Class 12 Hindi

Chapter 6 — Badal Raag

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Overview

Summary

Chapter 6 of the Class 12 Hindi NCERT textbook (Aroh), 'Badal Raag' (बादल राग), सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की कविता है, जो उनके संग्रह 'अनामिका' में छह खंडों में प्रकाशित 'बादल राग' का छठा खंड है; इसमें बादल को विप्लव का प्रतीक बनाकर लघुमानव की मुक्ति और नव-निर्माण का आह्वान है।

  • बादल — क्रांति का अग्रदूतकवि बादल को विप्लव (क्रांति) और नव-निर्माण के दूत के रूप में पुकारते हैं; उसका गर्जन-वर्षण सुप्त अंकुरों को जगा देता है, जिससे बादल शोषित समाज में परिवर्तन और नयी सृष्टि की आकांक्षा का प्रतीक बन जाता है।
  • वंचितों की पक्षधरता'विप्लव-रव से छोटे ही हैं शोभा पाते' — क्रांति सदा वंचितों का प्रतिनिधित्व करती है; अकाल और शोषण से जीर्ण कृषक तथा छोटे पौधे ही बादल को बुलाते हैं, अट्टालिकाएँ नहीं।
  • मानवीकरण और मुक्त छंदपूरी कविता में प्रकृति का मानवीकरण और रूपक अलंकार से बादल एक वीर-दल-सा दिखता है; निराला ने इसे मुक्त छंद में रचकर छायावादी बिंब को क्रांतिकारी स्वर देने में सफलता पाई है।
Essentials

Key points & formulas

  1. 01कवि-परिचय: सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' का जन्म सन् 1899 में महिषादल (बंगाल के मेदिनीपुर जिले में) हुआ; पारिवारिक गाँव गढ़ाकोला, उन्नाव (उत्तर प्रदेश); निधन सन् 1961 में इलाहाबाद में।
  2. 02विधा व स्रोत: 'बादल राग' अनामिका संग्रह में छह खंडों में प्रकाशित है; पाठ्यक्रम में उसका छठा खंड लिया गया है। निराला छायावाद के प्रमुख कवि हैं।
  3. 03केंद्रीय भाव: बादल क्रांति और नव-निर्माण का अग्रदूत है — किसान-मजदूर की आकांक्षाएँ उसे नव-निर्माण के राग के रूप में पुकार रही हैं।
  4. 04काव्य-सौंदर्य: पूरी कविता में प्रकृति का मानवीकरण किया गया है; कविता में रूपक अलंकार का प्रयोग है; निराला ने मुक्त छंद में रचना की है।
  5. 05प्रमुख बिंब: 'अशनि-पात से शापित उन्नत शत-शत वीर, क्षत-विक्षत हत अचल-शरीर, गगन-स्पर्शी स्पर्द्धा धीर' — घायल होने पर भी हिम्मत न हारने वाले बादल वीरों के दल की तरह दिखाई देते हैं।
  6. 06वंचित वर्ग की पक्षधरता: 'विप्लव-रव से छोटे ही हैं शोभा पाते' — क्रांति हमेशा वंचितों का प्रतिनिधित्व करती है; 'अट्टालिका नहीं है रे' में भी यही भाव है।
  7. 07कठिन शब्दार्थ: विप्लव = क्रांति/बाढ़; अशनि-पात = वज्रपात; दग्ध = तप्त/तपा हुआ; शस्य = हरा (फसल); रण-तरी = युद्ध की नौका; शीर्ण = क्षीण; भेरी = बड़ा ढोल।
Questions

Frequently asked questions

01

बादल राग किसने लिखी है?

'बादल राग' सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' ने लिखी है। वे छायावाद के प्रमुख कवि हैं।

02

Badal Raag किस संग्रह में है और कौन-सा खंड पढ़ाया जाता है?

यह कविता निराला के काव्य-संग्रह 'अनामिका' में छह खंडों में प्रकाशित है। NCERT कक्षा 12 आरोह में उसका छठा खंड लिया गया है।

03

बादल राग का केंद्रीय भाव क्या है?

