Class 5 Hindi

Chapter 4 — साङकेन

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Overview

Summary

Path 4 — Class 5 Hindi NCERT textbook (Veena / वीणा), 'Sangken' (साङकेन) — download the PDF aur padhein: Arunachal Pradesh ke Chowkham mein manaye jane wale naye saal ke tyohar Sangken ka ek bachchi Vallari ki nazar se vivran, jo bharat ki vividh sansskritiyon ki ekta dikhata hai.

  • सारांशदिल्ली की भीड़भरी जिंदगी छोड़कर अरुणाचल प्रदेश के चौखाम आई वल्लरी अपने मित्र चाऊतान के घर जाती है। वहाँ सड़क पर एक शोभायात्रा निकलती है जिसमें बौद्ध-विहार से भगवान बुद्ध और उनके शिष्यों की मूर्तियाँ नव-निर्मित मंदिर ले जाई जा रही हैं। चाऊतान बताता है कि यह साङकेन का त्योहार है जो नए वर्ष के आरंभ का उत्सव है। लोग तीन दिन तक एक-दूसरे पर पानी डालते और चावल का आटा लगाते हैं। वल्लरी को होली की याद आती है और वह दोनों त्योहारों की समानताएँ समझती है। पाठ के अंत में बौद्ध भिक्षुओं का आशीर्वाद-गीत है — 'खेती फूले-फले तुम्हारी, तुम्हें न हो कोई बीमारी।'
  • मुख्य विषय (Theme)यह पाठ भारत की सांस्कृतिक विविधता में एकता का संदेश देता है। अरुणाचल प्रदेश का साङकेन और उत्तर भारत की होली — दोनों नए वर्ष के उत्सव हैं, दोनों में पानी और रंग का उपयोग होता है, दोनों में बड़ों को प्रणाम और आशीर्वाद की परंपरा है। पाठ यह भी सिखाता है कि दूसरी संस्कृतियों को जिज्ञासा और सम्मान से समझना चाहिए।
  • रचना का संदर्भ'साङकेन' वीणा पाठ्यपुस्तक (कक्षा 5) का पाठ 4 है। यह एक गद्य कहानी है जिसके लेखक का नाम पाठ में नहीं दिया गया है। यह NCERT द्वारा 2026-27 के पाठ्यक्रम के लिए पुनर्मुद्रित है। साङकेन वास्तव में अरुणाचल प्रदेश और म्यांमार के ताई-खामती समुदाय का जल-उत्सव है जो बौद्ध नव-वर्ष के रूप में मनाया जाता है।
Essentials

Key points & formulas

  1. 01लेखक परिचय: पाठ में लेखक का नाम नहीं दिया गया है; यह एक गद्य कहानी है जो वल्लरी नामक बालिका की दृष्टि से लिखी गई है।
  2. 02मुख्य पात्र: वल्लरी (दिल्ली से आई बालिका) और चाऊतान (अरुणाचल प्रदेश का उसका मित्र) — दोनों के बीच की मित्रता और संवाद पाठ की धुरी है।
  3. 03मूल भाव: 'विविधता में एकता' — साङकेन और होली दोनों अलग-अलग प्रदेशों के नव-वर्ष उत्सव हैं, फिर भी उनमें पानी डालना, मिठाइयाँ बनाना और बड़ों का आशीर्वाद लेना जैसी समान परंपराएँ हैं।
  4. 04काव्य-सौंदर्य / भाषा-सौंदर्य: पाठ में युग्म शब्दों का सुंदर प्रयोग है — 'नाचते-गाते', 'हिल-मिलकर', 'भर-भरकर', 'खेती फूले-फले'; ये शब्द उत्सव की जीवंतता को व्यक्त करते हैं।
  5. 05कठिन शब्दार्थ — शोभायात्रा: किसी धार्मिक या सांस्कृतिक अवसर पर निकाला जाने वाला जुलूस जिसमें लोग गाते-बजाते चलते हैं।
  6. 06कठिन शब्दार्थ — बौद्ध भिक्षु: बौद्ध धर्म के संन्यासी जो मठ/विहार में रहते हैं और धर्म का प्रचार करते हैं।
  7. 07कठिन शब्दार्थ — खपच्चियाँ: बाँस या लकड़ी की पतली-पतली चपटी पट्टियाँ; पाठ में मंदिर की जालीदार दीवारें इन्हीं से बनाई गई थीं।
Questions

Frequently asked questions

01

साङकेन पाठ कहाँ की कहानी है?

यह पाठ अरुणाचल प्रदेश के चौखाम की कहानी है, जहाँ वल्लरी के पिताजी मंडल कार्यालय में अधिकारी हैं। वे अपने परिवार को दिल्ली से वहाँ बुला लेते हैं।

02

साङकेन का त्योहार क्या होता है?

