Class 11 Hindi

Chapter 14 — Badal Ko Ghirte Dekha Hai

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Overview

Summary

Chapter 14 of the Class 11 Hindi NCERT textbook (Antra), 'Badal Ko Ghirte Dekha Hai' (बादल को घिरते देखा है), नागार्जुन की कविता है जिसमें हिमालय की बर्फ़ीली घाटियों में बादल के कोमल और कठोर दोनों रूपों तथा किन्नर-किन्नरियों के जीवन का यथार्थ चित्रण है।

  • बादल के कोमल और कठोर रूपकवि हिमालय के अमल-धवल शिखरों पर बादल घिरते देखता है — मानसरोवर के कमलों पर शीतल तुहिन-कण गिरने की कोमलता से लेकर 'महामेघ को झंझानिल से गरज-गरज भिड़ते' की प्रचंडता तक। प्रकृति के दोनों छोर एक साथ जीवंत होते हैं।
  • हिमालयी लोक का सजीव यथार्थझीलों में हंसों का तिरना और विसतंतु खोजना, चकवा-चकई का प्रणय-कलह, कस्तूरी मृग का अपनी ही सुगंध के पीछे भटकना, और किन्नर-किन्नरियों का वंशी-वादन, इंद्रनील माला व मदिरारुण आँखें — ये चित्र हिमालयी जीवन को यथार्थ रूप देते हैं।
  • कल्पना बनाम यथार्थ का द्वंद्वकवि कालिदास के मेघदूत की अलका और कुबेर को खोजते हुए अंततः कहता है — 'जाने दो, वह कवि-कल्पित था', इस तरह कल्पना और यथार्थ का अंतर रेखांकित करता है। 'बादल को घिरते देखा है' टेक की आवृत्ति सभी चित्रों को एक केंद्रीय अनुभव में बाँधती है।
Essentials

Key points & formulas

  1. 01कवि नागार्जुन (1911-1998) का मूल नाम वैद्यनाथ मिश्र था; जन्म बिहार के दरभंगा जिले में, निवास मधुबनी जिले में; मैथिली में 'यात्री' नाम से रचना करते थे और 1936 में श्रीलंका जाकर बौद्ध धर्म में दीक्षित हुए।
  2. 02विधा: कविता। काव्य-भाषा में एक ओर संस्कृत काव्य परंपरा की प्रतिध्वनि है, तो दूसरी ओर बोलचाल की भाषा की रवानी और जीवंतता भी। भाव और भाषा की दृष्टि से कविता कालिदास और निराला की परंपरा से जुड़ती है।
  3. 03केंद्रीय भाव: कवि ने हिमालय की बर्फ़ीली घाटियों में बादल के कोमल और कठोर दोनों रूपों का वर्णन किया है — मानसरोवर के कमलों पर शीतल ओस-कण से लेकर 'महामेघ को झंझानिल से गरज-गरज भिड़ते' तक।
  4. 04प्रमुख चित्र: मानसरोवर के स्वर्णिम कमलों पर तुहिन कण; हिमालय की झीलों में समतल देशों से आए हंसों का तिरना जो विसतंतु (कमलनाल के कोमल रेशे) खोजते हैं; वसंत के सुप्रभात में चकवा-चकई का प्रणय-कलह; दुर्गम घाटी में कस्तूरी मृग का अपनी ही उन्मादक सुगंध के पीछे भटकना।
  5. 05कालिदास और मेघदूत का संदर्भ: कवि 'कहाँ गया धनपति कुबेर वह, कहाँ गई उसकी वह अलका' पूछते हुए मेघदूत के काव्य-जगत को खोजता है और अंततः कहता है — 'जाने दो, वह कवि-कल्पित था' — इस प्रकार यथार्थ और कल्पना का अंतर रेखांकित करता है।
  6. 06किन्नर-किन्नरियाँ: देवलोक की एक कलाप्रिय जाति। कविता में उनका वंशी-वादन, इंद्रनील (नीलम) की माला, द्राक्षासव (अंगूरों से बनी सुरा) और मदिरारुण आँखों का चित्रण है — हिमालय के इस लोक का यथार्थ रूप।
  7. 07तीन कठिन शब्दार्थ (स्रोत से): तुहिन कण = ओस की बूँद; प्रणय-कलह = प्यार-भरी छेड़छाड़; विसतंतु = कमलनाल के भीतर स्थित कोमल रेशे या तंतु।
  8. 08'बादल को घिरते देखा है' टेक पंक्ति की बार-बार आवृत्ति कविता को संगठित करती है और समस्त प्रकृति-चित्रों को एक केंद्रीय अनुभव से जोड़ती है।
Questions

Frequently asked questions

01

'बादल को घिरते देखा है' के कवि कौन हैं?

