Summary
Paath 12 — Class 5 Hindi NCERT textbook (Veena / वीणा), 'Ganga ki Kahani' (गंगा की कहानी) — download the PDF aur padhein is paath ka saraansh, shabdarth, aur prashn-uttar. Ganga nadi apni zubaan se apni kahani sunati hai: Gangotri se janam, parvaton ko chirtey hue maidan mein utarna, Rishikesh, Haridwar, Prayagraj, Varanasi, Patna, aur Kolkata hote hue Bengal ki khaadi mein samudra se milna — aur beech mein pradushan ki chinta aur safai ki asha.
- पाठ का सारांश — यह पाठ गंगा नदी की आत्मकथा के रूप में लिखी एक गद्य रचना है। गंगा स्वयं अपनी कहानी सुनाती है। वह बताती है कि उसका जन्म हिमालय की गोद में उत्तरकाशी जनपद स्थित गंगोत्री हिमनद के गोमुख नामक स्थान से हुआ। वहाँ से नन्ही-सी धारा के रूप में निकलकर वह पहाड़ों को चीरती, चट्टानों से टकराती हुई आगे बढ़ती है। देवप्रयाग में अलकनंदा उससे मिलती है। ऋषिकेश में वह मैदान में उतर आती है। हरिद्वार, कानपुर, प्रयागराज (जहाँ यमुना से संगम होता है), वाराणसी, पटना, भागलपुर, कोलकाता — इन नगरों से होती हुई वह अंत में बंगाल की खाड़ी में समुद्र से मिल जाती है। पश्चिम बंगाल में उसकी दो धाराएँ होती हैं: एक बांग्लादेश जाती है जहाँ उसे 'पद्मा' कहते हैं, दूसरी कोलकाता की ओर जहाँ उसे 'हुगली' कहते हैं। पाठ के अंत में गंगा यह दुख व्यक्त करती है कि कारखानों और शहरों के गंदे पानी से उसका चाँदी जैसा चमकीला रंग मटमैला हो गया है। किंतु उसे प्रसन्नता है कि लोगों का ध्यान इस ओर गया है और जल शुद्ध करने के प्रयास आरंभ हो गए हैं।
- पाठ का मूल विषय — इस पाठ में गंगा नदी को एक बोलने वाली, अनुभव करने वाली सत्ता के रूप में प्रस्तुत किया गया है — जो स्वयं अपना जन्म, अपनी यात्रा, अपना दुख और अपनी आशा बताती है। पाठ में तीन भाव एक साथ चलते हैं: (1) गंगा की भौगोलिक यात्रा का ज्ञान — गोमुख से बंगाल की खाड़ी तक के प्रमुख स्थानों का परिचय; (2) गंगा की धार्मिक, सांस्कृतिक और आर्थिक महत्ता — तीर्थ, कुंभ मेला, नहर, कारखानों को जल; (3) जल प्रदूषण की समस्या और उसके समाधान की उम्मीद। पाठ यह संदेश देता है कि नदियाँ केवल जल का स्रोत नहीं हैं — वे सभ्यता और जीवन की आधार हैं, इसलिए उनकी रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है।
- रचना का स्वरूप — यह पाठ कक्षा 5 की हिंदी पाठ्यपुस्तक 'वीणा' का पाठ 12 है। यह गद्य में लिखी आत्मकथात्मक रचना है जिसमें गंगा नदी प्रथम पुरुष ('मैं') में अपनी कहानी सुनाती है। पाठ में भौगोलिक जानकारी, तीर्थ-स्थलों का उल्लेख, औद्योगिक नगरों का विवरण और पर्यावरण की चिंता — सब एक साथ बुनी गई हैं। पाठ के साथ 'पाठ से', 'भाषा की बात', 'बातचीत के लिए', 'समझ और अनुभव' और 'कलाकारी' जैसे अभ्यास-खंड दिए गए हैं जो छात्रों की भाषा और समझ दोनों को मज़बूत करते हैं।
Key points & formulas
- 01गंगा का उद्गम: उत्तरकाशी जनपद में स्थित गंगोत्री हिमनद के 'गोमुख' नामक स्थान से — पाठ में यही स्पष्ट रूप से लिखा गया है।
- 02गंगा का एक और नाम 'भागीरथी' है क्योंकि राजा भगीरथ ने गंगोत्री में तपस्या की थी — यह जानकारी पाठ से ली गई है।
- 03देवप्रयाग में अलकनंदा गंगा से मिलती है; प्रयागराज में यमुना से संगम होता है — पाठ में दोनों स्थानों का नाम स्पष्ट रूप से दिया गया है।
- 04कठिन शब्दार्थ — हिमनद: बर्फ से बनी नदी या ग्लेशियर; मटमैला: गंदला, धूल-मिट्टी मिला हुआ; औद्योगिक: कारखानों और उद्योगों से संबंधित; संगम: दो नदियों का आपस में मिलना।
- 05पाठ में गंगा को 'मैं' के रूप में प्रस्तुत किया गया है — वह स्वयं बोलती है, अपना दुख और प्रसन्नता व्यक्त करती है। इस प्रकार एक निर्जीव नदी को सजीव की तरह प्रस्तुत किया गया है।
- 06गंगा के जल का वर्णन: गंगोत्री से निकलते समय उसका रूप 'चाँदी जैसा चमकीला' होता है किंतु काशी पहुँचते-पहुँचते वह 'मटमैला' हो जाता है — कारण है कारखानों और शहरों का गंदा पानी।
- 07पश्चिम बंगाल में गंगा की दो धाराएँ हो जाती हैं: एक बांग्लादेश में 'पद्मा' और दूसरी कोलकाता की ओर 'हुगली' — अंत में वह बंगाल की खाड़ी में समुद्र से मिलती है।
Frequently asked questions
01'गंगा की कहानी' पाठ किस पुस्तक में है और यह किसने लिखी है?
