Class 11 Hindi

Chapter 4 — Gunge

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Overview

Summary

Chapter 4 of the Class 11 Hindi NCERT textbook (Antra), 'Gunge' (गूँगे), रांगेय राघव की मार्मिक कहानी है जिसमें एक गूँगे-बहरे किशोर के माध्यम से समाज में शोषित और दिव्यांग व्यक्ति की पीड़ा तथा असहायता का यथार्थ चित्रण है।

  • दिव्यांग की असहायता और स्वाभिमानजन्म से वज्र-बहरा किशोर मेहनती और स्वाभिमानी है — भीख नहीं माँगता, चार रुपये पर नौकरी करता है और बसंता की मार पर भी उठा हाथ रोक लेता है। यह संयम उसकी असहायता के भीतर छिपे मानवीय गौरव को उभारता है।
  • समाज की संवेदनहीनतामाँ के छोड़ जाने से बुआ-फूफा के शोषण तक, और झूठी चोरी के आरोप में निकाले जाकर सड़क पर पिटने तक — कहानी दिखाती है कि समाज दिव्यांग को सामान्य मनुष्य की तरह संवेदनशील व्यवहार नहीं देता।
  • 'गूँगे' का व्यापक प्रतीकअंत में कहानी संकेत देती है कि अन्याय देखकर भी जो बोल नहीं पाते, वे भी एक प्रकार से गूँगे हैं। इस तरह मूक किशोर की व्यथा पूरे समाज की मौन कायरता का रूपक बन जाती है।
Essentials

Key points & formulas

  1. 01लेखक परिचय: रांगेय राघव (सन् 1923–1962), जन्म आगरा में; मूल नाम तिरुमल्लै नंबाकम वीर राघव आचार्य; आगरा विश्वविद्यालय से हिंदी में एम.ए. और पीएच.डी.; 39 वर्ष की अल्पायु में निधन; 1961 में राजस्थान साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित।
  2. 02विधा: कहानी (गद्य)। रांगेय राघव ने 1936 से 80 से अधिक कहानियाँ लिखी हैं; उनकी रचनाओं का संग्रह दस खंडों में 'रांगेय राघव ग्रंथावली' नाम से प्रकाशित है।
  3. 03केंद्रीय भाव: शोषित और दिव्यांग मनुष्य की असहायता तथा समाज की संवेदनहीनता का चित्रण; साथ ही यह संदेश कि दिव्यांगों को सामान्य मनुष्य की तरह समझना और संवेदनशील व्यवहार करना चाहिए।
  4. 04मुख्य पात्र: गूँगा-बहरा किशोर (केंद्रीय पात्र), चमेली (मालकिन), बसंता (चमेली का बेटा), शकुंतला (चमेली की बेटी), सुशीला।
  5. 05मुख्य घटनाएँ: गूँगे की माँ पिता की मृत्यु के बाद छोड़ गई; बुआ-फूफा ने पाला और पल्लेदारी कराई; चमेली ने चार रुपये पर नौकर रखा; बसंता की मार पर भी गूँगे ने हाथ नहीं चलाया; चोरी पर चमेली ने निकाला; वह सड़क पर पिटकर सिर फटे हुए दहलीज पर लौटा।
  6. 06व्यापक सामाजिक संदेश: कहानी का अंत बताता है — 'और ये गूँगे--- अनेक-अनेक हो संसार में भिन्न-भिन्न रूपों में छा गए हैं µ जो कहना चाहते हैं, पर कह नहीं पाते'; अर्थात् अन्याय देखकर मौन रहने वाले भी एक प्रकार के गूँगे हैं।
  7. 07कठिन शब्दार्थ: वज्र बहरा = जिसे बिलकुल सुनाई न देता हो; अस्फुट = अस्पष्ट; पल्लेदारी = पीठ पर अनाज या सामान इत्यादि ढोने का कार्य; कांकल = गले के भीतर की घाँटी; विक्षुब्ध = अशांत।
Questions

Frequently asked questions

01

गूँगे कहानी के लेखक कौन हैं?

इस कहानी के लेखक रांगेय राघव (सन् 1923–1962) हैं। उनका जन्म आगरा में हुआ था और उन्होंने आगरा विश्वविद्यालय से हिंदी में एम.ए. और पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की थी।

02

Gunge kahani mein kaun kaun se patra hain?

