Class 6 Sanskrit

Chapter 4 — Aham Cha Tvam Cha

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Overview

Summary

Chapter 4 of the Class 6 Sanskrit NCERT textbook (Deepakam), 'Aham Cha Tvam Cha' (अहं च त्वं च), इस पाठ में उत्तम पुरुष एवं मध्यम पुरुष सर्वनाम, विभिन्न व्यवसायों के पुंलिंग-स्त्रीलिंग रूप तथा 'अस्' धातु के प्रयोग सिखाए गए हैं।

  • उत्तम एवं मध्यम पुरुष सर्वनामउत्तम पुरुष के अहम् (मैं), आवाम् (हम दोनों), वयम् (हम लोग) तथा मध्यम पुरुष के त्वम् (तुम), युवाम् (तुम दोनों), यूयम् (तुम लोग) सर्वनाम संवाद-रूप में सिखाए गए हैं।
  • व्यवसाय-शब्द एवं 'अस्' धातुसैनिकः/सैनिकी, गायकः/गायिका, पत्रकारः, पाचकः/पाचिका जैसे व्यवसायों के पुंलिंग-स्त्रीलिंग रूप तथा 'अस्' धातु के तीनों वचनों में रूप (असि/स्थः/स्थ, अस्मि/स्वः/स्मः) दिए गए हैं।
  • अनुस्वार-नियम एवं पठन-सामग्रीव्यंजन वर्ण से पूर्व पद के अंत के 'म्' के स्थान पर अनुस्वार (ं) लिखा जाता है — यथा 'पुस्तकं नास्ति'। पाठ में 'त्वमेव माता च पिता त्वमेव' श्लोक एवं एक गीत भी सम्मिलित है।
Essentials

Key points & formulas

  1. 01उत्तम पुरुष के सर्वनाम: अहम् (मैं), आवाम् (हम दोनों), वयम् (हम लोग)
  2. 02मध्यम पुरुष के सर्वनाम: त्वम् (तुम), युवाम् (तुम दोनों), यूयम् (तुम लोग)
  3. 03'अस्' धातु के रूप — मध्यम पुरुष: असि / स्थः / स्थ; उत्तम पुरुष: अस्मि / स्वः / स्मः
  4. 04पुंलिंग और स्त्रीलिंग व्यवसाय-शब्द सिखाए गए: सैनिकः/सैनिकी, गायकः/गायिका, पत्रकारः/पत्रकारा, पाचकः/पाचिका, चित्रकारः
  5. 05व्याकरण नियम: व्यंजन वर्ण से पूर्व पद के अंत के 'म्' के स्थान पर अनुस्वार (ं) लिखा जाता है — यथा 'पुस्तकं नास्ति'
  6. 06कठिन शब्द-अर्थ: तन्त्रज्ञः = कंप्यूटर इंजीनियर, आरक्षी = पुलिसकर्मी, वैद्या = महिला चिकित्सक, द्रविणम् = धन
  7. 07पठन-अभ्यास के लिए 'त्वमेव माता च पिता त्वमेव...' श्लोक और 'अहं पठामि संस्कृतम्...' नामक गीत भी पाठ में दिए गए हैं
Questions

Frequently asked questions

01

Aham Cha Tvam Cha paath mein kya sikhaya gaya hai?

इस पाठ में संस्कृत के उत्तम पुरुष सर्वनाम (अहम्/आवाम्/वयम्) और मध्यम पुरुष सर्वनाम (त्वम्/युवाम्/यूयम्), विभिन्न व्यवसायों के पुंलिंग-स्त्रीलिंग रूप तथा 'अस्' धातु के एकवचन, द्विवचन और बहुवचन में रूप सिखाए गए हैं।

02

Aham Cha Tvam Cha ka arth kya hai?

'अहं च त्वं च' का अर्थ है — मैं भी और तुम भी। यह शीर्षक पाठ की विषय-वस्तु को दर्शाता है जिसमें 'अहम्' (मैं/हम) और 'त्वम्' (तुम) पुरुष के सर्वनाम एवं उनके प्रयोग सिखाए गए हैं।

03

संस्कृत में उत्तम पुरुष के सर्वनाम कौन-से हैं?