यह पाठ NCERT की हिंदी पाठ्यपुस्तक 'वीणा' (कक्षा 5) के पाठ 12 में है। पाठ में गंगा नदी खुद अपनी कहानी पहले पुरुष में सुनाती है, इसलिए इसे आत्मकथात्मक शैली में लिखा गया है। पाठ में किसी एक लेखक का नाम नहीं दिया गया है।
02गंगा नदी का जन्म कहाँ हुआ?
गंगा नदी का जन्म हिमालय की गोद में हुआ। वह उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद में स्थित गंगोत्री हिमनद के गोमुख नामक स्थान से एक नन्ही-सी धारा के रूप में निकली।
03गंगा नदी को भागीरथी नाम क्यों पड़ा?
राजा भगीरथ ने गंगोत्री में तपस्या की थी, इसलिए गंगा का एक नाम भागीरथी भी है।
04गंगा नदी के रास्ते में कौन-कौन से प्रमुख स्थान आते हैं?
गंगा गोमुख से निकलकर देवप्रयाग, ऋषिकेश, हरिद्वार, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी (काशी), पटना, भागलपुर, कोलकाता से होती हुई बंगाल की खाड़ी में समुद्र से मिलती है।
05देवप्रयाग में गंगा के साथ क्या हुआ?
देवप्रयाग में गंगा से अलकनंदा नदी आकर मिली। इसके बाद ऋषिकेश पहुँचने पर गंगा मैदान में उतर आई।
06प्रयागराज में गंगा का संगम किस नदी से होता है?
प्रयागराज में गंगा का संगम यमुना नदी से होता है। 'संगम' का अर्थ है एक से अधिक नदियों का आपस में मिलना। इस संगम पर भी प्रत्येक बारहवें वर्ष कुंभ का मेला लगता है।
07कुंभ का मेला कहाँ-कहाँ और कब लगता है?
कुंभ का मेला हरिद्वार और प्रयागराज दोनों स्थानों पर लगता है। यह प्रत्येक बारह वर्ष बाद लगता है और इसमें देश के कोने-कोने से लाखों लोग आते हैं।
08पश्चिम बंगाल में गंगा की कितनी धाराएँ हो जाती हैं और उनके नाम क्या हैं?
पश्चिम बंगाल में गंगा की दो धाराएँ हो जाती हैं। एक धारा बांग्लादेश को चली जाती है, जहाँ उसका नाम पद्मा पड़ गया है। दूसरी धारा कोलकाता की ओर जाती है, जहाँ उसे हुगली कहते हैं। अंत में गंगा बंगाल की खाड़ी में समुद्र से मिल जाती है।
09गंगा का जल मटमैला और दूषित क्यों हो जाता है?
कारखानों और शहरों का गंदा पानी गंगा के जल को दूषित कर देता है। गंगोत्री से निकलते समय गंगा का जल चाँदी जैसा चमकीला रहता है, लेकिन काशी पहुँचते-पहुँचते उसका रंग मटमैला हो जाता है।
10इस पाठ का मुख्य संदेश क्या है?
पाठ का मुख्य संदेश यह है कि हमें नदियों को प्रदूषित होने से बचाना चाहिए। गंगा स्वयं दुखी है कि कारखानों और नगरों का गंदा पानी उसे दूषित कर रहा है। पाठ यह भी बताता है कि लोगों का ध्यान इस समस्या की ओर गया है और गंगा के जल को शुद्ध करने के प्रयास शुरू हो गए हैं।
11गंगानहर कहाँ से निकाली गई है और वह कहाँ तक जाती है?
हरिद्वार के पास से गंगानहर निकाली गई है। यह नहर लाखों एकड़ भूमि को सींचती हुई उत्तर प्रदेश के कानपुर जनपद तक पहुँचती है।
12इस पाठ में कौन से कठिन शब्दों के अर्थ जानना जरूरी है?
कुछ मुख्य शब्द और उनके अर्थ: 'गोमुख' — गंगोत्री हिमनद का वह स्थान जहाँ से गंगा निकलती है; 'संगम' — दो नदियों का मिलना; 'हिमनद' — बर्फ की नदी (ग्लेशियर); 'मटमैला' — मिट्टी के रंग जैसा गंदला; 'तीर्थयात्री' — धार्मिक स्थानों पर जाने वाले लोग; 'औद्योगिक' — कारखानों से संबंधित।
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