Summary
Chapter 5 of the Class 12 Hindi NCERT textbook (Aroh), 'Usha' (उषा), शमशेर बहादुर सिंह द्वारा रचित प्रयोगवादी कविता है, जो सूर्योदय से ठीक पहले पल-पल बदलते प्रकृति-चित्र को गाँव के परिवेश के उपमानों के माध्यम से जीवंत बनाती है।
- भोर का पल-पल बदलता शब्द-चित्र — कविता सूर्योदय के ठीक पहले के आकाश को क्षण-क्षण बदलते रंगों में उकेरती है — नीला शंख, राख से लीपा गीला चौका, केसर से धुली काली सिल और नील जल में झिलमिल देह; यह प्रकृति की गतिशील छवि है।
- ग्रामीण उपमानों का बिंब-विधान — शमशेर सारे उपमान गाँव के परिवेश से लेते हैं — चौका, सिल, स्लेट, खड़िया चाक; इन घरेलू बिंबों से भोर रंग, रेखा और उजास से भर उठती है और कविता चित्रकला-सी हो जाती है।
- जादू का टूटना — 'जादू टूटता है इस उषा का अब / सूर्योदय हो रहा है' — सूर्य के उदय होते ही भोर की पल-पल बदलती जादुई छटा समाप्त हो जाती है; क्षणभंगुर सौंदर्य का यही मार्मिक बोध कविता का चरम है।
Key points & formulas
- 01कवि परिचय: शमशेर बहादुर सिंह का जन्म 13 जनवरी सन् 1911 को देहरादून (उत्तर प्रदेश, अब उत्तराखंड) में हुआ; निधन सन् 1993 में अहमदाबाद में।
- 02प्रमुख रचनाएँ: कुछ कविताएँ, कुछ और कविताएँ, चुका भी हूँ नहीं मैं, इतने पास अपने, बात बोलेगी, काल तुझसे होड़ है मेरी तथा उर्दू-हिंदी कोश का संपादन।
- 03विधा: प्रयोगवादी कविता; शमशेर की पहचान बिंबधर्मी कवि के रूप में है — उनकी कविता में शब्दों से रंग, रेखा, स्वर और कूची की अद्भुत कशीदाकारी का माद्दा है।
- 04केंद्रीय भाव: यह कविता सूर्योदय के ठीक पहले के पल-पल परिवर्तित प्रकृति का शब्द-चित्र है; कवि भोर के आसमान की गति को गाँव के जीवन भरे हलचल से जोड़ने वाला स्रष्टा है।
- 05उपमान: शंख (नीला नभ), राख से लीपा गीला चौका, लाल केसर से धुली काली सिल, स्लेट पर लाल खिड़या चाक, और नील जल में गौर झिलमिल देह — ये सभी उपमान गाँव के परिवेश से लिए गए हैं।
- 06कविता का समापन 'और—जादू टूटता है इस उषा का अब / सूर्योदय हो रहा है' — से होता है; सूर्योदय के साथ भोर की पल-पल बदलती जादुई छटा समाप्त हो जाती है।
- 07शब्दार्थ — उषा: सूर्योदय से पहले की वेला (भोर); सिल: वह पत्थर की पाटी जिस पर मसाले पीसे जाते हैं; चौका: रसोई का साफ-लिपा भाग।
- 08शमशेर खुद को उर्दू और हिंदी का दोआब मानते थे; विचारों में प्रगतिशील और शिल्प में प्रयोगधर्मी कवि थे।
Frequently asked questions
01उषा कविता किसने लिखी है?
उषा कविता शमशेर बहादुर सिंह ने लिखी है।
02Usha kavita ka kendriya bhav kya hai?
यह कविता सूर्योदय के ठीक पहले के पल-पल परिवर्तित प्रकृति का शब्द-चित्र है, जिसमें भोर के नभ को गाँव के उपमानों से जीवंत बनाया गया है।
03उषा कविता में किन उपमानों का प्रयोग हुआ है?
कविता में भोर के नभ की तुलना शंख, राख से लीपे गीले चौके, लाल केसर से धुली काली सिल, स्लेट पर लाल खिड़या चाक, और नील जल में झिलमिलाती गौर देह से की गई है।
04'जादू टूटता है इस उषा का' का क्या अर्थ है?
सूर्योदय होते ही भोर की पल-पल बदलती जादुई रंग-छटा समाप्त हो जाती है — यही इस पंक्ति का भाव है।
05Shamsher Bahadur Singh ka janm kab aur kahan hua?
शमशेर बहादुर सिंह का जन्म 13 जनवरी सन् 1911 को देहरादून (उत्तर प्रदेश, अब उत्तराखंड) में हुआ।
06शमशेर बहादुर सिंह को कौन-से पुरस्कार प्राप्त हुए?
उन्हें साहित्य अकादेमी तथा कबीर सम्मान सहित अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।
07Shamsher Bahadur Singh ki pramukh rachnaen kaun si hain?
उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं — कुछ कविताएँ, कुछ और कविताएँ, चुका भी हूँ नहीं मैं, इतने पास अपने, बात बोलेगी, काल तुझसे होड़ है मेरी तथा उर्दू-हिंदी कोश का संपादन।
08उषा कविता में गाँव का वातावरण कैसे चित्रित हुआ है?
कवि ने सिल, राख से लीपा चौका, स्लेट और खिड़या चाक जैसे ग्रामीण उपमानों के माध्यम से भोर के आसमान को गाँव की सुबह की जीवंत हलचल से जोड़ा है।
09शमशेर को बिंबधर्मी कवि क्यों कहा जाता है?
शमशेर की पहचान बिंबधर्मी कवि के रूप में है क्योंकि उनकी बिंबधर्मिता शब्दों से रंग, रेखा, स्वर और कूची की अद्भुत कशीदाकारी का माद्दा रखती है।
10Usha kavita mein 'prat nabh tha bahut neela shankh jaise' ka kya arth hai?
इस पंक्ति में भोर के नभ की गहरी नीलिमा की तुलना शंख से की गई है।
11उषा कविता किस काव्य-धारा से संबंधित है?
यह कविता प्रयोगवादी काव्य-धारा से संबंधित है; शमशेर विचारों में प्रगतिशील और शिल्प में प्रयोगधर्मी कवि थे।
12क्या इस पाठ का PDF मुफ़्त डाउनलोड कर सकते हैं?
हाँ, यह मुफ़्त है, बिना साइन-अप।
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