Summary
Chapter 2 of the Class 11 Hindi NCERT textbook (Antra), 'Dopehar Ka Bhojan' (दोपहर का भोजन), अमरकांत की यथार्थवादी कहानी है जो गरीबी से जूझते निम्न मध्यवर्गीय परिवार की दोपहर के भोजन की मार्मिक स्थिति को चित्रित करती है।
- निम्न मध्यवर्ग की मौन गरीबी — मुंशी चंद्रिका प्रसाद की क्लर्की छँट जाने से परिवार भुखमरी की कगार पर है। दो रोटियाँ, पनियाई दाल और चने की तरकारी में सिमटा भोजन उस चुपचाप सही जाती गरीबी को दिखाता है जिसे परिवार दुनिया के सामने प्रकट नहीं होने देता।
- सिद्धेश्वरी का त्याग और रक्षक-झूठ — माँ सिद्धेश्वरी एक सदस्य की झूठी तारीफ दूसरे से कहकर परिवार में उम्मीद और जुड़ाव बनाए रखती है। स्वयं जली-मोटी बची रोटी खाते हुए रो पड़ना उसके मौन आत्मत्याग की पराकाष्ठा है।
- यथार्थवादी शिल्प की सादगी — नयी कहानी आंदोलन के कहानीकार अमरकांत सहज संकेतों और शिल्प की सादगी से करुणा उत्पन्न करते हैं। भोजन के सामान्य दृश्य के जरिए वे बिना उपदेश दिए सामाजिक विषमता का गहरा प्रभाव छोड़ते हैं।
Key points & formulas
- 01लेखक परिचय — अमरकांत (1925–2014), उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के नगरा गाँव में जन्म; मूल नाम श्रीराम वर्मा; इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बी.ए.; नयी कहानी आंदोलन के प्रमुख कहानीकार।
- 02पुरस्कार — 'इन्हीं हथियारों से' उपन्यास पर 2007 में साहित्य अकादमी पुरस्कार; 2009 में भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार श्री लाल शुक्ल के साथ संयुक्त रूप से।
- 03विधा — यथार्थवादी हिंदी कहानी (गद्य); शिल्प की सादगी और सहज संकेतों पर आधारित।
- 04केंद्रीय भाव — निम्न मध्यवर्गीय परिवार की गरीबी और माँ सिद्धेश्वरी का मौन त्याग; वह 'गरीबी के अहसास को मुखर नहीं होने देती और उसकी आँच से अपने परिवार को बचाए रखती है।'
- 05मुख्य पात्र व घटनाएँ — सिद्धेश्वरी (माँ), मुंशी चंद्रिका प्रसाद (पिता — डेढ़ महीने पहले मकान किराया नियंत्रण विभाग की क्लर्की से छँटनी हो चुकी), रामचंद्र (बड़ा बेटा, ~21 वर्ष), मोहन (मँझला बेटा, ~18 वर्ष), प्रमोद (छोटा बेटा, ~6 वर्ष); तीनों परिजन बारी-बारी खाने में अधिक रोटी लेने से मना करते हैं।
- 06सिद्धेश्वरी का झूठ — वह रामचंद्र को मोहन की 'पढ़ने में लगी तबीयत' की झूठी तारीफ करती है और मुंशी जी को रामचंद्र के 'बाबू जी देवता के समान हैं' जैसे काल्पनिक वाक्य सुनाती है — यह झूठ परिवार को जोड़ने का साधन है।
- 07कठिन शब्दार्थ (स्रोत से) — व्यग्रता = व्याकुलता/घबराहट; ओसारा = बरामदा; निर्विकार = जिसमें कोई विकार या परिवर्तन न होता हो; छिपुली = खाने का छोटा बर्तन; अलगनी = कपड़े टाँगने के लिए बाँधी गई रस्सी।
Frequently asked questions
01दोपहर का भोजन कहानी के लेखक कौन हैं?
इस कहानी के लेखक अमरकांत हैं (सन् 1925–2014)। उनका मूल नाम श्रीराम वर्मा है और वे उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के नगरा गाँव से थे।
02Dopehar Ka Bhojan किस NCERT पुस्तक में है?
यह कहानी NCERT Class 11 Hindi की पुस्तक 'अंतरा' (Antra) में संकलित है।
03दोपहर का भोजन कहानी का सारांश क्या है?
