Class 12 Hindi

Chapter 15 — Jahan Koi Waapsi Nahi

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Overview

Summary

Chapter 15 of the Class 12 Hindi NCERT textbook (Antra), 'Jahan Koi Waapsi Nahi' (जहाँ कोई वापसी नहीं), निर्मल वर्मा का यात्रा-वृत्तांत है ('धुंध से उठती धुन' से लिया गया), जिसमें सिगरौली के नवागाँव क्षेत्र में औद्योगीकरण से होने वाले विस्थापन और पर्यावरण-विनाश का मार्मिक चित्रण है।

  • औद्योगीकरण बनाम प्रकृति-संतुलन1983 में 'लोकायन' की ओर से सिगरौली गए लेखक चिंता व्यक्त करते हैं कि अंधाधुंध औद्योगीकरण प्रकृति, मनुष्य और संस्कृति के बीच के 'नाजुक संतुलन' को मटियामेट कर देगा।
  • विस्थापन की लगातार लहरेंनवागाँव के अमझर में अमरौली प्रोजेक्ट की घोषणा के बाद आम के पेड़ सूखने लगे; रिहंद बाँध से पहली विस्थापन-लहर आई, फिर सेंट्रल कोल फील्ड और NTPC ने विस्थापन को और बढ़ाया।
  • पेड़ों का मूक सत्याग्रहलेखक लिखते हैं — 'आदमी उजड़ेगा, तो पेड़ जीवित रहकर क्या करेंगे?' — मनुष्य के विस्थापन के विरोध में पेड़ों का सूखना एक विचित्र, मार्मिक अनुभव के रूप में प्रस्तुत होता है।
  • 'आधुनिक शरणार्थी' का दर्दप्राकृतिक विपदा के बाद लोग घर लौट सकते हैं, पर विकास के नाम पर उन्मूलित लोग कभी नहीं लौट पाते — ये 'आधुनिक भारत के नए शरणार्थी' हैं, जिनके लिए वापसी का कोई रास्ता नहीं।
Essentials

Key points & formulas

  1. 01लेखक परिचय: निर्मल वर्मा (1929–2005), जन्म शिमला; नयी कहानी आंदोलन के महत्त्वपूर्ण हस्ताक्षर; 1985 में 'कव्वे और काला पानी' पर साहित्य अकादमी पुरस्कार।
  2. 02विधा व स्रोत: यात्र-वृत्तांत; 'धुंध से उठती धुन' यात्र-संस्मरण संग्रह से लिया गया; रचनाकाल 1983 (सिगरौली)।
  3. 03केंद्रीय भाव: अंधाधुंध औद्योगीकरण से पर्यावरण-विनाश और ग्रामीण जन का स्थायी विस्थापन; लेखक का मत है कि प्रकृति, मनुष्य और संस्कृति के बीच का 'नाजुक संतुलन' नष्ट हो रहा है।
  4. 04मुख्य स्थान व घटनाएँ: नवागाँव (50,000 की आबादी, लगभग 18 गाँव) का अमझर गाँव — अमरौली प्रोजेक्ट की घोषणा के बाद आम के पेड़ सूख गए; रिहंद बाँध निर्माण से पहली विस्थापन-लहर; बाद में सेंट्रल कोल फील्ड और NTPC की स्थापना।
  5. 05पेड़ों का मूक सत्याग्रह: लेखक लिखते हैं — 'आदमी उजड़ेगा, तो पेड़ जीवित रहकर क्या करेंगे?' — मनुष्य के विस्थापन के विरोध में पेड़ों का सूखना एक विचित्र अनुभव बताया गया है।
  6. 06आधुनिक शरणार्थी: औद्योगीकरण से उजड़े लोग 'आधुनिक भारत के नए शरणार्थी' हैं — प्राकृतिक आपदा के बाद लोग लौट सकते हैं, किंतु विकास के नाम पर उन्मूलित लोग 'फिर कभी अपने घर वापस नहीं लौट सकते।'
  7. 07कठिन शब्दार्थ (स्रोत से): विस्थापन = अपने निवास स्थान से बलपूर्वक हटाना/उजाड़ना; उन्मूलित = अपने मूल से कटना; शाश्वत = निरंतर, कभी न मिटने वाला; लोलुप = लालची; झंझावात = मुसीबत/परेशानी।
Questions

Frequently asked questions

01

Jahan Koi Waapsi Nahi ke lekhak kaun hain?

