Summary
Chapter 5 of the Class 7 Sanskrit NCERT textbook (Deepakam), 'Seva Hi Paramo Dharma' (सेवा हि परमो धर्मः), प्रसिद्ध चिकित्सक नागार्जुन की एक चतुर परीक्षा की कथा है जो सिद्ध करती है कि सेवाभावना के बिना कोई सच्चा चिकित्सक नहीं बन सकता — सेवा ही परम धर्म है।
- नागार्जुन की परीक्षा — रसायनशास्त्रज्ञ-चिकित्सक नागार्जुन ने दो युवकों को दो दिन में रसायन बनाकर राजमार्ग से लाने को कहा और मार्ग पर एक रोगी रखकर परीक्षा ली। प्रथम युवक रसायन तो लाया पर रोगी की उपेक्षा कर दी।
- सेवा ही परम धर्म — द्वितीय युवक ने रोगी को घर ले जाकर दो दिन सेवा की और रसायन न बना सका, फिर भी नागार्जुन ने उसी को चुना — 'सेवाभावनां विना चिकित्सकः कथं भवेत्?' सत्य, करुणा, उदारता और परोपकार ही जीवन की वास्तविक सफलता हैं।
- भूतकाल का व्याकरण — पाठ भूतकाल के दो प्रयोग सिखाता है — धातु के साथ क्तवतु प्रत्यय (पठितवान्/पठितवती) तथा वर्तमानकाल क्रियापद के साथ 'स्म' अव्यय (गच्छति स्म = गया था)।
Key points & formulas
- 01कथावस्तु: नागार्जुन (प्रसिद्ध रसायनशास्त्रज्ञ एवं चिकित्सक) को सहायक की आवश्यकता थी; उन्होंने महाराज की सहायता से दो युवकों को बुलाया और राजमार्ग पर एक रोगी रखकर उनकी परीक्षा ली।
- 02केंद्रीय शिक्षा: नागार्जुन के शब्दों में — 'सेवाभावनां विना चिकित्सकः कथं भवेत्?' — सेवाभावना के बिना कोई सच्चा चिकित्सक नहीं बन सकता; सेवा ही परम धर्म है।
- 03प्रमुख पात्र: नागार्जुन (रसायनशास्त्रज्ञ-चिकित्सक), महाराज, प्रथम युवक (यन्त्रवत् कार्य करने वाला), द्वितीय युवक (रोगी की सेवा करने वाला)।
- 04मानवीय गुण: पाठ में बताया गया है कि सत्यं, करुणा, उदारता, सेवा, परोपकारः, अक्रोध — ये मानवीय गुण जीवन की वास्तविक सफलता के लिए आवश्यक हैं।
- 05कठिन शब्द: रसायनशास्त्रज्ञः = रसायन शास्त्र का विशेषज्ञ; यन्त्रवत् = यन्त्र की भाँति; शोचनीया = दयनीय/दुःखदायी; खिन्नः = दुःखी; निरतः = मग्न।
- 06व्याकरण: भूतकाल के दो प्रयोग — (१) धातु + क्तवतु प्रत्यय (पुंलिंग: पठितवान्; स्त्रीलिंग: पठितवती); (२) वर्तमानकाल क्रियापद + स्म अव्यय (गच्छति स्म = गया था)।
- 07योग्यताविस्तर में स्वास्थ्यरक्षण-सम्बन्धी दो संस्कृत श्लोक हैं — ब्राह्म मुहूर्त में उठने का महत्त्व और भोजन के बाद तक्र, दिन के अंत में दूध तथा रात को जल पीने के नियम।
Frequently asked questions
01Seva hi paramo dharma paath ka arth kya hai?
इस पाठ का अर्थ है — 'सेवा ही सर्वोच्च धर्म है।' कथा के माध्यम से सिखाया गया है कि दूसरों की मदद करना सबसे बड़ा मानवीय कर्तव्य है।
02नागार्जुन कौन थे?
