Summary
Chapter 15 of the Class 11 Hindi NCERT textbook (Antra), 'Hastakshep' (हस्तक्षेप), श्रीकांत वर्मा की कविता है जिसमें 'मगध' के प्रतीक द्वारा उस निरंकुश व्यवस्था का चित्रण है जहाँ जनता भय के कारण छींकती-चीखती-टोकती तक नहीं, और अंततः एक मुर्दा ही 'मनुष्य क्यों मरता है?' पूछकर हस्तक्षेप करता है।
- 'मगध' — निरंकुश व्यवस्था का प्रतीक — मगध ऐसी व्यवस्था है जहाँ विरोध की कोई गुंजाइश नहीं; नागरिक इस डर से छींकते-चीखते-टोकते तक नहीं कि शांति भंग न हो या 'टोकने का रिवाज' न बन जाए। लोग स्वयं कहते हैं — 'मगध अब कहने को मगध है, रहने को नहीं।'
- हस्तक्षेप की अनिवार्यता — कविता का संदेश है कि व्यवस्था को जनतांत्रिक बनाए रखने के लिए हस्तक्षेप जरूरी है, वरना वह निरंकुश हो जाती है। सत्ता की क्रूरता और उससे उपजते प्रतिरोध का यह चित्रण कविता का केंद्रीय भाव है।
- मुर्दे का प्रतीकात्मक हस्तक्षेप — जब कोई जीवित मनुष्य प्रश्न नहीं उठाता, तब नगर के बीच से गुजरता मुर्दा 'मनुष्य क्यों मरता है?' पूछकर सबसे बड़ा हस्तक्षेप कर देता है। यह तीखा व्यंग्य जीवितों की मौन कायरता को उजागर करता है।
Key points & formulas
- 01कवि परिचय: श्रीकांत वर्मा (सन् 1931–1986), जन्म बिलासपुर, मध्य प्रदेश; सन् 1956 में नागपुर विश्वविद्यालय से हिंदी में एम.ए.; पत्रकार के रूप में साहित्यिक जीवन की शुरुआत; श्रमिक, कृति, दिनमान और वणिर्का पत्रों से संबद्ध रहे।
- 02विधा: कविता; प्रमुख काव्य संग्रह — भटका मेघ, दिनारंभ, मायादर्पण, जलसाघर और मगध।
- 03पुरस्कार: मध्य प्रदेश सरकार द्वारा तुलसी पुरस्कार, आचार्य नंददुलारे वाजपेयी पुरस्कार और शिखर सम्मान; केरल का कुमारन आशान राष्ट्रीय पुरस्कार।
- 04केंद्रीय भाव: सत्ता की क्रूरता और उसके कारण पैदा होनेवाले प्रतिरोध का चित्रण — व्यवस्था को निरंकुश होने से बचाने के लिए हस्तक्षेप अनिवार्य है।
- 05'मगध' प्रतीक: एक ऐसी व्यवस्था जहाँ विरोध की कोई गुंजाइश नहीं; नागरिक 'इस डर से' छींकते-चीखते-टोकते तक नहीं कि शांति भंग न हो जाए या 'टोकने का रिवाज न बन जाए।'
- 06मुर्दे का हस्तक्षेप: जब कोई जीवित मनुष्य प्रश्न नहीं उठाता, तब नगर के बीच से गुजरता मुर्दा 'मनुष्य क्यों मरता है?' पूछकर हस्तक्षेप करता है — यह कविता का केंद्रीय व्यंग्य है।
- 07कठिन शब्दार्थ (पाठ से): हस्तक्षेप = रोकना, प्रश्न उठाना; रिवाज = चलन, प्रथा; कतराओ = बचो, सामने न आओ।
Frequently asked questions
01'हस्तक्षेप' कविता के कवि कौन हैं?
