Summary
Path 2 — Class 5 Hindi NCERT textbook (Veena / वीणा), 'Nyay Ki Kursi' (न्याय की कुर्सी) — download the PDF aur padhein yah kahani jo sikhati hai ki sachcha nyay sirf nirmal man se hi ho sakta hai, aur Raja Vikramaditya ke jaadu-singhasan ki pariksha mein ek chhota bachcha raja se bhi agey nikalta hai.
- सारांश — उज्जैन के बाहर एक मैदान में लड़कों का एक झुंड खेलते हुए एक चिकने पत्थर पर बैठकर न्याय का खेल खेलने लगता है। एक लड़के की न्याय-बुद्धि इतनी तीव्र होती है कि असली किसान भी अपने झगड़े लेकर उसके पास आने लगते हैं। जब राजा को यह सुनाई देता है तो वह क्रोधित होकर वहाँ पहुँचता है और देखता है कि वह पत्थर वास्तव में राजा विक्रमादित्य का प्राचीन सिंहासन है। राजा उस पर बैठने का प्रयास करता है, पर सिंहासन की चारों देवदूत-मूर्तियाँ एक-एक करके उसे रोकती हैं — झूठ, चोरी और दूसरों को चोट पहुँचाने के उसके कर्मों का स्मरण कराकर। अंत में चौथी मूर्ति सिंहासन समेत आकाश में उड़ जाती है क्योंकि राजा के मन में कलुष था, जबकि बालकों के मन निर्मल थे।
- मुख्य विषय (Theme) — इस कहानी का केंद्रीय विषय है — सच्चे न्याय के लिए निर्मल मन, ईमानदारी और निर्दोष चरित्र अनिवार्य हैं। पद, धन और बल से न्याय का अधिकार नहीं मिलता; वह केवल भोले और कलुषरहित हृदय को ही मिलता है। बालकों की निर्दोषता राजा की शक्ति से बड़ी सिद्ध होती है।
- रचना का संदर्भ — लेखिका एवं स्रोत — यह कहानी लीलावती भागवत द्वारा लिखित है और राष्ट्रीय पुस्तक न्यास से प्रकाशित 'स्वर्ग की सैर तथा अन्य कहानियाँ' पुस्तक से साभार ली गई है। कहानी का आधार सदियों पुरानी भारतीय परंपरागत पुस्तक 'सिंहासन बत्तीसी' है, जिसमें राजा भोज को राजा विक्रमादित्य का सिंहासन मिलता है और उसकी बत्तीस मूर्तियाँ विक्रमादित्य की न्याय-कथाएँ सुनाती हैं।
- पात्र और घटनाक्रम — मुख्य पात्र एक बुद्धिमान बालक है जो खेल-खेल में न्याय करता है और नगर के लोगों का विश्वास जीत लेता है। राजा अहंकार में आकर उस सिंहासन पर बैठना चाहता है। चार देवदूत-मूर्तियाँ क्रमशः चोरी, झूठ, किसी को कष्ट देने और मन के कलुष — चार नैतिक परीक्षाएँ लेती हैं। राजा हर बार असफल होता है और सिंहासन अंत में उड़ जाता है।
Key points & formulas
- 01लेखिका: लीलावती भागवत; स्रोत — राष्ट्रीय पुस्तक न्यास प्रकाशित 'स्वर्ग की सैर तथा अन्य कहानियाँ'; मूल आधार: सिंहासन बत्तीसी (भारत की प्राचीन कथा-परंपरा)।
- 02कहानी की पृष्ठभूमि उज्जैन की ऐतिहासिक नगरी है; सिंहासन राजा विक्रमादित्य का है जो अपने न्याय और विवेक के लिए प्रसिद्ध थे।
- 03मुख्य भाव: सच्चे न्याय का अधिकार केवल निर्मल, कलुषरहित मन को है — पद या बल से नहीं मिलता; बालकों की निर्दोषता राजा के अहंकार पर विजय पाती है।
- 04कहानी-कौशल: घटना-क्रम में रहस्य और रोमांच (पत्थर का सिंहासन निकलना, मूर्तियों का बोलना और उड़ना) बच्चों की जिज्ञासा बनाए रखता है।
- 05कठिन शब्दार्थ — दैवी शक्ति: ईश्वर से मिली अलौकिक शक्ति; न्यायकर्ता: न्याय करने वाला; कलुष: मन का मैल या बुरे कर्मों का बोझ; प्रायश्चित: पाप या गलती के लिए पश्चाताप और सुधार; स्तंभित: अत्यधिक आश्चर्यचकित।
- 06विराम चिह्नों का महत्व इसी पाठ के माध्यम से सिखाया गया है — उद्धरण चिह्न, विस्मयादिबोधक चिह्न और पूर्ण विराम वाक्य के भाव को स्पष्ट करते हैं।
- 07पाठ का विस्तार 'सिंहासन बत्तीसी', पंचतंत्र, हितोपदेश और जातक कथाओं से जोड़ता है — भारतीय नैतिक कथा-परंपरा का परिचय कराता है।
Frequently asked questions
01'न्याय की कुर्सी' पाठ किसने लिखा है और यह किस पुस्तक से लिया गया है?
