Chapter 7 — Kavitavali, Lakshman Murcha Aur Ram Ka Vilap
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Chapter 7 of the Class 12 Hindi NCERT textbook (Aroh), 'Kavitavali, Lakshman Murcha Aur Ram Ka Vilap' (कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप), गोस्वामी तुलसीदास की रचनाओं 'कवितावली' (उत्तर कांड) और 'रामचरितमानस' (लंका कांड) से लिया गया पाठ है, जिसमें युगीन आर्थिक पीड़ा और लक्ष्मण-मूर्च्छा पर राम के मर्मस्पर्शी विलाप का चित्रण है।
- युगीन आर्थिक विषमता का यथार्थ — कवितावली के छंद पेट की आग को समुद्र की बड़वाग्नि से भी बड़ी बताते हैं — किसान, भिखारी, चोर सभी उसी के लिए कर्म करते हैं। दरिद्रता को 'दसानन' (रावण) से उपमित कर बेकारी और भुखमरी का यथार्थपरक चित्र खींचा गया है।
- जाति-निरपेक्ष भक्ति का स्वाभिमान — तुलसी जाति-पाँत के सभी विभेदों को अस्वीकार कर केवल राम के सेवक के रूप में अपनी पहचान घोषित करते हैं — 'धूत कहौ, अवधूत कहौ' कहकर वे समाज के लेबलों से ऊपर उठकर भक्ति को ही अपना एकमात्र आधार बनाते हैं।
- राम का मानवीकरण और करुण रस — लक्ष्मण के मूर्छित होने पर राम का विलाप प्रलाप में बदल जाता है; 'मिलइ न जगत सहोदर भ्राता' कहकर वे भाई के अद्वितीय प्रेम को व्यक्त करते हैं। यह प्रसंग राम को दिव्य से हटाकर पूर्णतः मानवीय बना देता है।
- शोक में आशा का संचार — करुण रस से भरे वातावरण में हनुमान का संजीवनी लेकर लौटना निराशा के बीच आशा जगाता है। कवि की दृष्टि में यह करुण रस के मध्य वीर रस का उदय है, जो प्रसंग को नयी ऊर्जा देता है।
Key points & formulas
- 01कवि परिचय: गोस्वामी तुलसीदास का जन्म सन् 1532 में बाँदा (उत्तर प्रदेश) के राजापुर गाँव में हुआ; निधन सन् 1623 में काशी में; प्रमुख रचनाएँ — रामचरितमानस, विनयपत्रिका, गीतावली, दोहावली, कवितावली आदि।
- 02विधा एवं भाषा: कवितावली में कवित्त व सवैया छंद हैं; रामचरितमानस-प्रसंग में चौपाई, दोहा और सोरठा प्रयुक्त हैं; रचना-भाषाएँ अवधी व ब्रजभाषा (लोकभाषाएँ)।
- 03पहला छंद — पेट की आग: 'आगि बड़वागितें बड़ी है आगि पेटकी' — किसान, भिखारी, चोर, बाजीगर सभी पेट की आग बुझाने के लिए ऊँचे-नीचे कर्म करते हैं; राम-भक्ति को इसका एकमात्र समाधान बताया गया है।
- 04दूसरा छंद — दारिद-दसानन: 'दारिद-दसानन दबाई दुनी' — खेती, भीख, व्यापार, नौकरी सब बंद हैं; दरिद्रता को रावण (दसानन) से उपमित कर बेकारी और पीड़ा का यथार्थपरक चित्रण किया गया है।
- 05तीसरा छंद — स्वाभिमानी भक्त: 'धूत कहौ, अवधूत कहौ, रजपूतु कहौ, जोलहा कहौ कोऊ' — तुलसी जाति-पाँत के सभी विभेदों को अस्वीकार कर केवल राम के सेवक के रूप में अपनी पहचान घोषित करते हैं।
- 06लक्ष्मण-मूर्च्छा प्रसंग: लक्ष्मण के शक्ति बाण लगने पर राम का विलाप प्रलाप में बदल जाता है; 'मिलइ न जगत सहोदर भ्राता' कहकर राम भाई के अद्वितीय प्रेम को व्यक्त करते हैं; यह प्रसंग राम का पूर्ण मानवीकरण करता है।
- 07हनुमान का आगमन: शोकग्रस्त वातावरण में संजीवनी लेकर हनुमान का लौटना — कवि की दृष्टि में यह करुण रस के बीच वीर रस का उदय है।
- 08कठिन शब्दार्थ: 'किसबी' = धंधा; 'चेटकी' = बाजीगर; 'बिपिन' = जंगल; 'प्रलाप' = तर्कहीन वचन-प्रवाह; 'सहोदर' = एक ही माँ की कोख से जन्मे।
Frequently asked questions
01Kavitavali ke kavi kaun hain? (कवितावली के कवि कौन हैं?)
