Summary
Chapter 12 of the Class 12 Hindi NCERT textbook (Antra), 'Sambadiya' (संवदिया), फणीश्वरनाथ 'रेणु' की आंचलिक कहानी है, जिसमें संवदिया (संदेशवाहक) हरगोबिन और असहाय बड़ी बहुरिया की मार्मिक कथा प्रस्तुत की गई है।
- बेसहारा नारी की पीड़ा — बड़े भैया के निधन के बाद तीनों देवर जायदाद बाँटकर शहर बस जाते हैं और बड़ी हवेली की बड़ी बहुरिया को बेसहारा छोड़ देते हैं — कहानी इस असहाय नारी की गहन पीड़ा को केंद्र में रखती है।
- संवदिया का नैतिक संकट — बड़ी बहुरिया हरगोबिन को माँ के पास यह संवाद लेकर भेजती है कि वह उसे ले जाए, नहीं तो गले में घड़ा बाँधकर पोखरे में डूब मरेगी; पर हरगोबिन यह दर्दनाक संवाद बूढ़ी माता को सुना नहीं पाता।
- मानवीय संवेदना का उत्कर्ष — बीस कोस पैदल लौटकर हरगोबिन बड़ी बहुरिया के पैर पकड़ माफी माँगता है और 'तुम मेरी माँ हो, सारे गाँव की माँ हो' कहकर उसकी देखभाल का संकल्प लेता है — यही उसकी गहरी संवेदना है।
- आंचलिकता — भाषा और परिवेश — रेणु आंचलिक कथाकार हैं; कहानी लोकभाषा, आंचलिक शब्दावली ('अफरना', 'रैयत', 'परेवा') और मुहावरों ('आगे नाथ न पीछे पगहा') से बुनकर बिहारी ग्राम-जीवन को सजीव कर देती है।
Key points & formulas
- 01लेखक परिचय: फणीश्वरनाथ 'रेणु' (1921-1977), बिहार के पूर्णिया जिले के औराही हिगना गाँव के निवासी, हिंदी के प्रमुख आंचलिक कथाकार।
- 02विधा: कहानी — लोकभाषा, आंचलिक शब्दावली और मुहावरों पर आधारित।
- 03केंद्रीय भाव: असहाय और बेसहारा नारी (बड़ी बहुरिया) की पीड़ा तथा संवदिया हरगोबिन की गहरी मानवीय संवेदना।
- 04मुख्य पात्र: हरगोबिन (संवदिया), बड़ी बहुरिया (बड़ी हवेली की बेसहारा पुत्रवधू), बूढ़ी माता (बड़ी बहुरिया की माँ), मोदिआइन (गाँव की दुकानदार)।
- 05मुख्य संघर्ष: बड़ी बहुरिया का संवाद — 'यदि माँ मुझे नहीं ले गई तो गले में घड़ा बाँधकर पोखरे में डूब मरूँगी'; हरगोबिन यह दर्दनाक संवाद बूढ़ी माता को नहीं सुना पाता।
- 06हरगोबिन बूढ़ी माता को सच्चा संवाद न सुनाकर वापस लौटता है और बीस कोस पैदल चलकर गाँव पहुँचता है; बड़ी बहुरिया के सामने माफी माँगकर संकल्प लेता है कि 'तुम मेरी माँ हो, सारे गाँव की माँ हो।'
- 07कठिन शब्दार्थ (पाठ के अनुसार): 'संवदिया' = संदेशवाहक; 'अफरना' = पेट भरकर खाना; 'रैयत' = प्रजा; 'सूपा' = छाज/सूप; 'परेवा' = कबूतर; 'बहुरिया' = पुत्रवधू; 'आगे नाथ न पीछे पगहा' = कोई जिम्मेदारी न होना।
Frequently asked questions
01संवदिया कहानी के लेखक कौन हैं?
संवदिया कहानी के लेखक फणीश्वरनाथ 'रेणु' हैं। उनका जन्म 1921 में बिहार के पूर्णिया जिले के औराही हिगना गाँव में हुआ था और निधन 1977 में हुआ।
02Sambadiya kahani ka kendra kya hai?
इस कहानी का केंद्र है बड़ी बहुरिया की असहाय पीड़ा और संवदिया हरगोबिन की मानवीय संवेदना। बड़े भैया के निधन के बाद देवरों द्वारा छोड़ी गई बड़ी बहुरिया अपनी माँ के पास संदेश भेजना चाहती है।
03हरगोबिन ने बड़ी बहुरिया का सच्चा संवाद बूढ़ी माता को क्यों नहीं सुनाया?
