Class 7 Sanskrit

Chapter 3 — मित्राय नमः

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Overview

Summary

Chapter 3 of the Class 7 Sanskrit NCERT textbook (Deepakam), 'Mitraya Namah' (मित्राय नमः), एक संवाद-आधारित पाठ है जो सूर्यनमस्कार के बारह मंत्रों, उसके लाभों पर एक श्लोक तथा चतुर्थी विभक्ति और दा-धातु के रूपों का परिचय कराता है।

  • सूर्यनमस्कार का स्वरूपयोगिता और मित्र प्रातःकाल उद्यान में योगशिक्षिका से सूर्यनमस्कार सीखते हैं। यह बारह आसनों का समाहार है, जिसमें प्रत्येक आसन से पहले 'ॐ मित्राय नमः' से 'ॐ भास्कराय नमः' तक एक मंत्र बोला जाता है।
  • प्रतिदिन अभ्यास के लाभआचार्या एक श्लोक द्वारा बताती हैं कि जो प्रतिदिन सूर्य को नमस्कार करते हैं, उन्हें आयु, बुद्धि (प्रज्ञा), बल, वीरता (वीर्य) और तेज (कान्ति) की प्राप्ति होती है।
  • चतुर्थी विभक्ति का प्रयोगव्याकरण में 'नमः' के साथ चतुर्थी विभक्ति का प्रयोग सिखाया गया है (जैसे भास्कराय नमः); दानार्थक 'दा' तथा 'यच्छ्' धातुओं के साथ भी चतुर्थी आती है। साथ में दा-धातु के लट् व लोट् लकार दिए गए हैं।
Essentials

Key points & formulas

  1. 01कथावस्तु: योगिता और मित्रों का संवाद — उद्यान से योगशिक्षिका तक; योगासन देखकर उत्साहित होना और सूर्यनमस्कार सीखना
  2. 02सूर्यनमस्कार: बारह (द्वादश) आसनों का समाहार; प्रत्येक आसन से पहले एक मंत्र — ॐ मित्राय नमः से ॐ भास्कराय नमः तक, सर्वान्त में ॐ सवितृसूर्यनारायणाय नमः
  3. 03केंद्रीय श्लोक: 'आदित्यस्य नमस्कारान् ये कुर्वन्ति दिने दिने। आयुः प्रज्ञा बलं वीर्यं तेजस्तेषां च जायते॥' — प्रतिदिन सूर्य-नमस्कार से आयु, बुद्धि, बल, वीरता और कान्ति मिलती है
  4. 04व्याकरण: 'नमः' के साथ चतुर्थी विभक्ति (जैसे भास्कराय नमः); दानार्थे 'दा' और 'यच्छ्' धातु के साथ भी चतुर्थी विभक्ति
  5. 05शब्दरूप: अकारान्त पुंलिङ्ग (छात्र, आदित्य), आकारान्त व ईकारान्त स्त्रीलिङ्ग (आचार्या, नदी), अकारान्त नपुंसकलिङ्ग (आसन, फल) — चतुर्थी विभक्ति के एकवचन, द्विवचन, बहुवचन
  6. 06धातुरूप: दा-धातु (परस्मैपद) के लट्-लकार और लोट्-लकार की पूर्ण रूपावली
  7. 07कठिन शब्द: प्रज्ञा = बुद्धि; वीर्यम् = वीरता/पराक्रम; तेजः = कान्ति/दीप्ति; आध्यात्मिकम् = अध्यात्म-विषयक
Questions

Frequently asked questions

01

Mitraya Namah paath ka arth kya hai?

'मित्राय नमः' का अर्थ है — 'मित्र (सूर्य के एक नाम) को नमस्कार'। यह सूर्यनमस्कार का प्रथम मंत्र है और इसी से पाठ का नाम लिया गया है।

02

इस पाठ में कौन-कौन से पात्र हैं?

इस पाठ में योगिता (छात्रा) और उसके मित्र (अन्य छात्र-छात्राएँ) तथा योगशिक्षिका (आचार्या) हैं।

03

सूर्यनमस्कार में कितने आसन होते हैं?

पाठ में आचार्या बताती हैं कि सूर्यनमस्कार द्वादश (बारह) आसनों का समाहार है।

04

सूर्यनमस्कार के बारह मंत्र कौन से हैं?

बारह मंत्र ये हैं — ॐ मित्राय नमः, ॐ रवये नमः, ॐ सूर्याय नमः, ॐ भानवे नमः, ॐ खगाय नमः, ॐ पूष्णे नमः, ॐ हिरण्यगर्भाय नमः, ॐ मरीचये नमः, ॐ आदित्याय नमः, ॐ सवित्रे नमः, ॐ अर्काय नमः, ॐ भास्कराय नमः। सर्वान्त में ॐ सवितृसूर्यनारायणाय नमः बोला जाता है।

05

पाठ के श्लोक का अर्थ क्या है?

श्लोक है — 'आदित्यस्य नमस्कारान् ये कुर्वन्ति दिने दिने। आयुः प्रज्ञा बलं वीर्यं तेजस्तेषां च जायते॥' अर्थात् जो लोग प्रतिदिन सूर्य को नमस्कार करते हैं, उन्हें आयु, बुद्धि, बल, वीरता और कान्ति प्राप्त होती है।

06

'नमः' के साथ कौन सी विभक्ति का प्रयोग होता है?

पाठ में नियम दिया गया है — 'नमः' शब्द के योग में चतुर्थी विभक्ति लगती है। जैसे — 'भास्कराय नमः' (भास्कर को नमस्कार)।

07

दा-धातु के साथ कौन सी विभक्ति आती है और उदाहरण क्या है?

दा-धातु (देना) और यच्छ्-धातु के साथ दानार्थे चतुर्थी विभक्ति का प्रयोग होता है। जैसे — 'शिक्षकः छात्राय पुस्तकं ददाति।' (शिक्षक छात्र को पुस्तक देता है।)

08

सूर्यनमस्कार से क्या लाभ होते हैं?

पाठ के अनुसार सूर्यनमस्कार से शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक बल बढ़ता है तथा आयु, प्रज्ञा (बुद्धि), बल, वीर्य और तेज (कान्ति) की प्राप्ति होती है।

09

What is the meaning of 'prajna' in this lesson?

पाठ में 'प्रज्ञा' का अर्थ मेधा (बुद्धि/Intelligence) दिया गया है।

10

विश्वयोगदिवस कब और क्यों मनाया जाता है?

पाठ के अनुसार जगत में सभी लोग जून मास के 21वें दिन को विश्वयोगदिवस के रूप में मनाते हैं।

11

योगसूत्र के प्रणेता कौन हैं और इसमें कितने सूत्र हैं?

पाठ के योग्यताविस्तर भाग के अनुसार योगसूत्र के प्रणेता महर्षि पतञ्जलि हैं। इस ग्रंथ में 196 सूत्र हैं जिनमें शरीर और मन के स्वास्थ्य से संबंधित विषय हैं।

12

हठयोगप्रदीपिका क्या है?

पाठ के अनुसार हठयोगप्रदीपिका स्वात्माराम स्वामी द्वारा विरचित ग्रंथ है जिसमें विविध आसनों का विवरण मिलता है।

13

क्या यह अध्याय की PDF मुफ़्त है?

हाँ, बिना साइन-अप के मुफ़्त डाउनलोड करें।

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