इस कविता के कवि श्रीकांत वर्मा हैं, जिनका जन्म सन् 1931 में बिलासपुर, मध्य प्रदेश में हुआ था और जिनका निधन सन् 1986 में हुआ।
02Hastakshep kavita mein 'Magadh' kiska pratik hai?
मगध उस निरंकुश व्यवस्था का प्रतीक है जहाँ किसी भी प्रकार के विरोध के लिए गुंजाइश नहीं छोड़ी गई है।
03मगधनिवासी हस्तक्षेप करने से क्यों कतराते हैं?
वे डरते हैं कि एक बार शुरू होने पर हस्तक्षेप कहीं नहीं रुकता — इसीलिए वे छींकते-चीखते-टोकते तक नहीं। कवि के अनुसार वे 'बच नहीं सकते हस्तक्षेप से', फिर भी कतराते हैं।
04'मगध अब कहने को मगध है, रहने को नहीं' — इस पंक्ति का अर्थ क्या है?
इस पंक्ति का भाव है कि मगध नाम तो बना हुआ है, परंतु वहाँ रहने लायक स्थिति नहीं रही — व्यवस्था इतनी दमनकारी हो गई है कि 'लोग तो यह भी कहते हैं' वह रहने योग्य नहीं।
05मुर्दे का हस्तक्षेप क्या है और वह क्या प्रश्न उठाता है?
जब कोई जीवित मनुष्य हस्तक्षेप नहीं करता, तब नगर के बीच से गुजरता हुआ मुर्दा 'मनुष्य क्यों मरता है?' का प्रश्न कर हस्तक्षेप करता है।
06'कोई छींकता तक नहीं' पंक्ति का क्या भाव है?
यह पंक्ति दर्शाती है कि मगधनिवासी इस डर से छोटी-से-छोटी प्रतिक्रिया भी नहीं करते कि मगध की शांति भंग न हो जाए।
07Shrikant Verma ke pramukh kavya sangrah kaun se hain?
उनके प्रमुख काव्य संग्रह हैं — भटका मेघ, दिनारंभ, मायादर्पण, जलसाघर और मगध।
08श्रीकांत वर्मा को कौन-कौन से पुरस्कार मिले?
मध्य प्रदेश सरकार ने उन्हें तुलसी पुरस्कार, आचार्य नंददुलारे वाजपेयी पुरस्कार और शिखर सम्मान से सम्मानित किया; केरल का कुमारन आशान राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्रदान किया गया।
09पाठ में 'हस्तक्षेप' शब्द का क्या अर्थ दिया गया है?
पाठ के शब्दार्थ अनुभाग के अनुसार हस्तक्षेप का अर्थ है — रोकना, प्रश्न उठाना।
10क्या इस पाठ का PDF मुफ़्त डाउनलोड कर सकते हैं?
हाँ, यह मुफ़्त है, बिना साइन-अप।
11'रिवाज' और 'कतराओ' के अर्थ क्या हैं?
पाठ के अनुसार रिवाज का अर्थ है — चलन, प्रथा; और कतराओ का अर्थ है — बचो, सामने न आओ।
12Shrikant Verma ne sahityik jeevan ki shuruaat kaise ki?
सन् 1956 में नागपुर विश्वविद्यालय से हिंदी में एम.ए. करने के बाद उन्होंने एक पत्रकार के रूप में अपना साहित्यिक जीवन शुरू किया और वे श्रमिक, कृति, दिनमान और वणिर्का पत्रों से संबद्ध रहे।
13'हस्तक्षेप' कविता में सत्ता और जनता के संबंध को कैसे दिखाया गया है?
कविता में दिखाया गया है कि निरंकुश 'मगध' व्यवस्था के भय से जनता इतनी दबी हुई है कि छींकती-चीखती-टोकती तक नहीं; कवि प्रश्न उठाता है कि जहाँ मुर्दा भी हस्तक्षेप करता है वहाँ जीता-जागता मनुष्य चुप क्यों है।
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