पाठ के अनुसार नागार्जुन एक प्रसिद्ध रसायनशास्त्रज्ञ (रसायन विशेषज्ञ) और चिकित्सक थे जो अहोरात्र (दिन-रात) प्रयोगशाला में कार्य करते थे।
03नागार्जुन ने दोनों युवकों को क्या कार्य दिया?
नागार्जुन ने दोनों युवकों को दो दिन में एक विशेष रसायन बनाकर लाने को कहा और यह भी निर्देश दिया कि राजमार्ग (मुख्य सड़क) से आएँ।
04प्रथम युवक ने क्या किया?
प्रथम युवक ने अपने पिता की उदरवेदना और माता के ज्वर की परवाह न करते हुए रसायन बना लिया और नागार्जुन को दे दिया। उसने राजमार्ग पर पड़े रोगी को देखकर भी आगे चला गया।
05द्वितीय युवक ने क्या किया?
द्वितीय युवक ने राजमार्ग पर एक रोगी को दयनीय अवस्था में देखा और उसे अपने घर ले गया। दो दिन उसकी सेवा में लगा रहा जब तक वह स्वस्थ न हो गया; इसलिए रसायन नहीं बना सका।
06नागार्जुन ने द्वितीय युवक को ही क्यों चुना?
नागार्जुन ने बताया कि उन्होंने जानबूझकर दोनों को राजमार्ग से भेजा था क्योंकि वे जानते थे कि वहाँ रोगी है। प्रथम युवक रोगी को देखकर भी आगे बढ़ गया — वह यन्त्रवत् काम करता है। सेवाभावना के बिना चिकित्सक नहीं बन सकता।
07यन्त्रवत् का अर्थ क्या है?
यन्त्रवत् का अर्थ है 'यन्त्र की भाँति' अर्थात् मशीन की तरह — बिना किसी भावना के केवल काम करना। पाठ में नागार्जुन ने प्रथम युवक के लिए यही शब्द प्रयोग किया।
08मानवीय गुण कौन-कौन से बताए गए हैं?
पाठ में मानवीय गुण बताए गए हैं — सत्यं, करुणा, उदारता, सेवा, परोपकारः, अक्रोध इत्यादि। ये गुण जीवन की वास्तविक सफलता के लिए आवश्यक हैं।
09क्तवतु प्रत्यय का प्रयोग किस काल में होता है?
क्तवतु प्रत्यय का प्रयोग भूतकाल (past tense) में होता है। जैसे — पठ् + क्तवतु = पुंलिंग में पठितवान् और स्त्रीलिंग में पठितवती।
10स्म अव्यय का प्रयोग कैसे होता है?
वर्तमानकाल की क्रिया के साथ 'स्म' अव्यय जोड़ने से भूतकाल का अर्थ बनता है। जैसे — 'गच्छति स्म' का अर्थ है 'जाता था'; 'लिखति स्म' का अर्थ है 'लिखता था।'
11खिन्नः और शोचनीया का हिंदी अर्थ क्या है?
खिन्नः का अर्थ है 'दुःखी' — द्वितीय युवक खिन्न होकर आया क्योंकि वह रसायन नहीं बना सका। शोचनीया का अर्थ है 'दयनीय / दुःखदायी' — रोगी की परिस्थिति शोचनीया थी।
12निरतः का अर्थ क्या है?
निरतः का अर्थ है 'मग्न / लीन'। पाठ में बताया गया है कि द्वितीय युवक दो दिन रोगी की सेवा में निरत (लीन) रहा।
13पाठ में स्वास्थ्यरक्षण के क्या नियम बताए गए हैं?
योग्यताविस्तर खण्ड में दो संस्कृत श्लोकों में बताया गया है कि स्वस्थ रहने के लिए ब्राह्म मुहूर्त में उठना चाहिए, भोजन के बाद तक्र (छाछ), दिन के अंत में दूध और रात को जल पीने से रोग नहीं होता।
14क्या यह अध्याय की PDF मुफ़्त है?
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