Summary
Chapter 1 of the Class 11 Sanskrit NCERT textbook (Shashwati), 'Vedamritam' (वेदामृतम्), यह पाठ ऋग्वेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद से संकलित छह वैदिक मंत्रों का पद्य-संग्रह है, जो संगठन, मानसिक एकता, प्रकृति-माधुर्य, शिवसंकल्प और मातृभूमि-स्तुति के उदात्त आदर्श प्रस्तुत करता है। इस पाठ का कोई एक लेखक नहीं है — मंत्र सीधे वेदों से लिए गए हैं।
- संगठन और मानसिक एकता का वैदिक आह्वान — ऋग्वेद के साम्मनस्य-सूक्त के मंत्र समाज को एकजुट होकर चलने, विरोध त्यागकर एक स्वर में बोलने तथा हृदय-आकूति-मन को समान रखने की प्रेरणा देते हैं — जैसे पूर्वकाल के देवता एकमत होकर हवि ग्रहण करते थे।
- प्रकृति की मधुरता और दीर्घ सक्रिय जीवन की कामना — पाठ में वायु, नदियों, समुद्र और ओषधियों की मधुरता की प्रार्थना है तथा सौ वर्षों तक देखते-सुनते-बोलते हुए दीनता-रहित सक्रिय जीवन की आकांक्षा व्यक्त की गई है — मन का शिवसंकल्प इसी की आधारशिला है।
- विविधता में एकता — पृथ्वी माता का आदर्श — अथर्ववेद का पृथ्वीसूक्त पृथ्वी को विविध भाषाओं और अनेक धर्मों के लोगों को घर की भाँति धारण करने वाली माता के रूप में स्तुत करता है — यह विश्वबन्धुत्व और विविधता में एकता का उदात्त वैदिक संदेश है।
Key points & formulas
- 01पाठ का स्रोत एवं विधा: यह तीन वेदों — ऋग्वेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद — से चुने गए छह मंत्रों का पद्य-संग्रह है; कोई एक कवि या लेखक नहीं।
- 02केंद्रीय भाव: विश्वशान्ति, विश्वबन्धुत्व, एकता, निर्भयता, प्रकृति की मधुरता और राष्ट्रप्रेम — ये वैदिक काव्य के मूल संदेश हैं जो पाठ्यपुस्तक के आमुख में स्पष्ट रेखांकित हैं।
- 03ऋग्वेद (10-191) के दो मंत्रों में समाज को एकजुट होकर चलने, परस्पर विरोध छोड़कर एक स्वर में बोलने और हृदय-आकूति-मन को समान रखने का आह्वान है — जैसे पूर्वकाल के देवता एकमत होकर हवि ग्रहण करते थे।
- 04प्रमुख श्लोक (ऋग्वेद 1-90-7): «मधु वाता ऋतायते मधु क्षरन्ति सिन्धवः। माध्वीर्नः सन्त्वोषधीः॥» — भावार्थ: यजमान के लिए वायु मधुर बहे, नदियाँ और समुद्र मधुर प्रवाहित हों, हमारी ओषधियाँ भी मधुरता-युक्त हों।
- 05प्रमुख श्लोक (यजुर्वेद 36-24): «पश्येम शरदः शतं जीवेम शरदः शतम्। शृणुयाम शरदः शतं प्रब्रवाम शरदः शतम् अदीनाः स्याम शरदः शतं भूयश्च शरदः शतात्॥» — भावार्थ: हम सौ वर्ष देखें, जिएँ, सुनें, बोलें और दीनता-रहित रहें — बार-बार सौ वर्षों से भी अधिक।
- 06कठिन शब्दार्थ — सङ्गच्छध्वम्: साथ चलें (सम्+गम् धातु); सिन्धवः: नदियाँ अथवा समुद्र; अदीनाः: दीनता से रहित, निर्भय।
- 07अथर्ववेद के पृथ्वीसूक्त (12-1-45) में पृथ्वी को विभिन्न भाषा-भाषियों और विविध धर्मों के लोगों को घर की भाँति धारण करने वाली माता बताया गया है — विविधता में एकता का वैदिक आदर्श।
Frequently asked questions
01वेदामृतम् पाठ में कितने मंत्र हैं और वे किन वेदों से लिए गए हैं?
