Summary
Chapter 1 of the Class 7 Sanskrit NCERT textbook (Deepakam), 'Vande Bharatamataram' (वन्दे भारतमातरम्), एक संवाद-रूप पाठ है जिसमें माँ अपने बच्चों को 'वन्दे मातरम्' गीत का अर्थ, बङ्किमचन्द्र चट्टोपाध्याय द्वारा उसकी रचना का इतिहास, भारतमाता का सुंदर वर्णन और राष्ट्रध्वज के रंगों का संदेश समझाती है।
- 'वन्दे मातरम्' गीत का उद्गम — संवाद-शैली में माँ बताती है कि बङ्किमचन्द्र चट्टोपाध्याय ने १८८२ में 'आनन्दमठ' उपन्यास में यह गीत रचा। इसका अर्थ है 'मैं माता को प्रणाम करता/करती हूँ', और यह संस्कृत तथा बाँग्ला दोनों भाषाओं में विद्यमान है।
- भारतमाता का स्वरूप-वर्णन — पाठ भारतभूमि को माता के रूप में चित्रित करता है — हिमालय उनका मुकुट है और समुद्र उनके चरण धोता है। गङ्गा-यमुना जैसी पवित्र नदियाँ और अयोध्या-काशी जैसे तीर्थक्षेत्र इस मातृभूमि की शोभा बढ़ाते हैं।
- राष्ट्रध्वज का संदेश — तिरंगे के तीन रंगों का भाव समझाया गया है — केशर त्याग-शौर्य का, हरित किसानों के परिश्रम का, श्वेत शांति-सत्य का। मध्य का धर्मचक्र चौबीस तीलियों से यह सिखाता है कि कर्तव्यपथ पर निरंतर चलते रहो।
Key points & formulas
- 01पाठ संवाद-शैली में है — बच्चे माँ से पूछते हैं कि 'वन्दे मातरम्' जो आकाशवाणी और विद्यालय में सुनते हैं, उसका अर्थ क्या है।
- 02बङ्किमचन्द्रः चट्टोपाध्यायः ने १८८२ में 'आनन्दमठ' उपन्यास लिखा; 'वन्दे मातरम्' गीत उसी उपन्यास में है और संस्कृत एवं बाँग्ला दोनों भाषाओं में है।
- 03भारतमाता का वर्णन: पर्वतराज हिमालय उनका मुकुट है, रत्नाकर (समुद्र) उनके चरण धोता है; गङ्गा, यमुना, गोदावरी, कावेरी आदि पवित्र नदियाँ और अयोध्या, काशी, द्वारिका जैसे तीर्थक्षेत्र भारतभूमि पर सुशोभित हैं।
- 04राष्ट्रध्वज के रंगों का संदेश: केशरवर्ण = त्याग और शौर्य ('जयतु सैनिकः'); हरितवर्ण = किसानों का परिश्रम और भूमि की समृद्धि ('जयतु कृषकः'); श्वेतवर्ण = शांति, सत्य और वैज्ञानिकों का यश ('जयतु वैज्ञानिकः')।
- 05ध्वज के मध्य नीला धर्मचक्र है जिसमें चौबीस (२४) तीलियाँ (अराः) हैं; यह संदेश देता है — कर्तव्यपथ पर निरंतर चलते रहो, जीवन में थकान, आलस्य और प्रमाद का स्थान न हो।
- 06पाठ के अंत में बच्चों का भक्ति-गीत है: 'वयं बालका भारतभक्ताः / वयं बालिका भारतभक्ताः / वयं हि सर्वे भारतभक्ताः / पृथ्वीं स्वर्गं जेतुं शक्ताः।'
- 07कठिन शब्द-अर्थ: वन्दे = प्रणाम करता/ती हूँ; रत्नाकरः = समुद्र; तीर्थक्षेत्राणि = पुण्यक्षेत्र; सस्यश्यामला = उपजों से हरी-भरी; माहात्म्यम् = महिमा; मुकुटरूपेण = मुकुट रूप से।
Frequently asked questions
01वन्दे भारतमातरम् पाठ का अर्थ क्या है?
'वन्दे मातरम्' का अर्थ पाठ में इस प्रकार दिया गया है — 'अहं मातुः वन्दनं करोमि' अर्थात् 'मैं माता को प्रणाम करता/करती हूँ।' यह पाठ भारतमाता के स्वरूप और राष्ट्रध्वज के संदेश का भी वर्णन करता है।
02'वन्दे मातरम्' गीत किसने लिखा और कब?
महान् देशभक्त बङ्किमचन्द्रः चट्टोपाध्यायः ने १८८२ तमे वर्षे (1882 में) 'आनन्दमठ' नामक उपन्यास लिखा। 'वन्दे मातरम्' गीत उसी उपन्यास में है।
03'वन्दे मातरम्' गीत किस भाषा में है?
