Summary
Chapter 6 of the Class 11 Hindi NCERT textbook (Antra), 'Khanabados' (खानाबदोश), ओमप्रकाश वाल्मीकि की कहानी है जो ईंट-भट्ठे पर काम करने वाले मजदूर दंपति सुकिया और मानो के शोषण तथा पक्के घर के टूटते सपने को चित्रित करती है।
- मजदूर वर्ग का शोषण — भट्ठा-मालिक का बेटा सूबे सिंह मजदूर औरतों का शोषण करता है और विरोध करने वाले जसदेव को बेरहमी से पीटता है। समृद्ध और ताकतवर लोग ईमानदारी से मेहनत कर इज्जत से जीना चाहने वालों को जीने नहीं देते।
- पक्के घर का टूटता सपना — मानो कड़ी मेहनत से ईंटें पाथते हुए अपना पक्का घर बनाने का सपना देखती है, पर उसकी कच्ची ईंटें तोड़ दी जाती हैं और मजदूरी भी नहीं मिलती। सपना टूटने पर दंपति फिर खानाबदोश बनकर अगले पड़ाव की तलाश में निकल पड़ते हैं।
- जातिवाद और स्थानीय बोली का यथार्थ — कहानी संकेत करती है कि मजदूर वर्ग भी जातिवादी मानसिकता से पूरी तरह नहीं उबरा — मानो जसदेव को 'बामन नहीं, म्हारे जैसा भट्ठा मजदूर' कहती है। स्थानीय बोली के संवाद कथा में वास्तविकता उत्पन्न करते हैं।
Key points & formulas
- 01लेखक परिचय: ओमप्रकाश वाल्मीकि (1950–2013), जन्म बरला, मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश; हिंदी दलित साहित्य के प्रमुख हस्ताक्षर; प्रमुख कृतियाँ — जूठन (आत्मकथा), सलाम व घुसपैठिये (कहानी संग्रह), सदियों का संताप (कविता संग्रह); डॉ. अंबेडकर राष्ट्रीय पुरस्कार 1993 और परिवेश सम्मान 1995 से सम्मानित।
- 02विधा: कहानी (गद्य); स्थानीय बोली के संवाद कहानी में वास्तविकता उत्पन्न करने में सहायक हैं।
- 03केंद्रीय भाव: मजदूर वर्ग के शोषण और यातना का चित्रण; सूबे सिंह जैसे समृद्ध और ताकतवर लोग ईमानदारी से मेहनत कर इज्जत से जीना चाहने वाले मजदूरों को जीने नहीं देते।
- 04मुख्य पात्र: सुकिया (ईंट-भट्ठे का मजदूर, मानो का पति), मानो (सुकिया की पत्नी, पक्के घर की आकांक्षा रखने वाली), सूबे सिंह (भट्ठा-मालिक मुखतार सिंह का शोषक बेटा), जसदेव (युवा सहायक मजदूर), असगर ठेकेदार, किसनी (शोषण की शिकार मजदूर महिला)।
- 05प्रमुख घटनाक्रम: सुकिया-मानो का भट्ठे पर आना → पक्के घर का सपना → सूबे सिंह द्वारा किसनी का शोषण → मानो को बुलाने की कोशिश → जसदेव का बीच में पड़ना और पिटाई → कच्ची ईंटों का तोड़ा जाना → मजदूरी से वंचित होकर भट्ठा छोड़ना।
- 06जातिवाद का प्रश्न: कहानी यह भी संकेत करती है कि मजदूर वर्ग जातिवादी मानसिकता से नहीं उबर पाया; जसदेव के ब्राह्मण होने पर मानो कहती है — 'बामन नहीं भट्ठा मजदूर है वह---म्हारे जैसा।'
- 07कठिन शब्दार्थ: 'पाथना' = साँचे या हाथ से थोप-पीटकर ईंट तैयार करना; 'अंटी' = धोती की गाँठ जिसमें रुपये-पैसे रखते हैं; 'दड़बा' = मुर्गी आदि रखने के लिए बना छोटा घर (यहाँ झोंपड़ी के लिए प्रयुक्त); 'शिद्दत से' = तीव्रता से।
- 08अंतिम प्रतीक: 'भट्ठे से उठते काले धुएँ ने आकाश तले एक काली चादर फैला दी थी' — सुकिया और मानो एक खानाबदोश की तरह 'अगले पड़ाव की तलाश में, एक दिशाहीन यात्रा पर' निकल पड़ते हैं।
Frequently asked questions
01Khanabados kahani ke lekhak kaun hain?
खानाबदोश कहानी के लेखक ओमप्रकाश वाल्मीकि हैं, जिनका जन्म सन् 1950 में बरला, जिला मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश में हुआ था। सन् 2013 में उनका निधन दिल्ली में हुआ।
02खानाबदोश कहानी का केंद्रीय भाव क्या है?
