Class 12 Hindi

Chapter 8 — Pad

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Overview

Summary

Chapter 8 of the Class 12 Hindi NCERT textbook (Antra), 'Pad' (पद), विद्यापति (सन् 1380–1460) के तीन मैथिली पदों का संकलन है, जो राधा-कृष्ण के प्रेम के माध्यम से विरहिणी नायिका की मनोदशा को चित्रित करते हैं।

  • विद्यापति — संधिकवि और उनकी पदावलीमिथिला-नरेश शिवसिंह के राजकवि विद्यापति ने संस्कृत, अवहट्ट और मैथिली में रचना की; आदिकाल और भक्तिकाल के संधिकवि उनकी पदावली में जनभाषा में जनसंस्कृति की अभिव्यक्ति हुई है।
  • विरह और मिलन की आसपहले पद में सावन में अकेली नायिका प्रियतम को पत्र भेजना चाहती है — 'मोर मन हरि हर लए गेल' — जो गोकुल छोड़ मधुपुर जा बसे; कवि कार्तिक मास में उनके लौटने की आस बँधाता है।
  • अतृप्त प्रेम और नित्य-नूतन अनुरागदूसरे पद में नायिका कहती है कि जन्म भर रूप देखने पर भी नयन तृप्त नहीं हुए — 'सेह पिरिति अनुराग बखानिअ तिल तिल नूतन होए' — प्रीति का अनुराग तिल-तिल नित नया होता रहता है।
  • प्रकृति में असह्य विरहतीसरे पद में फूला वन और कोकिल-मधुकर की ध्वनि नायिका को असह्य लगती है; वह पृथ्वी पर बैठ जाती है, अश्रु बहते हैं और वह 'चौदसि-चाँद-समान' विरह में क्षण-क्षण क्षीण होती जाती है।
Essentials

Key points & formulas

  1. 01कवि परिचय: विद्यापति (सन् 1380–1460) का जन्म मधुबनी (बिहार) के बिस्पी गाँव में हुआ; वे मिथिला नरेश राजा शिवसिंह के अभिन्न मित्र, राजकवि और सलाहकार थे।
  2. 02भाषाएँ: विद्यापति ने संस्कृत, अवहट्ट (अपभ्रंश) और मैथिली — तीन भाषाओं में रचनाएँ कीं।
  3. 03साहित्यिक स्थान: वे आदिकाल और भक्तिकाल के संधिकवि कहे जा सकते हैं; उनकी पदावली में जनभाषा में जनसंस्कृति की अभिव्यक्ति हुई है।
  4. 04केंद्रीय भाव: राधा-कृष्ण के प्रेम के माध्यम से लौकिक प्रेम और विरह की प्रगाढ़ अनुभूति; पदों में 'प्रेम और सौंदर्य की अनुभूति की निश्छल और प्रगाढ़ अभिव्यक्ति' है।
  5. 05पद 1: विरहिणी सावन में प्रियतम को पत्र भेजना चाहती है; 'मोर मन हरि हर लए गेल' — प्रियतम ने मन हर लिया है; वे गोकुल छोड़कर मधुपुर गए; कार्तिक मास में लौटने की आस।
  6. 06पद 2: 'जनम अबधि हम रूप निहारल नयन न तिरपित भेल' — जन्म भर देखने पर भी नयन तृप्त नहीं; 'सेह पिरिति अनुराग बखानिअ तिल तिल नूतन होए' — प्रीति का अनुराग तिल-तिल नूतन होता है।
  7. 07पद 3: कुसुमित वन देखकर नायिका आँखें मूँद लेती है; कोकिल-कलरव और मधुकर-धुनि सुनकर कान ढँक लेती है; 'तोहर बिरह दिन छन-छन तनु छिन — चौदसि-चाँद-समान' — विरह में क्षण-क्षण क्षीण होती नायिका।
  8. 08कठिन शब्दार्थ: 'पतिआ' = पत्र/चिट्ठी; 'तिरपित' = तृप्त/संतुष्ट; 'जरनि' = जलन; 'कातर' = दुखी; 'चौदसि' = चतुर्दशी; 'मधुपुर' = मथुरा।
Questions

Frequently asked questions

01

विद्यापति का जन्म कहाँ और कब हुआ था?

