Summary
Chapter 5 of the Class 12 Hindi NCERT textbook (Antra), 'Todo' (तोड़ो), नयी कविता के प्रमुख कवि रघुवीर सहाय (1929–1990) की उद्बोधनपरक कविता 'तोड़ो' तथा 'वसंत आया' पर केंद्रित है; 'तोड़ो' में कवि चट्टानों और बंजर-ऊसर भूमि को तोड़कर धरती और मन दोनों को सृजन के लिए उर्वर बनाने का आह्वान करता है।
- 'तोड़ो' — सृजन का आह्वान — कवि पत्थर, चट्टानें और ऊसर-बंजर भूमि को तोड़कर परती जमीन को खेत में बदलने का आह्वान करता है; मिट्टी में रस है जिससे दूब उगती है — यह सृजन की संभावना का संकेत है।
- प्रकृति और मन का समानांतर — कवि प्रकृति से मन की तुलना करता है — जैसे धरती में बंजरता है वैसे ही मन में भी ऊब और खीज है; मन की यह बंजरता सृजन में बाधक है, अतः उसे भी 'गोड़ने' की जरूरत है।
- 'तोड़ो' से 'गोड़ो' तक का संकेत — कविता 'तोड़ो तोड़ो तोड़ो' से आरंभ होकर 'गोड़ो गोड़ो गोड़ो' पर समाप्त होती है — शब्दों की यह पुनरावृत्ति स्पष्ट करती है कि कवि विध्वंस नहीं, सृजन (जुताई-निराई) चाहता है।
- 'वसंत आया' — प्रकृति से कटाव पर व्यंग्य — इसी पाठ की 'वसंत आया' कविता कहती है कि वसंत का आना अब कैलेंडर से जाना जाता है, अनुभव से नहीं — यह आधुनिक मनुष्य के प्रकृति से कटाव पर तीखा व्यंग्य है।
Key points & formulas
- 01**कवि परिचय:** रघुवीर सहाय (1929–1990), जन्म लखनऊ (उत्तर प्रदेश); 1951 में अंग्रेजी साहित्य में एम.ए.; पेशे से पत्रकार — प्रतीक, आकाशवाणी, कल्पना (हैदराबाद) और दिनमान से जुड़े रहे।
- 02**काव्यधारा:** नयी कविता के कवि; रचनाएँ अज्ञेय द्वारा संपादित 'दूसरा सप्तक' में संकलित; मुक्त छंद के साथ-साथ छंद में भी काव्य-रचना की; कविता में कथा या वृत्तांत का उपयोग करते हैं।
- 03**'तोड़ो' का केंद्रीय भाव:** पत्थर, चट्टानें और बंजर-ऊसर भूमि को तोड़कर सृजन के लिए तैयार करना; परती को खेत में बदलना सृजन की आरंभिक किंतु अत्यंत महत्त्वपूर्ण प्रक्रिया है।
- 04**प्रकृति और मन का समानांतर:** कवि प्रकृति से मन की तुलना करता है — बंजरता जैसे धरती में है वैसे ही मन में भी है; मन की ऊब और खीज को भी 'गोड़ने' की जरूरत है।
- 05**'तोड़ो' से 'गोड़ो' तक:** कविता 'तोड़ो तोड़ो तोड़ो' से आरंभ और 'गोड़ो गोड़ो गोड़ो' पर समाप्त होती है — यह शब्दों की पुनरावृत्ति आह्वान के स्वर को बलवान बनाती है और विध्वंस नहीं, सृजन का लक्ष्य स्पष्ट करती है।
- 06**'वसंत आया' का भाव:** इसी पाठ में 'वसंत आया' कविता है — कवि कहता है कि वसंत का आना अब कैलेंडर से जाना जाता है, अनुभव से नहीं; यह आधुनिक जीवनशैली पर व्यंग्य है।
- 07**कठिन शब्दार्थ (स्रोत से):** ऊसर-बंजर = अनुपजाऊ जमीन; चरती-परती = पशुओं के लिए चारागाह आदि के लिए छोड़ी गई जमीन; व्यापी = फैली हुई, व्याप्त।
- 08**पुरस्कार:** 'लोग भूल गए हैं' काव्य संग्रह पर साहित्य अकादमी पुरस्कार; छह खंडों में रघुवीर सहाय रचनावली प्रकाशित।
Frequently asked questions
01'तोड़ो' कविता के कवि कौन हैं?
