Class 6 Sanskrit

Chapter 7 — Shooraah Vayam Dheeraah Vayam

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Overview

Summary

Chapter 7 of the Class 6 Sanskrit NCERT textbook (Deepakam), 'Shooraah Vayam Dheeraah Vayam' (शूराः वयं धीराः वयम्), यह श्रीधर भास्कर वर्णेकर रचित एक देशभक्ति संस्कृत गीत है जिसमें घोषणा की गई है कि हम भारतीय शूरवीर, धीर, साहसी और गुणशाली हैं; साथ ही संस्कृत सर्वनाम एवं प्रथमा विभक्ति के रूप भी सिखाए गए हैं।

  • देशभक्ति गीत एवं इसका भावपाँच पदों के इस गीत में बताया गया है कि हम भारतीय शूरवीर, धीर, गुणशाली, लोभरहित, साहसी और जनसेवक हैं। हमारे हृदय में धनलालसा या कपट नहीं, हम भयरहित और नीतिमान होकर विजय की कामना करते हैं।
  • रचनाकार एवं प्रमुख पंक्तियाँगीत के रचनाकार नागपुर (महाराष्ट्र) के प्रसिद्ध आधुनिक संस्कृत कवि, राष्ट्रपति-पुरस्कृत श्रीधर भास्कर वर्णेकर हैं। प्रथम पंक्ति है — 'शूरा वयं धीरा वयं वीरा वयं सुतराम्।' और अंतिम पद ईश्वर से उज्ज्वल विजय की प्रार्थना है।
  • व्याकरण एवं आदर्श महापुरुषपाठ में प्रातिपदिक की अवधारणा तथा अस्मद्, युष्मद्, तद्, एतद् के प्रथमा विभक्ति रूप सिखाए गए हैं। शिवाजी, विवेकानन्द, लक्ष्मीबाई, सुभाषचन्द्र बोस, अब्दुल कलाम आदि गीत के आदर्शों के जीवंत उदाहरण रूप में उल्लिखित हैं।
Essentials

Key points & formulas

  1. 01यह पाठ संस्कृत का एक देशभक्ति गीत है जिसमें भारतीयों के वीरत्व, साहस, नीति और सेवाभाव का वर्णन है।
  2. 02गीत के रचनाकार श्रीधर भास्कर वर्णेकर हैं — महाराष्ट्र के नागपुर से, प्रसिद्ध आधुनिक संस्कृत कवि, राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित।
  3. 03गीत की प्रथम पंक्ति: 'शूरा वयं धीरा वयं वीरा वयं सुतराम् । गुणशालिनो बलशालिनो जयगामिनो नितराम् ॥'
  4. 04मुख्य शब्द-अर्थ: दृढमानसाः = दृढ़ मन वाले; गतलालसाः = लोभरहित; ऊर्जस्वलाः = फुर्तीले; वर्चस्वलाः = तेजस्वी; गतभीतयः = भयरहित; समराङ्गणम् = युद्धक्षेत्र।
  5. 05पाठ में प्रातिपदिक की अवधारणा और प्रथमा विभक्ति के रूप सिखाए गए हैं — अस्मद् (अहम्/आवाम्/वयम्), युष्मद् (त्वम्/युवाम्/यूयम्), तद् और एतद् के तीनों वचनों में रूप।
  6. 06पाठ में भारत के महापुरुषों — शिवाजी महाराज, स्वामी विवेकानन्द, रानी लक्ष्मीबाई, सुभाषचन्द्र बोस, ए.पी.जे. अब्दुल कलाम आदि — का उल्लेख है जो इस गीत के आदर्शों के जीवंत उदाहरण हैं।
  7. 07गीत का अंतिम पद ईश्वर से प्रार्थना है: 'जगदीश हे ! परमेश हे ! सकलेश हे ! भगवन् । जयमङ्गलं परमोज्ज्वलं नो देहि परमात्मन् ॥'
Questions

Frequently asked questions

01

Shooraah Vayam Dheeraah Vayam paath mein kya sikhaya gaya hai?

इस पाठ में एक संस्कृत देशभक्ति गीत है जिसमें बताया गया है कि हम भारतीय शूरवीर, साहसी, नीतिमान और जनसेवक हैं। साथ ही संस्कृत व्याकरण में प्रातिपदिक, प्रथमा विभक्ति और सर्वनाम (अस्मद्, युष्मद्, तद्, एतद्) के एकवचन-द्विवचन-बहुवचन रूप भी सिखाए गए हैं।

02

Shooraah Vayam Dheeraah Vayam ka arth kya hai?

