Summary
पाठ 1 — "सीखो" कक्षा 3 की एनसीईआरटी हिंदी पाठ्यपुस्तक वीणा का एक कविता है जिसमें कवि शिवनाथ सिंह बच्चों को प्रकृति की चीज़ों — फूल, भौंरा, सूरज, दीपक, नदी, पेड़, हवा — से जीवन के अच्छे गुण सीखने की बात कहते हैं।
- कविता का सारांश — इस कविता में फूल, भौंरा, सूरज, दीपक, पृथ्वी और जलधारा जैसी प्रकृति की चीज़ों से हँसना, गाना, नम्र रहना, अँधेरा दूर करना और आगे बढ़ना सीखने की बात कही गई है।
- कवि का नाम — इस कविता के कवि शिवनाथ सिंह हैं। यह कविता वीणा (कक्षा 3 हिंदी) की पहली इकाई 'हमारा पर्यावरण' में है।
- मुख्य भाव — प्रकृति हमारी सबसे बड़ी गुरु है। फूल से हँसना, सूरज से जगाना, दीपक से अँधेरा हटाना, और नदी से आगे बढ़ना — ये सब गुण हम अपने जीवन में अपना सकते हैं।
- पाठ से सीख — हमें हमेशा नम्र रहना चाहिए, दूसरों की मदद करनी चाहिए और जीवन में निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए — ठीक जैसे पेड़, नदी और सूरज करते हैं।
Key points & formulas
- 01कविता के कवि शिवनाथ सिंह हैं
- 02फूलों से हँसना और भौंरों से गाना सीखने की बात है
- 03झुकी डालियों से नम्रता और शीश झुकाना सीखने को कहा गया है
- 04सूरज से जगना और जगाना, दीपक से अँधेरा दूर करना सीखें
- 05पृथ्वी से सच्ची सेवा और जलधारा से आगे बढ़ना सीखें
- 06शब्दार्थ: तरु = पेड़, शीश = सिर, पृथ्वी = धरती, पथ = रास्ता, हरना = दूर करना
- 07यह कविता इकाई एक — हमारा पर्यावरण — का पहला पाठ है
Frequently asked questions
01कविता 'सीखो' के कवि कौन हैं?
इस कविता के कवि शिवनाथ सिंह हैं।
02यह कविता किस पाठ्यपुस्तक में है?
यह कविता कक्षा 3 की एनसीईआरटी हिंदी पाठ्यपुस्तक 'वीणा' में है। यह पाठ 1 है।
03कविता में फूलों से क्या सीखने की बात है?
कविता में फूलों से हमेशा हँसते रहना सीखने की बात कही गई है।
04भौंरों से हमें क्या सीखना चाहिए?
भौंरों से हमेशा गाते रहना सीखने की बात कविता में है।
05झुकी डालियों से क्या सीख मिलती है?
पेड़ की झुकी डालियों से नम्रता के साथ सिर झुकाना यानी विनम्र रहना सीखने की बात है।
06सूरज की किरणों से क्या सीखें?
सूरज की किरणों से जगना और दूसरों को जगाना — यानी खुद भी सजग रहें और दूसरों को भी जगाएँ — सीखने की बात है।
07दीपक से हमें क्या सीखना चाहिए?
दीपक से जितना हो सके अँधेरा दूर करना सीखने की बात कविता में है।
08पृथ्वी से क्या सीखें?
पृथ्वी से सच्ची सेवा करना सीखने की बात कही गई है।
09जलधारा से क्या सीख मिलती है?
जलधारा से जीवन के रास्ते पर हमेशा आगे बढ़ते रहना सीखने की बात है।
10धुएँ से क्या सीखें?
धुएँ से हमेशा ऊँचे उठते रहना — यानी ऊँचे लक्ष्य की ओर बढ़ना — सीखने की बात है।
11कविता में 'तरु' शब्द का अर्थ क्या है?
'तरु' का अर्थ पेड़ होता है।
12यह कविता किस इकाई में है?
यह कविता इकाई एक — 'हमारा पर्यावरण' में है और यह वीणा का पहला पाठ है।
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