Summary
Chapter 1 of the Class 8 Sanskrit NCERT textbook (Deepakam), 'Sangacchadhvam Samvadadhvam' (संगच्छध्वं संवदध्वम्), ऋग्वेद के 'संज्ञान-सूक्त' (सूक्त १०.१९१) के तीन मन्त्रों को प्रस्तुत करता है। यह पाठ मिलकर चलने, एकस्वर से बोलने और परस्पर मनों में सामरस्य रखने की शिक्षा देता है।
- एकता एवं सामरस्य का वैदिक संदेश — पाठ का मूल भाव है — परिवार, गण, समाज, राष्ट्र और विश्व सभी स्तरों पर वैमनस्य त्यागकर ऐक्यभाव से जीना। मनुष्य मिलकर आगे बढ़ें, एक-दूसरे के मनोभावों को समझें और सामूहिक हित में एकजुट रहें।
- क्रीडा-कथा से सूक्त की ओर — पाठ पादकन्दुक-क्रीडा (फुटबॉल) की विजय के संवाद से आरम्भ होता है, जहाँ जीत का कारण परस्पर सामञ्जस्य था और विपक्ष की हार का कारण मनोभेद। यही अनुभव ऋग्वेद के संघटन-सूक्त की शिक्षा से जोड़ा जाता है।
- व्याकरण एवं वेद-परिचय — पाठ गम्-धातु में सम् उपसर्ग से बनने वाले आत्मनेपद रूप, लोट्-लकार के आज्ञा/आमन्त्रण/आशीर्वाद प्रयोग सिखाता है। साथ ही चार वेदों और ऋग्वेद के मण्डल-सूक्त-मन्त्र का परिचय भी देता है।
Key points & formulas
- 01पाठ का स्रोत: ऋग्वेद के दशम मण्डल का सूक्त १०.१९१, जो 'संज्ञान-सूक्त' तथा 'संघटन-सूक्त' नाम से प्रसिद्ध है।
- 02केंद्रीय शिक्षा: परिवार, गण, समाज, राष्ट्र और विश्व में वैमनस्य छोड़कर ऐक्यभाव से मिलकर रहें, एकस्वर से बोलें और मनों में सामरस्य बनाए रखें।
- 03पाठ-प्रवेश: विद्यालय के क्रीडोत्सव में पादकन्दुक-क्रीडा की विजय का संवाद — विजय का कारण था परस्पर सामञ्जस्य, जबकि विपक्षी दल में मनोभेद और द्वेषभाव था।
- 04प्रमुख मन्त्र: "संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम् । देवा भागं यथा पूर्वे संजानाना उपासते ॥" (मन्त्र १) — सभी मिलकर आगे बढ़ें और एक-दूसरे के मनोभावों को समझें।
- 05कठिन शब्द: संगच्छध्वम् = मिलकर चलो; आकूतिः = संकल्प; अभ्युदयम् = लौकिक उन्नति; हविषा = प्रार्थनापूर्वक समर्पण (यज्ञाहुति)।
- 06व्याकरण: गम्-धातु + सम् उपसर्ग → आत्मनेपद रूप बनते हैं; लोट्-लकार के तीन प्रयोग — आज्ञार्थे, आमन्त्रणार्थे और आशीर्वादार्थे।
- 07अतिरिक्त ज्ञान (योग्यताविस्तरः): चार वेद (ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद), ऋग्वेद में १०,५५२ मन्त्र, १० मण्डल, १,०२८ सूक्त — इनका परिचय भी इस पाठ में दिया गया है।
Frequently asked questions
01sangacchadhvam samvadadhvam paath ka arth kya hai?
इस पाठ का अर्थ है — 'मिलकर चलो, मिलकर बोलो।' यह ऋग्वेद के संज्ञान-सूक्त (१०.१९१) के मन्त्रों पर आधारित है जो एकता, परस्पर सहयोग और सामरस्य का संदेश देते हैं।
02संगच्छध्वं संवदध्वम् पाठ किस वेद से लिया गया है?
यह पाठ ऋग्वेद के दशम मण्डल के १९१वें सूक्त (१०.१९१) से लिया गया है, जो 'संज्ञान-सूक्त' और 'संघटन-सूक्त' नाम से प्रसिद्ध है।
03संगच्छध्वम् और संवदध्वम् का अर्थ क्या है?
