Summary
Chapter 5 of the Class 6 Sanskrit NCERT textbook (Deepakam), 'Sankhyaganana' (संख्यागणना), इस पाठ में संस्कृत में १ से ५० तक की संख्याओं के नाम सिखाए गए हैं और श्लोकों, संख्यागीत तथा 'संख्याप्रसिद्धि' खंड के माध्यम से प्रत्येक संख्या का सांस्कृतिक महत्त्व भी बताया गया है।
- संख्यागणना १ से ५० तक — पाठ संस्कृत में संख्याओं के नाम सिखाता है — एकम्, द्वे, त्रीणि, चत्वारि, पञ्च, षट्, सप्त, अष्ट, नव, दश आगे बढ़ते हुए पञ्चाशत् तक। कक्षा में छात्र गिनती करते हुए इन्हें बोलना सीखते हैं।
- संख्याओं का सांस्कृतिक महत्त्व — 'संख्याप्रसिद्धि' खंड में प्रत्येक संख्या की विशेष पहचान बताई गई है — त्रीणि वचनानि, चत्वारि युगानि, षट् रसाः, सप्त ऋषयः, अष्ट दिक्पालाः, नव ग्रहाः, दश दिशाः।
- दिशाएँ, गीत एवं शब्दार्थ — दस दिशाओं के संस्कृत नाम (पूर्व, पश्चिम, ईशान, आग्नेय आदि) दिए गए हैं। 'संख्यागीत' में जोड़ों में संख्या बोलने का अभ्यास है, तथा षण्मुखदेव (कार्तिकेय) व त्रिनयनमूर्ति (शिव) का उल्लेख श्लोकों में हुआ है।
Key points & formulas
- 01पाठ में १ से ५० तक की संख्याओं के संस्कृत नाम सिखाए गए हैं — एकम्, द्वे, त्रीणि, चत्वारि, पञ्च, षट्, सप्त, अष्ट, नव, दश ... पञ्चाशत्।
- 02शोकों के माध्यम से संख्याओं को उदाहरणों से जोड़ा गया है — सात वासर (सप्त वासराः), आठ दिग्गज (अष्ट दिग्गजाः), नौ ग्रह (नव ग्रहाः), दस दिशाएँ (दश दिशाः)।
- 03'संख्याप्रसिद्धि' खंड में प्रत्येक संख्या (१-१०) का सांस्कृतिक महत्त्व बताया गया है — जैसे त्रीणि वचनानि, चत्वारि युगानि, षट् रसाः, सप्त ऋषयः, अष्ट दिक्पालाः।
- 04दस दिशाओं (दश दिशाः) के संस्कृत नाम बताए गए हैं — पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण, ईशान, आग्नेय, नैर्ऋत्य, वायव्य, ऊर्ध्वम्, अधः।
- 05'संख्यागीत' गतिविधि में जोड़ों में संख्याएँ बोलते हुए क्रिया करने का अभ्यास कराया गया है — एकं द्वे, त्रीणि चत्वारि, पञ्च षट् आदि।
- 06प्रमुख शब्दार्थ: जीविनि = प्राणी में, स्रष्टा = सृष्टिकर्ता ब्रह्मा, सुरसेनानीः = कार्तिकेय (देवताओं के सेनापति), करकमले = कमल जैसे हाथ में, अमितामोदं = अत्यानन्दपूर्वक, करतालम् = ताली।
- 07षण्मुखदेव (कार्तिकेय) और त्रिनयनमूर्ति (शिव) का उल्लेख संख्याओं के सन्दर्भ में शोकों में हुआ है।
Frequently asked questions
01Sankhyaganana paath mein kya sikhaya gaya hai?
इस पाठ में संस्कृत में १ से ५० तक की संख्याओं के नाम सिखाए गए हैं। शोकों और संख्यागीत के माध्यम से संख्याओं का सांस्कृतिक महत्त्व और उनका अभ्यास भी कराया गया है।
02Sankhyaganana ka arth kya hai?
'संख्यागणना' का अर्थ है गिनती करना। संस्कृत में 'संख्या' का अर्थ गिनती और 'गणना' का अर्थ गणना/गिनती होता है।
03संस्कृत में १ से १० तक की संख्याएँ क्या हैं?
