Summary
Chapter 7 of the Class 11 Hindi NCERT textbook (Antra), 'Uski Maa' (उसकी माँ), पांडेय बेचन शर्मा 'उग्र' की कहानी है जो स्वाधीनता आंदोलन के दौर में ममतामयी माँ जानकी और उसके क्रांतिकारी बेटे लाल की मार्मिक कथा प्रस्तुत करती है।
- माँ की असीम ममता और त्याग — जानकी अपना लोटा, थाली और गहने बेचकर जेल में बंद बच्चों को खाना पहुँचाती है और वकीलों से गिड़गिड़ाती है। बेटे लाल के प्रति उसका असीम स्नेह पूरी कहानी का भावनात्मक केंद्र है।
- राजभक्ति बनाम राजविद्रोह का संघर्ष — लाल और उसके साथी ब्रिटिश शासन के विरुद्ध क्रांतिकारी विचार रखते हैं, जबकि 'सात पुश्त से सरकार के फ़रमाबरदार' चाचा राजभक्त हैं। कहानी इन दो परस्पर विरोधी मानसिकताओं के टकराव को उभारती है।
- भारत माता की छवि और करुण अंत — एक लड़का जानकी की झुर्रियों और केशों को हिमालय, गंगा-यमुना से जोड़कर उसे भारत माता कहता है। लाल को फाँसी होने पर अंतिम पत्र मिलने के बाद मौन जानकी अगली सुबह हाथ में चिट्ठी लिए मृत पाई जाती है।
Key points & formulas
- 01लेखक परिचय: पांडेय बेचन शर्मा 'उग्र' (सन् 1900-1967) का जन्म उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के चुनार ग्राम में हुआ; वे आज, विश्वमित्र, स्वदेश, वीणा, स्वराज्य और विक्रम के संपादक रहे तथा मतवाला-मंडल के प्रमुख सदस्य थे।
- 02विधा: कहानी (गद्य); उग्र जी प्रेमचंदयुगीन कहानीकार हैं और इनकी कहानियों में समाज-सुधार की मुख्य प्रवृत्ति मौजूद है।
- 03केंद्रीय भाव: यह कहानी माँ की असीम ममता, स्वाधीनता आंदोलन में युवा पीढ़ी के विद्रोह तथा राजभक्त और राजविद्रोही—दो परस्पर विरोधी मानसिकताओं के संघर्ष को चित्रित करती है।
- 04मुख्य पात्र: जानकी (बूढ़ी ममतामयी माँ), लाल (जानकी का क्रांतिकारी बेटा), चाचा (ज़मींदार/कथावाचक, 'सात पुश्त से सरकार के फ़रमाबरदार'), पुलिस सुपरिटेंडेंट, और बंगड़ (लाल का साथी)।
- 05भारत माता की छवि: एक लड़के ने जानकी को हलवा परोसते समय कहा, 'माँ! तू तो ठीक भारत माता-सी लगती है'—उसने जानकी की झुर्रियों, केशों और चेहरे की रेखाओं को हिमालय, गंगा-यमुना आदि से जोड़कर उनकी पहचान भारत माता से की।
- 06कहानी का अंत: फाँसी की पूर्व रात लाल का पत्र मिला जिसमें उसने लिखा, 'जिस दिन तुम्हें यह पत्र मिलेगा उसके सवेरे मैं बाल अरुण के किरण-रथ पर चढ़कर उस ओर चला जाऊँगा'। अगली सुबह जानकी दरवाजे पर हाथ में वही चिट्ठी लिए मृत पाई गई।
- 07कठिन शब्दार्थ — फ़रमाबरदार: आज्ञाकारी, सेवक; बाल अरुण: सुबह-सुबह का सूर्य (लालिमायुक्त); नीति-मर्दक कानून: नीति को मिटाने वाला, नष्ट करने वाला कानून।
Frequently asked questions
01उसकी माँ कहानी के लेखक कौन हैं?
इस कहानी के लेखक पांडेय बेचन शर्मा 'उग्र' (सन् 1900-1967) हैं। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के चुनार नामक ग्राम में हुआ था।
02Uski Maa story ka mukhya paatra kaun hai?