यह कहानी लीलावती भागवत ने लिखी है। यह राष्ट्रीय पुस्तक न्यास से प्रकाशित 'स्वर्ग की सैर तथा अन्य कहानियाँ' पुस्तक से ली गई है। यह पाठ कक्षा 5 की हिंदी पाठ्यपुस्तक वीणा में पाठ 2 के रूप में संकलित है।
02इस कहानी का संक्षिप्त सारांश क्या है?
उज्जैन के बाहर एक मैदान में बच्चे खेल-खेल में न्याय करने लगे। एक लड़का पत्थर की शिला पर राजा बनकर बैठता और फरियाद सुनकर फैसले देता। उसकी न्याय-बुद्धि से असली झगड़े भी हल होने लगे। राजा को यह सुनकर क्रोध आया, लेकिन जब वह वहाँ पहुँचा तो खुद भी चकित रह गया। जमीन खोदने पर वह पत्थर असल में राजा विक्रमादित्य का सिंहासन निकला। राजा ने उस पर बैठने की कोशिश की लेकिन चार देवदूत मूर्तियाँ एक-एक करके उड़ गईं, क्योंकि राजा ने चोरी, झूठ और किसी को चोट पहुँचाने जैसे पाप किए थे। अंत में सिंहासन समेत चौथी मूर्ति भी आकाश में उड़ गई।
03कहानी का मुख्य संदेश (भाव) क्या है?
इस कहानी का मुख्य संदेश है कि सच्चा न्याय करने के लिए मन निर्मल और साफ होना चाहिए। जो लड़के भोले-भाले थे और जिनके मन में कलुष (पाप) नहीं था, वे सिंहासन पर बैठ सके। लेकिन राजा, जिसने चोरी, झूठ और दूसरों को चोट पहुँचाने जैसे काम किए थे, वह सिंहासन पर नहीं बैठ पाया। इससे यह सीख मिलती है कि पद और शक्ति नहीं, बल्कि ईमानदारी और निष्पक्षता ही न्याय की असली कसौटी है।
04कहानी में कौन-कौन से मुख्य पात्र हैं?
कहानी के मुख्य पात्र हैं: (1) एक बुद्धिमान लड़का जो शिला पर बैठकर न्याय करता था, (2) उज्जैन का राजा जो लड़के की प्रसिद्धि सुनकर क्रोधित होता है और सिंहासन पर बैठने की कोशिश करता है, (3) सिंहासन के चार पायों पर बनी चार देवदूत मूर्तियाँ जो राजा को सिंहासन पर बैठने से रोकती हैं, और (4) दो किसान जो जमीन के झगड़े के निपटारे के लिए लड़के के पास आते हैं।
05लड़कों का खेल कैसे शुरू हुआ था?
उज्जैन नगरी के बाहर एक मैदान में लड़कों का झुंड खेल रहा था। एक लड़का कूदता-भागता एक टीले पर चढ़ा और ठोकर खाकर गिर पड़ा। उसे एक बड़ा चिकना पत्थर दिखा। वह उठकर अपने मित्रों को उस शिला के पास ले गया और उस पर शान से बैठकर बोला कि यह उसका सिंहासन है, वह राजा है और बाकी सब दरबारी हैं। इस तरह न्याय का खेल शुरू हुआ जो धीरे-धीरे रोज का खेल बन गया।
06दोनों किसान राजा के दरबार में जाने के बजाय लड़के के पास क्यों गए?
दोनों किसानों के बीच जमीन को लेकर झगड़ा था। उस समय लड़के की न्याय-बुद्धि की चर्चा पूरे नगर में फैल चुकी थी। उसके फैसलों से लोगों को हमेशा संतोष होता था। इसलिए किसान राजा के दरबार में न जाकर सीधे उसी लड़के के पास गए। लड़के ने बड़ी गंभीरता से दोनों का बयान सुना और ऐसा फैसला दिया कि वे दंग रह गए।
07राजा को सबसे ज्यादा आश्चर्य किस बात से हुआ?
