Summary
Chapter 7 of the Class 12 Hindi NCERT textbook (Antra), 'Barahmasa' (बारहमासा), यह पाठ मलिक मुहम्मद जायसी (सन् 1492-1542) की प्रसिद्ध काव्य-कृति पद्मावत के 'बारहमासा' खंड से लिए गए अंश हैं, जिनमें नायिका नागमती की विरह-वेदना का अगहन, पूस, माघ और फागुन माहों में चित्रण किया गया है।
- मासों के अनुसार विरह-दशा — चार अंशों में अगहन की विरह-अग्नि, पूस के शीत से काँपता शरीर, माघ के पाला-माँहुट से बढ़ता कष्ट और फागुन के चौगुने ताप में नागमती की क्रमशः गहराती वेदना दर्शाई गई है।
- प्रकृति और पक्षी संदेशवाहक के रूप में — नागमती भँवरे और काग के माध्यम से प्रिय तक संदेश भेजती है; चकई, कोकिला, सारस जैसे पक्षी और मौसमी प्रकृति-चित्र उसकी विरह-दशा को और गहरा तथा मार्मिक बनाते हैं।
- सूफी प्रेम और आत्म-दहन की तीव्रता — फागुन में जब सब फाग खेलते हैं, नागमती तब भी विरह-ताप में जलती रहती है और अपना तन जलाकर राख हो जाने की कामना करती है — सूफी प्रेममार्ग की तीव्र समर्पण-भावना यहाँ मुखर है।
- पद्मावत की पृष्ठभूमि व शैली — पद्मावत सिंहल की पद्मावती और चित्तौड़ के रत्नसेन के प्रेम की लोककथा पर आधारित प्रबंधकाव्य है, जो फारसी मसनवी शैली और ठेठ अवधी दोहा-चौपाई में रचा गया है।
Key points & formulas
- 01कवि परिचय: मलिक मुहम्मद जायसी (सन् 1492-1542), जायस, अमेठी (उत्तर प्रदेश) के निवासी; सूफी प्रेममार्गी शाखा के सर्वश्रेष्ठ कवि; गुरु: सैयद अशरफ और शेख बुरहान।
- 02प्रमुख रचनाएँ: पद्मावत (प्रेमाख्यान परंपरा का सर्वश्रेष्ठ प्रबंधकाव्य), अखरावट और आखिरी कलाम।
- 03पद्मावत की कथा: भारतीय लोककथा पर आधारित — सिंहल देश की राजकुमारी पद्मावती और चित्तौड़ के राजा रत्नसेन के प्रेम की कथा।
- 04विधा और भाषा: फारसी की मसनवी शैली में रचित; दोहा-चौपाई शैली; भाषा ठेठ अवधी; काव्य-शैली अत्यंत प्रौढ़ और गंभीर।
- 05केंद्रीय भाव: नागमती की विरह-वेदना — अगहन में विरह की अग्नि, पूस में शीत से काँपता शरीर, माघ में पाला और माँहुट (महावट) से बढ़ता कष्ट, फागुन में चौगुना शीत और विरह-ताप।
- 06काव्य-सौंदर्य: भँवरा, काग, चकई, कोकिला, सारस जैसे पक्षियों के माध्यम से नागमती की दशा व्यक्त होती है; प्रकृति के मौसमी चित्र (पाला, माँहुट, पवन-झकोरे) विरह-वेदना को और गहरा करते हैं; काव्य पर लोक संस्कृति का व्यापक प्रभाव है।
- 07कठिन शब्दार्थ: 'सीऊ' = शीत; 'दगधै' = दग्ध होना/जलना; 'माँहुट' = माघ मास की वर्षा; 'सचान' = बाज पक्षी; 'चाँचरि' = होली के समय खेला जाने वाला एक खेल।
Frequently asked questions
01बारहमासा के कवि कौन हैं?
बारहमासा के कवि मलिक मुहम्मद जायसी हैं। वे सन् 1492 में जायस, अमेठी (उत्तर प्रदेश) के निकट पैदा हुए थे और सूफी प्रेममार्गी शाखा के सर्वश्रेष्ठ कवि माने जाते हैं।
02Barahmasa kis rachna ka hissa hai?
बारहमासा, जायसी की प्रसिद्ध रचना पद्मावत का एक खंड है। पद्मावत प्रेमाख्यान परंपरा का सर्वश्रेष्ठ प्रबंधकाव्य माना जाता है।
03बारहमासा में नागमती कौन है?
नागमती इस काव्य की नायिका है जो अपने प्रिय के वियोग में विरह-ताप भोग रही है। कवि ने अगहन, पूस, माघ और फागुन मासों में उसकी विरह-दशा का चित्रण किया है।
04पद्मावत में किस कथा का वर्णन है?
पद्मावत में सिंहल देश की राजकुमारी पद्मावती और चित्तौड़ के राजा रत्नसेन के प्रेम की भारतीय लोककथा पर आधारित कथा है।
05बारहमासा की भाषा और शैली क्या है?
बारहमासा की भाषा ठेठ अवधी है। यह फारसी की मसनवी शैली में रचित है और दोहा-चौपाई शैली का प्रयोग किया गया है।
06'पिय सौं कहेहु सँदेसड़ा, ऐ भँवरा ऐ काग' पंक्ति का आशय क्या है?
इन पंक्तियों में नागमती भँवरे और काग को संदेशवाहक बनाकर अपने प्रिय को यह सूचना भेज रही है कि वह विरह में जल-जलकर मर रही है और उसका धुआँ आकाश में फैल रहा है।
07Barahmasa mein kaun se mahine ka varnan hai?
पाठ में अगहन, पूस, माघ और फागुन — इन चार महीनों में नागमती की विरह-दशा का वर्णन है।
08'रकत ढरा माँसू गरा, हाड़ भए सब संख' का अर्थ क्या है?
इन पंक्तियों में नागमती की चरम विरह-दशा दर्शाई गई है — उसका रक्त बह गया, माँस गल गया और हड्डियाँ शंख के समान सफेद रह गई हैं।
09जायसी किस काव्य-शाखा के कवि हैं?
जायसी सूफी प्रेममार्गी शाखा के सर्वश्रेष्ठ कवि माने जाते हैं।
10फागुन माह में नागमती की क्या स्थिति है?
फागुन में पवन के झकोरे शीत को चौगुना बढ़ा देते हैं। सभी फाग (चाँचरि) खेल रहे हैं, पर नागमती विरह-ताप में और अधिक संतप्त होती जाती है। वह कहती है — 'यह तन जारौं छार कै, कहौं कि पवन उड़ाउ। / मकु तेहि मारग होइ परौं, कंत धरैं जहँ पाउ॥'
11क्या इस पाठ का PDF मुफ़्त डाउनलोड कर सकते हैं?
हाँ, यह मुफ़्त है, बिना साइन-अप।
12जायसी के गुरु कौन थे?
जायसी ने सैयद अशरफ और शेख बुरहान का अपने गुरुओं के रूप में उल्लेख किया है।
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