कवितावली के कवि गोस्वामी तुलसीदास हैं, जो भक्तिकाल की सगुण काव्य-धारा में रामभक्ति शाखा के सर्वोपरि कवि माने जाते हैं।
02तुलसीदास का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
तुलसीदास का जन्म सन् 1532 में बाँदा (उत्तर प्रदेश) जिले के राजापुर गाँव में माना जाता है और उनका निधन सन् 1623 में काशी में हुआ।
03'पेट की आग' से Tulsidas का क्या तात्पर्य है?
तुलसीदास के अनुसार पेट की भूख (आजीविका की आवश्यकता) इतनी तीव्र है कि 'आगि बड़वागितें बड़ी है आगि पेटकी' — समुद्र की अग्नि से भी बड़ी यह आग है, जिसके लिए लोग ऊँचे-नीचे, धर्म-अधर्म सभी कर्म करते हैं।
04'दारिद-दसानन' किसे कहा गया है?
दूसरे छंद में तुलसीदास ने दरिद्रता (गरीबी) को दसानन (रावण) से उपमित किया है — 'दारिद-दसानन दबाई दुनी' — अर्थात् दरिद्रता ने सारी दुनिया को उसी प्रकार दबा रखा है जैसे रावण ने।
05Dhoot Kahon वाले सवैये में Tulsidas ने क्या भाव व्यक्त किया है?
'धूत कहौ, अवधूत कहौ, रजपूतु कहौ, जोलहा कहौ कोऊ' — तुलसी कहते हैं कि कोई उन्हें कुछ भी कहे, वे राम के नामी गुलाम हैं; माँग कर खाएँगे, मस्जिद में सोएँगे — न किसी से लेना है न देना; इस प्रकार जाति-पाँत के विभेद को अस्वीकार कर भक्त का स्वाभिमान व्यक्त होता है।
06Lakshman Murcha प्रसंग किस रचना से लिया गया है?
यह प्रसंग 'रामचरितमानस' के लंका कांड से लिया गया है, जिसमें लक्ष्मण को शक्ति बाण लगने के बाद राम के विलाप का मर्मस्पर्शी चित्रण है।
07राम के विलाप में कौन-से भाव प्रकट हुए?
भाई लक्ष्मण के प्रति राम के मन में छिपे प्रेम के कई कोण अनावृत होते हैं — 'मम हित लागि तजेहु पितु माता', 'मिलइ न जगत सहोदर भ्राता' आदि पंक्तियों में भ्रातृप्रेम, आत्मग्लानि और विह्वलता एक साथ व्यक्त होती है; विलाप धीरे-धीरे प्रलाप (तर्कहीन वचन-प्रवाह) में बदल जाता है।
08Hanuman के आगमन को कवि ने किस रूप में देखा?
कवि ने हनुमान के संजीवनी लेकर आने को 'करुण रस के बीच वीर रस के उदय' के रूप में देखा — घने शोक-परिवेश में यह आगमन काव्यगत करुण-प्रसंग को जीवन के मंगल-विकास की ओर ले जाता है।
09तुलसीदास ने किन-किन भाषाओं में रचनाएँ कीं?
तुलसीदास ने शास्त्रीय भाषा (संस्कृत) में सर्जन-क्षमता होने के बावजूद लोकभाषाओं — अवधी व ब्रजभाषा — को साहित्य-रचना का माध्यम चुना।
10इस पाठ में कौन-कौन से छंद प्रयुक्त हैं?
पाठ में तुलसीदास के पाँच छंद प्रयुक्त हैं — दोहा, चौपाई, सोरठा, कवित्त और सवैया।
11'किसबी' और 'चेटकी' का अर्थ क्या है?
पाठ की शब्द-छवि के अनुसार 'किसबी' (किसबी) का अर्थ है धंधा (कारीगर/दस्तकार) और 'चेटकी' का अर्थ है बाजीगर।
12Class 12 Hindi Aroh Chapter 7 ka saransh kya hai?
यह पाठ तुलसीदास की 'कवितावली' और 'रामचरितमानस' से लिया गया है। कवितावली में तीन छंदों के माध्यम से युगीन आर्थिक पीड़ा, बेकारी और भक्ति की रचनात्मक भूमिका का चित्रण है। रामचरितमानस के लंका कांड से लक्ष्मण-मूर्च्छा प्रसंग में राम का मानवीय विलाप और हनुमान का संजीवनी लेकर लौटना वर्णित है।
13क्या इस पाठ का PDF मुफ़्त डाउनलोड कर सकते हैं?
हाँ, यह मुफ़्त है, बिना साइन-अप।
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