Summary
Chapter 15 of the Class 8 Sanskrit NCERT textbook (Deepakam), 'Parishishtam 2: Shabdarupani' (परिशिष्टम् २: शब्दरूपाणि), शब्दरूप-संदर्भ परिशिष्ट है। यह विभिन्न प्रकार के शब्दों के रूप सातों विभक्तियों, तीनों वचनों और तीनों लिङ्गों में प्रस्तुत करता है।
- विशेष संज्ञा-शब्दरूप — इकारान्त नपुंसक (दधि, वारि), उकारान्त नपुंसक (मधु) तथा अनियमित पुंलिङ्ग शब्द — मरुत् (तकारान्त), राजन्/आत्मन् (नकारान्त), विद्वस् (सकारान्त) — के रूप दिए गए हैं, जिनमें विशेष आन्तरिक परिवर्तन होते हैं।
- कृदन्त एवं सर्वनाम रूप — शतृ-प्रत्ययान्त गच्छत्/गच्छन्ती के विस्तृत रूप तथा सर्वनाम — भवत्/भवती (आदरणीय 'आप'), यद् (जो), इदम् (यह), कीदृश (कैसा) — के तीनों लिङ्गों में विभक्ति-रूप प्रस्तुत हैं।
- संख्यावाचि शब्दरूप — संख्यावाचक शब्द — एक (नित्यैकवचनान्त), द्वि (नित्यद्विवचनान्त), त्रि और चतुर् (नित्यबहुवचनान्त) — के विशेष रूप तीनों लिङ्गों में दिए गए हैं। प्रत्येक तालिका में प्रथमा से सप्तमी तथा सम्बोधन-रूप सम्मिलित हैं।
Key points & formulas
- 01इकारान्त नपुंसकलिङ्ग शब्द — दधि (दही) और वारि (जल) के रूप सातों विभक्तियों में तीनों वचनों सहित दिए गए हैं; प्रथमा-द्वितीया एकवचन में मूलरूप यथावत् रहता है।
- 02उकारान्त नपुंसकलिङ्ग शब्द मधु (शहद) के रूप दिए गए हैं, जिनमें आंतरिक परिवर्तन के साथ विभक्तियाँ बनती हैं।
- 03अनियमित पुंलिङ्ग शब्द — मरुत् (वायु, तकारान्त), राजन् (राजा, नकारान्त), आत्मन् (आत्मा, नकारान्त) और विद्वस् (विद्वान्, सकारान्त) — इनके रूपों में विशेष आन्तरिक परिवर्तन होते हैं जो इस तालिका से स्पष्ट होते हैं।
- 04शतृ-प्रत्ययान्त कृदन्त शब्द — गच्छत् (जाता हुआ, पुंलिङ्ग) और गच्छन्ती (जाती हुई, स्त्रीलिङ्ग) के विस्तृत रूप दिए गए हैं।
- 05सर्वनाम-शब्दरूप — भवत्/भवती (आदरणीय 'आप'), यद् (जो — तीनों लिङ्ग) और इदम् (यह — तीनों लिङ्ग) के सभी विभक्ति-रूप प्रस्तुत हैं; कीदृश/कीदृशी ('कैसा') के भी तीनों लिङ्गों के रूप दिए गए हैं।
- 06संख्यावाचि-शब्दरूप — एक (नित्यैकवचनान्त), द्वि (नित्यद्विवचनान्त), त्रि और चतुर् (नित्यबहुवचनान्त) — तीनों लिङ्गों में इनके विशेष रूप दिए गए हैं।
- 07प्रत्येक तालिका में प्रथमा से सप्तमी तक सभी विभक्तियाँ और जहाँ लागू हो, सम्बोधनम् के रूप भी सम्मिलित हैं।
Frequently asked questions
01परिशिष्टम् २ शब्दरूपाणि में कौन-कौन से शब्दों के रूप दिए गए हैं?
इस परिशिष्ट में दधि, वारि, मधु, मरुत्, राजन्, आत्मन्, विद्वस्, गच्छत्, गच्छन्ती (सामान्य शब्दरूप); भवत्, भवती, यद्, इदम्, कीदृश (सर्वनाम-शब्दरूप); तथा एक, द्वि, त्रि और चतुर् (संख्यावाचि-शब्दरूप) दिए गए हैं।
02parishishtam 2 shabdarupani mein kitne prakar ke shabdrup hain?
