Class 6 Sanskrit

Chapter 16 — Vrikshaah Satpurushaah Iva

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Overview

Summary

Chapter 16 of the Class 6 Sanskrit NCERT textbook (Deepakam), 'Vrikshaah Satpurushaah Iva' (वृक्षाः सत्पुरुषाः इव), इस पाठ में सुभाषितों के माध्यम से बताया गया है कि वृक्ष सत्पुरुषों के समान परोपकारी होते हैं — वे स्वयं तपती धूप में खड़े रहते हुए भी दूसरों को छाया, फल और सब कुछ प्रदान करते हैं।

  • वृक्ष एवं सत्पुरुष की तुलनापर्यावरण-संरक्षण प्रदर्शनी की पृष्ठभूमि में छह सुभाषितों द्वारा वृक्षों की तुलना सत्पुरुषों से की गई है। वृक्ष स्वयं आतप (धूप) में खड़े रहकर दूसरों को छाया, फल, पुष्प, मूल, वल्कल और काष्ठ प्रदान करते हैं।
  • एक वृक्ष का मूल्यपाठ में एक वृक्ष का मूल्य दर्शाया गया है — दश कुएँ = एक वापी, दश वापी = एक ह्रद, दश ह्रद = एक पुत्र, और दश पुत्र = एक वृक्ष; अतः वृक्ष सर्वाधिक उपकारक है, कोई याचक निराश नहीं लौटता।
  • परोपकार का संदेशपाठ का मुख्य नैतिक संदेश है — 'परोपकारार्थम् इदं शरीरम्', अर्थात् यह शरीर भी दूसरों के उपकार के लिए है। नदियों, गायों और बादलों की उदारता के दृष्टान्तों से परोपकार को सज्जन का सहज गुण बताया गया है।
Essentials

Key points & formulas

  1. 01पाठ का केंद्रीय विषय: वृक्ष सत्पुरुषों के समान परोपकारी होते हैं — स्वयं धूप (आतप) में खड़े रहकर दूसरों को छाया और फल देते हैं।
  2. 02पाठ में छह सुभाषित हैं जो वृक्षों की महत्ता, नदियों-गायों-बादलों की उदारता और परोपकार की भावना को समझाते हैं।
  3. 03मुख्य नैतिक संदेश: परोपकार ही सज्जन का गुण है; 'परोपकारार्थम् इदं शरीरम्' — यह शरीर भी दूसरों के उपकार के लिए है।
  4. 04एक वृक्ष का मूल्य: दश कुएँ = एक वापी (बावड़ी); दश वापी = एक ह्रद (तालाब); दश ह्रद = एक पुत्र; दश पुत्र = एक वृक्ष (द्रुम) — वृक्ष सर्वाधिक उपकारक है।
  5. 05वृक्ष जो देते हैं: पुष्प, पत्र, फल, छाया, मूल, वल्कल (छाल) और दारु (काष्ठ/लकड़ी) — कोई भी याचक (अर्थी) निराश नहीं जाता।
  6. 06प्रमुख कठिन शब्द: आतपे = धूप में | परार्थाय = दूसरों के उपकार के लिए | वापी = बावड़ी | वल्कलम् = पेड़ की छाल | वारिवाहाः = मेघ (बादल) | महीरुहाः = वृक्ष | विभूतयः = समृद्धियाँ
  7. 07पाठ का संदर्भ पर्यावरण-संरक्षण प्रदर्शनी है; परियोजना-कार्य में विद्यार्थियों को पाँच पेड़ों की देखभाल करने और परोपकार-विषयक दस सुभाषित एकत्र करने का कार्य दिया गया है।
Questions

Frequently asked questions

01

Vrikshaah Satpurushaah Iva paath mein kya sikhaya gaya hai?

इस पाठ में सुभाषितों के माध्यम से बताया गया है कि वृक्ष सत्पुरुषों के समान परोपकारी होते हैं। वे स्वयं धूप में खड़े रहकर दूसरों को छाया, फल, पुष्प, वल्कल और काष्ठ देते हैं। पाठ का मुख्य संदेश है कि परोपकार ही जीवन का सर्वोच्च उद्देश्य है।

02

Vrikshaah Satpurushaah Iva ka arth kya hai?

'वृक्षाः सत्पुरुषाः इव' का अर्थ है — 'वृक्ष सत्पुरुषों (सज्जनों) के समान हैं।' जैसे सज्जन स्वयं कष्ट उठाकर दूसरों का भला करते हैं, वैसे ही वृक्ष स्वयं धूप में खड़े रहकर सबको छाया और फल प्रदान करते हैं।

03

छायामन्यस्य कुर्वन्ति तिष्ठन्ति स्वयमातपे — इस श्लोक का अर्थ क्या है?