हरगोबिन भावुक हो गया था। बड़ी बहुरिया की सिसकियों से भरे दर्दनाक संवाद — 'नहीं तो गले में घड़ा बाँधकर पोखरे में डूब मरूँगी' — को वह बूढ़ी माता को नहीं सुना सका। रातभर उसे नींद नहीं आई और वह सुबह भी कह नहीं पाया।
04बड़ी बहुरिया कौन है और उसकी क्या स्थिति है?
बड़ी बहुरिया बड़ी हवेली की पुत्रवधू है। बड़े भैया के निधन के बाद तीनों देवरों ने जमीन-जायदाद बाँटकर शहर में बस गए। वह गाँव में अकेली, गरीब, बथुआ-साग खाकर जीवन बिता रही है।
05संवदिया का अर्थ क्या है?
पाठ में दिए शब्दार्थ के अनुसार संवदिया का अर्थ है — संदेशवाहक, संदेश पहुँचाने वाला।
06Sambadiya mein Hargobin kaun hai?
हरगोबिन जलालगढ़ गाँव का संवदिया (संदेशवाहक) है। वह बड़ी बहुरिया का संवाद उसकी माँ के पास पहुँचाने जाता है। अंत में वह बड़ी बहुरिया के पैर पकड़कर उसकी देखभाल का संकल्प लेता है।
07रेणु को आंचलिक कथाकार क्यों कहते हैं?
रेणु ने अंचल-विशेष को अपनी रचनाओं का आधार बनाया, आंचलिक शब्दावली और मुहावरों का प्रयोग किया, और वहाँ के जीवन तथा वातावरण का मार्मिक चित्रण किया। मैला आँचल और परती परिकथा उनके प्रसिद्ध उपन्यास हैं।
08संवदिया कहानी में बड़ी बहुरिया का संवाद क्या था?
बड़ी बहुरिया ने हरगोबिन से कहा कि माँ को बताना — 'मैं भाई-भाभियों की नौकरी करके पेट पालूँगी, बच्चों की जूठन खाकर एक कोने में पड़ी रहूँगी, लेकिन यहाँ अब नहीं रह सकूँगी। यदि माँ मुझे यहाँ से नहीं ले जाएगी तो मैं किसी दिन गले में घड़ा बाँधकर पोखरे में डूब मरूँगी।'
09'द्रौपदी चीर-हरण लीला' का उल्लेख कहानी में क्यों हुआ?
हरगोबिन ने देखा था कि बड़े भैया के निधन के बाद तीनों देवरों ने बड़ी बहुरिया के शरीर से गहने खींच-छीनकर बाँटे और बनारसी साड़ी को तीन टुकड़े करके बँटवारा किया। इसे देखकर हरगोबिन ने इसे 'द्रौपदी चीर-हरण लीला' कहा।
10हरगोबिन वापस लौटने पर बड़ी बहुरिया से क्या बोला?
हरगोबिन ने बड़ी बहुरिया का पैर पकड़कर कहा — 'बड़ी बहुरिया, मुझे माफ करो। मैं तुम्हारा संवाद नहीं कह सका। तुम गाँव छोड़कर मत जाओ। मैं तुम्हारा बेटा हूँ, तुम मेरी माँ, सारे गाँव की माँ हो। तुम्हारा सब काम करूँगा।'
11क्या इस पाठ का PDF मुफ़्त डाउनलोड कर सकते हैं?
हाँ, यह मुफ़्त है, बिना साइन-अप।
12रेणु की प्रमुख रचनाएँ कौन-कौन सी हैं?
पाठ के अनुसार रेणु के प्रसिद्ध कहानी-संग्रह हैं — ठुमरी, अगिनखोर, आदिम रात्रि की महक। उनके उल्लेखनीय उपन्यास हैं — मैला आँचल और परती परिकथा। तीसरी कसम उर्फ मारे गए गुलफाम कहानी पर फिल्म भी बन चुकी है।
More chapters in Antra
Read Chapter 12 of Antra, the Class 12 Hindi NCERT textbook (2026-27 edition), online for free: the complete chapter as published by NCERT with every diagram, solved example and exercise, with a chapter summary, question answers and revision notes. Open the NCERT PDF above, or browse all CBSE Class 12 textbooks.
Read offline with notes, solutions & mock tests
CBSE Prepmaster — free on iOS & Android