साङकेन अरुणाचल प्रदेश का नव-वर्ष त्योहार है। इस दिन लोग एक-दूसरे पर बालटियाँ भर-भरकर पानी डालते हैं और एक-दूसरे के चेहरों पर चावल का आटा लगाते हैं। यह तीन दिन तक मनाया जाता है।

03

साङकेन के समय शोभायात्रा में क्या हुआ?

लोग बौद्ध-विहार से भगवान बुद्ध और उनके शिष्यों की मूर्तियाँ पालकियों में लेकर नाचते-गाते हुए नदी के किनारे बने नए मंदिर में ले गए। मंदिर में बौद्ध भिक्षुओं ने मंत्र पढ़कर मूर्तियाँ रखीं और उन पर जल चढ़ाया।

04

वल्लरी को साङकेन देखकर होली की याद क्यों आई?

जब वल्लरी ने देखा कि लोग एक-दूसरे पर बालटियाँ भर-भरकर पानी डाल रहे हैं और चेहरों पर चावल का आटा लगा रहे हैं, तो उसे होली याद आई, क्योंकि होली में भी लोग एक-दूसरे पर रंगीन पानी फेंकते हैं और गुलाल लगाते हैं।

05

होली और साङकेन में क्या समानता है?

दोनों त्योहार नए वर्ष की शुरुआत पर मनाए जाते हैं। दोनों में लोग एक-दूसरे पर पानी डालते हैं — होली में रंगीन पानी और गुलाल, और साङकेन में सादा पानी और चावल का आटा। दोनों में घर पर पकवान बनाए जाते हैं और रिश्तेदारों से मिलने जाते हैं।

06

साङकेन में मंदिर कैसे सजाया गया था?

मंदिर की दीवारें बाँस और बाँस की खपच्चियों से बनाई गई थीं। बीच-बीच में पेड़ों की हरी-भरी टहनियाँ लगाई गई थीं और उन पर खोंस-खोंसकर रंग-बिरंगे फूल सजाए गए थे। वल्लरी ने इतना सादा और सुंदर मंदिर पहले कभी नहीं देखा था।

07

साङकेन में बौद्ध भिक्षु कौन-सा आशीर्वाद देते हैं?

भिक्षु लोगों को यह आशीर्वाद देते हैं — खेती फूले-फले तुम्हारी, तुम्हें न हो कोई बीमारी। हिल-मिलकर सब नाचें-गाएँ, नए साल में खुशी मनाएँ।

08

चौखाम और दिल्ली में वल्लरी को क्या अंतर लगा?

दिल्ली में भीड़भरी सड़कें, हॉर्न बजाती कारें और बसें, और आदमियों की लंबी कतारें थीं। चौखाम का वातावरण खुला और शांत था — जिधर देखो हरियाली और फूल ही फूल। यहाँ के लोगों के चेहरों पर सदैव मुस्कान रहती थी।

09

पाठ के मुख्य पात्र कौन-कौन हैं?

पाठ में मुख्य पात्र हैं — वल्लरी (दिल्ली से आई लड़की), वल्लरी के पिताजी (चौखाम में अधिकारी), चाऊतान (वल्लरी का अरुणाचली मित्र), और चाऊतान के माता-पिता।

10

साङकेन तीन दिन तक कैसे मनाया जाता है?

पहले दिन शोभायात्रा निकलती है और भगवान बुद्ध की मूर्तियाँ नदी किनारे के मंदिर में रखी जाती हैं। तीनों दिन लोग एक-दूसरे पर पानी डालते हैं और खुशी मनाते हैं। तीसरे दिन बौद्ध भिक्षु मूर्तियों को पुनः पालकियों में रखकर बौद्ध-विहार ले जाते हैं और मंत्र पढ़कर उन्हें उनके स्थान पर रखते हैं।

11

इस पाठ का मुख्य संदेश क्या है?

यह पाठ बताता है कि भारत के अलग-अलग राज्यों में त्योहार अलग-अलग नामों से मनाए जाते हैं, लेकिन उनमें खुशी, मिल-जुलकर रहना और एक-दूसरे का स्वागत करना — सब एक जैसा ही है। साङकेन हमें सिखाता है कि विविधता में एकता हमारे देश की पहचान है।

12

चाऊतान के घर वल्लरी के स्वागत में क्या हुआ?

जब वल्लरी और उसके पिताजी चाऊतान के घर पहुँचे, तो चाऊतान के पिताजी घर की सफाई कर रहे थे। उन्हें देखते ही सफाई छोड़कर स्वागत किया। चाऊतान की माताजी कई प्रकार के स्वादिष्ट पकवान लेकर आईं।

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