Summary
Chapter 4 of the Class 8 Sanskrit NCERT textbook (Deepakam), 'Pranamyo Deshabhakto Ayam Gopabandhurmahamanah' (प्रणम्यो देशभक्तोऽयं गोपबन्धुर्महामनाः), ओडिशा के उत्कलमणि गोपबन्धु दास की जीवनी है। यह उनके निःस्वार्थ जीवन, देशभक्ति और बाढ़पीड़ितों की सेवा का प्रेरणादायक वर्णन करता है।
- निःस्वार्थ सेवा का आदर्श — गोपबन्धु ने मरणासन्न पुत्र को छोड़कर बाढ़पीड़ितों की सेवा की और भोजन करते समय भूखे भिक्षुक को अपना भोजन दे दिया। पाठ का केंद्रीय भाव है — दूसरों की पीड़ा देखकर तुरन्त सेवा में जुट जाना।
- देशभक्त समाजसुधारक का जीवन — पञ्चमित्रों में से एक गोपबन्धु ने सत्यवादि-वनविद्यालय की स्थापना की, महात्मा गान्धी की प्रेरणा से स्वतन्त्रता-आन्दोलन में भाग लिया और कारावास भी सहा। उन्हें 'उत्कलमणि' की उपाधि से सम्मानित किया गया।
- साहित्य-रचना एवं व्याकरण — कारागार में उन्होंने 'बन्दीर आत्मकथा', 'कारा-कविता', 'धर्मपद' आदि प्रेरणादायी ओडिआ पुस्तकें लिखीं। पाठ पूर्वरूपसन्धि का नियम सिखाता है — ए/ओ के बाद 'अ' के स्थान पर अवग्रह 'ऽ' (देशभक्तोऽयम्)।
Key points & formulas
- 01विषय: यह पाठ ओडिशा के महान् स्वतन्त्रता-सेनानी और समाजसेवक उत्कलमणि गोपबन्धु दास की जीवनी पर आधारित संस्कृत कथा है, जो संवाद-शैली में प्रस्तुत है।
- 02केंद्रीय शिक्षा: दूसरों की पीड़ा देखकर तुरन्त सेवा करना — गोपबन्धु ने मरणासन्न पुत्र को छोड़कर बाढ़पीड़ितों की सेवा की और भूखे भिक्षुक को अपना भोजन दे दिया।
- 03प्रमुख व्यक्तित्व: गोपबन्धु दास — जन्म 09/10/1877, सुआण्डो ग्राम, पुरी, ओडिशा; पञ्चमित्रों में से एक; सत्यवादि-वनविद्यालय के संस्थापक; महात्मा गान्धी की प्रेरणा से स्वतन्त्रता-आन्दोलन में सहभागी; दो वर्ष कारावास; 17/06/1928 को निधन।
- 04प्रसिद्ध श्लोक: "स्वदेशभूमौ मम लीयतां तनुः, स्वदेशलोकास्तदनु प्रयान्तु नु।" — अर्थात् मेरा शरीर देश की मिट्टी में मिल जाए और देशवासी मेरे पथ पर चलें।
- 05व्याकरण — पूर्वरूपसन्धि: जब पद के अन्त में 'ए' या 'ओ' हो और अगले पद का प्रथम वर्ण 'अ' हो, तो उस 'अ' के स्थान पर अवग्रह 'ऽ' का प्रयोग होता है। जैसे: देशभक्तो + अयम् = देशभक्तोऽयम्।
- 06कठिन शब्द: अकुण्ठम् = आग्रहपूर्वक; बुभुक्षितः = भूखा; दयाविगलितहृदयः = दयापूर्ण हृदय वाला; उत्कलमणिः = उत्कल की मणि (एक उपाधि); महामनाः = उच्च विचार वाला।
- 07रचनाएँ: गोपबन्धु ने कारागार में 'बन्दीर आत्मकथा', 'कारा-कविता', 'धर्मपद', 'गो-माहात्म्य', 'नचिकेता-उपाख्यान' जैसी प्रेरणादायी पुस्तकें ओडिआ भाषा में लिखीं।
Frequently asked questions
01pranamyo deshabhakto ayam gopabandhurmahamanah पाठ किस बारे में है?
यह Class 8 Sanskrit Deepakam का चौथा पाठ है। इसमें ओडिशा के महान् स्वतन्त्रता-सेनानी और समाजसेवक उत्कलमणि गोपबन्धु दास के जीवन, उनकी करुणा और देशभक्ति का संस्कृत में वर्णन किया गया है।
02गोपबन्धु दास कौन थे?