कहानी के मुख्य पात्र हैं: गूँगा-बहरा किशोर (केंद्रीय पात्र), चमेली (मालकिन), बसंता (चमेली का बेटा), शकुंतला (चमेली की बेटी), और सुशीला।

03

कहानी का शीर्षक 'गूँगे' बहुवचन में क्यों है जबकि कहानी में एक ही गूँगा पात्र है?

लेखक ने कहानी के अंत में स्पष्ट किया है — 'और ये गूँगे--- अनेक-अनेक हो संसार में भिन्न-भिन्न रूपों में छा गए हैं µ जो कहना चाहते हैं, पर कह नहीं पाते।' अर्थात् समाज में ऐसे अनेक लोग हैं जो अन्याय और शोषण देखकर भी असमर्थता के कारण बोल नहीं पाते — वे सब 'गूँगे' हैं।

04

गूँगे ने अपने स्वाभिमानी होने का परिचय किस प्रकार दिया?

जब स्त्रियों ने पूछा कि वह खाना कहाँ से पाता है, तो गूँगे ने सीने पर हाथ मारकर और भुजाओं पर हाथ रखकर इशारे से बताया — 'हाथ फैलाकर कभी नहीं माँगा, भीख नहीं लेता' और 'मेहनत का खाता हूँ।' इससे उसके स्वाभिमान का पता चलता है।

05

गूँगे का बचपन कैसा था?

गूँगे की माँ पिता की मृत्यु के बाद उसे छोड़ गई। उसे बुआ और फूफा ने पाला, जो उसे मारते थे और चाहते थे कि वह बाजार में पल्लेदारी करके बारह-चौदह आने कमाकर लाए।

06

'मनुष्य की करुणा की भावना उसके भीतर गूँगेपन की प्रतिच्छाया है' — इस पंक्ति का आशय क्या है?

चमेली के पति के अनुसार, मनुष्य की करुणा की भावना उसके भीतर गूँगेपन की प्रतिच्छाया है — अर्थात् व्यक्ति बहुत कुछ करना चाहता है किंतु कर नहीं पाता। यह गूँगे की असहायता का प्रतीक है।

07

Gunge kahani ka kendriya sandesh kya hai?

कहानी का संदेश है कि दिव्यांगों के साथ संवेदनशील व्यवहार होना चाहिए ताकि वे समाज में अलग-थलग न पड़ें। साथ ही, जो लोग अन्याय देखकर भी अपने सामाजिक दायित्व के प्रति सचेत नहीं हैं, वे भी एक प्रकार से गूँगे-बहरे हैं।

08

बसंता ने गूँगे को मारा तो गूँगे ने क्या किया?

बसंता ने गूँगे को कसकर चपत जड़ दी। गूँगे का हाथ उठा किंतु वह अपने-आप रुक गया। उसकी आँखों में पानी भर आया और वह रो दिया। उसने बसंता पर हाथ नहीं चलाया — शायद इसलिए कि वह मालिक का बेटा था।

09

चमेली ने गूँगे को क्यों निकाल दिया?

गूँगे ने चोरी की थी, जिस पर चमेली ने पहले उससे सवाल किया। गूँगे ने अपना सिर झुका लिया। चमेली ने क्रोध में उसका हाथ पकड़कर दरवाजे के बाहर धकेलकर निकाल दिया।

10

गूँगा निकाले जाने के बाद क्या हुआ?

लगभग घंटेभर बाद शकुंतला और बसंता चिल्लाए। नीचे देखा तो गूँगा खून से भीगा हुआ था, सिर फटा हुआ था। वह सड़क के लड़कों से पिटकर आया था क्योंकि गूँगा होने के नाते वह उनसे दबना नहीं चाहता था। वह दरवाजे की दहलीज पर कुत्ते की तरह चिल्ला रहा था।

11

रांगेय राघव की प्रमुख रचनाएँ कौन सी हैं?

प्रमुख कहानी-संग्रह: रामराज्य का वैभव, देवदासी, समुद्र के फेन, अधूरी मूरत, जीवन के दाने, अंगारे न बुझे, ऐयाश मुर्दे, इंसान पैदा हुआ। प्रमुख उपन्यास: घरौंदा, विषाद-मठ, मुर्दों का टीला, सीधा-सादा रास्ता, अँधेरे के जुगनू, बोलते खंडहर, कब तक पुकारूँ।

12

क्या इस पाठ का PDF मुफ़्त डाउनलोड कर सकते हैं?

हाँ, यह मुफ़्त है, बिना साइन-अप।

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