Class 12 Hindi

Chapter 8 — Rubaaiyan, Gazal

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Overview

Summary

Chapter 8 of the Class 12 Hindi NCERT textbook (Aroh), 'Rubaaiyan, Gazal' (रुबाइयाँ, ग़ज़ल), फ़िराक गोरखपुरी (मूल नाम रघुपति सहाय 'फ़िराक') की रचनाएँ हैं, जिनकी रुबाइयों में माँ और शिशु के वात्सल्य-प्रेम के साथ भारतीय लोकजीवन के जीवंत चित्र उकेरे गए हैं।

  • माँ-शिशु का वात्सल्यरुबाइयों के केंद्र में माँ और शिशु का स्नेह है — चाँद पाने की ललक रखता बालक, आँगन में उसे लोका देती माँ; ये कोमल घरेलू दृश्य वात्सल्य-रस को सहज और आत्मीय अभिव्यक्ति देते हैं।
  • भारतीय लोकजीवन के चित्रदीवाली के चीनी खिलौने, रक्षाबंधन की चमकती राखी और दर्पण जैसे लोक-प्रतीक शायरी में जीवंत हो उठते हैं; फ़िराक परंपरागत रूमानियत से हटकर देशी लोकजीवन और प्रकृति को शायरी का विषय बनाते हैं।
  • भाषाई गठबंधन और रुबाई-शिल्पहिंदी, उर्दू और लोकभाषा का अनूठा मेल इन रचनाओं की विशेषता है; रुबाई चार-पंक्तियों की विधा है जिसमें पहली, दूसरी और चौथी पंक्ति में तुक मिलती है और तीसरी स्वच्छंद रहती है।
Essentials

Key points & formulas

  1. 01कवि परिचय: मूल नाम रघुपति सहाय 'फ़िराक'; जन्म 28 अगस्त 1896, गोरखपुर (उत्तर प्रदेश); निधन सन् 1983; इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग में अध्यापक रहे।
  2. 02पुरस्कार एवं कृतियाँ: गुले-नग्मा के लिए साहित्य अकादेमी पुरस्कार, ज्ञानपीठ पुरस्कार और सोवियत लैंड नेहरू अवार्ड; प्रमुख कृतियाँ — गुले-नग्मा, बज्मे जिंदगीः रंगे-शायरी, उर्दू गजलगोई।
  3. 03विधा — रुबाई: उर्दू और फ़ारसी का छंद; चार पंक्तियाँ; पहली, दूसरी और चौथी में तुक (काफ़िया); तीसरी पंक्ति स्वच्छंद।
  4. 04केंद्रीय भाव: माँ और शिशु का वात्सल्य-प्रेम; चाँद, आँगन, दर्पण, दीवाली, रक्षाबंधन जैसे भारतीय लोक-प्रतीकों का सहज उपयोग।
  5. 05काव्य-सौंदर्य: हिंदी-उर्दू-लोकभाषा का गठबंधन; पाठ में कवि का यह कथन उद्धृत है — 'दिव्यता भौतिकता से पृथक वस्तु नहीं है। जिसे हम भौतिक कहते हैं वही दिव्य भी है।'
  6. 06शब्दार्थ (स्रोत: पाठ की शब्द-छवि) — लोका देना: उछाल-उछाल कर प्यार करने की एक क्रिया; हई: है ही; शब: रात।
  7. 07साहित्यिक परंपरा: पाठ के अनुसार उर्दू शायरी का बड़ा हिस्सा रूमानियत, रहस्य और शास्त्रीयता से बँधा रहा; नजीर अकबराबादी और इल्ताफ़ हुसैन हाली जैसे शायरों के साथ फ़िराक ने इस रिवायत को तोड़ा।
  8. 08समानांतर संदर्भ: पाठ में सूरदास की पंक्ति 'मैया मैं तो चंद्र खिलौना लैहों' को फ़िराक की रुबाइयों के वात्सल्य-चित्रण से जोड़ा गया है।
Questions

Frequently asked questions

01

फ़िराक गोरखपुरी का असली नाम क्या था?

फ़िराक गोरखपुरी का मूल नाम रघुपति सहाय 'फ़िराक' था। उनका जन्म 28 अगस्त 1896 को गोरखपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ था।

02

Firaq Gorakhpuri ko kaun se puraskar mile?

