Class 8 Sanskrit

Chapter 9 — कोऽरुक्? कोऽरुक्? कोऽरुक्?

Open PDFReads in your browser
Overview

Summary

Chapter 9 of the Class 8 Sanskrit NCERT textbook (Deepakam), 'Ko-Aruk? Ko-Aruk? Ko-Aruk?' (कोऽरुक्? कोऽरुक्? कोऽरुक्?), वह कथा है जिसमें भगवान् धन्वन्तरि शुकरूप धारण कर श्रेष्ठ वैद्य की खोज करते हैं। इसमें वैद्य वाग्भट स्वस्थ जीवन के तीन सूत्र — हितभुक्, मितभुक्, ऋतुभुक् — प्रस्तुत करते हैं।

  • स्वास्थ्य के तीन सूत्रपाठ का केंद्रीय संदेश है — नीरोग रहने के लिए हितभुक् (हितकारक भोजन), मितभुक् (सीमित मात्रा) और ऋतुभुक् (ऋतु के अनुसार उपयुक्त आहार)। यही उत्तर वाग्भट को श्रेष्ठ वैद्य सिद्ध करता है।
  • धन्वन्तरि की परीक्षा-कथाधन्वन्तरि शुकरूप में 'कोऽरुक्?' अर्थात् 'कौन नीरोग है?' पूछते हुए घूमते हैं। अनेक वैद्य ध्यान नहीं देते, केवल वाग्भट अर्थ समझते हैं। प्रसन्न होकर धन्वन्तरि उन्हें अष्टाङ्ग आयुर्वेद-तन्त्र रचने का आदेश देते हैं।
  • आहार-नियम एवं व्याकरणमहर्षि चरक के श्लोकों द्वारा आहार के नियम और 'सर्वे भवन्तु सुखिनः' की सार्वभौमिक प्रार्थना दी गई है। पाठ विशेषण-विशेष्य का नियम सिखाता है — विशेषण में विशेष्य के समान लिंग, वचन और विभक्ति होती है।
Essentials

Key points & formulas

  1. 01कथावस्तु: भगवान् धन्वन्तरि मनोहर शुकरूप धारण करके प्रतिग्राम भ्रमण करते हैं और 'कोऽरुक्?' पूछकर श्रेष्ठ वैद्य की परीक्षा लेते हैं।
  2. 02केंद्रीय शिक्षा: स्वस्थ रहने के तीन सूत्र — हितभुक् (हितकारक भोजन करने वाला), मितभुक् (सीमित मात्रा में खाने वाला), ऋतुभुक् (ऋतु के अनुसार उपयुक्त भोजन करने वाला)।
  3. 03प्रमुख पात्र: भगवान् धन्वन्तरि (शुकरूप में), वैद्य वाग्भट और उनके जिज्ञासु छात्र।
  4. 04व्याकरण: विशेषण और विशेष्य का परिचय; नियम — विशेषण में विशेष्य का लिंग, वचन और विभक्ति समान होती है।
  5. 05कठिन शब्द: अरुक् = नीरोग/स्वस्थ; हितभुक् = हितकारक भोजन करने वाला; झटिति = शीघ्र।
  6. 06पाठ में पाँच श्लोक हैं — महर्षि चरक के तीन आहार-विषयक श्लोक, एक दैनिक दिनचर्या का श्लोक और एक सार्वभौमिक प्रार्थना: 'सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः।'
  7. 07धन्वन्तरि ने वाग्भट को आयुर्वेद-अष्टाङ्गविचार-सारभूतं तन्त्र विरचित करने का आदेश दिया, जो वाग्भट के उत्कृष्ट ज्ञान की पहचान है।
Questions

Frequently asked questions

01

ko-aruk ko-aruk ko-aruk paath ka arth kya hai?

इस पाठ में 'कोऽरुक्' का अर्थ है 'कः + अरुक्' = कौन नीरोग/स्वस्थ है? शुकरूपी भगवान् धन्वन्तरि यह प्रश्न पूछकर श्रेष्ठ वैद्य की परीक्षा ले रहे थे।

02

भगवान् धन्वन्तरि ने शुकरूप क्यों धारण किया?

भारतवर्ष में श्रेष्ठ वैद्य की खोज के लिए वे गुप्त रूप से भ्रमण करना चाहते थे, इसलिए उन्होंने मनोहर शुकरूप धारण किया और प्रतिग्राम वैद्यों के भवनों के पास जाकर 'कोऽरुक्?' का ध्वनि किया।

03

वाग्भट ने 'कोऽरुक्' का क्या उत्तर दिया?