यह 'गरीबी से जूझ रहे एक निम्न मध्यवर्गीय परिवार की कहानी है।' मुंशी जी की नौकरी जा चुकी है। माँ सिद्धेश्वरी बहुत कम भोजन — दो रोटियाँ, पनियाई दाल, चने की तरकारी — बनाती है। परिवार के तीनों सदस्य भूखे होते हुए भी रोटी लेने से मना करते हैं। सिद्धेश्वरी झूठी तारीफों से परिवार को उम्मीद में बनाए रखती है और अंत में स्वयं जली रोटी खाते हुए रोती है।
04कहानी की केंद्रीय पात्र कौन है और उसकी विशेषता क्या है?
कहानी की केंद्रीय पात्र सिद्धेश्वरी है। वह 'गरीबी के अहसास को मुखर नहीं होने देती और उसकी आँच से अपने परिवार को बचाए रखती है।' वह एक सदस्य के विषय में दूसरे से झूठ बोलकर परिवार में संबल और स्नेह बनाए रखती है।
05सिद्धेश्वरी ने रामचंद्र से मोहन के बारे में झूठ क्यों बोला?
रामचंद्र के पूछने पर कि मोहन कहाँ है, सिद्धेश्वरी को सच बोलने की 'तबीयत नहीं हुई' और उसने कहा कि मोहन किसी लड़के के यहाँ पढ़ने गया है और उसका दिमाग बड़ा तेज है। यह झूठ परिवार में टूटन न आने देने का उसका तरीका था।
06मुंशी चंद्रिका प्रसाद की नौकरी क्यों गई?
पाठ के अंत में बताया गया है कि 'डेढ़ महीने पूर्व मकान किराया नियंत्रण विभाग की क्लर्की से उनकी छँटनी' हो गई थी।
07रामचंद्र खाने में रोटी लेने से मना क्यों करता है?
सिद्धेश्वरी के रोटी देने की जिद पर रामचंद्र बिगड़कर कहता है, 'अधिक खिलाकर बीमार डालने की तबीयत है क्या?' — वास्तव में वह जानता है कि घर में खाना बहुत कम है, इसलिए माँ और प्रमोद के लिए छोड़ता है।
08ओसारा और व्यग्रता का अर्थ क्या है?
पाठ की शब्दार्थ सूची के अनुसार — ओसारा = बरामदा; व्यग्रता = व्याकुलता, घबराया हुआ।
09अमरकांत को कौन-कौन से पुरस्कार मिले?
'इन्हीं हथियारों से' उपन्यास पर उन्हें 2007 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। सन् 2009 में भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार श्री लाल शुक्ल के साथ संयुक्त रूप से दिया गया।
10दोपहर का भोजन कहानी का मुख्य विषय (theme) क्या है?
यह कहानी 'समाज में व्याप्त गरीबी को चिह्नित करती है।' मुंशी जी के परिवार का संघर्ष भावी उम्मीदों पर टिका है। इसके साथ ही सिद्धेश्वरी के माध्यम से माँ के मौन त्याग और परिवार को एकजुट रखने की शक्ति दर्शाई गई है।
11कहानी में भोजन की थाली में क्या परोसा गया था?
प्रत्येक सदस्य को 'कुल दो रोटियाँ, भर कटोरा पनियाई दाल और चने की तली तरकारी' परोसी गई। यह अत्यंत कम भोजन परिवार की विपन्न स्थिति का प्रतीक है।
12क्या इस पाठ का PDF मुफ़्त डाउनलोड कर सकते हैं?
हाँ, यह मुफ़्त है, बिना साइन-अप।
13अमरकांत की भाषा-शैली की क्या विशेषता है?
पाठ में बताया गया है कि 'आंचलिक मुहावरों और शब्दों के प्रयोग से उनकी कहानियों में जीवंतता आती है' और 'उनकी शैली की सहजता और भाषा की सजीवता पाठकों को आकर्षित करती है।' वे जीवन की कथा उसी ढंग से कहते हैं जिस ढंग से जीवन चलता है।
14Dopehar Ka Bhojan mein Siddheshwari ka charitra kaisa hai?
सिद्धेश्वरी कहानी की सबसे जीवंत पात्र है। वह स्वयं भूखी रहती है, पर परिवार को खिलाती है। उसके झूठ — एक सदस्य की दूसरे से झूठी तारीफ — परिवार में उम्मीद और स्नेह बनाए रखते हैं। अंत में वह 'मोटी, भद्दी और जली' एकमात्र बची रोटी खाते हुए रोती है।
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