Summary
Paath 10 — Class 5 Hindi NCERT textbook (Veena / वीणा), 'Teen Machhliyan' (तीन मछलियाँ) — download the PDF aur padhein saaraansh, shabdaarth, aur paath ke prashn-uttar. Yah kahaani Panchatantra par aadharit hai aur teen machhliyon ke madhyam se sujaan, tatkaalin buddhi, aur bhaagya-bhaavanaa ka antar spasht karti hai.
- सारांश — उत्तर भारत के एक सुंदर सरोवर में तीन मछलियाँ रहती थीं — अनागतविधाता, प्रत्युत्पन्नमति और यद्भविष्य। एक दिन दो मछुआरों ने सरोवर देख लिया और अगले दिन जाल लेकर आने का निश्चय किया। अनागतविधाता ने यह बात सब मछलियों को बताई और रात होने से पहले ही दूसरे सरोवर में चली गई। प्रत्युत्पन्नमति ने रुकना चुना क्योंकि वह मानती थी कि संकट आने पर तुरंत उपाय निकाल लेगी। यद्भविष्य ने सब कुछ भाग्य पर छोड़ दिया। सवेरे मछुआरे आए और जाल डाल दिया। प्रत्युत्पन्नमति ने चतुराई से मरी हुई मछली का नाटक किया और जान बचा ली, किंतु यद्भविष्य मछुआरों के जाल में फँसकर मारी गई।
- विषय / मूल भाव — यह कहानी तीन प्रकार की सोच का प्रतीकात्मक चित्रण करती है — पूर्वदृष्टि (अनागतविधाता), तात्कालिक सूझ-बूझ (प्रत्युत्पन्नमति) और भाग्यवाद (यद्भविष्य)। कहानी का मूल संदेश है कि केवल भाग्य पर निर्भर रहना विनाश का कारण बनता है, जबकि विवेक और बुद्धि से संकट का सामना किया जा सकता है।
- रचना का संदर्भ — लेखक एवं स्रोत — यह कहानी मालती देवी द्वारा लिखी गई है और पंचतंत्र पर आधारित है। पंचतंत्र भारत का प्राचीन नीति-साहित्य का ग्रंथ है जिसे लगभग 2500 से 3000 वर्ष पूर्व आचार्य विष्णु शर्मा ने राजकुमारों को जीवन-मूल्य सिखाने के उद्देश्य से रचा था। पंचतंत्र की नीति-कथाएँ पशु-पक्षियों के माध्यम से नैतिक शिक्षा देती हैं और ईसप की दंतकथाओं को भी प्रेरित करती मानी जाती हैं।
Key points & formulas
- 01लेखिका परिचय: इस कहानी को मालती देवी ने लिखा है। यह पंचतंत्र पर आधारित है, जिसके मूल रचयिता आचार्य विष्णु शर्मा माने जाते हैं।
- 02तीन मछलियों के नाम उनके स्वभाव का परिचय देते हैं — अनागतविधाता (भविष्य की समस्याओं का पहले से हल निकालने वाली), प्रत्युत्पन्नमति (संकट के क्षण में तुरंत उपाय सोचने वाली), यद्भविष्य (सब कुछ भाग्य पर छोड़ देने वाली)।
- 03मूल भाव: सतर्कता, पूर्वदृष्टि और तत्काल बुद्धि से संकट टाला जा सकता है; केवल भाग्यवाद से नहीं।
- 04काव्य-सौंदर्य / कथा-शिल्प: कहानी में नाम-प्रतीक (symbolic naming) का कुशल प्रयोग है — प्रत्येक मछली का नाम ही उसके व्यक्तित्व की परिभाषा है। संवाद-शैली जीवंत है और घटनाक्रम तेज़ गति से आगे बढ़ता है।
- 05कठिन शब्दार्थ — सरोवर: तालाब/झील; रमणीय: सुंदर, मनोहर; तीक्ष्ण: तेज़, पैनी; विनोद: मनोरंजन, हँसी-खेल।
- 06प्रत्युत्पन्नमति ने जाल में फँसने पर शरीर सिकोड़कर और आँखें बंद करके मृत होने का नाटक किया — इस चतुराई ने उसकी जान बचाई।
- 07पंचतंत्र का संदेश: यह ग्रंथ न केवल बच्चों के लिए बल्कि वयस्कों के लिए भी जीवन के विभिन्न पहलुओं का बोध कराता है और आज भी प्रासंगिक है।
Frequently asked questions
01'तीन मछलियाँ' पाठ किस पुस्तक पर आधारित है और इसे किसने लिखा है?
