Summary
Chapter 6 of the Class 12 Hindi NCERT textbook (Antra), 'Bharat-Ram Ka Prem, Kaushalya Ka Vilaap' (भरत-राम का प्रेम / कौशल्या का विलाप), यह पाठ महाकवि तुलसीदास (सन् 1532-1623) की रचनाओं से संकलित है, जिसमें रामचरितमानस के अयोध्या कांड से भरत-राम के प्रेम के छंद तथा गीतावली से माँ कौशल्या की विरह वेदना के दो पद सम्मिलित हैं।
- भरत का अगाध भ्रातृ-प्रेम — राम के वनगमन के बाद भरत सभा में पुलकित और अश्रुपूरित होकर राम के उदार, क्षमाशील स्वभाव का स्मरण करते हैं — बचपन से राम उन्हें खेल में हारकर भी जितवाते थे और कभी क्रोध नहीं करते थे।
- आत्म-दोष की भावदशा — भरत अपने वियोग के लिए किसी अन्य पर आरोप नहीं मढ़ते; अपने दुर्भाग्य को ही समुद्र-सा अगाध मानते हैं और गुरु, गोसाईं तथा सिय-राम पर श्रद्धा रखकर सारी पीड़ा मौन सह लेते हैं।
- कौशल्या की विरह-वेदना — गीतावली के पदों में माँ कौशल्या राम की धनुहियाँ-पनहियाँ देखकर चित्रलिखी-सी स्तब्ध रह जाती हैं और झाँवरे होते घोड़ों को देख एक पथिक के माध्यम से राम को एक बार लौट आने का करुण संदेश भेजती हैं।
- काव्य-शैली और भाषा — भरत-प्रसंग रामचरितमानस के दोहा-चौपाई छंद और अवधी भाषा में है, जबकि कौशल्या के पद गीतावली की पद-शैली और ब्रज भाषा में रचे गए हैं — भाव के अनुरूप शैली का सुंदर मेल।
Key points & formulas
- 01कवि परिचय: तुलसीदास (सन् 1532-1623); जन्म — बाँदा जिले के राजापुर गाँव में; उन्हें लोकमंगल की साधना के कवि तथा समन्वय का कवि कहा जाता है।
- 02स्रोत और विधा: भरत-राम का प्रेम — रामचरितमानस (अयोध्या कांड), दोहा-चौपाई छंद, अवधी भाषा; दोनों पद — गीतावली, पद शैली, ब्रज भाषा।
- 03केंद्रीय भाव: भरत का राम के प्रति अगाध प्रेम — 'हारेंहूँ खेल जितावहि मोंही' और 'मैं जानउँ निज नाथ सुभाऊ। अपराधिहु पर कोह न काऊ' — राम स्वभाव से क्षमाशील और स्नेही हैं।
- 04भरत की भावदशा: वे किसी पर दोष नहीं देते — 'सपनेहँु दोसक लेसु न काहू। मोर अभाग उदधि अवगाहू'; गुरु, गोसाईं और सिय-राम पर श्रद्धा रखकर सब सहते हैं।
- 05कौशल्या की विरह: पहले पद में 'रहि चकि चित्रलिखी सी' — वे राम की धनुहियाँ और पनहियाँ को बार-बार हृदय और नेत्रों से लगाती हैं; दूसरे पद में 'राघौ! एक बार फिरि आवौ' — झाँवरे होते घोड़ों को देखकर पथिक के ज़रिए राम को संदेश भेजती हैं।
- 06काव्य-सौंदर्य (पाठ्य प्रश्नों में नामित): उपमा अलंकार — 'रहि चकि चित्रलिखी सी'; उत्प्रेक्षा अलंकार — 'मनहुँ कमल हिममारे'; दोनों का उल्लेख पाठ के प्रश्न-अभ्यास में है।
- 07कठिन शब्दार्थ (पाठ से): पयादेहि = पैदल, नंगे पाँव; अघ = पाप; झाँवरे = कुम्हलाना, मलिन होना; बाजि = घोड़ा; उदधि = सागर।
Frequently asked questions
01भरत-राम का प्रेम किस ग्रंथ और किस कांड से लिया गया है?
