Summary
Chapter 16 of the Class 12 Hindi NCERT textbook (Antra), 'Doosra Devdas' (दूसरा देवदास), ममता कालिया (जन्म सन् 1940) की कहानी है, जो हर की पौड़ी, हरिद्वार के परिवेश में संभव और पारो की आकस्मिक पहली मुलाकात और प्रेम के प्रथम अंकुरण को चित्रित करती है।
- आकस्मिक प्रेम का जन्म — कहानी का केंद्रीय भाव है कि प्रेम के लिए किसी निश्चित व्यक्ति, समय या स्थिति का होना आवश्यक नहीं — वह कभी भी, कहीं भी उपज सकता है; यह प्रेम को बंबइया फ़िल्मी परिपाटी से अलग पवित्र रूप में प्रस्तुत करती है।
- पुजारी का युगल-आशीर्वाद — गंगा आरती के समय एक छोटे मंदिर में संभव और पारो के पास-पास खड़े होने पर पुजारी उन्हें युगल मानकर 'सुखी रहो, फूलो-फलो, साथ ही आना' का आशीर्वाद दे देता है, जिससे दोनों अकबका जाते हैं।
- पात्र और पुनर्मुलाकात — सिविल-सेवा की तैयारी करता संभव और सौम्य गुलाबी-साड़ीधारी पारो अगले दिन बैसाखी पर मंसा देवी की केबिल कार में बच्चे मन्नू के माध्यम से पुनः मिलते हैं; रात भर संभव बेचैन रहकर कल्पनाएँ करता है।
- शीर्षक की सार्थकता — अंत में संभव अपना नाम 'संभव देवदास' बताता है और लड़की का नाम पारो है — इस नाम-युगल तथा 'मनोकामना की गाँठ अद्भुत है' जैसी पंक्तियों से 'दूसरा देवदास' शीर्षक सार्थक हो उठता है।
Key points & formulas
- 01लेखिका परिचय: ममता कालिया का जन्म सन् 1940 में मथुरा, उत्तर प्रदेश में हुआ; दिल्ली विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में एम.ए.; 1973-2001 तक महिला सेवा सदन डिग्री कालेज, इलाहाबाद में प्रधानाचार्य; उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान से साहित्य भूषण (2004) और कहानी सम्मान (1989) प्राप्त।
- 02विधा: गद्य कहानी; ममता कालिया की भाषा में व्यंग्य की सटीकता एवं सजीवता है और अभिव्यक्ति की सरलता एवं सुबोधता इसे मर्मस्पर्शी बनाती है।
- 03केंद्रीय भाव: प्रेम के लिए किसी निश्चित व्यक्ति, समय और स्थिति का होना आवश्यक नहीं — वह कभी भी, कहीं भी उपज सकता है; कहानी प्रेम को 'बंबईया फ़िल्मों की परिपाटी से अलग' पवित्र और स्थायी स्वरूप में प्रस्तुत करती है।
- 04मुख्य पात्र: संभव — एम.ए. उत्तीर्ण युवक, सिविल सेवा की तैयारी कर रहा है, नानी के घर हरिद्वार आया है; पारो — दुबली-पतली, गुलाबी साड़ीधारी सौम्य युवती; मन्नू — पारो का भतीजा जो दोनों की पुनर्मुलाकात का माध्यम बनता है।
- 05प्रमुख घटनाएँ: हर की पौड़ी पर कलावा बँधवाते समय पुजारी का युगल-आशीर्वाद और दोनों का अकबका जाना; संभव का रात भर बेचैन रहना और कल्पनाएँ करना; मंसा देवी की केबिल कार में संयोग से पुनर्मुलाकात; अंत में 'संभव देवदास' नाम का परिचय और पारो की उद्धरण-पंक्ति — 'मनोकामना की गाँठ भी अद्भुत, अनूठी है, इधर बाँधो उधर लग जाती है।'
- 06शीर्षक-सार्थकता: कहानी के अंत में संभव अपना नाम 'संभव देवदास' बताता है (पाठ में उद्धृत) और लड़की का नाम पारो है — इस नाम-युगल से शीर्षक 'दूसरा देवदास' सार्थक होता है।
- 07कठिन शब्दार्थ: नीलांजलि = विशेष प्रकार का दीपक जिसे प्रज्ज्वलित कर आरती के समय देवमूर्ति के सामने घुमाया जाता है; गोधूलि बेला = संध्या का समय; झुटपुटा = कुछ-कुछ अँधेरा, कुछ-कुछ उजाला।
Frequently asked questions
01दूसरा देवदास कहानी के लेखक/लेखिका कौन हैं?
दूसरा देवदास ममता कालिया द्वारा लिखी कहानी है। उनका जन्म सन् 1940 में मथुरा, उत्तर प्रदेश में हुआ था।
02Doosra Devdas kahani ka saransh kya hai?
