Summary
Chapter 10 of the Class 7 Sanskrit NCERT textbook (Deepakam), 'Dashamah Kah' (दशमः कः?), एक हास्यपूर्ण कथा-पाठ है जो दस बालकों की कहानी के माध्यम से क्रमसंख्यावाचक शब्दों (प्रथमः, द्वितीयः... दशमः) का परिचय देता है और सिखाता है कि गिनने वाला स्वयं ही दसवाँ था।
- 'दशमः कः?' की कथा — दस बालक नदी में स्नान कर लौटते हैं; गणना करते समय नायक स्वयं को भूलकर नौ ही गिनता है और सब समझते हैं कि दसवाँ डूब गया। एक पथिक सच बताता है — 'दशमः त्वम् असि' — तुम ही दसवें हो।
- स्वयं को भी गिनने की सीख — कथा का नैतिक यह है कि दूसरों को गिनते समय व्यक्ति को स्वयं को भी गिनना चाहिए; इसी भूल से सारी समस्या उत्पन्न हुई थी।
- क्रमसंख्या और संस्कृत संख्याएँ — पाठ पूरण प्रत्ययान्त क्रमसंख्यावाचक शब्द (एकम्→प्रथमः, दश→दशमः) तीनों लिंगों में तथा १ से १०० तक की संस्कृत संख्याएँ सिखाता है; साथ में संकटनाशन श्रीगणेशस्तोत्र भी दिया गया है।
Key points & formulas
- 01पाठ का विषय: संस्कृत ओलम्पियाड संवाद और 'दशमः कः?' कथा के माध्यम से क्रमसंख्यावाचक शब्दों (पूरण प्रत्ययान्त) का व्यावहारिक परिचय।
- 02कथावस्तु: दश बालक नदी में स्नान कर लौटे; नायक स्वयं को भूलकर नौ ही गिनता है; एक पथिक ने समझाया — 'दशमः त्वम् असि' (तुम ही दसवें हो)।
- 03केंद्रीय शिक्षा: दूसरों को गिनते समय स्वयं को भी गिनना चाहिए — यही भूल सारी समस्या की जड़ थी।
- 04प्रमुख पात्र: नायकः (बालकों का नेता), पथिकः (यात्री जिसने सत्य बताया), और दश बालक।
- 05कठिन शब्द: तीर्त्वा = तैरकर; मग्नः = डूब गया; विषण्णाः = दुःखी; तूष्णीम् = मौन; पथिकः = यात्री; प्रहृष्टाः = प्रसन्न।
- 06व्याकरण — क्रमसंख्यावाचक शब्द (पूरणार्थे): एकम् → प्रथमः/प्रथमा/प्रथमम्; दश → दशमः/दशमी/दशमम् — १ से २० तक तीनों लिंगों में तालिका दी गई है।
- 07योग्यताविस्तरः में १ से १०० तक संस्कृत संख्याएँ तथा संकटनाशनं श्रीगणेशस्तोत्र है, जिसमें क्रमसंख्याओं से गणेश के बारह नाम गाए गए हैं।
Frequently asked questions
01'दशमः कः?' पाठ किस बारे में है?
यह पाठ दश बालकों की कथा है जो नदी में स्नान कर लौटते हैं। नायक गणना में स्वयं को भूल जाता है और नौ ही गिनता है। एक पथिक बताता है — 'दशमः त्वम् असि' (तुम ही दसवें हो)। साथ ही कक्षा-संवाद और क्रमसंख्यावाचक शब्दों की तालिका भी है।
02Dashamah Kah path mein dashamah kaun tha?
नायकः स्वयं दशमः था। वह दूसरे बालकों को गिनते समय अपने आप को नहीं गिनता था, इसलिए हर बार नौ ही आते थे। पथिक ने उसे बताया — 'दशमः त्वम् असि।'
03पाठ में पथिकः ने क्या किया?
