Summary
Chapter 9 of the Class 6 Sanskrit NCERT textbook (Deepakam), 'Atithidevo Bhava' (अतिथिदेवो भव), इस कहानी में राधिका नामक लड़की अपने घर की छत पर आई एक बिल्ली और उसके चार शावकों की प्रेमपूर्वक सेवा करती है, और दादी उसे सिखाती हैं कि अतिथि को अपना देवता समझो।
- राधिका एवं अतिथि शावक — राधिका के घर की छत पर एक बिल्ली (मार्जारी) और उसके चार शावक — तन्वी, मृद्वी, शबलः और भीमः — विशिष्ट अतिथि के रूप में आते हैं। राधिका उन्हें दूध देती है और उनकी प्रेमपूर्वक देखभाल करती है।
- 'अतिथिदेवो भव' की शिक्षा — दादी बताती हैं कि 'अतिथिदेवो भव' उपनिषद् का वचन है — अतिथि हमारा देवता है और उसकी आदरपूर्वक सेवा करनी चाहिए। भारतीय संस्कृति में अतिथिसेवा पञ्चमहायज्ञों में अंतर्भूत है; प्राणी भी अतिथि हो सकते हैं।
- अव्यय व्याकरण — इस पाठ में अव्यय शब्द सिखाए गए हैं — अत्र (यहाँ), तत्र (वहाँ), कुत्र (कहाँ), सर्वत्र (हर जगह), अन्यत्र (और कहीं)। अव्यय में लिंग, वचन और विभक्ति का भेद नहीं होता।
Key points & formulas
- 01'अतिथिदेवो भव' उपनिषद् का वचन है — इसका अर्थ है: अतिथि हमारा देवता है और उसकी आदर के साथ सेवा करनी चाहिए।
- 02भारतीय संस्कृति में अतिथिसेवा पञ्चमहायज्ञों में अंतर्भूत है; न केवल मनुष्य बल्कि अन्य प्राणी भी अतिथि हो सकते हैं।
- 03राधिका के घर की छत पर एक बिल्ली और उसके चार शावक विशिष्ट अतिथि के रूप में आए; राधिका उन्हें दूध देती और उनकी देखभाल करती थी।
- 04शावकों के नाम राधिका ने रखे — तन्वी (सुंदर आकृति), मृद्वी (स्पर्श में अत्यंत कोमल), शबलः (चित्रवर्ण / रंग-बिरंगा), भीमः (थोड़ा मोटा)।
- 05दादी की शिक्षा: अतिथि को देवता समझकर उसकी सेवा करो — राधिका ने इसे मंत्र की तरह दिनभर दोहराया।
- 06व्याकरण: इस पाठ में अव्यय शब्द सिखाए गए — अत्र (यहाँ), तत्र (वहाँ), कुत्र (कहाँ?), सर्वत्र (हर जगह), अन्यत्र (और कहीं); अव्यय में लिंग, वचन और विभक्ति का भेद नहीं होता।
- 07कठिन शब्द: शावकाः = बिल्ली के बच्चे; अहोरात्रम् = दिन-रात; वारं वारम् = बार-बार; कूर्दमाना = कूदती हुई; कार्यकलापान् = गतिविधियों को।
Frequently asked questions
01Atithidevo Bhava paath mein kya sikhaya gaya hai?
इस पाठ में सिखाया गया है कि अतिथि को देवता के समान समझकर उनकी आदर सहित सेवा करनी चाहिए। राधिका की कहानी द्वारा दिखाया गया है कि अतिथि केवल मनुष्य ही नहीं, अन्य प्राणी भी हो सकते हैं।
02Atithidevo Bhava ka arth kya hai?
'अतिथिदेवो भव' का अर्थ है — अतिथि हमारा देवता है, ऐसा समझो। यह उपनिषद् का वचन है।
03राधिका के घर में कौन-से विशिष्ट अतिथि आए थे?
राधिका के घर की छत (छद्याः उपरि) पर एक बिल्ली (मार्जारी) और उसके चार शावक विशिष्ट अतिथि के रूप में आए थे।
04मार्जारी के शावकों के नाम क्या थे और उनके नाम का क्या अर्थ है?
राधिका ने चारों शावकों के नाम रखे — तन्वी (आकृति से सुंदर), मृद्वी (स्पर्श से अत्यंत कोमल), शबलः (चित्रवर्ण अर्थात् रंग-बिरंगा), और भीमः (थोड़ा मोटा)।
05दादी ने राधिका को क्या सिखाया?
दादी ने राधिका को बताया — 'अतिथिदेवो भव'। अर्थात् अतिथि हमारा देवता है, ऐसा मानो और उसकी आदर के साथ सेवा करो। दादी ने यह भी कहा कि हम नहीं जानते अतिथि कब आएंगे, किंतु जब आएं तो उनकी इसी प्रकार सेवा करनी चाहिए।
06'अतिथिदेवो भव' वचन कहाँ से लिया गया है?
'अतिथिदेवो भव' उपनिषद् का वचन है। पाठ में स्पष्ट लिखा है: 'अतिथिदेवो भव' इति उपनिषदः वचनम् अस्ति।
07भारतीय संस्कृति में अतिथिसेवा का क्या महत्त्व है?
पाठ के अनुसार भारतीय संस्कृति में अतिथियों का अत्यधिक महत्त्व है। अतिथिसेवा पञ्चमहायज्ञों में अंतर्भूत है। केवल मनुष्य ही नहीं, अन्य प्राणी भी अतिथि के रूप में आदर के पात्र हैं।
08राधिका बिल्ली को क्या देती थी और बिल्ली की प्रतिक्रिया क्या थी?
राधिका बिल्ली (मार्जारी) को दूध (क्षीरम्) देती थी। दूध पीने के बाद बिल्ली कृतज्ञतापूर्वक (सधन्यवादं) राधिका को देखती थी।
09इस पाठ में कौन-से अव्यय शब्द सिखाए गए हैं?
पाठ में ये अव्यय शब्द सिखाए गए — अत्र (यहाँ), तत्र (वहाँ), कुत्र (कहाँ?), सर्वत्र (हर जगह), अन्यत्र (और कहीं), बहिः (बाहर), अधः (नीचे), उपरि (ऊपर)। अव्यय में लिंग, वचन और विभक्ति का भेद नहीं होता।
10अव्यय किसे कहते हैं? पाठ में दी गई परिभाषा क्या है?
पाठ में दिए गए श्लोक के अनुसार: 'सदृशं त्रिषु लिङ्गेषु सर्वासु च विभक्तिषु। वचनेषु च सर्वेषु यन्न व्येति तदव्ययम्।।' — जो शब्द तीनों लिंगों, सभी विभक्तियों और सभी वचनों में एक समान रहे, वह अव्यय है।
11शावकाः और कूर्दमाना का हिंदी अर्थ क्या है?
शावकाः = बिल्ली के बच्चे (मार्जारस्य शिशवः)। कूर्दमाना = कूदती हुई (उच्छलनं कुर्वती)।
12वारं वारम् और अहोरात्रम् का अर्थ क्या है?
वारं वारम् = बार-बार (पुनः पुनः)। अहोरात्रम् = दिन-रात (अहर्निशम्)। राधिका ने 'अतिथिदेवो भव' को दिन-रात बार-बार दोहराया।
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