पाठ में माँ बताती है — 'एतत् गीतं संस्कृतं बाङ्ग्ला च इति भाषाद्वये वर्तते।' अर्थात् यह गीत संस्कृत और बाँग्ला दोनों भाषाओं में है।
04पाठ में भारतमाता का वर्णन कैसे किया गया है?
पाठ में बताया गया है कि पर्वतराज हिमालय मुकुट की तरह भारतमाता के मस्तक पर शोभित है और रत्नाकर समुद्र स्वयं उनके चरण धोता है। गङ्गा, यमुना, सरस्वती, सिन्धु, ब्रह्मपुत्र, गण्डकी, नर्मदा, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी जैसी पवित्र नदियाँ बहती हैं और अयोध्या, मथुरा, काशी, द्वारिका जैसे तीर्थक्षेत्र शोभायमान हैं।
05राष्ट्रध्वज के केशर रंग का क्या अर्थ है?
केशरवर्ण त्याग-परम्परा और शौर्य-परम्परा का सूचक है। जिन वीरों ने देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राण अर्पित किए, उनके बलिदान को यह रंग सूचित करता है। यह 'जयतु सैनिकः' कहने की प्रेरणा देता है।
06राष्ट्रध्वज के हरे रंग का क्या अर्थ है?
किसान भाइयों (कृषकबान्धवाः) के परिश्रम और पसीने से भारतभूमि हरी-भरी और समृद्ध हुई है। उनकी मेहनत की यह आभा हरे रंग के रूप में राष्ट्रध्वज में विराजित है। यह रंग 'जयतु कृषकः' कहने की प्रेरणा देता है।
07राष्ट्रध्वज के श्वेत रंग का क्या अर्थ है?
श्वेत (सफेद) रंग शांति और सत्य का द्योतक है। परमाणु विज्ञान, संगणक विज्ञान, चिकित्सा विज्ञान, अंतरिक्ष विज्ञान और आयुध विज्ञान जैसे क्षेत्रों में भारतीय वैज्ञानिकों का धवल यश इस रंग में विराजित है। यह 'जयतु वैज्ञानिकः' की प्रेरणा देता है।
08धर्मचक्र में कितनी तीलियाँ हैं और इसका क्या संदेश है?
ध्वज के मध्य स्थित नीले धर्मचक्र में चौबीस (चतुर्विंशतिः) अराः (तीलियाँ) हैं। यह चक्र संदेश देता है — 'कर्तव्यपथ पर निरंतर चलते रहो, रुको मत।' जीवन में थकान, आलस्य और प्रमाद के लिए कोई स्थान नहीं।
09Vande Bharatamataram Class 7 Sanskrit chapter ka summary Hindi mein
यह पाठ संवाद-रूप में है। बच्चे माँ से 'वन्दे मातरम्' का अर्थ पूछते हैं। माँ बताती है कि 1882 में बङ्किमचन्द्र चट्टोपाध्याय ने 'आनन्दमठ' उपन्यास में यह गीत लिखा और इसका अर्थ है 'मैं माता को प्रणाम करता हूँ।' पाठ में भारतमाता का वर्णन, पवित्र नदियाँ, पर्वत, तीर्थक्षेत्र और राष्ट्रध्वज के तीन रंगों व धर्मचक्र का संदेश दिया गया है।
10पाठ में 'रत्नाकरः' का क्या अर्थ है?
'रत्नाकरः' का अर्थ समुद्र है। पाठ में कहा गया है — 'अस्याः चरणौ प्रक्षालयति स्वयं रत्नाकरः समुद्रः' अर्थात् समुद्र स्वयं भारतमाता के चरण धोता है।
11स्वतंत्रता आंदोलन में 'वन्दे मातरम्' का क्या महत्व था?
पाठ में बताया गया है कि स्वतंत्रता के आंदोलन में सभी देशभक्त इस गीत को मंत्र की तरह गाते थे — 'सर्वे देशभक्ताः एतत् गीतं मन्त्रम् इव गायन्ति स्म।' आज भी यह गीत सुनकर-गाकर सभी भारतीय प्रेरित होते हैं।
12पाठ के अंत में कौन-सा गीत है?
पाठ के अंत में सभी मिलकर यह गाते हैं: 'वयं बालका भारतभक्ताः / वयं बालिका भारतभक्ताः / वयं हि सर्वे भारतभक्ताः / पृथ्वीं स्वर्गं जेतुं शक्ताः।'
13दीपकम् कक्षा ७ पाठ १ में कौन-सी नदियों का उल्लेख है?
पाठ में गङ्गा, यमुना, सरस्वती, सिन्धु, ब्रह्मपुत्र, गण्डकी, महानदी, नर्मदा, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी का उल्लेख है। पाठ कहता है — 'नद्यः अपि अस्माकं मातरः इव।'
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