Summary
Chapter 15 of the Class 7 Sanskrit NCERT textbook (Deepakam), 'Parishishtam 2: Dhaturupani' (परिशिष्टम् २: धातुरूपाणि), एक परिशिष्ट है जो परस्मैपदी व आत्मनेपदी धातुओं के पाँच लकारों — लट्, लृट्, लङ्, लोट् और विधिलिङ् — की रूप-तालिकाएँ तथा स्वरसन्धि के नियम प्रस्तुत करता है।
- धातु के प्रकार और पाँच लकार — धातु तीन प्रकार के होते हैं — परस्मैपदी, आत्मनेपदी और उभयपदी, प्रत्येक के तिङ्-प्रत्यय भिन्न। परिशिष्ट लट् (वर्तमान), लृट् (भविष्यत्), लङ् (भूत), लोट् (आज्ञा) और विधिलिङ् (विधि) की विस्तृत रूप-तालिकाएँ देता है।
- प्रमुख धातुओं के रूप — मुख्य धातु 'पठ्' के साथ अस्, कृ, श्रु, दा, ज्ञा, क्री जैसे विशेष धातुओं के रूप भी हैं। लङ् में 'अ'-उपसर्ग जुड़ता है (अपठत्, अकरोत्) और 'अस्' का भविष्यत् 'भू' धातु से बनता है (भविष्यति)।
- स्वरसन्धि के नियम — 'अधिकं जानीमः' खण्ड सन्धि के तीन प्रकार (स्वर, व्यञ्जन, विसर्ग) बताता है और स्वरसन्धि के चार प्रमुख भेद उदाहरण सहित देता है — सवर्णदीर्घ (तत्रापि), गुण (सुरेन्द्रः), वृद्धि (एकैकम्) और यण् (इत्यपि)।
Key points & formulas
- 01धातु तीन प्रकार के होते हैं — (१) परस्मैपदी, (२) आत्मनेपदी और (३) उभयपदी; प्रत्येक के तिङ्-प्रत्यय भिन्न होते हैं।
- 02लट्-लकार (वर्तमानकाल): 'पठ्' (परस्मैपदी) और 'भाष्' (आत्मनेपदी) की पूर्ण रूप-तालिका; विशेष धातु — अस्, कृ, श्रु, दा, ज्ञा, क्री के रूप भी दिए गए हैं।
- 03लृट्-लकार (भविष्यत्काल): 'पठ्' → पठिष्यति, 'लिख्' → लेखिष्यति; 'अस्' धातु का भविष्यत् रूप 'भू' धातु से बनता है (भविष्यति)।
- 04लङ्-लकार (भूतकाल): सभी रूपों में 'अ'-उपसर्ग (अगम) जुड़ता है; जैसे 'पठ्' → अपठत्, 'अस्' → आसीत्, 'कृ' → अकरोत्।
- 05लोट्-लकार और विधिलिङ्-लकार: आज्ञा, प्रार्थना, विधि, निमन्त्रण और आमन्त्रण के प्रसंगों में प्रयुक्त; जैसे पठतु (लोट्), पठेत् (विधिलिङ्)।
- 06सन्धि का परिचय: तीन प्रकार — स्वरसन्धि (अच्), व्यञ्जनसन्धि (हल्), विसर्गसन्धि; स्वरसन्धि के ७ भेद हैं।
- 07प्रमुख स्वरसन्धियाँ — सवर्णदीर्घ (अ+अ=आ, जैसे तत्रापि), गुण (अ+इ=ए, जैसे सुरेन्द्रः; अ+उ=ओ, जैसे परोपकारः), वृद्धि (अ+ए=ऐ, जैसे एकैकम्), यण् (इ+अ=य, जैसे इत्यपि)।
Frequently asked questions
01परिशिष्टम् २ धातुरूपाणि का मुख्य विषय क्या है?
इस परिशिष्ट में संस्कृत के प्रमुख धातुओं के पाँच लकारों — लट् (वर्तमान), लृट् (भविष्यत्), लङ् (भूत), लोट् (आज्ञार्थ) और विधिलिङ् (विध्यर्थ) — की विस्तृत रूप-तालिकाएँ दी गई हैं।
02धातु कितने प्रकार के होते हैं और उनके नाम क्या हैं?
धातु तीन प्रकार के होते हैं — (१) परस्मैपदी-धातु, (२) आत्मनेपदी-धातु और (३) उभयपदी-धातु।
03लट्-लकार किस काल को कहते हैं और उसका उदाहरण क्या है?
