Class 12 Hindi

Chapter 12 — Kaale Megha Paani De

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Overview

Summary

Chapter 12 of the Class 12 Hindi NCERT textbook (Aroh), 'Kaale Megha Paani De' (काले मेघा पानी दे), धर्मवीर भारती द्वारा लिखित संस्मरण है जिसमें अनावृष्टि के समय लोक-प्रचलित विश्वास और वैज्ञानिक तर्क के द्वंद्व का सजीव चित्रण है।

  • विश्वास और विज्ञान का द्वंद्वसूखे में 'इंदर सेना' पर पानी फेंकने की प्रथा को लेखक का तर्कशील किशोर मन निर्मम बरबादी और अंधविश्वास मानता है; संस्मरण लोक-आस्था और वैज्ञानिक तर्क के बीच के आंतरिक संघर्ष को उजागर करता है।
  • त्याग बिना दान नहींजीजी समझाती हैं कि सूखे में फेंका जाने वाला पानी 'बुवाई' है — जैसे किसान बीज बोता है वैसे ही यह अर्घ्य है; उनका तर्क है कि बिना त्याग के दान संभव नहीं और सामूहिक कल्याण के लिए पहले देना होता है।
  • व्यक्ति से राष्ट्र तकजीजी 'यथा राजा तथा प्रजा' के साथ 'यथा प्रजा तथा राजा' और गांधीजी का संदर्भ जोड़ती हैं; पचास वर्ष बाद लेखक स्वयं से पूछता है कि आज हम देश के लिए क्या त्याग करते हैं।
Essentials

Key points & formulas

  1. 01लेखक परिचय: धर्मवीर भारती (जन्म सन् 1926, इलाहाबाद; निधन सन् 1997); पद्मश्री एवं व्यास सम्मान से सम्मानित।
  2. 02विधा: संस्मरण — यह पाठ लेखक के किशोर जीवन का स्मरण है।
  3. 03केंद्रीय भाव: लोक-प्रचलित विश्वास और विज्ञान के द्वंद्व का चित्रण; साथ ही यह संदेश कि बिना त्याग के दान नहीं होता और सामूहिक कल्याण के लिए पहले देना होता है।
  4. 04मुख्य पात्र व घटनाएँ: इंदर सेना (दस से अठारह वर्ष के लड़कों की टोली जो 'काले मेघा पानी दे' गाते हुए घर-घर से पानी माँगती थी), जीजी (वृद्ध स्नेहमयी स्त्री जिनके तर्क ने लेखक के किले को पस्त कर दिया) और लेखक का स्वयं का किशोर रूप (आर्यसमाजी संस्कारों वाला, कुमार-सुधार सभा का उपमंत्री जो इंदर सेना को अंधविश्वास मानता था)।
  5. 05जीजी का तर्क: 'यह जो सूखे हम अपने घर का पानी इन पर फेंकते हैं वह भी बुवाई है' — पानी गली में बोने से काले मेघ की फसल आती है; और 'बिना त्याग के दान नहीं होता।'
  6. 06गांधी जी का संदर्भ: जीजी ने 'यथा राजा तथा प्रजा' के साथ 'यथा प्रजा तथा राजा' भी कहा और गांधी जी महाराज का उल्लेख किया।
  7. 07कठिन शब्दार्थ (पाठ में दिए): गुड़धानी = गुड़ और चने से बना एक प्रकार का व्यंजन; अर्घ्य = जल चढ़ाना; पखवारा = पंद्रह दिन की अवधि; ढोर-ढंगर = पशु; किला पस्त = हार जाना।
Questions

Frequently asked questions

01

काले मेघा पानी दे के लेखक कौन हैं?

इस पाठ के लेखक धर्मवीर भारती हैं। उनका जन्म सन् 1926 में इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश) में हुआ था और निधन सन् 1997 में हुआ। उन्हें पद्मश्री एवं व्यास सम्मान से सम्मानित किया गया था।

02

Kaale Megha Paani De ki vidha kya hai?

यह पाठ एक संस्मरण (memoir) है। पाठ में स्पष्ट उल्लेख है: 'यहाँ प्रस्तुत संस्मरण काले मेघा पानी दे में लोक-प्रचलित विश्वास और विज्ञान के द्वंद्व का सुंदर चित्रण है।'

03

इंदर सेना क्या है और उन्हें मेढक-मंडली क्यों कहा जाता था?