संगच्छध्वम् का अर्थ है 'मिलकर चलो' और संवदध्वम् का अर्थ है 'सहमतिपूर्वक / एकस्वर से बोलो।' पाठ में ये दोनों शब्द एकता और समन्वय के प्रतीक हैं।
04पाठ की केंद्रीय शिक्षा (moral) क्या है?
पाठ की केंद्रीय शिक्षा है कि मानव को वैमनस्य त्यागकर ऐक्यभाव से जीना चाहिए — परिवार, गण, समाज, राष्ट्र और विश्व सभी स्तरों पर मिलकर कार्य करना, एकस्वर से बोलना और मनों में सामरस्य रखना ही सच्ची उन्नति का मार्ग है।
05पाठ में कितने वेद-मन्त्र हैं और वे क्या सिखाते हैं?
पाठ में ऋग्वेद के तीन मन्त्र हैं। पहला — मिलकर चलने और मनों के सामरस्य की शिक्षा; दूसरा — समान संकल्प, समान चिन्तन और एकीभूत बुद्धि की शिक्षा; तीसरा — समान हृदय, समान संकल्प और सुसंघटित एकता की शिक्षा।
06आकूतिः का अर्थ क्या है?
आकूतिः का अर्थ है 'संकल्प' (Resolution)। तीसरे मन्त्र में कहा गया है कि सभी मनुष्यों का संकल्प एक समान होना चाहिए।
07अभ्युदयम् का हिंदी अर्थ क्या है?
अभ्युदयम् का अर्थ है 'लौकिक उन्नति' या 'अभिवृद्धि'। पाठ में कहा गया है कि संभूय (मिलकर) अभ्युदयं साधयत — मिलकर उन्नति प्राप्त करो।
08लोट्-लकार के कितने और कौन-कौन से प्रयोग हैं?
पाठ के अनुसार लोट्-लकार के तीन प्रयोग हैं — (१) आज्ञार्थे (आदेश देने के लिए, जैसे उत्तिष्ठत), (२) आमन्त्रणार्थे (निमन्त्रण देने के लिए, जैसे आगच्छन्तु), और (३) आशीर्वादार्थे (आशीर्वाद देने के लिए, जैसे आयुष्मान् भव)।
09गम् धातु में सम् उपसर्ग लगने पर क्या बदलता है?
गम्-धातु सामान्यतः परस्मैपदी होती है, परन्तु सम् उपसर्ग लगने पर वह आत्मनेपदी हो जाती है। जैसे: गम् + ति = गच्छति (परस्मैपद), किन्तु सम् + गच्छति = सङ्गच्छते (आत्मनेपद)।
10संज्ञान-सूक्त ऋग्वेद के किस मण्डल और सूक्त में है?
संज्ञान-सूक्त ऋग्वेद के दशम (दसवें) मण्डल का एकशताधिक-एकनवतितमं (१९१वाँ) सूक्त है। इसे 'संघटन-सूक्त' भी कहते हैं।
11पाठ का प्रवेश-प्रसंग किस खेल से जुड़ा है?
पाठ की शुरुआत विद्यालय के क्रीडोत्सव में पादकन्दुक-क्रीडा (फुटबॉल) की विजय के संवाद से होती है। छात्रों की टीम परस्पर सामञ्जस्य के कारण जीती, जबकि विपक्षी दल में परस्पर मनोभेद और द्वेषभाव था।
12अस्मद् और युष्मद् के वैकल्पिक रूप कौन-सी विभक्तियों में होते हैं?
पाठ के अनुसार अस्मद् और युष्मद् शब्दों के द्वितीया, चतुर्थी और षष्ठी विभक्ति में वैकल्पिक रूप होते हैं। जैसे — चतुर्थी में 'मह्यम्' का विकल्प 'मे' और 'तुभ्यम्' का विकल्प 'ते' होता है।
13क्या यह अध्याय की PDF मुफ़्त है?
हाँ, बिना साइन-अप के मुफ़्त डाउनलोड करें।
More chapters in Deepakam (दीपकम्)
Read Chapter 1 of Deepakam (दीपकम्), the Class 8 Sanskrit NCERT textbook (2026-27 edition), online for free: the complete chapter as published by NCERT with every diagram, solved example and exercise, with a chapter summary, question answers and revision notes. Open the NCERT PDF above, or browse all NCERT Class 8 textbooks.
Read offline with notes, solutions & mock tests
CBSE Prepmaster — free on iOS & Android