इस कविता के कवि नागार्जुन हैं, जिनका जन्म सन् 1911 में और निधन 1998 में हुआ। उनका मूल नाम वैद्यनाथ मिश्र था।

02

Badal Ko Ghirte Dekha Hai poem ka mukhya vishay kya hai?

इस कविता में कवि ने हिमालय की बर्फ़ीली घाटियों, झीलों, झरनों तथा देवदार के जंगलों के साथ-साथ किन्नर-किन्नरियों के जीवन का यथार्थ चित्र प्रस्तुत किया है और बादल के कोमल व कठोर दोनों रूपों का वर्णन किया है।

03

प्रणय-कलह से कवि का क्या तात्पर्य है?

पाठ में दी गई शब्दार्थ टिप्पणी के अनुसार 'प्रणय-कलह' का अर्थ है प्यार-भरी छेड़छाड़। कविता में चकवा-चकई का वसंत के सुप्रभात में शैवालों की हरी दरी पर यही प्रणय-कलह छिड़ते देखा गया है।

04

कस्तूरी मृग के अपने पर ही चिढ़ने के क्या कारण हैं?

कस्तूरी मृग की सुगंध उसकी अपनी नाभि से उठती है ('अलख नाभि से उठनेवाले / निज के ही उन्मादक परिमल'), परंतु वह उसे नहीं जानता और उसी नशीली गंध के पीछे दुर्गम घाटी में भटकता रहता है — इसलिए अपने पर चिढ़ता है।

05

बादलों का वर्णन करते हुए कवि को कालिदास की याद क्यों आती है?

हिमालय के उसी क्षेत्र में कालिदास के मेघदूत की पृष्ठभूमि है जहाँ कुबेर की नगरी अलका और यक्ष-यक्षिणी की कथा है। कवि वहाँ उस काव्य-जगत को खोजता है — 'कहाँ गया धनपति कुबेर वह, कहाँ गई उसकी वह अलका' — किंतु अंत में स्वीकार करता है, 'जाने दो, वह कवि-कल्पित था।'

06

कवि ने 'महामेघ को झंझानिल से गरज-गरज भिड़ते देखा है' क्यों कहा है?

कवि ने मेघदूत के काव्य-कल्पित संसार के विपरीत भीषण जाड़ों में कैलाश के शीर्ष पर असली महामेघ को प्रचंड तूफ़ान से टकराते देखा है — यह बादल के कठोर, वास्तविक रूप का चित्रण है।

07

'बादल को घिरते देखा है' पंक्ति को बार-बार दोहराए जाने से कविता में क्या सौंदर्य आया है?

यह टेक पंक्ति प्रत्येक दृश्य-खंड के अंत में आकर समस्त चित्रों को एक केंद्रीय अनुभव से जोड़ती है और कविता को संगठित तथा संगीतात्मक बनाती है।

08

नागार्जुन को साहित्य अकादमी पुरस्कार किस कृति पर मिला?

नागार्जुन को उनकी मैथिली कविता संग्रह 'पत्रहीन नग्न गाछ' पर साहित्य अकादमी पुरस्कार प्रदान किया गया।

09

किन्नर-किन्नरियाँ कौन हैं और कविता में उनका क्या चित्रण है?

पाठ की शब्दार्थ टिप्पणी के अनुसार किन्नर 'देवलोक की एक कलाप्रिय जाति' हैं। कविता में उन्हें देवदार के कानन की कुटी में, इंद्रनील की माला डाले, द्राक्षासव पूरित पात्र सामने रखे, मृगछालों पर बैठे वंशी पर उँगलियाँ फेरते दिखाया गया है।

10

चकवा-चकई को 'चिर-अभिशापित' क्यों कहा गया है?

पाठ में 'चिर-अभिशापित' का अर्थ है — सदा से ही शापग्रस्त, दुखी, अभागे। चकवा-चकई को रात भर एक-दूसरे से विरहित रहने का शाप है ('निशा काल से चिर-अभिशापित'); वसंत के सुप्रभात में उनका क्रंदन बंद होता है और वे मिलते हैं।

11

Nagarjuna ka mool naam kya tha aur unka janam kahan hua tha?

नागार्जुन का मूल नाम वैद्यनाथ मिश्र था। उनका जन्म अपने ननिहाल सतलखा, जिला दरभंगा, बिहार में हुआ था; वे तरौनी गाँव, जिला मधुबनी, बिहार के निवासी थे।

12

'तुहिन कण' और 'अमल-धवल' का अर्थ क्या है?

पाठ की शब्दार्थ टिप्पणी के अनुसार: तुहिन कण = ओस की बूँद; अमल-धवल = निर्मल और सफ़ेद।

13

क्या इस पाठ का PDF मुफ़्त डाउनलोड कर सकते हैं?

हाँ, यह मुफ़्त है, बिना साइन-अप।

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