Summary
Chapter 2 of the Class 12 Hindi NCERT textbook (Aroh), 'Patang' (पतंग), आलोक धन्वा द्वारा रचित कविता है, जो उनके एकमात्र काव्य-संग्रह 'दुनिया रोज बनती है' का हिस्सा है; इसमें शरद ऋतु के आगमन और पतंग उड़ाते बच्चों की बालसुलभ उमंगों का सजीव चित्रण है।
- बालसुलभ उमंग और निडरता — छतों पर दौड़ते, पेंग भरते और खतरनाक किनारों तक पहुँचते बच्चे गिरकर भी और निडर हो जाते हैं; पतंग उनकी रंग-बिरंगी उमंगों और ऊँचाइयाँ छूने की अदम्य इच्छा का जीवंत प्रतीक बन जाती है।
- शरद का सजीव प्रकृति-चित्रण — भादो की बौछारें जाने के बाद शरद को नयी चमकीली साइकिल चलाते बच्चे-सा दिखाया गया है; 'खरगोश की आँखों जैसा लाल सवेरा' जैसे बिंब ऋतु-परिवर्तन और उल्लास को कोमल रंगों में उकेरते हैं।
- बिंब-सौंदर्य — 'दिशाओं को मृदंग की तरह बजाते हुए' और 'धड़कती ऊँचाइयाँ महज एक धागे के सहारे' जैसे बिंब पतंग और बच्चों के रोमांच को ध्वनि, गति और स्पर्श से भर देते हैं, जिससे कविता चित्रात्मक हो उठती है।
Key points & formulas
- 01कवि परिचय: आलोक धन्वा का जन्म सन् 1948 ई. में मुंगेर (बिहार) में हुआ; उनकी पहली कविता 'जनता का आदमी' 1972 में प्रकाशित हुई।
- 02प्रमुख कृतियाँ: 'भागी हुई लड़कियाँ', 'ब्रूनो की बेटियाँ' से प्रसिद्धि; एकमात्र काव्य-संग्रह 'दुनिया रोज बनती है' सन् 98 में प्रकाशित।
- 03विधा: यह एक लंबी कविता है जिसके तीसरे भाग को पाठ्यपुस्तक में शामिल किया गया है।
- 04केंद्रीय भाव: पतंग के बहाने बालसुलभ इच्छाओं एवं उमंगों का सुंदर चित्रण; पतंग बच्चों की उमंगों का रंग-बिरंगा सपना है जो आसमान की ऊँचाइयों को छूना चाहता है।
- 05प्रकृति-चित्रण: भादो की बौछारें जाने के बाद 'खरगोश की आँखों जैसा लाल सवेरा' और शरद का आगमन — बाल क्रियाकलापों एवं प्रकृति में आए परिवर्तन को सुंदर बिंबों द्वारा अभिव्यक्त किया गया है।
- 06काव्य-सौंदर्य: कविता में ऐसे बिंब हैं जैसे 'दिशाओं को मृदंग की तरह बजाते हुए' और 'पतंगों की धड़कती ऊँचाइयाँ उन्हें थाम लेती हैं महज एक धागे के सहारे' — जो पतंग और बच्चों के रोमांच को जीवंत करते हैं।
- 07शब्दार्थ — भादो: वर्षा ऋतु का महीना; मृदंग: एक वाद्य यंत्र; पेंग: झूले की तरह की आगे-पीछे की गति; रंध्र: छिद्र।
Frequently asked questions
01पतंग कविता के कवि कौन हैं?
पतंग कविता के कवि आलोक धन्वा हैं जिनका जन्म सन् 1948 ई. में मुंगेर (बिहार) में हुआ था।
02Patang poem kis kavya-sangrah se li gayi hai?
पतंग कविता आलोक धन्वा के एकमात्र काव्य-संग्रह 'दुनिया रोज बनती है' का हिस्सा है।
03पतंग कविता का केंद्रीय भाव क्या है?
पतंग के बहाने बालसुलभ इच्छाओं एवं उमंगों का सुंदर चित्रण किया गया है। पतंग बच्चों की उमंगों का रंग-बिरंगा सपना है।
04'खरगोश की आँखों जैसा लाल सवेरा' का क्या अर्थ है?
यह पंक्ति भादो के बाद शरद ऋतु के आगमन पर सुबह के लालिमायुक्त उजाले का चित्र प्रस्तुत करती है — 'सबसे तेज बौछारें गयीं भादो गया / सवेरा हुआ / खरगोश की आँखों जैसा लाल सवेरा'।
05कविता में शरद ऋतु का चित्रण कैसे किया गया है?
शरद को एक बच्चे की तरह 'अपनी नयी चमकीली साइकिल तेज चलाते हुए / घंटी बजाते हुए जोर-जोर से / चमकीले इशारों से बुलाते हुए' दिखाया गया है।
06पतंग को 'दुनिया की सबसे हलकी और रंगीन चीज' क्यों कहा गया है?
कवि ने पतंग के लिए ये विशेषण इसलिए प्रयोग किए हैं क्योंकि वह 'दुनिया की सबसे हलकी और रंगीन चीज', 'दुनिया का सबसे पतला कागज' और 'बाँस की सबसे पतली कमानी' से बनी होती है, जो बच्चों की नाजुक उमंगों को व्यक्त करती है।
07'दिशाओं को मृदंग की तरह बजाते हुए' का तात्पर्य क्या है?
इस पंक्ति में बच्चों की उत्साहपूर्ण दौड़ को इस तरह दिखाया गया है कि उनके पैरों की थाप से दिशाएँ मृदंग (वाद्य यंत्र) की तरह गूँज उठती हैं — 'छतों को भी नरम बनाते हुए / दिशाओं को मृदंग की तरह बजाते हुए'।
08Patang kavita mein bachcho ka girne ke baad kya hota hai?
कविता के अनुसार गिरने के बाद बच्चे और अधिक निडर हो जाते हैं — 'अगर वे कभी गिरते हैं छतों के खतरनाक किनारों से / और बच जाते हैं तब तो / और भी निडर होकर सुनहले सूरज के सामने आते हैं।'
09'जन्म से ही वे अपने साथ लाते हैं कपास' का क्या अर्थ है?
यह पंक्ति बच्चों की कोमलता और मासूमियत का बोध कराती है — वे जन्म से ही कपास जैसी नरमी अपने साथ लेकर आते हैं।
10पतंग कविता में 'रोमांचित शरीर का संगीत' से क्या आशय है?
कवि के अनुसार छतों के खतरनाक किनारों पर बच्चों को गिरने से 'सिर्फ उनके ही रोमांचित शरीर का संगीत' बचाता है — अर्थात् उनकी आंतरिक जीवंतता और रोमांच की भावना उन्हें सँभाले रखती है।
11क्या इस पाठ का PDF मुफ़्त डाउनलोड कर सकते हैं?
हाँ, यह मुफ़्त है, बिना साइन-अप।
12आलोक धन्वा को कौन-कौन से सम्मान मिले हैं?
आलोक धन्वा को राहुल सम्मान, बिहार राष्ट्रभाषा परिषद् का साहित्य सम्मान, बनारसी प्रसाद भोजपुरी सम्मान, और पहल सम्मान प्रदान किए गए हैं।
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