यह रामचरितमानस के अयोध्या कांड से लिया गया है। पाठ्यपुस्तक में प्रस्तुत चौपाई और दोहों को रामचरितमानस के अयोध्या कांड से संकलित किया गया है।
02'हारेंहूँ खेल जितावहि मोही' — Bharat ke is kathan ka kya aashay hai?
भरत कहते हैं कि राम खेल में हार जाने पर भी उन्हें विजयी घोषित करते थे — अर्थात् राम का प्रेम इतना गहरा था कि वे अपना मन कभी भरत के विरुद्ध नहीं करते थे।
03भरत राम के वन-गमन का दोष किसे देते हैं?
भरत अपने भाग्य को दोषी ठहराते हैं — 'सपनेहँु दोसक लेसु न काहू। मोर अभाग उदधि अवगाहू।' वे माता या किसी अन्य पर आरोप नहीं लगाते।
04'बिधि न सकेउ सहि मोर दुलारा। नीच बीचु जननी मिस पारा' — is pankti ka bhaav kya hai?
भरत कहते हैं कि विधाता (भाग्य) उनके प्रति राम का इतना दुलार सहन नहीं कर सका और माता के माध्यम से इस प्रेम में बाधा डाल दी।
05गीतावली के पहले पद में माँ कौशल्या क्या करती हैं?
माँ कौशल्या राम की बाल धनुहियाँ और पनहियाँ (जूतियाँ) देखकर उन्हें बार-बार हृदय और नेत्रों से लगाती हैं, और 'रहि चकि चित्रलिखी सी' — चित्र की भाँति स्थिर हो जाती हैं।
06'राघौ! एक बार फिरि आवौ' — yah kisne kaha aur kyun?
यह माँ कौशल्या ने कहा। वे राम के उन घोड़ों को देख रही हैं जो दिनों-दिन मलिन (झाँवरे) होते जा रहे हैं। वे राम से एक बार अयोध्या लौटने का करुण निवेदन करती हैं।
07'रहि चकि चित्रलिखी सी' का मर्म क्या है?
राम के वनगमन का स्मरण होते ही माँ कौशल्या चित्र में अंकित छवि की भाँति स्थिर और निश्चेष्ट हो जाती हैं — उनका दुख इतना गहरा है कि वे बोल या हिल भी नहीं पातीं।
08Tulsidas ka janm kab aur kahan hua tha?
तुलसीदास का जन्म सन् 1532 में बाँदा जिले के राजापुर गाँव में हुआ था, यद्यपि कुछ विद्वान उनका जन्म स्थान सोरों, एटा को भी मानते हैं।
09पाठ के अनुसार तुलसीदास की प्रमुख रचनाएँ कौन सी हैं?
तुलसीदास की प्रामाणिक बारह कृतियाँ मानी जाती हैं, परंतु रामचरितमानस, कवितावली, गीतावली और विनयपत्रिका उनकी ख्याति के आधार हैं।
10इस पाठ में किन भाषाओं का प्रयोग हुआ है?
रामचरितमानस की चौपाई-दोहे अवधी भाषा में हैं, जबकि गीतावली के पद ब्रज भाषा में रचित हैं। पाठ के अनुसार तुलसीदास का ब्रज और अवधी दोनों भाषाओं पर असाधारण अधिकार था।
11'झाँवरे' और 'अंदेसो' शब्दों के अर्थ क्या हैं?
पाठ की शब्दार्थ सूची के अनुसार — झाँवरे = कुम्हलाना, मलिन होना; अंदेसो = अंदेशा, चिंता।
12क्या इस पाठ का PDF मुफ़्त डाउनलोड कर सकते हैं?
हाँ, यह मुफ़्त है, बिना साइन-अप।
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