पाठ के अनुसार फ़िराक गोरखपुरी को गुले-नग्मा के लिए साहित्य अकादेमी पुरस्कार, ज्ञानपीठ पुरस्कार और सोवियत लैंड नेहरू अवार्ड मिले।

03

रुबाई किसे कहते हैं? इसका छंद-विधान क्या है?

पाठ के अनुसार रुबाई उर्दू और फ़ारसी का एक छंद या लेखन शैली है जिसमें चार पंक्तियाँ होती हैं। पहली, दूसरी और चौथी पंक्ति में तुक (काफ़िया) मिलाया जाता है, जबकि तीसरी पंक्ति स्वच्छंद होती है।

04

फ़िराक गोरखपुरी की रुबाइयों का केंद्रीय भाव क्या है?

इन रुबाइयों में माँ और शिशु के वात्सल्य-प्रेम का चित्रण है — चाँद पाने की ललक, आँगन में लोका देना, दीवाली के चीनी खिलौने और रक्षाबंधन की राखी जैसे भारतीय लोकजीवन के दृश्य इन्हें जीवंत बनाते हैं।

05

'लोका देना' का क्या अर्थ है?

पाठ की शब्द-छवि के अनुसार 'लोका देना' का अर्थ है — उछाल-उछाल कर प्यार करने की एक क्रिया।

06

'हई' और 'शब' शब्दों के अर्थ क्या हैं?

पाठ में दी गई शब्द-छवि के अनुसार — 'हई' का अर्थ 'है ही' है और 'शब' का अर्थ 'रात' है।

07

फ़िराक ने उर्दू शायरी की किस परंपरा को तोड़ा?

पाठ के अनुसार उर्दू शायरी का बड़ा हिस्सा रूमानियत, रहस्य और शास्त्रीयता से बँधा था जिसमें लोकजीवन और प्रकृति के पक्ष बहुत कम उभर पाए। नजीर अकबराबादी और इल्ताफ़ हुसैन हाली के साथ फ़िराक ने भी इस रिवायत को तोड़कर लोकजीवन को शायरी का विषय बनाया।

08

Rubaaiyan mein chand ka kya mahatva hai?

रुबाइयों में बालक आँगन में चाँद पर ललचाया हुआ ठुनक रहा है। माँ उसे दर्पण देकर कहती है — 'देख आईने में चाँद उतर आया है।' चाँद यहाँ बालक की कल्पना और माँ के वात्सल्य का एक जीवंत प्रतीक बनकर आता है।

09

पाठ में रक्षाबंधन का वर्णन कैसे है?

पाठ में रक्षाबंधन पर यह पंक्तियाँ हैं — 'बिजली की तरह चमक रहे हैं लच्छे / भाई के है बाँधती चमकती राखी।' सावन की हलकी घटा और बिजली की चमक को राखी के लच्छों से जोड़ा गया है।

10

फ़िराक के काव्य में किन भाषाओं का प्रयोग हुआ है?

पाठ के अनुसार फ़िराक की रुबाइयों में हिंदी, उर्दू और लोकभाषा का मिला-जुला अनूठा गठबंधन है — 'लोका देना', 'गेसू', 'जिदयाया', 'घरौंदा' जैसे शब्द इसी गठबंधन के उदाहरण हैं।

11

फ़िराक गोरखपुरी की प्रमुख कृतियाँ कौन-सी हैं?

पाठ के अनुसार फ़िराक गोरखपुरी की प्रमुख कृतियाँ हैं — गुले-नग्मा, बज्मे जिंदगीः रंगे-शायरी और उर्दू गजलगोई।

12

Class 12 Hindi Aroh chapter 8 Rubaaiyan summary in Hindi?

इन रुबाइयों में माँ और शिशु के वात्सल्य का चित्रण है — आँगन में चाँद पाने की जिद करते बालक, दीवाली के चीनी खिलौने और रक्षाबंधन की चमकती राखी जैसे लोकजीवन के दृश्य हिंदी-उर्दू-लोकभाषा के मेल में पिरोए गए हैं। कवि फ़िराक गोरखपुरी हैं।

13

क्या इस पाठ का PDF मुफ़्त डाउनलोड कर सकते हैं?

हाँ, यह मुफ़्त है, बिना साइन-अप।

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