को 'जीवन-कामधेनु का अमृत-पूत पय', और 'अंकुर' को वह बताया गया है जो 'फोड़ धरा को रवि को तकता निर्भय' — ये सभी दीप (व्यक्ति) की विशेषताएँ और उसकी असाधारण शक्ति के प्रतीक हैं।
06'मैंने देखा, एक बूँद' कविता का भावार्थ क्या है?
इस कविता में बूँद सहसा सागर के झाग से उछलती है और ढलते सूरज की आग से क्षणभर रंग जाती है। कवि को दीख जाता है — 'सूने विराट् के सम्मुख / हर आलोक-छुआ अपनापन / है उन्मोचन / नश्वरता के दाग से!' इस कविता में 'जीवन में क्षण के महत्त्व को, क्षणभंगुरता को प्रतिष्ठापित किया गया है।'
07Agyeya ki pramukh kavya-kritiyan kaun si hain?
अज्ञेय की प्रमुख काव्य-कृतियाँ हैं — भग्नदूत, चिता, हरी घास पर क्षणभर, इंद्रधनु रौंदे हुए ये, आँगन के पार द्वार, कितनी नावों में कितनी बार। उनकी संपूर्ण कविताओं का संकलन 'सदानीरा' नाम से दो भागों में प्रकाशित हुआ है।
08'यह दीप अकेला' में दीप को 'मदमाता' क्यों कहा गया है?
कविता में दीप स्नेह भरा और गर्व भरा होने के साथ-साथ 'मदमाता' भी है। कवि के अनुसार 'अहंकार का मद हमें अपनों से अलग कर देता है' — इसीलिए इस अकेले दीप को भी पंक्ति में शामिल करने की बात की गई है ताकि उसकी महत्ता और सार्थकता बढ़े।
09अज्ञेय की सप्तक परंपरा क्या है?
अज्ञेय ने सप्तक परंपरा का सूत्रपात करते हुए तार सप्तक, दूसरा सप्तक और तीसरा सप्तक का संपादन किया। प्रत्येक सप्तक में सात कवियों की कविताएँ संगृहीत हैं जो शताब्दी के कई दशकों की काव्य-चेतना को प्रकट करती हैं।
10'यह दीप अकेला' प्रयोगवादी कविता क्यों मानी जाती है?
पाठ्यपुस्तक में इसे प्रयोगवादी कविता कहा गया है और इसके आधार पर 'लघु मानव' के अस्तित्व और महत्त्व पर प्रश्न पूछा गया है। अज्ञेय की कविता में 'व्यक्ति की स्वतंत्रता का आग्रह है और बौद्धिकता का विस्तार भी' — तथा उन्होंने 'शब्दों को नया अर्थ देने का प्रयास' किया है।
11'नश्वरता के दाग से उन्मोचन' का क्या अर्थ है?
पाठ के शब्दार्थ के अनुसार 'नश्वरता' का अर्थ है नाशशीलता, मिटना और 'उन्मोचन' का अर्थ है मुक्त करना। 'मैंने देखा, एक बूँद' में बूँद का क्षणभर ढलते सूरज की आग से रंगना — विराट् के सम्मुख — उसे नश्वरता के बोध से मुक्त कर देता है।
12क्या इस पाठ का PDF मुफ़्त डाउनलोड कर सकते हैं?
हाँ, यह मुफ़्त है, बिना साइन-अप।
13अज्ञेय की भाषा और काव्य-शैली कैसी है?
स्रोत के अनुसार अज्ञेय 'प्रकृति-प्रेम और मानव-मन के अंतर्द्वंद्वों के कवि हैं।' उनकी कविता में 'व्यक्ति की स्वतंत्रता का आग्रह है और बौद्धिकता का विस्तार भी।' उन्होंने 'शब्दों को नया अर्थ देने का प्रयास करते हुए हिंदी काव्य-भाषा का विकास किया है।'
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