लट्-लकार वर्तमानकाल को कहते हैं। जैसे 'पठ्' धातु — प्रथमपुरुष एकवचन 'पठति' (वह पढ़ता है)।
04'पठ्' धातु के लट्-लकार में तीनों पुरुषों के एकवचन रूप क्या हैं?
प्रथमपुरुष — पठति; मध्यमपुरुष — पठसि; उत्तमपुरुष — पठामि।
05लृट्-लकार का प्रयोग कब होता है और 'पठ्' का उदाहरण बताएँ।
लृट्-लकार भविष्यत्काल में प्रयुक्त होता है। 'पठ्' धातु — प्रथमपुरुष एकवचन 'पठिष्यति' (वह पढ़ेगा)।
06'अस्' धातु का भविष्यत्काल (लृट्-लकार) में रूप कौन-सा है?
'अस्' धातु के लृट्-लकार में 'भू' धातु का आदेश होता है। प्रथमपुरुष एकवचन — 'भविष्यति'।
07लङ्-लकार किस काल को दर्शाता है और 'पठ्' के भूतकाल रूप बताएँ।
लङ्-लकार भूतकाल को दर्शाता है। 'पठ्' धातु — प्रथमपुरुष: अपठत्, अपठताम्, अपठन्।
08लोट्-लकार किन प्रसंगों में प्रयुक्त होता है?
लोट्-लकार आज्ञार्थ, प्रार्थनार्थ, विध्यर्थ, निमन्त्रणार्थ और आमन्त्रणार्थ में प्रयुक्त होता है। जैसे 'पठतु' (वह पढ़े)।
09विधिलिङ्-लकार क्या है और उसका उदाहरण क्या है?
विधिलिङ्-लकार भी आज्ञा, प्रार्थना, विधि और निमन्त्रण आदि के लिए प्रयुक्त होता है। जैसे 'पठेत्' (उसे पढ़ना चाहिए)।
10आत्मनेपदी धातु के लट्-लकार में 'भाष्' के रूप कैसे होते हैं?
आत्मनेपदी धातुओं में 'ते'-अन्त प्रत्यय लगते हैं। 'भाष्' धातु — प्रथमपुरुष: भाषते, भाषेते, भाषन्ते।
11सन्धि कितने प्रकार की होती है और उनके नाम क्या हैं?
व्याकरण में प्रमुखतः तीन प्रकार की सन्धि होती है — (१) स्वरसन्धि (अच्-सन्धि), (२) व्यञ्जनसन्धि (हल्-सन्धि) और (३) विसर्गसन्धि।
12सवर्णदीर्घसन्धि का नियम और उदाहरण क्या है?
जब 'अ, इ, उ, ॠ' के बाद समान वर्ण आए तो दोनों के स्थान पर एक दीर्घ वर्ण बनता है। जैसे — तत्र + अपि = तत्रापि (अ + अ = आ), रवि + इन्द्रः = रवीन्द्र (इ + इ = ई)।
13गुणसन्धि का नियम क्या है?
अ/आ के बाद इ/ई हो तो 'ए', उ/ऊ हो तो 'ओ', और ॠ हो तो 'अर्' आदेश होता है। जैसे — सुर + इन्द्रः = सुरेन्द्रः (अ + इ = ए), पर + उपकारः = परोपकारः (अ + उ = ओ)।
14What is Parishishtam 2 Dhaturupani in Class 7 Sanskrit Deepakam?
Parishishtam 2 Dhaturupani is the second appendix of the Class 7 Sanskrit textbook 'Deepakam'. It contains complete verb-conjugation tables (dhaturupani) for five lakaras — Lat (present), Lrit (future), Lang (past), Lot (imperative) and Vidhiling (optative) — for parasmaipadi and atmanepadi verb roots, plus an introduction to Sanskrit sandhi rules.
15क्या यह अध्याय की PDF मुफ़्त है?
हाँ, बिना साइन-अप के मुफ़्त डाउनलोड करें।
More chapters in Deepakam (दीपकम्)
Read Chapter 15 of Deepakam (दीपकम्), the Class 7 Sanskrit NCERT textbook (2026-27 edition), online for free: the complete chapter as published by NCERT with every diagram, solved example and exercise, with a chapter summary, question answers and revision notes. Open the NCERT PDF above, or browse all NCERT Class 7 textbooks.
Read offline with notes, solutions & mock tests
CBSE Prepmaster — free on iOS & Android