Summary
पाठ 9 — "प्रकृति पर्व — फूलदेई" कक्षा 3 की एनसीईआरटी हिंदी पाठ्यपुस्तक वीणा का एक गद्य पाठ है जिसमें जानकी और उसके मित्र उत्तराखंड के प्रसिद्ध बाल पर्व फूलदेई पर जंगल से फूल चुनकर हर घर की देहली पर अक्षत और फूल डालते हैं और गाते हुए आशीर्वाद देते हैं।
- पाठ का सारांश — जानकी और उसके मित्र हेमा, गीता, राधा, बीर, गोविंद और मनोज डलिया लेकर जंगल जाते हैं और बुरांस, फ्योंली जैसे फूल चुनते हैं। फिर 'फुलारी' बनकर हर घर की देहली पर फूल-अक्षत डालते और गाते हुए आशीर्वाद देते हैं, और बदले में चावल, गुड़ व पैसे पाते हैं।
- मुख्य भाव — फूलदेई पर्व बच्चों को प्रकृति प्रेम और सामाजिक सद्भाव की सीख बचपन से देता है। यह त्योहार लोकगीतों, मान्यताओं और परंपराओं से जुड़ने का अवसर भी देता है।
- फूलदेई पर्व क्या है — फूलदेई उत्तराखंड का एक प्रसिद्ध त्योहार है जिसे बच्चे मनाते हैं, इसलिए इसे 'बाल पर्व' कहा जाता है। यह चैत्र मास की संक्रांति को मनाया जाता है और वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है।
- सीख — यह पाठ सिखाता है कि मिलकर काम करने और प्रकृति से प्रेम रखने में आनंद है। बच्चे दिनभर थके पर प्रसन्न थे — यह मेहनत और खुशी का संदेश देता है।
Key points & formulas
- 01फूलदेई उत्तराखंड का प्रसिद्ध बाल पर्व है जो चैत्र मास की संक्रांति को मनाया जाता है
- 02जानकी और उसके मित्र जंगल से बुरांस और फ्योंली के फूल डलिया में इकट्ठा करते हैं
- 03फूल चुनने वाले बच्चों की टोली को 'फुलारी' कहते हैं
- 04फुलारी हर घर की देहली पर अक्षत और फूल डालकर गाती है — 'फूल देई, छम्मा देई...'
- 05घर वाले फुलारी को चावल, गुड़ और पैसे भेंट करते हैं
- 06जमा चावल और गुड़ से हलवा, छोई, साई और पापड़ी जैसे व्यंजन मिलकर बनाए और खाए जाते हैं
- 07बुरांस के फूल लाल होते हैं और फ्योंली के फूल पीले — दोनों पहाड़ों पर उगते हैं और औषधीय गुणों से भरपूर हैं
Frequently asked questions
01फूलदेई पर्व क्या है?
फूलदेई उत्तराखंड का एक प्रसिद्ध त्योहार है जो बच्चों द्वारा मनाया जाता है। इसीलिए इसे 'बाल पर्व' भी कहते हैं। यह वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है।
02फूलदेई कब मनाया जाता है?
यह पर्व चैत्र मास की संक्रांति के दिन मनाया जाता है। चैत्र माह हिंदू नववर्ष का पहला महीना होता है।
03जानकी के मित्रों के नाम क्या थे?
जानकी के मित्रों के नाम हेमा, गीता, राधा, बीर, गोविंद और मनोज थे।
04फुलारी किसे कहते हैं?
फूल चुनकर हर घर की देहली पर अक्षत और फूल डालने वाली बच्चों की टोली को 'फुलारी' कहते हैं।
05फुलारी कौन-सा गीत गाती है?
फुलारी गाती है — 'फूल देई, छम्मा देई, दैणी द्वार, भर भकार, ये देली कैं बारंबार नमस्कार, फूले द्वार।' इसका अर्थ है कि देहली फूलों से भरी रहे, घर में समृद्धि और अन्न के भंडार भरे रहें।
06फूलदेई पर बच्चे कौन-कौन से फूल चुनते हैं?
बच्चे बुरांस, फ्योंली और कई प्रकार के अन्य फूल जंगल से अपनी छोटी-छोटी डलियों में इकट्ठा करते हैं।
07फुलारी को भेंट में क्या मिलता है?
जब फुलारी गाकर आशीर्वाद देती है, तो हर घर से उन्हें चावल, गुड़ और पैसे दिए जाते हैं।
08जमा हुए चावल और गुड़ का क्या किया जाता है?
बच्चों द्वारा एकत्रित चावल और गुड़ मिलाकर हलवा, छोई, साई और पापड़ी जैसे स्थानीय व्यंजन बनाए जाते हैं। पैसों से घी या तेल खरीदा जाता है और सब मिलकर खाते हैं।
09इजा का क्या अर्थ है?
उत्तराखंड के कुमाऊँ क्षेत्र में माँ को 'इजा' कहकर पुकारते हैं। पाठ में जानकी की माँ को भी 'इजा' कहा गया है।
10बुरांस के फूल कैसे होते हैं?
बुरांस के फूल लाल रंग के होते हैं जो गर्मी के मौसम में आते हैं। ये देखने में बहुत सुंदर होते हैं और दवाई बनाने में भी काम आते हैं।
11फ्योंली के फूल कैसे होते हैं?
फ्योंली के फूल पीले रंग के होते हैं और वसंत के आगमन की सूचना देते हैं। ये पहाड़ों की सुंदरता के प्रतीक हैं और औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं।
12फूलदेई पर्व कितने दिनों तक चलता है?
फूलदेई का त्योहार उत्तराखंड के अलग-अलग क्षेत्रों में आठ दिनों से लेकर महीनेभर तक चलता है।
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