उत्तम पुरुष के सर्वनाम तीन हैं — एकवचन: अहम् (मैं), द्विवचन: आवाम् (हम दोनों), बहुवचन: वयम् (हम लोग)।

04

संस्कृत में मध्यम पुरुष के सर्वनाम क्या होते हैं?

मध्यम पुरुष के सर्वनाम हैं — एकवचन: त्वम् (तुम), द्विवचन: युवाम् (तुम दोनों), बहुवचन: यूयम् (तुम लोग)।

05

'अस्' धातु के मध्यम पुरुष में रूप क्या हैं?

मध्यम पुरुष में 'अस्' धातु के रूप: एकवचन — त्वम् असि (तुम हो), द्विवचन — युवाम् स्थः (तुम दोनों हो), बहुवचन — यूयम् स्थ (तुम लोग हो)।

06

'अस्' धातु के उत्तम पुरुष में रूप क्या हैं?

उत्तम पुरुष में 'अस्' धातु के रूप: एकवचन — अहम् अस्मि (मैं हूँ), द्विवचन — आवाम् स्वः (हम दोनों हैं), बहुवचन — वयम् स्मः (हम लोग हैं)।

07

इस पाठ में कौन-कौन से व्यवसायों के शब्द सिखाए गए हैं?

पाठ में ये व्यवसाय-शब्द सिखाए गए हैं: सैनिकः (सैनिक), गायकः (गायक), पत्रकारः (पत्रकार), पाचकः (रसोइया), चित्रकारः (चित्रकार), आरक्षी (पुलिसकर्मी), तन्त्रज्ञः (कंप्यूटर इंजीनियर), नर्तकी (महिला नृत्यकलाकार), वैद्या (महिला चिकित्सक)।

08

संस्कृत में अनुस्वार लिखने का नियम क्या है?

पाठ में बताया गया है कि व्यंजन वर्ण से पूर्व आने वाले पद के अंत में 'म्' के स्थान पर अनुस्वार (ं) लिखा जाता है। उदाहरण के रूप में 'पुस्तकम् नास्ति' के स्थान पर 'पुस्तकं नास्ति' लिखा जाता है।

09

एकवचन, द्विवचन और बहुवचन में क्या अंतर है?

संस्कृत में तीन वचन होते हैं — एकवचन एक व्यक्ति/वस्तु के लिए (अहम् = मैं), द्विवचन ठीक दो के लिए (आवाम् = हम दोनों), और बहुवचन दो से अधिक के लिए (वयम् = हम लोग) प्रयुक्त होता है।

10

संस्कृत में प्रथम पुरुष, मध्यम पुरुष और उत्तम पुरुष क्या होते हैं?

प्रथम पुरुष वह है जिसके बारे में बात की जाए (भवान्/भवती — वह), मध्यम पुरुष वह है जिससे बात की जाए (त्वम् — तुम), और उत्तम पुरुष वह है जो स्वयं बात करे (अहम् — मैं)। इस पाठ में मध्यम और उत्तम पुरुष के प्रयोग का विशेष अभ्यास कराया गया है।

11

पाठ में दिए गए श्लोक 'त्वमेव माता...' का क्या अर्थ है?

पठन-अभ्यास के लिए दिए गए इस श्लोक में ईश्वर से कहा गया है कि आप ही हमारी माता हैं, आप ही पिता हैं, आप ही बंधु और सखा हैं, आप ही विद्या और धन हैं — हे देवदेव, आप ही हमारे सब कुछ हैं।

12

पाठ में 'तन्त्रज्ञः' और 'आरक्षी' का क्या अर्थ है?

पाठ की शब्द-सूची के अनुसार 'तन्त्रज्ञः' का अर्थ कंप्यूटर इंजीनियर है और 'आरक्षी' का अर्थ पुलिसकर्मी है।

13

क्या Aham Cha Tvam Cha अध्याय की PDF मुफ़्त है?

हाँ, बिना साइन-अप के मुफ़्त डाउनलोड करें।

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