इंदर सेना दस-बारह से सोलह-अठारह वर्ष के लड़कों की वह टोली थी जो अनावृष्टि के समय 'काले मेघा पानी दे' गाते हुए द्वार-द्वार पानी माँगती थी। जो लोग उनके नग्न शरीर, उछलकूद, शोर-शराबे और कीचड़-काँदो से चिढ़ते थे, वे उन्हें मेढक-मंडली कहते थे।

04

जीजी ने इंदर सेना पर पानी फेंके जाने को कैसे सही ठहराया?

जीजी ने कहा: 'बिना त्याग के दान नहीं होता।' उन्होंने बुवाई का उदाहरण दिया — जैसे किसान पाँच-छह सेर गेहूँ जमीन में फेंकता है तो तीस-चालीस मन फसल आती है, वैसे ही यह पानी देना बुवाई है। उन्होंने कहा: 'यह जो सूखे हम अपने घर का पानी इन पर फेंकते हैं वह भी बुवाई है।'

05

लेखक का इंदर सेना के प्रति क्या दृष्टिकोण था?

लेखक का तर्कशील किशोर मन इसे पानी की निर्मम बरबादी और अंधविश्वास मानता था। उन्होंने सोचा: 'देश की कितनी क्षति होती है इस तरह के अंधविश्वासों से।' वे आर्यसमाजी संस्कारों वाले और कुमार-सुधार सभा के उपमंत्री थे, इसलिए सामाजिक सुधार का जोश अधिक था।

06

'গগরी फूटी बैल पियासा' पंक्ति का क्या भाव है?

यह इंदर सेना के खेलगीत की पंक्ति है। इसमें सूखे की भीषणता का संकेत है — গগরी (घड़ा) फूटी है और बैल प्यासे हैं; जीवन की मूलभूत जरूरतें तक पूरी नहीं हो पा रहीं। बैल कृषि-समाज की जीवनरेखा हैं, उनके प्यासे रहने का उल्लेख खेती और जीवन दोनों पर सूखे के संकट को व्यक्त करता है।

07

पाठ में 'अर्घ्य' का क्या अर्थ बताया गया है?

पाठ की शब्द-छवि सूची के अनुसार 'अर्घ्य' का अर्थ है — जल चढ़ाना। जीजी ने कहा था: 'यह पानी का अर्घ्य चढ़ाते हैं, जो चीज मनुष्य पाना चाहता है उसे पहले देगा नहीं तो पाएगा कैसे?'

08

जीजी के अनुसार सच्चा त्याग किसे कहते हैं?

जीजी ने कहा: 'त्याग तो वह होता है कि जो चीज तेरे पास भी कम है, जिसकी तुझको भी जरूरत है तो अपनी जरूरत पीछे रख कर दूसरे के कल्याण के लिए उसे दे — त्याग तो वह होता है, दान तो वह होता है, उसी का फल मिलता है।'

09

गांधी जी का उल्लेख इस पाठ में किस संदर्भ में आया है?

जीजी ने 'यथा राजा तथा प्रजा' के साथ यह भी कहा कि 'यथा प्रजा तथा राजा' — और इसे गांधी जी महाराज के विचारों से जोड़ा। जीजी का एक लड़का राष्ट्रीय आंदोलन में पुलिस की लाठी खा चुका था, तब से वे गांधी जी महाराज की बात अकसर करने लगी थीं।

10

पाठ के अंत में लेखक क्या प्रश्न उठाते हैं?

लेखक पूछते हैं: 'हम आज देश के लिए करते क्या हैं? माँगें हर क्षेत्र में बड़ी-बड़ी हैं पर त्याग का कहीं नाम-निशान नहीं है।' वे यह भी कहते हैं: 'काले मेघा दल के दल उमड़ते हैं, पानी झमाझम बरसता है, पर গগरी फूटी की फूटी रह जाती है, बैल पियासे के पियासे रह जाते हैं।'

11

'पखवारा' और 'दसतपा' शब्दों का क्या अर्थ है?

पाठ की शब्द-छवि सूची के अनुसार: पखवारा = पंद्रह दिन की अवधि; दसतपा = तपते दस दिन। पाठ में लिखा है: 'जेठ के दसतपा बीत कर आषाढ़ का पहला पखवारा भी बीत चुका होता पर क्षितिज पर कहीं बादल की रेख भी नहीं दीखती।'

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क्या इस पाठ का PDF मुफ़्त डाउनलोड कर सकते हैं?

हाँ, यह मुफ़्त है, बिना साइन-अप।

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