Summary
पाठ 5 — "आम का पेड़" कक्षा 3 की एनसीईआरटी हिंदी पाठ्यपुस्तक वीणा का एक कहानी पाठ है, जिसमें सौरभ नाम का एक बच्चा मीठे आम खाकर खुद आम की गुठली बोता है, धैर्य से उसकी देखभाल करने का निश्चय करता है, और यह सीखता है कि पेड़ को बड़ा होने में कई साल लगते हैं।
- कहानी का सारांश — गर्मियों में सौरभ के चाचाजी ने उसे बगीचे के आम भेजे। वे आम बहुत मीठे थे, इसलिए सौरभ ने भी अपने बगीचे में आम की गुठली बो दी और रोज़ पानी देने लगा। कुछ दिन बाद बारिश में उसे लाल कोंपलों वाला छोटा-सा पौधा दिखा, जिसे देखकर वह और उसकी बहन प्रिया बहुत खुश हुए।
- मुख्य भाव — अच्छे काम में धैर्य रखना ज़रूरी है। पिताजी ने बताया कि पौधे को बड़ा पेड़ बनने में चार-पाँच साल लगेंगे, तब भी सौरभ ने कहा कि वे पौधे की देखभाल करते रहेंगे।
- मुख्य पात्र — सौरभ (मुख्य पात्र — जिसने गुठली बोई), प्रिया (सौरभ की छोटी बहन), और पिताजी (जिन्होंने पेड़ के बारे में जानकारी दी)। चाचाजी ने आम भेजे थे, पर वे कहानी में सीधे नहीं आते।
- पाठ से सीख — किसी भी काम में जल्दी छोड़ देना सही नहीं है। पौधा उगने में समय लगता है, इसलिए नियमित देखभाल और धैर्य से काम करना चाहिए।
Key points & formulas
- 01सौरभ के चाचाजी ने गर्मियों में बगीचे के मीठे आम भेजे
- 02सौरभ ने बगीचे में आम की गुठली बोकर रोज़ पानी देना शुरू किया
- 03कई दिन बाद भी पौधा न निकलने पर उसने पानी देना बंद कर दिया
- 04एक बरसात के दिन उसे लाल कोंपलों वाला छोटा-सा पौधा दिखा
- 05पिताजी ने बताया — पौधे को बड़ा पेड़ बनने में चार-पाँच साल लगेंगे
- 06प्रिया थोड़ी उदास हुई, पर सौरभ ने कहा कि वे पौधे की देखभाल करते रहेंगे
- 07पाठ इकाई 1 — हमारा पर्यावरण का हिस्सा है
Frequently asked questions
01आम का पेड़ पाठ किस किताब में है?
यह पाठ कक्षा 3 की एनसीईआरटी हिंदी पाठ्यपुस्तक वीणा में है। यह पाठ 5 है और इकाई 1 — हमारा पर्यावरण का हिस्सा है।
02सौरभ के चाचाजी ने उसे क्या भेजा?
सौरभ के चाचाजी ने गर्मियों में अपने बगीचे के मीठे आमों की एक टोकरी भेजी।
03सौरभ ने आम की गुठली कैसे बोई?
सौरभ ने बगीचे में एक जगह थोड़ी मिट्टी खोदी, उसमें आम की गुठली डाली, ऊपर से मिट्टी डाली, और पानी छिड़क दिया। इसके बाद वह हर सुबह पानी देता रहा।
04सौरभ ने पानी देना क्यों बंद कर दिया?
कई दिन बीत जाने के बाद भी आम का पौधा नहीं निकला, इसलिए सौरभ ने पानी देना बंद कर दिया। उसे लगा कि पौधा शायद उगेगा नहीं।
05सौरभ को पौधा कब दिखा?
एक दिन जब हल्की-हल्की बारिश हो रही थी, सौरभ घूमते हुए बगीचे में उसी जगह पहुँचा तो उसे लाल कोंपलों वाला एक छोटा-सा पौधा दिखा।
06पौधा देखकर सौरभ और प्रिया ने क्या किया?
पौधा देखते ही सौरभ बहुत खुश हो गया। वह दौड़कर अपनी छोटी बहन प्रिया को लेकर आया। प्रिया भी खुशी से उछल पड़ी। फिर दोनों भागते हुए पिताजी के पास गए।
07पिताजी ने पेड़ के बारे में क्या बताया?
पिताजी ने बताया कि छोटे पौधे को बड़ा पेड़ बनने में बहुत समय लगेगा — लगभग चार-पाँच साल। तब इसका तना मोटा होगा, बड़ी-बड़ी शाखाएँ होंगी, और उसके बाद आम लगेंगे।
08प्रिया उदास क्यों हो गई?
पिताजी की बात सुनकर कि आम खाने के लिए चार-पाँच साल इंतजार करना होगा, प्रिया थोड़ी उदास हो गई।
09सौरभ ने प्रिया को क्या कहकर समझाया?
सौरभ ने कहा — कोई बात नहीं, हम पौधे की देखभाल करेंगे और एक दिन अवश्य इसके फल खाएंगे। इससे पता चलता है कि वह धैर्यवान है।
10इस पाठ से बच्चों को क्या सीख मिलती है?
इस पाठ से सीख मिलती है कि पेड़-पौधों की नियमित देखभाल ज़रूरी है और अच्छे काम में धैर्य रखना चाहिए। जल्दी हार मानने से सफलता नहीं मिलती।
11आम के कुछ प्रकारों के नाम क्या हैं जो पाठ में बताए गए हैं?
पाठ के अंत में दशहरी, सिंदूरी, और चौसा जैसे आम के प्रकारों के नाम दिए गए हैं। बच्चों से घर के बड़ों से और नाम पूछने को कहा गया है।
12गुठली वाले फल और बिना गुठली वाले फल में क्या अंतर है?
गुठली वाले फल जैसे आम और लीची के अंदर एक कठोर बीज (गुठली) होता है। बिना गुठली वाले फल जैसे केला में ऐसी कठोर गुठली नहीं होती। पाठ में बच्चों से ऐसे फलों की सूची बनाने को कहा गया है।
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