Class 11 Hindi

Chapter 1 — Namak Ka Daroga

Open PDFReads in your browser
Overview

Summary

Chapter 1 of the Class 11 Hindi NCERT textbook (Aroh), 'Namak Ka Daroga' (नमक का दारोगा), प्रेमचंद (मूल नाम धनपत राय) द्वारा लिखित एक प्रसिद्ध कहानी है जो धन के ऊपर धर्म (ईमानदारी) की जीत का चित्रण करती है।

  • धर्म बनाम धन का द्वंद्वकहानी का मूल संघर्ष ईमानदार दारोगा मुंशी वंशीधर और धनी जमींदार पंडित अलोपीदीन के बीच है। रिश्वत और अदालत में धन जीतता है, पर अंत में धर्म की नैतिक विजय होती है।
  • कथानक और मोड़वंशीधर अलोपीदीन की नमक-तस्करी पकड़ते हैं और भारी रिश्वत ठुकराते हैं। अदालत में हारकर नौकरी गँवाते हैं, पर अलोपीदीन स्वयं उन्हें अपनी जायदाद का स्थायी मैनेजर नियुक्त करते हैं।
  • सामाजिक यथार्थ का चित्रणप्रेमचंद दिखाते हैं कि अदालत, प्रशासन और समाज सब धन के आगे झुक जाते हैं—'न्याय के मैदान में धर्म और धन में युद्ध ठन गया।' यह उस दौर के भ्रष्टाचार की तीखी आलोचना है।
  • आदर्शोन्मुख यथार्थवादकहानी कठोर यथार्थ का चित्रण करते हुए भी अंत में आदर्शवादी समाधान देती है—इसीलिए इसे प्रेमचंद के आदर्शोन्मुख यथार्थवाद का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है।
Essentials

Key points & formulas

  1. 01लेखक परिचय: प्रेमचंद (मूल नाम धनपत राय), जन्म 1880, लमही गाँव (उत्तर प्रदेश), मृत्यु 1936; हिंदी कथा-साहित्य के शिखर पुरुष माने जाते हैं।
  2. 02विधा एवं प्रकाशन: 'नमक का दारोगा' एक कहानी (गद्य) है, प्रथम प्रकाशन सन् 1914 ई.।
  3. 03केंद्रीय भाव: यह 'धन के ऊपर धर्म की जीत' की कहानी है — पंडित अलोपीदीन (धन) और मुंशी वंशीधर (धर्म/ईमानदारी) इसके प्रतिनिधि पात्र हैं।
  4. 04मुख्य पात्र एवं घटनाएँ: वंशीधर के पिता ने 'ऊपरी आमदनी' ढूँढने की नसीहत दी; वंशीधर ने इसे अनसुना कर अपना कर्तव्य निभाया; अलोपीदीन की नमक-तस्करी पकड़ी, रिश्वत की पेशकश ठुकराई, मुअत्तली झेली, अंततः मैनेजर नियुक्त हुए।
  5. 05सामाजिक यथार्थ: अदालत, प्रशासन और समाज सब धन के आगे झुक गए — 'न्याय के मैदान में धर्म और धन में युद्ध ठन गया।'
  6. 06शब्दार्थ — बरकंदाजी: बंदूक लेकर चलने वाला सिपाही / चौकीदार।
  7. 07शब्दार्थ — कातर: परेशान, दुखी।
  8. 08शब्दार्थ — तजवीज: राय, निर्णय।
  9. 09आदर्शोन्मुख यथार्थवाद: पाठ में इस कहानी को आदर्शोन्मुख यथार्थवाद का उदाहरण कहा गया है — कठोर यथार्थ का चित्रण, पर अंत में आदर्शवादी समाधान।
Questions

Frequently asked questions

01

नमक का दारोगा कहानी के लेखक कौन हैं?

इस कहानी के लेखक प्रेमचंद हैं। उनका मूल नाम धनपत राय था। जन्म सन् 1880 में लमही गाँव (उत्तर प्रदेश) में हुआ और मृत्यु सन् 1936 में हुई।

02

Namak Ka Daroga kahan se hai — यह कहानी किस पुस्तक में है?

यह कहानी NCERT कक्षा 11 की हिंदी पाठ्यपुस्तक 'आरोह' (Aroh) के गद्य खंड में, अध्याय 1 के रूप में संकलित है।

03

नमक का दारोगा कहानी पहली बार कब प्रकाशित हुई?

पाठ के अनुसार इस कहानी का प्रथम प्रकाशन सन् 1914 ई. में हुआ था।

04

मुंशी वंशीधर कौन थे और उनके पिता ने उन्हें क्या सलाह दी?