१-एकम्, २-द्वे, ३-त्रीणि, ४-चत्वारि, ५-पञ्च, ६-षट्, ७-सप्त, ८-अष्ट, ९-नव, १०-दश।
04संस्कृत में ११ से २० तक की संख्याएँ क्या हैं?
११-एकादश, १२-द्वादश, १३-त्रयोदश, १४-चतुर्दश, १५-पञ्चदश, १६-षोडश, १७-सप्तदश, १८-अष्टादश, १९-नवदश, २०-विंशतिः।
05दश दिशाओं के नाम संस्कृत में क्या हैं?
पाठ के अनुसार दस दिशाएँ हैं: पूर्वदिशा, पश्चिमदिशा, उत्तरदिशा, दक्षिणदिशा, ईशानदिशा, आग्नेयदिशा, नैर्ऋत्यदिशा, वायव्यदिशा, ऊर्ध्वम् (ऊपर), अधः (नीचे)।
06षण्मुखदेव कौन हैं और उनका उल्लेख क्यों हुआ?
षण्मुखदेव कार्तिकेय हैं — देवताओं के सेनापति (सुरसेनानीः)। पाठ में संख्या 'छह' (षट्) के संदर्भ में उनका उल्लेख हुआ है क्योंकि उनके छह मुख होते हैं।
07संख्याप्रसिद्धि खंड में क्या बताया गया है?
इस खंड में १ से १० तक प्रत्येक संख्या की प्रसिद्ध सांस्कृतिक पहचान बताई गई है — जैसे एकम् = एकं ब्रह्म, त्रीणि = वचनानि (एकवचन, द्विवचन, बहुवचन), चत्वारि = युगानि, षट् = रसाः, सप्त = ऋषयः, अष्ट = दिक्पालाः, नव = ग्रहाः, दश = दिशाः।
08नव ग्रहों के नाम संस्कृत में क्या हैं?
पाठ के संख्याप्रसिद्धि खंड के अनुसार नव ग्रह हैं: सूर्यः, चन्द्रः, मङ्गलः, बुधः, गुरुः, शुक्रः, शनिः, राहुः, केतुः।
09सप्त ऋषियों के नाम क्या हैं?
पाठ के अनुसार सप्त ऋषि हैं: मरीचिः, अत्रिः, अङ्गिराः, पुलस्त्यः, पुलहः, क्रतुः, वसिष्ठः।
10षट् रसों के नाम संस्कृत में क्या हैं?
पाठ के अनुसार षट् रसाः: मधुरः (मीठा), अम्लः (खट्टा), लवणः (नमकीन), कटुः (कड़वा), तिक्तः (तीखा/कसैला), कषायः (कसैला)।
11संख्यागीत क्या है और उसमें क्या है?
संख्यागीत पाठ की एक गतिविधि (कार्यकलाप) है जिसमें जोड़ों में संख्याएँ बोलते हुए क्रियाएँ की जाती हैं — जैसे 'एकं द्वे, एकं द्वे — पश्यत किमस्ति मम हस्ते', 'त्रीणि चत्वारि — हस्ते पात्रं, पात्रे वारि' आदि।
12अष्ट दिक्पालों के नाम क्या हैं?
पाठ के अनुसार अष्ट दिक्पालाः: इन्द्रः, अग्निः, यमः, निर्ऋतिः, वरुणः, वायुः, कुबेरः, ईशानः।
13चत्वारि युगों के नाम संस्कृत में क्या हैं?
पाठ के अनुसार चत्वारि युगानि: कृतयुगम् (सत्ययुग), त्रेतायुगम्, द्वापरयुगम्, कलियुगम्।
14क्या Sankhyaganana अध्याय की PDF मुफ़्त है?
हाँ, बिना साइन-अप के मुफ़्त डाउनलोड करें।
More chapters in Deepakam
Read Chapter 5 of Deepakam, the Class 6 Sanskrit NCERT textbook (2026-27 edition), online for free: the complete chapter as published by NCERT with every diagram, solved example and exercise, with a chapter summary, question answers and revision notes. Open the NCERT PDF above, or browse all NCERT Class 6 textbooks.
Read offline with notes, solutions & mock tests
CBSE Prepmaster — free on iOS & Android