यह पाठ मालती देवी द्वारा लिखा गया है और पंचतंत्र पर आधारित है। पंचतंत्र के लेखक प्रसिद्ध आचार्य विष्णु शर्मा माने जाते हैं। यह ग्रंथ लगभग 2500 से 3000 वर्ष पूर्व भारत में रचा गया था।
02पंचतंत्र क्या है और इसका क्या उद्देश्य था?
पंचतंत्र नीति साहित्य का एक विशिष्ट ग्रंथ है। इसका निर्माण एक शिक्षण सामग्री के रूप में किया गया था जिसका उद्देश्य बच्चों को रोचक कथाओं के माध्यम से जीवन-मूल्य सिखाना था। इसमें नैतिक शिक्षा देने के उद्देश्य से लिखी कहानियाँ हैं जो विभिन्न पशु-पक्षियों के माध्यम से प्रस्तुत की गई हैं।
03'तीन मछलियाँ' पाठ का सारांश क्या है?
उत्तर भारत के एक सुंदर सरोवर में तीन मछलियाँ रहती थीं — अनागतविधाता, प्रत्युत्पन्नमति और यद्भविष्य। एक दिन दो मछुआरों ने अगले दिन जाल डालकर सब मछलियाँ पकड़ने की योजना बनाई। यह सुनकर अनागतविधाता ने सरोवर छोड़कर दूसरे सरोवर में जाने का सुझाव दिया और बहुत-सी मछलियों के साथ चली गई। यद्भविष्य भाग्य के भरोसे वहीं रही और मछुआरों के जाल में फँसकर अपनी जान गँवा बैठी। प्रत्युत्पन्नमति ने जाल में फँसने पर खुद को मरी हुई दिखाकर अपनी जान बचा ली।
04तीनों मछलियों के नाम क्या थे और उनके स्वभाव कैसे थे?
पहली मछली अनागतविधाता थी — वह बुद्धिमती थी और भविष्य की संभावित समस्याओं का हल पहले से निकाल लेती थी। दूसरी मछली प्रत्युत्पन्नमति थी जिसकी बुद्धि तीक्ष्ण और तीव्र थी और वह समय पड़ने पर क्षण भर में किसी भी उलझन का हल निकाल लेती थी। तीसरी मछली यद्भविष्य थी जो आलस्यमयी थी और सब कुछ भाग्य के भरोसे छोड़ देती थी।
05मछुआरों ने सरोवर पर क्या योजना बनाई?
एक दिन शाम को दो मछुआरे उस सरोवर के किनारे से निकले। उन्होंने यह सरोवर पहले कभी नहीं देखा था। पानी में बड़ी-बड़ी मछलियाँ देखकर पहले मछुआरे ने कहा कि कल सवेरे वे बड़ा जाल लेकर आएँगे और सब मछलियों को पकड़ेंगे। दूसरे मछुआरे ने भी सहर्ष सम्मति दी और दोनों उत्साह से घर की ओर चल दिए।
06खतरे का पता चलने पर अनागतविधाता ने क्या किया?
मछुआरों की बातें सुनकर अनागतविधाता ने तुरंत सरोवर की सभी मछलियों को बुलाकर एक सभा की। उसने सबको बताया कि मछुआरे अगले दिन सवेरे जाल डालकर सब मछलियों को पकड़ने की योजना बना रहे हैं। उसने सुझाव दिया कि सवेरा होने से पहले सब सरोवर छोड़कर पास के दूसरे सरोवर में चले जाएँ। वह खुद बहुत-सी मछलियों के साथ दूसरे सरोवर में चली गई और इस तरह अपनी जान बचाई।
07प्रत्युत्पन्नमति ने मछुआरों के जाल से अपनी जान कैसे बचाई?