इस यात्र-वृत्तांत के लेखक निर्मल वर्मा (1929–2005) हैं, जिनका जन्म शिमला (हिमाचल प्रदेश) में हुआ था।

02

'जहाँ कोई वापसी नहीं' किस संग्रह से लिया गया है?

यह पाठ निर्मल वर्मा के यात्र-संस्मरण संग्रह 'धुंध से उठती धुन' से लिया गया है।

03

अमझर गाँव का क्या अर्थ है और वहाँ सूनापन क्यों है?

अमझर का अर्थ है — आम के पेड़ों से घिरा गाँव जहाँ आम झरते हैं। जब से अमरौली प्रोजेक्ट के अंतर्गत नवागाँव के गाँव उजाड़े जाने की सरकारी घोषणा हुई, तब से आम के पेड़ सूखने लगे — न फल पकते हैं, न कुछ नीचे झरता है।

04

इस पाठ में 'आधुनिक भारत के नए शरणार्थी' किन्हें कहा गया है?

औद्योगीकरण के झंझावात ने जिन लोगों को उनकी घर-जमीन से उखाड़कर हमेशा के लिए निर्वासित कर दिया है, उन्हें 'आधुनिक भारत के नए शरणार्थी' कहा गया है।

05

प्रकृति के कारण विस्थापन और औद्योगीकरण के कारण विस्थापन में क्या अंतर बताया गया है?

बाढ़ या भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा के बाद लोग कुछ अरसे के लिए घर छोड़ते हैं और आफत टलने पर वापस लौट भी आते हैं। किंतु विकास और प्रगति के नाम पर होने वाले विस्थापन में लोग फिर कभी अपने घर वापस नहीं लौट सकते और उनका परिवेश व आवास स्थल भी हमेशा के लिए नष्ट हो जाते हैं।

06

पेड़ों के मूक सत्याग्रह से लेखक का क्या तात्पर्य है?

लेखक ने देखा कि अमझर में अमरौली प्रोजेक्ट की घोषणा के बाद आम के पेड़ सूखने लगे। उन्होंने इसे 'मनुष्य के विस्थापन के विरोध में पेड़ों का मूक सत्याग्रह' कहा है — अर्थात पेड़ भी मानो जानते हैं कि जब आदमी उजड़ेगा तो वे जीवित रहकर क्या करेंगे।

07

लेखक के अनुसार स्वातंत्र्योत्तर भारत की सबसे बड़ी ट्रेजेडी क्या है?

लेखक के अनुसार ट्रेजेडी यह है कि पश्चिम की देखादेखी में योजनाएँ बनाते समय — प्रकृति, मनुष्य और संस्कृति के बीच का नाजुक संतुलन किस तरह नष्ट होने से बचाया जा सकता है — इस ओर पश्चिम-शिक्षित सत्ताधारियों का ध्यान कभी नहीं गया।

08

यूरोप और भारत की पर्यावरण संबंधी चिंताएँ किस प्रकार भिन्न हैं?

पाठ के अनुसार यूरोप में पर्यावरण का प्रश्न मनुष्य और भूगोल के बीच संतुलन बनाए रखने का है, जबकि भारत में यही प्रश्न मनुष्य और उसकी संस्कृति के बीच पारंपरिक संबंध बनाए रखने का हो जाता है — क्योंकि भारत की सांस्कृतिक विरासत संग्रहालयों में नहीं, मनुष्य और उसकी धरती-नदी-जंगल के रिश्तों में जीवित थी।

09

सिगरौली का नाम कहाँ से आया है?

पाठ में उल्लेख है कि एक पुरानी दंतकथा के अनुसार सिगरौली का नाम 'सृंगावली' पर्वतमाला से निकला है, जो पूर्व-पश्चिम में फैली है।

10

'कभी-कभी किसी इलाके की संपदा ही उसका अभिशाप बन जाती है' — इसका क्या आशय है?

लेखक का तात्पर्य है कि सिगरौली की अपार खनिज संपदा को देखकर ही दिल्ली के सत्ताधारियों और उद्योगपतियों की आँखें उसकी ओर गईं और परिणामस्वरूप वहाँ के वनवासियों व किसानों को उनकी उर्वरा भूमि व जंगलों से उखाड़ दिया गया।

11

लेखक सिगरौली किस संस्था की ओर से गए थे?

लेखक दिल्ली में स्थित 'लोकायन' संस्था की ओर से सिगरौली गए थे — विकास के 'उजले' पहलू के पीछे के विनाश का जायजा लेने।

12

क्या इस पाठ का PDF मुफ़्त डाउनलोड कर सकते हैं?

हाँ, यह मुफ़्त है, बिना साइन-अप।

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