विद्यापति का जन्म सन् 1380 में मधुबनी (बिहार) के बिस्पी गाँव में एक विद्या और ज्ञान के लिए प्रसिद्ध परिवार में हुआ था।

02

NCERT Class 12 Hindi Antra Pad किस कवि की रचना है?

यह पाठ विद्यापति (सन् 1380–1460) की रचना है, जो मिथिला नरेश राजा शिवसिंह के अभिन्न मित्र, राजकवि और सलाहकार थे।

03

Vidyapati ne kitni bhashaon mein rachnaen kin?

विद्यापति ने संस्कृत, अवहट्ट (अपभ्रंश) और मैथिली — तीन भाषाओं में रचनाएँ कीं।

04

विद्यापति की प्रमुख कृतियाँ कौन-सी हैं?

उनकी महत्त्वपूर्ण कृतियाँ हैं — कीर्तिलता, कीर्तिपताका, पुरुष परीक्षा, भू-परिक्रमा, लिखनावली और पदावली।

05

पहले पद में प्रियतमा के दुख का क्या कारण है?

प्रियतम गोकुल छोड़कर मधुपुर जा बसे हैं और सावन के महीने में विरहिणी अकेले घर में नहीं रह पा रही। कवि के अनुसार 'मोर मन हरि हर लए गेल' — प्रियतम ने उसका मन हर लिया है।

06

'नयन न तिरपित भेल' का क्या अर्थ है?

इसका अर्थ है कि नायिका ने जन्म भर प्रियतम का रूप देखा, फिर भी नेत्र संतुष्ट नहीं हो पाए — पाठ के अनुसार 'जनम अबधि हम रूप निहारल नयन न तिरपित भेल।'

07

Antra 12 Chapter 8 Pad mein teen padon ka kya vishay hai?

तीनों पद विरहिणी नायिका की मनोदशा पर केंद्रित हैं — प्रियतम का वियोग और पत्र भेजने की चाहत (पद 1), जन्म भर की प्रेम-तृष्णा (पद 2), और विरह से क्षण-क्षण क्षीण होती नायिका (पद 3)।

08

कोयल और भौरों की ध्वनि का नायिका पर क्या प्रभाव पड़ता है?

तीसरे पद में नायिका कुसुमित वन देखकर आँखें मूँद लेती है और 'कोकिल-कलरव, मधुकर-धुनि सुनि, कर देइ झाँपइ कान' — कोयल-भौरों की ध्वनि सुनकर कानों पर हाथ रख लेती है, क्योंकि ये विरह को और तीव्र कर देती हैं।

09

विद्यापति को संधिकवि क्यों कहा जाता है?

वे आदिकाल और भक्तिकाल के संधिकवि कहे जा सकते हैं क्योंकि उनकी कीर्तिलता और कीर्तिपताका पर दरबारी संस्कृति और अपभ्रंश काव्य परंपरा का प्रभाव है, जबकि पदावली के गीतों में भक्ति और शृंगार की गूँज है।

10

तीसरे पद में 'चौदसि-चाँद-समान' का क्या भाव है?

नायिका विरह के कारण क्षण-क्षण क्षीण होती जा रही है। पाठ में कहा गया है — 'तोहर बिरह दिन छन-छन तनु छिन — चौदसि-चाँद-समान' — जैसे चतुर्दशी का चाँद घटता जाता है, वैसे ही विरह में उसका शरीर क्षीण होता जा रहा है।

11

'पतिआ' और 'मधुपुर' का क्या अर्थ है?

पाठ के शब्दार्थ के अनुसार 'पतिआ' का अर्थ पत्र/चिट्ठी है और 'मधुपुर' का अर्थ मथुरा है।

12

क्या इस पाठ का PDF मुफ़्त डाउनलोड कर सकते हैं?

हाँ, यह मुफ़्त है, बिना साइन-अप।

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