इस परिशिष्ट में तीन प्रमुख प्रकार की तालिकाएँ हैं — (१) सामान्य शब्दरूप, (२) सर्वनाम-शब्दरूप, और (३) संख्यावाचि-शब्दरूप। इनमें कुल मिलाकर अठारह से अधिक शब्दों के तीनों लिङ्गों और तीनों वचनों के रूप दिए गए हैं।
03दधि और वारि के शब्दरूपों में क्या समानता है?
दोनों इकारान्त नपुंसकलिङ्ग शब्द हैं। इनकी प्रथमा और द्वितीया विभक्ति के एकवचन में शब्द का मूलरूप ही प्रयुक्त होता है (दधि / वारि)। तृतीया से आगे दोनों के अंग में परिवर्तन होता है।
04राजन् शब्द के प्रथमा एकवचन का रूप क्या है?
राजन् शब्द का प्रथमा एकवचन रूप 'राजा' है।
05आत्मन् और राजन् शब्दरूपों में क्या अंतर है?
दोनों नकारान्त पुंलिङ्ग शब्द हैं। आत्मन् का प्रथमा एकवचन 'आत्मा', बहुवचन 'आत्मानः' और सप्तमी एकवचन 'आत्मनि' है; राजन् का प्रथमा एकवचन 'राजा', बहुवचन 'राजानः' और सप्तमी एकवचन 'राज्ञि' या 'राजनि' है — दोनों के मध्यवर्ती रूपों में भेद है।
06शतृ-प्रत्यय क्या होता है और गच्छत् में यह कैसे प्रयुक्त हुआ है?
शतृ-प्रत्यय वर्तमानकालिक कृदन्त (present participle) बनाने के लिए धातु में जोड़ा जाता है। गम् धातु में शतृ जोड़ने से गच्छत् बना, जिसका अर्थ है 'जाता हुआ'। इसके पुंलिङ्ग और स्त्रीलिङ्ग (गच्छन्ती) दोनों के रूप इस परिशिष्ट में दिए गए हैं।
07भवत् और भवती में क्या अंतर है?
भवत् पुंलिङ्ग सर्वनाम है जिसका प्रयोग पुरुष के लिए आदरणीय 'आप' के अर्थ में होता है; भवती स्त्रीलिङ्ग सर्वनाम है जिसका प्रयोग महिला के लिए आदरणीय 'आप' के अर्थ में होता है।
08यद् सर्वनाम के तीनों लिङ्गों के प्रथमा एकवचन रूप क्या हैं?
यद् सर्वनाम के प्रथमा एकवचन रूप इस प्रकार हैं — पुंलिङ्ग: यः, स्त्रीलिङ्ग: या, नपुंसकलिङ्ग: यत्।
09इदम् सर्वनाम का अर्थ क्या है और इसके पुंलिङ्ग के प्रथमा एकवचन का रूप क्या है?
इदम् का अर्थ है 'यह' (this)। इसके पुंलिङ्ग का प्रथमा एकवचन रूप 'अयम्' है; स्त्रीलिङ्ग का 'इयम्' और नपुंसकलिङ्ग का 'इदम्' है।
10एक, द्वि, त्रि और चतुर् के संख्यावाचि रूप क्यों विशेष माने जाते हैं?
ये शब्द वचन की दृष्टि से विशेष हैं — एक केवल एकवचन (नित्यैकवचनान्त), द्वि केवल द्विवचन (नित्यद्विवचनान्त), तथा त्रि और चतुर् केवल बहुवचन (नित्यबहुवचनान्त) में प्रयुक्त होते हैं। तीनों लिङ्गों में इनके रूप अलग-अलग होते हैं।
11विद्वस् शब्द का अर्थ क्या है और इसका प्रथमा एकवचन रूप क्या है?
विद्वस् का अर्थ है 'विद्वान्' (ज्ञानी व्यक्ति / learned person)। यह सकारान्त पुंलिङ्ग शब्द है और इसका प्रथमा एकवचन रूप 'विद्वान्' है।
12कीदृश शब्द का अर्थ क्या है और इसके कौन-से रूप इस परिशिष्ट में दिए गए हैं?
कीदृश का अर्थ है 'कैसा' (of what kind)। इस परिशिष्ट में इसके तीनों लिङ्गों के रूप दिए गए हैं — पुंलिङ्ग (कीदृशः आदि), स्त्रीलिङ्ग (कीदृशी आदि) और नपुंसकलिङ्ग (कीदृशम् आदि)।
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