इस कहानी में मजदूरी करके गुजर-बसर कर रहे मजदूर वर्ग के शोषण और यातना को चित्रित किया गया है। सूबे सिंह जैसे समृद्ध और ताकतवर लोग ईमानदारी से मेहनत कर इज्जत से जीना चाहने वाले मजदूरों को जीने नहीं देते।
03मानो का सपना क्या था?
मानो का सपना था — 'मुझे एक पक्की ईंटों का घर चाहिए। अपने गाँव में---लाल-सुर्ख ईंटों का घर।' अपने ही हाथ से पाथी ईंटों से बना घर उसकी गहरी आकांक्षा थी।
04सूबे सिंह ने जसदेव को क्यों मारा?
जब असगर ठेकेदार के साथ जसदेव सूबे सिंह के पास पहुँचा (मानो की जगह), तो सूबे सिंह बिफर पड़ा। उसने जसदेव को अपशब्द कहे और फिर 'एक झन्नाटेदार थप्पड़' तथा लात-घूँसों से उसे अधमरा कर दिया।
05जसदेव ने मानो के हाथ की रोटी क्यों नहीं खाई?
सुकिया ने कहा था 'बामन तेरे हाथ की रोटी खावेगा' — जसदेव ब्राह्मण था और जाति-भेद के कारण हिचकिचाया। मानो ने उसे समझाया: 'बामन नहीं भट्ठा मजदूर है वह---म्हारे जैसा।'
06कहानी में किसनी और सूबे सिंह की क्या भूमिका है?
किसनी एक नवविवाहित मजदूर महिला थी जिसे सूबे सिंह ने दफ्तर की सेवा-टहल का काम देकर उसका शोषण किया। किसनी की स्थिति मानो के लिए चेतावनी थी — 'मानो के अवचेतन में असंख्य अँधेरे नाच रहे थे। वह किसनी नहीं बनना चाहती थी।'
07कहानी का शीर्षक 'खानाबदोश' क्यों सार्थक है?
कहानी के अंत में वर्णित है: 'सब कुछ छोड़कर मानो और सुकिया चल पड़े थे। एक खानाबदोश की तरह, जिन्हें एक घर चाहिए था, रहने के लिए।' उनकी घुमंतू, अस्थिर जिंदगी जो कभी किसी ठिकाने पर नहीं टिकती — यही शीर्षक की सार्थकता है।
08ओमप्रकाश वाल्मीकि की प्रमुख रचनाएँ कौन-सी हैं?
उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं — सदियों का संताप, बस! बहुत हो चुका (कविता संग्रह); सलाम, घुसपैठिये (कहानी संग्रह); दलित साहित्य का सौंदर्यशास्त्र; और जूठन (आत्मकथा)। जूठन के कारण उन्हें हिंदी साहित्य में विशेष पहचान और प्रतिष्ठा मिली।
09'अपने देस की सूखी रोटी भी परदेस के पकवानों से अच्छी होती है' — यह किसका कथन है?
यह कथन मानो का है। वह कई बार सुकिया से गाँव लौट जाने की बात करती थी। इस कथन से उसका अपने गाँव के प्रति लगाव और परदेस के जीवन की कठिनाई के प्रति व्याकुलता व्यक्त होती है।
10क्या इस पाठ का PDF मुफ़्त डाउनलोड कर सकते हैं?
हाँ, यह मुफ़्त है, बिना साइन-अप।
11कहानी में जातिवाद की समस्या को कैसे दर्शाया गया है?
कहानी संकेत करती है कि मजदूर वर्ग भी जातिवादी मानसिकता से नहीं उबर पाया। जसदेव (ब्राह्मण) मानो के हाथ की रोटी लेने में हिचकिचाता है। मानो का कहना है — 'बामन नहीं भट्ठा मजदूर है वह---म्हारे जैसा।'
12सुकिया ने गाँव क्यों छोड़ा था?
सुकिया का मानना था 'नर्क की जिंदगी से निकलना है तो कुछ छोड़ना भी पड़ेगा।' उसके अनुसार गाँव में रहने वाले 'काँधे पर लंबा लट्ठ धरकर चलने वाले चौधरी' भी शहर में सरकारी अफसरों के आगे सीधे नहीं खड़े हो सकते। बेहतर जिंदगी की तलाश में वह असगर ठेकेदार के साथ भट्ठे पर आया।
13Omaprakash Valmiki ko kaun-kaun se puraskar mile?
ओमप्रकाश वाल्मीकि को सन् 1993 में डॉ. अंबेडकर राष्ट्रीय पुरस्कार और सन् 1995 में परिवेश सम्मान से अलंकृत किया गया। जूठन के अंग्रेजी संस्करण को न्यू इंडिया बुक पुरस्कार 2004 प्रदान किया गया।
14कहानी की भाषा-शैली कैसी है?
ओमप्रकाश वाल्मीकि की भाषा सहज, तथ्यपरक और आवेगमयी है तथा उसमें व्यंग्य का गहरा पुट भी दिखता है। कहानी में स्थानीय बोली के संवाद वास्तविकता उत्पन्न करने में सहायक बने हैं।
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