वाग्भट ने तीन सूत्रों में उत्तर दिया: 'हितभुक्, मितभुक्, ऋतुभुक्' — अर्थात् जो व्यक्ति हितकारक, सीमित और ऋतु के अनुकूल भोजन करता है, वही सदा स्वस्थ रहता है।

04

हितभुक्, मितभुक्, ऋतुभुक् का अर्थ क्या है?

हितभुक् = जो स्वास्थ्य के लिए हितकारक पौष्टिक भोजन करता है; मितभुक् = जो उचित/सीमित मात्रा में भोजन करता है; ऋतुभुक् = जो ऋतु के अनुसार उपयुक्त भोजन करता है।

05

वाग्भट कौन थे और धन्वन्तरि ने उन्हें क्या आदेश दिया?

वाग्भट प्रख्यात आयुर्वेद वैद्य थे। धन्वन्तरि ने प्रसन्न होकर कहा — 'तुम्हारे उत्कृष्ट आयुर्वेदज्ञान से मैं अत्यन्त सन्तुष्ट हूँ, तुम आयुर्वेद-अष्टाङ्गविचार-सारभूतं तन्त्र अवश्य रचो।'

06

पाठ में चरक और उनके श्लोकों का क्या महत्त्व है?

वाग्भट ने अपने छात्रों को महर्षि चरक के तीन श्लोकों द्वारा हितभुक्, मितभुक् और ऋतुभुक् के विस्तृत अर्थ समझाए। चरकसंहिता आयुर्वेद का प्रमुख ग्रन्थ है जिसमें रोगचिकित्सा और स्वास्थ्यरक्षा दोनों के उपाय हैं।

07

पाठ में कौन-से व्याकरण नियम सिखाए गए हैं?

इस पाठ में विशेषण और विशेष्य का परिचय दिया गया है। नियम: विशेषण का लिंग, वचन और विभक्ति सदा विशेष्य के समान होते हैं। जैसे — 'मधुरां वाणीम्' में 'मधुराम्' (विशेषण) और 'वाणीम्' (विशेष्य) दोनों द्वितीया विभक्ति में हैं।

08

पाठ में कितनी ऋतुएँ बताई गई हैं?

पाठ में छः ऋतुओं का उल्लेख है: ग्रीष्म, वर्षा, शरद्, शिशिर, हेमन्त और वसन्त। ऋतुभुक् वह है जो इन ऋतुओं के अनुसार उपयुक्त भोजन करता है।

09

What does 'aruk' mean in Sanskrit?

'अरुक्' का अर्थ है — जो बीमार नहीं है, अर्थात् स्वस्थ/नीरोग। पाठ में इसे 'नीरोगिणः' और 'निरामयाः' के पर्याय के रूप में प्रयुक्त किया गया है।

10

'सर्वे भवन्तु सुखिनः' श्लोक का भाव क्या है?

इस प्रार्थना-श्लोक का भाव है: संसार में सभी सुखी हों, सभी नीरोग हों, सभी कल्याण देखें और कोई भी दुःख को प्राप्त न हो। पाठ के अनुसार नियमित हितकर भोजन से ही लोग रोगमुक्त हो सकते हैं।

11

दैनिक स्वास्थ्य दिनचर्या के बारे में पाठ क्या बताता है?

पाठ के चतुर्थ श्लोक में बताया गया है — प्रातः उठकर व्यायाम करना चाहिए, नित्य दन्तशोधन करना चाहिए, स्वच्छ जल से स्नान करना चाहिए और भूख लगने पर ही भोजन करना चाहिए।

12

क्या यह अध्याय की PDF मुफ़्त है?

हाँ, बिना साइन-अप के मुफ़्त डाउनलोड करें।

Keep learning

More chapters in Deepakam (दीपकम्)

Read Chapter 9 of Deepakam (दीपकम्), the Class 8 Sanskrit NCERT textbook (2026-27 edition), online for free: the complete chapter as published by NCERT with every diagram, solved example and exercise, with a chapter summary, question answers and revision notes. Open the NCERT PDF above, or browse all NCERT Class 8 textbooks.

Read offline with notes, solutions & mock tests

CBSE Prepmaster — free on iOS & Android

Get the App