इस कविता के कवि रघुवीर सहाय (1929–1990) हैं — नयी कविता के प्रमुख कवि, जो पेशे से पत्रकार थे और 'दिनमान' पत्रिका के संपादक रहे।
02Toro kavita ka kendriya bhaav kya hai?
कवि पत्थर, चट्टानें और ऊसर-बंजर भूमि को तोड़कर सृजन के लिए धरती को उर्वर बनाने का आह्वान करता है। साथ ही मन की ऊब और खीज को भी तोड़कर उसे सृजनशील बनाने की बात है।
03'तोड़ो' कविता में 'पत्थर' और 'चट्टान' किसके प्रतीक हैं?
पाठ के प्रश्न-अभ्यास के अनुसार 'पत्थर' और 'चट्टान' उन बाधाओं और जड़ता के प्रतीक हैं जो धरती और मन दोनों को बंजर बनाए रखते हैं — इन्हें तोड़ने पर ही सृजन संभव है।
04'तोड़ो' कविता का आरंभ और अंत किन शब्दों से होता है?
कविता 'तोड़ो तोड़ो तोड़ो' से आरंभ और 'गोड़ो गोड़ो गोड़ो' पर समाप्त होती है। पाठ बताता है कि कवि ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि उसका लक्ष्य विध्वंस नहीं, सृजन (जुताई-निराई) है।
05Raghuveer Sahay ka parichay dijiye.
रघुवीर सहाय का जन्म 1929 में लखनऊ में हुआ। 1951 में अंग्रेजी साहित्य में एम.ए. किया। पत्रकार के रूप में प्रतीक, आकाशवाणी, कल्पना (हैदराबाद) और दिनमान से जुड़े रहे। नयी कविता के कवि; 'दूसरा सप्तक' में संकलित; 'लोग भूल गए हैं' पर साहित्य अकादमी पुरस्कार। सन् 1990 में निधन।
06'झूठे बंधन टूटें / तो धरती को हम जानें' — इन पंक्तियों का क्या अर्थ है?
पाठ के अनुसार जब ये झूठे बंधन (जड़ताएँ और बाधाएँ) टूटेंगे, तभी हम धरती की वास्तविक उर्वरता — मिट्टी का रस जिससे दूब उगती है — को पहचान सकेंगे।
07'मन की खीज' से कवि का क्या तात्पर्य है?
कवि कविता में कहता है — 'हम इसको क्या कर डालें इस अपने मन की खीज को?' — यानी मन में व्याप्त ऊब और खीज सृजन में बाधक है; इसे भी गोड़ने (तोड़ने) की जरूरत है।
08Vasant Aaya kavita ka bhaav kya hai?
इसी पाठ की 'वसंत आया' कविता बताती है कि आज मनुष्य का प्रकृति से रिश्ता टूट गया है — वसंत अब कैलेंडर और दफ्तर की छुट्टी से जाना जाता है, प्रकृति को अनुभव करके नहीं। यह आधुनिक जीवनशैली पर व्यंग्य है।
09Raghuveer Sahay ki pramukh kavya-kritiyan kaun si hain?
पाठ के अनुसार उनकी प्रमुख काव्य-कृतियाँ हैं — 'सीढ़ियों पर धूप में', 'आत्महत्या के विरुद्ध', 'हँसो हँसो जल्दी हँसो' और 'लोग भूल गए हैं'।
10'ऊसर-बंजर' और 'चरती-परती' का अर्थ क्या है?
पाठ के शब्दार्थ के अनुसार — ऊसर-बंजर = अनुपजाऊ जमीन; चरती-परती = पशुओं के लिए चारागाह आदि के लिए छोड़ी गई जमीन।
11रघुवीर सहाय को साहित्य अकादमी पुरस्कार किस कृति पर मिला?
पाठ के अनुसार 'लोग भूल गए हैं' काव्य संग्रह पर उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला था।
12रघुवीर सहाय की काव्य-भाषा की क्या विशेषता है?
पाठ के अनुसार वे अनावश्यक शब्दों के प्रयोग से प्रयासपूर्वक बचते हैं। 'भयाक्रांत अनुभव की आवेगरहित अभिव्यक्ति' उनकी कविता की प्रमुख विशेषता है। उन्होंने पत्रकार-दृष्टि का सर्जनात्मक उपयोग किया है।
13क्या इस पाठ का PDF मुफ़्त डाउनलोड कर सकते हैं?
हाँ, यह मुफ़्त है, बिना साइन-अप।
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