मुंशी वंशीधर नमक विभाग के दारोगा थे। उनके पिता ने उन्हें नौकरी में 'ऊपरी आय' ढूँढने की सलाह देते हुए कहा था — 'मासिक वेतन तो पूर्णमासी का चाँद है जो एक दिन दिखाई देता है और घटते-घटते लुप्त हो जाता है।'

05

पंडित अलोपीदीन कौन थे?

पंडित अलोपीदीन दातागंज के सबसे प्रतिष्ठित जमींदार थे। उनका लाखों रुपये का लेन-देन था और अंग्रेज अफसर उनके इलाके में शिकार खेलने आकर उनके मेहमान होते थे।

06

वंशीधर ने पंडित अलोपीदीन को क्यों गिरफ्तार किया?

रात को वंशीधर ने नदी के पुल पर पंडित अलोपीदीन की गाड़ियाँ रोकीं। बोरे टटोलने पर उनमें नमक के ढेले मिले — अर्थात् सरकारी आदेश का उल्लंघन करते हुए नमक की तस्करी हो रही थी।

07

अलोपीदीन ने रिश्वत देने की कितनी कोशिश की?

अलोपीदीन ने एक हजार से शुरू करके पाँच, दस, पंद्रह, बीस, पच्चीस, तीस और चालीस हजार तक रिश्वत देने की पेशकश की, पर वंशीधर ने हर बार इनकार किया।

08

अदालत में क्या फैसला हुआ और वंशीधर का क्या हुआ?

डिप्टी मजिस्ट्रेट ने अपनी तजवीज में अलोपीदीन के विरुद्ध प्रमाण को 'निर्मूल और भ्रमात्मक' बताया और वंशीधर को 'उद्दंड और विचारहीन' कहा। इसके कुछ दिनों बाद वंशीधर को मुअत्तली का परवाना मिल गया।

09

कहानी का अंत कैसे होता है?

नौकरी जाने के एक सप्ताह बाद पंडित अलोपीदीन स्वयं वंशीधर के घर आए और उन्हें अपनी सारी जायदाद का स्थायी मैनेजर नियुक्त किया — छह हजार वार्षिक वेतन, घोड़ा, बंगला और नौकर-चाकर के साथ। उन्होंने कहा: 'परमात्मा से यही प्रार्थना है कि वह आपको सदैव वही नदी के किनारे वाला बेमुरौवत, उद्दंड, कठोर परंतु धर्मनिष्ठ दारोगा बनाए रखे!'

10

नमक का दारोगा कहानी का मुख्य संदेश क्या है?

पाठ के अनुसार यह 'धन के ऊपर धर्म की जीत' की कहानी है। इसे आदर्शोन्मुख यथार्थवाद का उदाहरण कहा गया है — प्रशासनिक और न्यायिक भ्रष्टाचार का साहसिक चित्रण होते हुए भी कहानी सत्य की विजय के साथ समाप्त होती है।

11

'आदर्शोन्मुख यथार्थवाद' का क्या अर्थ है — Premchand की इस कहानी के संदर्भ में?

पाठ के अनुसार आदर्शोन्मुख यथार्थवाद वह रचना-शैली है जो कठोर यथार्थ का चित्रण करते हुए भी समस्याओं को अंततः एक आदर्शवादी और मनोवांछित समाधान तक पहुँचा देती है। 'नमक का दारोगा' इसका एक 'मुकम्मल उदाहरण' है।

12

Namak Ka Daroga mein 'Dharma ne Dhan ko pairon tale kuchhal diya' — इस पंक्ति का क्या अर्थ है?

यह पंक्ति उस क्षण पर आती है जब वंशीधर ने चालीस हजार की रिश्वत ठुकराकर अलोपीदीन को हिरासत में लेने का आदेश दिया। इसका अर्थ है कि वंशीधर की ईमानदारी (धर्म) ने अलोपीदीन की धनशक्ति को परास्त कर दिया।

13

क्या NCERT Class 11 Hindi Aroh Chapter 1 PDF मुफ़्त डाउनलोड कर सकते हैं?

हाँ, यह मुफ़्त है, बिना साइन-अप।

Keep learning

More chapters in Aroh

Read Chapter 1 of Aroh, the Class 11 Hindi NCERT textbook (2026-27 edition), online for free: the complete chapter as published by NCERT with every diagram, solved example and exercise, with a chapter summary, question answers and revision notes. Open the NCERT PDF above, or browse all NCERT Class 11 textbooks.

Read offline with notes, solutions & mock tests

CBSE Prepmaster — free on iOS & Android

Get the App