गोपबन्धु दास ओडिशा के महान् समाजसेवक, शिक्षाप्रेमी और स्वतन्त्रता-सेनानी थे। वे सत्यवादि-वनविद्यालय के संस्थापक, 'समाज' दैनिक पत्रिका के प्रतिष्ठाता और पञ्चमित्रों में से एक थे। वैज्ञानिक प्रफुल्लचन्द्र राय ने उन्हें 'उत्कलमणि' उपाधि से सम्मानित किया।
03गोपबन्धु का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
उनका जन्म 09/10/1877 को ओडिशा राज्य के पुरी जनपद के साक्षीगोपाल के समीप सुआण्डो ग्राम में हुआ था।
04'उत्कलमणि' उपाधि किसने और क्यों दी?
वैज्ञानिक आचार्य प्रफुल्लचन्द्र राय ने 1924 में गोपबन्धु दास के असीम त्याग और समाजसेवा को देखकर उन्हें 'उत्कलमणि' — अर्थात् उत्कल (ओडिशा) की मणि — उपाधि से सम्मानित किया।
05गोपबन्धु ने भिक्षुक को भोजन क्यों दिया?
जब गोपबन्धु आचार्य हरिहरदास के यहाँ भोजन कर रहे थे, तभी बाहर से एक करुण आवाज़ आई जिसमें कोई तीन दिन से भूखा होने की बात कह रहा था। दयाविगलितहृदय गोपबन्धु अश्रुपूर्णनयन हो गए और अपना परोसा भोजन उठाकर बाहर जाकर उस भिक्षुक को खिला दिया।
06सत्यवादि-वनविद्यालय क्या था?
सत्यवादि-वनविद्यालय भारत का प्रथम मुक्त विद्यालय था जिसकी स्थापना 12 अगस्त 1909 को साक्षीगोपाल में हुई। यहाँ गोपबन्धु दास सहित कई देशभक्तों ने मिलकर छात्रों को निःशुल्क शिक्षा दी।
07गोपबन्धु ने कारावास में कौन-कौन सी रचनाएँ लिखीं?
कारागार में रहते हुए गोपबन्धु ने ओडिआ भाषा में 'बन्दीर आत्मकथा', 'कारा-कविता', 'धर्मपद', 'गो-माहात्म्य' और 'नचिकेता-उपाख्यान' जैसी बहुप्रेरणादायी पुस्तकें लिखीं।
08'समाज' दिनपत्रिका के संस्थापक कौन थे?
गोपबन्धु दास। इस दैनिक समाचारपत्र का प्रकाशन 1919 में प्रारम्भ हुआ और शताधिक वर्षों से आज भी यह प्रतिदिन प्रकाशित होती है।
09पूर्वरूपसन्धि किसे कहते हैं?
जब किसी पद के अन्त में 'ए' अथवा 'ओ' हो और अगले पद का प्रथम वर्ण 'अ' हो, तो उस 'अ' के स्थान पर अवग्रह 'ऽ' का प्रयोग होता है — इसे पूर्वरूपसन्धि कहते हैं। उदाहरण: देशभक्तो + अयम् = देशभक्तोऽयम्; सर्वे + अपि = सर्वेऽपि।
10गोपबन्धु किसकी प्रेरणा से स्वतन्त्रता-आन्दोलन में सम्मिलित हुए?
महात्मा गान्धी की प्रेरणा से गोपबन्धु दास भारतीय स्वतन्त्रता-आन्दोलन में सम्मिलित हुए। इसके कारण उन्हें दो वर्ष का कारावास भी हुआ।
11Gopabandhur Mahmanah ka pura shlok kya hai?
पाठ का शीर्षक श्लोक है: "उत्कलमणिरित्याख्यः प्रसिद्धो लोकसेवकः। प्रणम्यो देशभक्तोऽयं गोपबन्धुर्महामनाः॥" अर्थात् — उत्कलमणि नाम से प्रसिद्ध यह महान् लोकसेवक देशभक्त गोपबन्धु महामना (उच्च विचार वाले) हैं, ये प्रणम्य (नमस्कार योग्य) हैं।
12'बुभुक्षितः' और 'अकुण्ठम्' का अर्थ क्या है?
'बुभुक्षितः' का अर्थ है 'भूखा' (क्षुधातुरः)। 'अकुण्ठम्' का अर्थ है 'आग्रहपूर्वक' अथवा 'उत्साह से'।
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