इस पाठ में कुल छह मंत्र हैं — दो ऋग्वेद (10-191-2 और 10-191-4) से, एक ऋग्वेद (1-90-7) से, एक यजुर्वेद (34-1) से, एक यजुर्वेद (36-24) से और एक अथर्ववेद पृथ्वीसूक्त (12-1-45) से।
02'सङ्गच्छध्वम्' मंत्र का क्या अर्थ है?
सङ्गच्छध्वम् का अर्थ है 'साथ चलें'। इस मंत्र में परस्पर विरोध छोड़कर एक स्वर से बोलने और मन को समान रखने का आह्वान है — जैसे पूर्वकाल के देवता एकमत होकर हवि ग्रहण करते थे।
03Vedamritam mein mukhya sandesh kya hai?
इस पाठ का मुख्य संदेश है विश्वशान्ति, विश्वबन्धुत्व, एकता, निर्भयता और राष्ट्रप्रेम — ये वैदिक मंत्रों में निहित वे आदर्श हैं जो पाठ्यपुस्तक के आमुख में प्रासंगिक बताए गए हैं।
04'मधु वाता ऋतायते' मंत्र कहाँ से है और इसका भाव क्या है?
यह मंत्र ऋग्वेद (1-90-7) से है। इसमें प्रार्थना है कि यजमान के लिए वायु मधुर बहे, नदियाँ-समुद्र मधुर बहें और हमारी ओषधियाँ मधुरता से युक्त हों।
05'शिवसंकल्प' का अर्थ क्या है?
पाठ के शब्दार्थ के अनुसार 'शिवसंकल्पम्' का अर्थ है — जिसके संकल्प मंगलमय और कल्याणकारी हों। यजुर्वेद (34-1) के मंत्र में मन को ऐसा शिवसंकल्प-युक्त बनाने की प्रार्थना की गई है।
06पृथ्वीसूक्त किस वेद में है और उसमें पृथ्वी का कैसा वर्णन है?
पृथ्वीसूक्त अथर्ववेद (12-1-45) में है। उसमें पृथ्वी को विभिन्न भाषाओं, विविध धर्मों और विचारों के लोगों को घर की भाँति धारण करने वाली माता के रूप में वर्णित किया गया है।
07'अदीनाः स्याम शरदः शतम्' का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है — हम सौ वर्षों तक दीनता-रहित (स्वाभिमान से) जीवन जिएँ। यह यजुर्वेद (36-24) का मंत्र है जो दीर्घ, सक्रिय और निर्भय जीवन की कामना करता है।
08Vedamritam Sanskrit chapter 1 mein Rigveda ke kaun se sukta hain?
वेदामृतम् में ऋग्वेद के साम्मनस्य-सूक्त (10-191) से दो मंत्र और (1-90-7) से एक 'मधु' मंत्र लिया गया है जो क्रमशः एकता और प्रकृति-माधुर्य का संदेश देते हैं।
09'सिन्धवः' और 'आकूतिः' शब्दों के क्या अर्थ हैं?
पाठ के शब्दार्थ के अनुसार — 'सिन्धवः' का अर्थ है नदियाँ अथवा समुद्र, और 'आकूतिः' का अर्थ है संकल्प या अध्यवसाय।
10वेदामृतम् पाठ में यजुर्वेद से कौन से मंत्र हैं?
यजुर्वेद से दो मंत्र हैं — (34-1) में मन के शिवसंकल्प की प्रार्थना है, और (36-24) में सौ वर्षों तक देखने, जीने, सुनने, बोलने और दीनता-रहित रहने की कामना है।
11क्या NCERT Class 11 Sanskrit Shashwati Vedamritam का PDF मुफ़्त डाउनलोड कर सकते हैं?
हाँ, यह मुफ़्त है, बिना साइन-अप।
12वेदामृतम् में 'देवहितम्' और 'शुक्रम्' का क्या अर्थ है?
पाठ के शब्दार्थ के अनुसार — 'देवहितम्' का अर्थ है देवताओं द्वारा स्थापित, और 'शुक्रम्' का अर्थ है दिव्य या चमकीला। यजुर्वेद (36-24) के मंत्र में इन शब्दों से सूर्य को संबोधित किया गया है।
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