इस सुभाषित का भावार्थ है — वृक्ष स्वयं सूर्य की तपती धूप (आतप) में खड़े रहते हैं, किंतु दूसरों को छाया देते हैं; अपने फल भी दूसरों के उपकार (परार्थाय) के लिए देते हैं। इसीलिए वे सत्पुरुषों के समान हैं।

04

दशकूपसमा वापी श्लोक का अर्थ और महत्त्व क्या है?

इस श्लोक में वृक्ष का तुलनात्मक महत्त्व बताया गया है: दस कुएँ एक वापी (बावड़ी) के बराबर हैं, दस वापियाँ एक ह्रद (तालाब) के बराबर, दस ह्रद एक पुत्र के बराबर, और दस पुत्रों के बराबर एक वृक्ष (द्रुम) है। अर्थात् एक वृक्ष सर्वाधिक उपकारी और मूल्यवान है; इसलिए सभी को वृक्षारोपण करना चाहिए।

05

परोपकाराय फलन्ति वृक्षाः — इस श्लोक का भावार्थ क्या है?

इस सुभाषित का भावार्थ है — वृक्ष परोपकार के लिए फल देते हैं, नदियाँ परोपकार के लिए बहती हैं, गायें परोपकार के लिए दूध देती हैं। अतः यह शरीर भी दूसरों के उपकार के लिए है (परोपकारार्थम् इदं शरीरम्)।

06

इस पाठ में वापी, ह्रदः और द्रुमः का अर्थ क्या है?

वापी = बावड़ी (stepwell), ह्रदः = तालाब अथवा झील (pond/lake), द्रुमः = पेड़ (tree)। ये शब्द 'दशकूपसमा वापी' सुभाषित में आए हैं जो वृक्ष की महत्ता समझाता है।

07

आतपे, परार्थाय और वल्कलम् का अर्थ क्या है?

आतपे = धूप में (in the sunlight), परार्थाय = दूसरों के उपकार के लिए (for the sake of others), वल्कलम् = पेड़ की छाल (bark of tree)। ये शब्द पाठ की शब्दार्थ सूची में दिए गए हैं।

08

वारिवाहाः और महीरुहाः का क्या अर्थ है?

वारिवाहाः = मेघ अर्थात् बादल (clouds)। महीरुहाः = वृक्ष (trees)। 'पिबन्ति नद्यः' श्लोक में बादलों को वारिवाहाः कहा गया है और 'पुष्प-पत्र-फलच्छाया' श्लोक में वृक्षों को महीरुहाः।

09

वृक्ष हमें क्या-क्या देते हैं — पाठ के आधार पर बताइए।

पाठ के अनुसार वृक्ष पुष्प, पत्र, फल, छाया, मूल (जड़), वल्कल (छाल) और दारु (लकड़ी/काष्ठ) प्रदान करते हैं। इसके अलावा वे शुद्ध वायु भी देते हैं। वृक्षों के पास आने वाला कोई भी याचक (अर्थी) निराश नहीं जाता।

10

पाठ में पर्यावरण-संरक्षण का प्रसंग कैसे आया है?

पाठ का आरंभ विद्यालय में आयोजित पर्यावरण-संरक्षण (पर्यावरणसंरक्षण) प्रदर्शनी से होता है। छात्र प्रदर्शनी देखते हैं और शिक्षक के साथ संलाप (संवाद) करते हैं। इसी संवाद में छात्रा मुदिता वृक्षों पर सुभाषित सुनाती है और अन्य छात्र भी उसके साथ गाते हैं।

11

इस पाठ में सत्पुरुषाः का क्या अर्थ है और वृक्षों से क्या समानता बताई गई है?

सत्पुरुषाः = सज्जन लोग, जो स्वयं कष्ट सहकर भी दूसरों का हित करते हैं। वृक्ष भी ठीक ऐसे ही हैं — स्वयं धूप में खड़े रहकर दूसरों को छाया देते हैं और अपने फल स्वयं नहीं खाते, दूसरों को देते हैं। इसीलिए वृक्षों की तुलना सत्पुरुषों से दी गई है।

12

इस पाठ के परियोजना-कार्य में विद्यार्थियों को क्या करना है?

परियोजना-कार्य में दो कार्य दिए गए हैं: (१) विद्यालय या घर के आस-पास के पाँच पेड़-पौधों (पादपों) की देखभाल और संरक्षण करें। (२) इंटरनेट (अन्तर्जाल) की सहायता से परोपकार-विषयक दस सुभाषितों का संग्रह करें।

13

क्या Vrikshaah Satpurushaah Iva अध्याय की PDF मुफ़्त है?

हाँ, बिना साइन-अप के मुफ़्त डाउनलोड करें।

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