Summary
पाठ 8 — "चतुर गीदड़" कक्षा 3 की एनसीईआरटी हिंदी पाठ्यपुस्तक वीणा का एक एकांकी (नाटक) है जिसमें एक चालाक मगरमच्छ और चापलूस कछुआ मिलकर गीदड़ को फँसाने की कोशिश करते हैं, लेकिन समझदार गीदड़ मगरमच्छ के पूँछ हिलाने से उसकी चाल पहचान लेता है और भाग जाता है।
- कहानी का सारांश — मगरमच्छ बहुत भूखा है और गीदड़ को खाना चाहता है। कछुआ उसकी मदद करने के लिए मरे हुए जैसा बनने की योजना बताता है। गीदड़ को शक होता है कि मरने पर मगरमच्छ की पूँछ हिलती है — और मगरमच्छ सच में पूँछ हिला देता है, जिससे गीदड़ भाग जाता है।
- मुख्य सीख — बुद्धि और सूझ-बूझ से बड़े से बड़े खतरे से भी बचा जा सकता है। गीदड़ ने डरे बिना सोचा और अपनी जान बचाई।
- मुख्य पात्र — इस नाटक में तीन पात्र हैं — मगरमच्छ (जो गीदड़ को खाना चाहता है), कछुआ (जो मगरमच्छ का मित्र है और चाल सोचता है), और गीदड़ (जो चतुर है और हर बात ध्यान से परखता है)।
- इकाई का विषय — यह पाठ वीणा की इकाई 2 'हमारे मित्र' का हिस्सा है। यह दिखाता है कि मित्रता कभी-कभी नुकसान पहुँचाने के लिए भी इस्तेमाल की जा सकती है, इसलिए हमेशा सोच-समझकर काम करना चाहिए।
Key points & formulas
- 01यह पाठ एक एकांकी (नाटक) है जो तालाब के किनारे की घटना पर आधारित है।
- 02मगरमच्छ ने तालाब की सारी मछलियाँ खा ली थीं, इसलिए वह गीदड़ को खाना चाहता था।
- 03कछुए ने योजना बनाई कि मगरमच्छ मरा हुआ बनकर पड़ा रहे ताकि गीदड़ पास आए।
- 04गीदड़ ने कहा कि उसने सुना है मरने पर मगरमच्छ की पूँछ हिलती रहती है — यह उसकी चतुराई थी।
- 05मगरमच्छ पूँछ हिला बैठा और गीदड़ सच्चाई समझकर भाग गया।
- 06कछुए ने मगरमच्छ को मूर्ख कहा क्योंकि वह गीदड़ की चाल में आ गया।
- 07पाठ से शब्द — मित्र, भूख, उपाय, प्रयत्न, सहायता, निश्चिंत, उपकार।
Frequently asked questions
01चतुर गीदड़ पाठ किस विधा में लिखा गया है?
यह पाठ एकांकी (एक-अंकी नाटक) विधा में लिखा गया है। इसमें पात्र आपस में बातें करते हैं।
02मगरमच्छ को इतनी भूख क्यों लगी थी?
मगरमच्छ ने तालाब की सारी मछलियाँ धीरे-धीरे खा ली थीं। मछलियाँ समाप्त हो जाने के बाद कई दिनों से उसे खाने को कुछ नहीं मिला था।
03कछुए ने मगरमच्छ की मदद करने के लिए क्या योजना बनाई?
कछुए ने सोचा कि मगरमच्छ मरा हुआ बनकर पड़ा रहे। फिर कछुआ खुद जाकर रोते हुए गीदड़ को खबर देगा कि मगरमच्छ मर गया, जिससे गीदड़ पास आए और मगरमच्छ उसे पकड़ ले।
04गीदड़ तालाब पर पानी पीने क्यों नहीं आता था?
गीदड़ मगरमच्छ के डर से तालाब पर पानी पीने नहीं आता था। वह कई बार प्यासा ही रह जाता था।
05गीदड़ ने मगरमच्छ की चाल कैसे पहचानी?
गीदड़ ने कहा कि उसने सुना है कि मरने पर मगरमच्छ की पूँछ हिलती रहती है। मगरमच्छ यह सुनकर पूँछ हिलाने लगा और गीदड़ समझ गया कि वह जिंदा है — इस तरह गीदड़ ने चाल पहचानकर भाग गया।
06कछुए ने मगरमच्छ को क्या कहा जब गीदड़ भाग गया?
कछुए ने मगरमच्छ को मूर्ख कहा। उसने कहा कि तुम उस चतुर गीदड़ की चाल में आ ही गए और अब उसे पकड़ना कठिन है।
07इस नाटक में कितने पात्र हैं और कौन-कौन से हैं?
इस नाटक में तीन पात्र हैं — मगरमच्छ, कछुआ और गीदड़।
08पाठ का शीर्षक 'चतुर गीदड़' क्यों रखा गया है?
क्योंकि पाठ में गीदड़ ने अपनी समझदारी से मगरमच्छ और कछुए की चाल को पहचाना और जान बचाई। पूरी कहानी उसकी चतुराई के इर्द-गिर्द घूमती है।
09नाटक में कछुआ किस तरह का पात्र है?
कछुआ मगरमच्छ का मित्र है जो उसकी मदद के लिए गीदड़ को बहलाने की कोशिश करता है। वह गीदड़ के सामने रोते हुए नाटक करता है।
10पाठ किस इकाई का हिस्सा है?
यह पाठ वीणा (कक्षा 3) की इकाई 2 'हमारे मित्र' का हिस्सा है।
11इस पाठ में पानी के किस स्रोत का जिक्र है?
पाठ में तालाब का जिक्र है। तालाब ही पशुओं के लिए पानी का मुख्य स्रोत था। पाठ के अभ्यास में नहर, झरना, नदी, बारिश और पोखर जैसे अन्य जल-स्रोत भी खोजने को कहा गया है।
12अगर मगरमच्छ पूँछ न हिलाता तो क्या होता?
अगर मगरमच्छ पूँछ न हिलाता तो गीदड़ शायद पास आ जाता और मगरमच्छ उसे पकड़ लेता। पाठ में बच्चों से इसी पर सोचने को कहा गया है।
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