'शूरा वयम्' का अर्थ है — हम शूरवीर हैं, और 'धीरा वयम्' का अर्थ है — हम धीर (दृढ़/साहसी) हैं। पूरा शीर्षक यह घोषणा करता है कि हम भारतीय शूरवीर भी हैं और धीर भी।

03

इस संस्कृत गीत के रचनाकार कौन हैं?

इस गीत के रचनाकार श्रीधर भास्कर वर्णेकर हैं। वे महाराष्ट्र के नागपुर से हैं और एक प्रसिद्ध आधुनिक संस्कृत कवि हैं। उन्होंने अनेक काव्य, नाटक और गीत रचे हैं तथा वे राष्ट्रपति पुरस्कार से भी सम्मानित हैं।

04

'दृढमानसाः' का अर्थ क्या है?

दृढमानसाः का अर्थ है — दृढ़ मन वाले, अर्थात् जिनका संकल्प पक्का हो।

05

'गतलालसाः' का संस्कृत में क्या अर्थ है?

गतलालसाः का अर्थ है — लोभरहित, अर्थात् जिनके मन में लालच न हो।

06

'समराङ्गणम्' और 'गतभीतयः' का अर्थ क्या है?

समराङ्गणम् का अर्थ है — युद्धक्षेत्र (युद्ध का मैदान)। गतभीतयः का अर्थ है — भयरहित, अर्थात् जिनके मन से भय चला गया हो।

07

'ऊर्जस्वलाः' और 'वर्चस्वलाः' का अर्थ क्या है?

ऊर्जस्वलाः का अर्थ है — फुर्तीले (स्फूर्तियुक्त), और वर्चस्वलाः का अर्थ है — तेजस्वी (तेजोयुक्त)।

08

पाठ में 'वयम्' शब्द का प्रयोग किनके लिए हुआ है?

पाठ में 'वयम्' शब्द भारतीयों के लिए प्रयुक्त हुआ है। यह अस्मद् सर्वनाम का बहुवचन रूप है जिसका अर्थ है — हम सब।

09

गीत के पाँचवें पद में किससे क्या प्रार्थना की गई है?

गीत के पाँचवें पद में ईश्वर (जगदीश, परमेश, सकलेश, परमात्मन्) से प्रार्थना की गई है कि वे हमें परम उज्ज्वल और शुभ विजय प्रदान करें।

10

इस पाठ में कौन-से सर्वनाम के रूप सिखाए गए हैं?

इस पाठ में चार सर्वनामों के रूप सिखाए गए हैं — अस्मद् (अहम्/आवाम्/वयम्), युष्मद् (त्वम्/युवाम्/यूयम्), तद् (सः/सा/तत् — तौ/ते/ते — ते/ताः/तानि) और एतद् (एषः/एषा/एतत् — एतौ/एते/एते — एते/एताः/एतानि)।

11

'प्रातिपदिक' क्या होता है?

नामपद का मूलरूप 'प्रातिपदिक' कहलाता है। उदाहरण के लिए 'रामः' पद का मूल अर्थात् प्रातिपदिक 'राम' है।

12

पाठ में किन महापुरुषों और वीरांगनाओं का उल्लेख है?

पाठ में शङ्कराचार्य, शिवाजी महाराज, स्वामी दयानन्द सरस्वती, मदनमोहन मालवीय, रानी लक्ष्मीबाई, स्वामी विवेकानन्द, महर्षि अरविन्द, सुभाषचन्द्र बोस और ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का उल्लेख है। साथ ही स्तोत्र में अरुन्धती, सावित्री, जानकी, द्रौपदी, गार्गी, मीरा, लक्ष्मीबाई आदि वीरांगनाओं के नाम भी हैं।

13

गीत में 'नितराम्' का क्या अर्थ है?

नितराम् का अर्थ है — अत्यधिक रूप से (अत्यंत)। यह शब्द गीत की प्रथम पंक्ति में प्रयुक्त है।

14

क्या Shooraah Vayam Dheeraah Vayam अध्याय की PDF मुफ़्त है?

हाँ, बिना साइन-अप के मुफ़्त डाउनलोड करें।

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