पथिकः (यात्री) ने दुःखी बालकों से उनके दुःख का कारण पूछा। उसने स्वयं सभी को गिना और पाया कि दश बालक हैं। फिर उसने नायक को गिनने को कहा — जब नौ ही गिने, तब पथिक ने कहा: 'दशमः त्वम् असि।' सभी बालक प्रहृष्टाः होकर घर चले गए।
04बालकों ने दशमः को नदी में डूबा हुआ क्यों समझा?
क्योंकि नायक ने गणना करते समय स्वयं को नहीं गिना — उसे नौ ही दिखे। दूसरे बालक ने भी गणना की, फिर भी नौ ही आए। इसलिए उन्होंने निश्चय किया कि दशमः नद्यां मग्नः (नदी में डूब गया) है।
05क्रमसंख्यावाचक शब्द (पूरण प्रत्यय) क्या होते हैं?
संख्यावाचक शब्दों का क्रम बताने के लिए पूरण प्रत्यय लगते हैं — जैसे एकम् → प्रथमः (पहला), द्वे → द्वितीयः (दूसरा), त्रीणि → तृतीयः (तीसरा), दश → दशमः (दसवाँ)। इनके तीनों लिंगों में रूप होते हैं — पुंलिंग, स्त्रीलिंग, नपुंसकलिंग।
06पाठ में संस्कृत ओलम्पियाड में कौन-कौन से स्थान पर रहे?
विद्याधरः प्रथमं स्थानं प्राप्तवान्, प्रीतिः द्वितीयं स्थानं, हेमलता तृतीयं स्थानं प्राप्तवती। एक बालक चतुर्थः, एक पञ्चमी और एक नवमी स्थान पर था/थी। दशमः कौन है — यह किसी को ज्ञात नहीं था।
07'विषण्णाः' और 'प्रहृष्टाः' का अर्थ क्या है?
विषण्णाः = खिन्नाः = दुःखी; प्रहृष्टाः = आनन्दिताः = प्रसन्न। जब बालकों को लगा दशमः डूब गया, वे विषण्णाः तूष्णीम् अतिष्ठन् (चुपचाप खड़े रहे); पथिक के स्पष्टीकरण के बाद वे प्रहृष्टाः होकर घर गए।
08What is 'dashamah' in Sanskrit?
दशमः का अर्थ है 'दसवाँ' (tenth)। यह दश (१०) का क्रमसंख्यावाचक पुंलिंग रूप है। स्त्रीलिंग में दशमी और नपुंसकलिंग में दशमम् होता है।
09पाठ के योग्यताविस्तरः खंड में क्या सिखाया गया है?
योग्यताविस्तरः में तीन भाग हैं — (१) १ से २० तक क्रमसंख्यावाचक शब्दों की तीनों लिंगों में तालिका, (२) १ से १०० तक संस्कृत संख्याएँ (एकम् से शतम् तक), और (३) संकटनाशनं श्रीगणेशस्तोत्र जिसे पढ़ने और गाने का निर्देश है।
10गणेशस्तोत्र में क्रमसंख्याओं का उपयोग कैसे हुआ?
संकटनाशनं श्रीगणेशस्तोत्र में गणेश के बारह नाम क्रमसंख्याओं से बताए गए हैं — 'प्रथमं वक्रतुण्डं च एकदन्तं द्वितीयकम्, तृतीयं कृष्णपिङ्गाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम्...' इस प्रकार दशमं तु विनायकम्, एकादशं गणपतिम्, द्वादशं तु गजाननम् तक जाते हैं।
11'तूष्णीम् अतिष्ठन्' का क्या अर्थ है?
तूष्णीम् = निःशब्दम् = मौन; अतिष्ठन् = खड़े रहे। अर्थात् बालक मौन होकर चुपचाप खड़े रहे — यह उनके गहरे दुःख और चिंता को व्यक्त करता है।
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