कविता में बादल को विप्लव (क्रांति) के प्रतीक के रूप में देखा गया है। लघुमानव के दुख से त्रस्त कवि बादल का आह्वान नव-निर्माण के राग के रूप में करते हैं। किसान-मजदूर की आकांक्षाएँ बादल को पुकार रही हैं।

04

'विप्लव-रव से छोटे ही हैं शोभा पाते' का अर्थ क्या है?

इस पंक्ति में 'छोटे' से तात्पर्य वंचित और शोषित वर्ग से है। क्रांति (विप्लव) हमेशा वंचितों का प्रतिनिधित्व करती है — इसीलिए विप्लव के रव में छोटे लोग ही शोभा पाते हैं।

05

निराला का जन्म कब और कहाँ हुआ?

सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' का जन्म सन् 1899 में महिषादल (बंगाल के मेदिनीपुर जिले में) हुआ। उनका पारिवारिक गाँव गढ़ाकोला, उन्नाव (उत्तर प्रदेश) था। उनका निधन सन् 1961 में इलाहाबाद में हुआ।

06

कविता में कृषक की दशा कैसी दिखाई गई है?

कविता में कृषक को 'जीर्ण बाहु, है शीर्ण शरीर' और 'हाड़-मात्र ही है आधार' बताया गया है। अकाल की चिता से व्याकुल, त्रस्त नयन-मुख लिए वह अधीर होकर बादल (विप्लव के वीर) को पुकार रहा है।

07

'अट्टालिका नहीं है रे' पंक्ति का क्या अर्थ है?

इस पंक्ति में कहा गया है कि जल-विप्लव-प्लावन सदा पंक (कीचड़/निम्न स्थान) पर ही होता है, आतंक-भवन (ऊँचे महलों) पर नहीं। अर्थात् क्रांतिकारी परिवर्तन नीचे से उठता है।

08

'अशनि-पात से शापित उन्नत शत-शत वीर' पंक्ति में किसकी ओर संकेत है?

यह पाठ्यपुस्तक का अभ्यास-प्रश्न भी है। इस पंक्ति में उन बादलों की ओर संकेत है जो वज्रपात (अशनि-पात) से क्षत-विक्षत होने पर भी 'গগन-स्पर्शी स्पर्द्धा धीर' बने रहते हैं — बार-बार गिरकर उठते हैं।

09

क्या बादल राग में प्रकृति का मानवीकरण हुआ है?

हाँ, पाठ्यपुस्तक स्वयं कहती है: 'पूरी कविता में प्रकृति का मानवीकरण किया गया है।' बादल, छोटे पौधे और सुप्त अंकुर सभी मानवीय भावों के साथ चित्रित हैं।

10

Nirala ki pramukh rachnayen kaun-si hain?

निराला की प्रमुख काव्य-रचनाओं में अनामिका, परिमल, गीतिका, बेला, नए पत्ते, अणिमा, तुलसीदास, कुकुरमुत्ता शामिल हैं। गद्य-रचनाओं में चतुरी चमार, प्रभावती, बिल्लेसुर बकरिहा, चोटी की पकड़, काले कारनामे हैं।

11

बादल राग कविता में बादल के लिए कौन-से संबोधन प्रयुक्त हुए हैं?

इस खंड में 'ऐ विप्लव के बादल!', 'ऐ विप्लव के वीर!' और 'ऐ जीवन के पारावार!' संबोधन मिलते हैं। पाठ्यपुस्तक बताती है कि शेष खंडों में 'अरे वर्ष के हर्ष!', 'मेरे पागल बादल!', 'ऐ निर्बंध!', 'ऐ स्वच्छंद!', 'ऐ सम्राट!' जैसे संबोधन भी हैं।

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क्या इस पाठ का PDF मुफ़्त डाउनलोड कर सकते हैं?

हाँ, यह मुफ़्त है, बिना साइन-अप।

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