प्रत्युत्पन्नमति जाल में फँस गई थी। जाल में फँसने के बाद उसने बड़ी तीव्रता से उपाय सोचा। मछुआरों की बातचीत से वह समझ गई कि उन्हें स्वस्थ और जीवित मछलियाँ ही चाहिए। उसी क्षण उसने अपना शरीर सिकोड़ लिया और आँखें बंद करके निर्जीव-सी बनकर पड़ गई। मछुआरों ने उसे मरी हुई समझकर जाल से निकालकर सरोवर में फेंक दिया और इस तरह उसकी जान बच गई।
08यद्भविष्य की जान क्यों नहीं बच सकी?
यद्भविष्य का मानना था कि 'जो होना होगा सो तो होगा ही' इसलिए सब कुछ भाग्य के भरोसे छोड़ देना चाहिए। जब अनागतविधाता ने सरोवर छोड़कर जाने का सुझाव दिया, तब यद्भविष्य ने कहा कि वह अपने पुराने निवास स्थान को छोड़कर नहीं जाएगी। वह आलस्यमयी थी और श्रम तथा चिंतन से बचती थी। इसीलिए वह जाल में फँस गई और मछुआरे उसे लेकर चले गए।
09इस पाठ का मुख्य संदेश क्या है?
इस पाठ का मुख्य संदेश यह है कि सब कुछ भाग्य के भरोसे नहीं छोड़ना चाहिए। जो पहले से सोच-समझकर कदम उठाता है (अनागतविधाता) या मुसीबत के समय तुरंत बुद्धि से काम लेता है (प्रत्युत्पन्नमति), वह बच जाता है। जो आलस्य करता है और संकट की उपेक्षा करता है (यद्भविष्य), वह नष्ट हो जाता है। यत्न और सूझ-बूझ ही जीवन में सफलता दिलाते हैं।
10इस पाठ में 'सरोवर' और 'गाढ़ी मित्रता' का क्या अर्थ है?
'सरोवर' का अर्थ है बड़ा तालाब या झील। कहानी में तीनों मछलियाँ उत्तर भारत के एक सुंदर सरोवर में रहती थीं। 'गाढ़ी मित्रता' का अर्थ है घनिष्ठ या गहरी दोस्ती। पाठ में बताया गया है कि तीनों मछलियों में गाढ़ी मित्रता थी और वे सरोवर की अन्य मछलियों के साथ मिल-जुलकर विनोद और सैर करती रहती थीं।
11अनागतविधाता और प्रत्युत्पन्नमति की बुद्धि में क्या अंतर था?
अनागतविधाता भविष्य की संभावित समस्याओं का हल पहले से ही निकालकर रखती थी अर्थात वह पहले से योजना बनाती थी। प्रत्युत्पन्नमति की बुद्धि इतनी तीक्ष्ण और तीव्र थी कि वह पहले से समाधान करने की आवश्यकता नहीं समझती थी — वह समय पड़ने पर किसी भी उलझन का हल क्षण भर में निकाल लेती थी। दोनों बुद्धिमान थीं, पर अनागतविधाता पहले से सोचती थी और प्रत्युत्पन्नमति तुरंत समय पर।
12'तीन मछलियाँ' पाठ वीणा पुस्तक के किस पाठ में है और यह किस कक्षा के लिए है?
'तीन मछलियाँ' कक्षा 5 की हिंदी पाठ्यपुस्तक वीणा (Veena) का पाठ 10 है। यह पाठ NCERT द्वारा प्रकाशित है और 2026-27 के संस्करण में शामिल है। यह कहानी पंचतंत्र पर आधारित है तथा मालती देवी द्वारा लिखी गई है।
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