यह कहानी हरिद्वार के हर की पौड़ी परिवेश में संभव और पारो की आकस्मिक मुलाकात पर आधारित है। पुजारी के गलत आशीर्वाद से शुरू हुई उथल-पुथल अगले दिन बैसाखी पर मंसा देवी में मन्नू के माध्यम से सुखद पुनर्मुलाकात में बदल जाती है और संभव अपना नाम 'संभव देवदास' बताता है।
03दूसरा देवदास कहानी का शीर्षक क्यों सार्थक है?
कहानी के अंत में संभव अपना पूरा नाम 'संभव देवदास' बताता है और लड़की का नाम पारो है — यही देवदास-पारो नाम-युगल शीर्षक को सार्थक बनाता है।
04पुजारी ने लड़की के 'हम' को किस अर्थ में लिया और क्या आशीर्वाद दिया?
पुजारी ने 'हम' को युगल अर्थ में लेकर आशीर्वाद दिया — 'सुखी रहो, फूलो-फलो, जब भी आओ साथ ही आना, गंगा मैया मनोरथ पूरे करें।'
05संभव कौन है और वह हरिद्वार क्यों आया था?
संभव एम.ए. उत्तीर्ण युवक है जो सिविल सेवा परीक्षाओं में बैठने वाला है। माता-पिता के आग्रह पर वह नानी से मिलने और गंगा जी के दर्शन के लिए हरिद्वार आया था।
06मन्नू कौन है और कहानी में उसकी क्या भूमिका है?
मन्नू पारो का भतीजा है। वह पौड़ी पर संभव से दोस्ती करता है और मंसा देवी की केबिल कार में वापसी के समय 'पारो बुआ' कहकर पारो का नाम उजागर करते हुए दोनों को मिलाने का माध्यम बनता है।
07'मनोकामना की गाँठ भी अद्भुत, अनूठी है, इधर बाँधो उधर लग जाती है' — इस कथन का क्या आशय है?
यह पारो के मन का भाव है — मंसा देवी पर बाँधी मनोकामना की गाँठ उसी क्षण फलीभूत हो गई जब संभव उसके सामने प्रकट हुआ। यह संयोग और प्रेम की अप्रत्याशित प्रकृति को व्यक्त करता है।
08हर की पौड़ी पर गंगा आरती का वर्णन कहानी में कैसे किया गया है?
साँझ की बेला में पीतल की नीलांजलि में सहस्र बत्तियाँ जलती हैं, पुजारी 'जय गंगे माता' गाते हैं, मनौतियों के दोने गंगा की लहरों पर तैरते हैं और लता मंगेशकर की आवाज़ लाउडस्पीकरों से 'ओम जय जगदीश हरे' गूँजाती है।
09ममता कालिया की प्रमुख रचनाएँ कौन-सी हैं?
उपन्यास: बेघर, नरक दर नरक, एक पत्नी के नोट्स, प्रेम कहानी, लड़कियाँ, दौड़। 12 कहानी-संग्रह 'संपूर्ण कहानियाँ' नाम से दो खंडों में प्रकाशित हैं। हालिया संग्रह: पच्चीस साल की लड़की, थियेटर रोड के कौवे।
10दूसरा देवदास कहानी किस विधा की है और इसकी भाषा-शैली कैसी है?
यह गद्य कहानी है। ममता कालिया की भाषा में व्यंग्य की सटीकता एवं सजीवता है और अभिव्यक्ति की सरलता एवं सुबोधता इसे विशेष रूप से मर्मस्पर्शी बनाती है।
11क्या इस पाठ का PDF मुफ़्त डाउनलोड कर सकते हैं?
हाँ, यह मुफ़्त है, बिना साइन-अप।
12नीलांजलि का क्या अर्थ है?
नीलांजलि विशेष प्रकार का दीपक है जिसे प्रज्ज्वलित कर आरती के समय देवमूर्ति के सामने घुमाया जाता है।
13संभव की नानी का चरित्र-चित्रण कीजिए।
नानी ममतामयी और चिंतित वृद्धा हैं — संभव की देर होने पर घबराती हैं, उन्हें बार-बार खाने के लिए कहती हैं और एक बात को कई-कई बार दोहराती हैं। उनकी नींद उथली है और वे संभव का पूरा ध्यान रखती हैं।
14Mamta Kalia ko kaun se puraskar mile hain?
उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान से साहित्य भूषण (2004) और कहानी सम्मान (1989); अभिनव भारती, कलकत्ता से रचना पुरस्कार; सरस्वती प्रेस तथा साप्ताहिक हिंदुस्तान का श्रेष्ठ कहानी पुरस्कार।
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