जब राजा खुद मैदान में पहुँचा तो उसने देखा कि जो लड़का सिंहासन पर बैठकर न्याय कर रहा था, वह रोज वाला लड़का भी नहीं था — वह लड़का बीमार था और कोई नया ही लड़का बैठा था। राजा को यह जानकर सबसे ज्यादा आश्चर्य हुआ कि कोई भी लड़का उस शिला पर बैठते ही अच्छा न्याय करने लगता था। इसीलिए उसने सोचा कि पत्थर की उस कुर्सी में ही कोई चमत्कार है।
08विक्रमादित्य का सिंहासन कैसा था और उसे कैसे पहचाना गया?
जब राजा के इशारे पर उस जगह को खोदा गया तो पता चला कि वह एक पत्थर नहीं बल्कि बहुत ही सुंदर सिंहासन था। उस पर बारीक और खूबसूरत मूर्तियाँ खुदी हुई थीं और उसके चारों पायों पर चार देवदूतों की मूर्तियाँ बनी हुई थीं। विद्वान पंडितों ने बताया कि यह सदियों पुराना राजा विक्रमादित्य का सिंहासन है, जो अपने न्याय और विवेक के लिए बहुत प्रसिद्ध थे।
09मूर्तियों ने राजा को सिंहासन पर बैठने से क्यों रोका?
सिंहासन के चार पायों पर बनी देवदूत मूर्तियों ने राजा से तीन सवाल पूछे। पहली मूर्ति ने पूछा कि क्या तुमने कभी चोरी नहीं की — राजा को स्वीकार करना पड़ा कि उसने एक दरबारी की जमीन पर नाराजगी के कारण कब्जा कर लिया था। दूसरी मूर्ति ने पूछा कि क्या तुमने कभी झूठ नहीं बोला — राजा को याद आया कि उसने मुसीबत से बचने के लिए कई बार झूठ बोला था। तीसरी मूर्ति ने पूछा कि क्या तुमने कभी किसी को चोट नहीं पहुँचाई — राजा यह भी नहीं कह सका। हर बार राजा पीछे हटता गया और मूर्तियाँ उड़ती गईं।
10राजा ने उपवास और प्रायश्चित क्यों किया?
पहली मूर्ति ने राजा को बताया कि तुम इस सिंहासन के योग्य नहीं हो और तीन दिन तक प्रायश्चित करना होगा। राजा ने तीन दिन उपवास और प्रार्थना की ताकि वह सिंहासन पर बैठने के योग्य बन सके। यही क्रम दूसरी और तीसरी मूर्ति के साथ भी हुआ। हर बार राजा प्रायश्चित करके लौटता, लेकिन अगली मूर्ति उसे फिर रोक देती।
11अंत में चौथी मूर्ति ने क्या किया और क्यों?
चौथी मूर्ति ने राजा से कहा कि जो लड़के इस सिंहासन पर बैठते थे वे भोले-भाले थे, उनके मन में कलुष नहीं था। राजा ने घमंड में सोचा कि मैं धनवान, बलवान और बुद्धिमान हूँ, इसलिए मैं अवश्य योग्य हूँ। वह दृढ़ कदमों से आगे बढ़ा। लेकिन उसी समय चौथी मूर्ति पंख फैलाकर सिंहासन समेत आकाश में उड़ गई। सिंहासन राजा को नहीं मिला क्योंकि उसका मन निर्मल नहीं था और उसमें अहंकार था।
12'कलुष' और 'प्रायश्चित' शब्दों का अर्थ इस कहानी के संदर्भ में क्या है?
'कलुष' का अर्थ है मन की मैल या पाप — चौथी मूर्ति ने कहा कि जो लड़के सिंहासन पर बैठते थे उनके मन में कलुष नहीं था, यानी वे निर्दोष और निर्मल मन के थे। 'प्रायश्चित' का अर्थ है अपने पाप या गलती के लिए पश्चाताप करना और उसे सुधारने की कोशिश करना — जैसे राजा ने उपवास और प्रार्थना करके अपने किए का प्रायश्चित किया।
More chapters in Veena (वीणा)
Read Chapter 2 of Veena (वीणा), the Class 5 Hindi NCERT textbook (2026-27 edition), online for free: the complete chapter as published by NCERT with every diagram, solved example and exercise, with a chapter summary, question answers and revision notes. Open the NCERT PDF above, or browse all NCERT Class 5 textbooks.
Read offline with notes, solutions & mock tests
CBSE Prepmaster — free on iOS & Android