कहानी की केंद्रीय पात्र जानकी है — एक बूढ़ी ममतामयी माँ जो अपने क्रांतिकारी बेटे लाल से अगाध प्रेम करती है। कहानी का शीर्षक भी उसी पर आधारित है।
03कहानी में जानकी को भारत माता क्यों कहा गया?
लाल के एक साथी ने जानकी को हलवा परोसते समय उनके चेहरे की झुर्रियों, सफ़ेद केशों और रेखाओं को हिमालय, गंगा, यमुना, विंध्याचल आदि से जोड़ते हुए कहा, 'माँ! तू तो ठीक भारत माता-सी लगती है।'
04लाल को क्या सजा मिली?
ऊँची अदालत ने लाल, बंगड़ तथा दो और लड़कों को फाँसी की सज़ा सुनाई और दस अन्य लड़कों को दस वर्ष से सात वर्ष तक की कड़ी सजाएँ दी गईं।
05NCERT Class 11 Hindi Antra chapter 7 mein Jaanki ka charitra kaisa hai?
जानकी भोली, ममतामयी और साहसी बूढ़ी माँ है। उसने लोटा, थाली और गहने बेचकर जेल में बच्चों को खाना पहुँचाया, वकीलों से गिड़गिड़ाई, और अंत तक यह विश्वास बनाए रखा कि अदालत में बच्चे बेदाग छूट जाएँगे।
06चाचा और लाल के बीच क्या मतभेद था?
लाल ने स्वयं कहा, 'इस पराधीनता के विवाद में, चाचा जी, मैं और आप दो भिन्न सिरों पर हैं। आप कट्टर राजभक्त, मैं कट्टर राजविद्रोही।' चाचा सात पुश्त से सरकार का फ़रमाबरदार था जबकि लाल ब्रिटिश शासन को उखाड़ फेंकना चाहता था।
07कहानी का शीर्षक 'उसकी माँ' क्यों रखा गया?
जानकी न तो शासन-तंत्र के समर्थन में है न विरोध में, फिर भी वह दो विरोधी धाराओं के बीच खड़ी सबसे मार्मिक पात्र है। उसकी ममता और असहायता ही कहानी का भावात्मक केंद्र है, इसीलिए लेखक ने उसे शीर्षक में रखा।
08लाल के अंतिम पत्र में क्या लिखा था?
लाल ने लिखा, 'जिस दिन तुम्हें यह पत्र मिलेगा उसके सवेरे मैं बाल अरुण के किरण-रथ पर चढ़कर उस ओर चला जाऊँगा।' उसने माँ को आश्वस्त किया कि वे जन्म-जन्मांतर मिलते रहेंगे और उसे वहाँ आने का आमंत्रण दिया।
09चाचा ने मेजिनी की पुस्तक से लाल का नाम क्यों मिटाना चाहा?
पुलिस सुपरिटेंडेंट की 'भूरी, डरावनी, अमानवी आँखें' की याद आने पर चाचा को डर लगा कि विद्रोही से संबंध रखने पर वह मुसीबत में पड़ सकता है। इसीलिए उसने रबर उठाकर लाल के पेंसिल-खचित हस्ताक्षर मिटाने की कोशिश की।
10Uski Maa mein yuva pidhi ka kya sandesh hai?
लाल ने कहा, 'नष्ट हो जाना तो यहाँ का नियम है। जो सँवारा गया है, वह बिगड़ेगा ही। हमें दुर्बलता के डर से अपना काम नहीं रोकना चाहिए। कर्म के समय हमारी भुजाएँ दुर्बल नहीं, भगवान की सहस्र भुजाओं की सखियाँ हैं।'
11पांडेय बेचन शर्मा उग्र की भाषा-शैली कैसी है?
उनकी भाषा सरल, अलंकृत और व्यावहारिक है जिसमें उर्दू के व्यावहारिक शब्द भी आते हैं। उनकी शैली व्यंग्यपरक है और भावों को मूर्तिमंत करने में उनकी भाषा अत्यधिक सजीव और सशक्त है।
12क्या इस पाठ का PDF मुफ़्त डाउनलोड कर सकते हैं?
हाँ, यह मुफ़्त है, बिना साइन-अप।
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