Class 11 Hindi

Chapter 14 — He Bhukh Mat Machal, He Mere Juhi Ke Phool Jaise Ishwar

Open PDFReads in your browser
Overview

Summary

Chapter 14 of the Class 11 Hindi NCERT textbook (Aroh), 'He Bhukh Mat Machal; He Mere Juhi Ke Phool Jaise Ishwar' (हे भूख मत मचल; हे मेरे जूही के फूल जैसे ईश्वर), 12वीं सदी की कवयित्री अक्कमहादेवी के दो वचन हैं (अनुवाद: केदारनाथ सिंह) जो वीर शैव आंदोलन की भक्ति-चेतना को व्यक्त करते हैं।

  • इंद्रिय-नियंत्रण का प्रेम-भरा निवेदनप्रथम वचन में भूख, प्यास, नींद, क्रोध, मोह, लोभ, मद और ईर्ष्या को सीधे संबोधित कर वश में रहने को कहा गया है—यह उपदेश नहीं, बल्कि प्रेम-भरा मनुहार है।
  • अहंकार का नाश और पूर्ण समर्पणद्वितीय वचन में कवयित्री ईश्वर से भिखारिन बना देने की प्रार्थना करती हैं ताकि उनका 'स्व' (अहंकार) पूरी तरह मिट जाए और वे ईश्वर के प्रति पूर्णतः समर्पित हो सकें।
  • वचन विधा और स्त्रीवादी चेतनाकन्नड़ 'वचन' शैली और 'हे भूख!', 'ओ चराचर!' जैसा प्रत्यक्ष संबोधन भाव को जीवंत बनाता है। अक्कमहादेवी की कविता भारतीय साहित्य की क्रांतिकारी स्त्रीवादी चेतना का पहला सर्जनात्मक दस्तावेज़ मानी जाती है।
Essentials

Key points & formulas

  1. 01कवयित्री परिचय: अक्कमहादेवी का जन्म 12वीं सदी में कर्नाटक के उडुतरी गाँव (जिला शिवमोगा) में हुआ। वे वीर शैव आंदोलन से जुड़ी महत्वपूर्ण कवयित्री थीं; उनके समकालीन कन्नड़ संत कवि बसवन्ना और अल्लामा प्रभु थे।
  2. 02विधा और अनुवाद: ये रचनाएँ कन्नड़ 'वचन' (Vachana) विधा में हैं। दोनों वचनों का अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद केदारनाथ सिंह ने किया है। हिंदी में यह 'वचन सौरभ' नाम से तथा अंग्रेजी में 'स्पीकिंग ऑव शिवा' (सं. ए. के. रामानुजन) नाम से उपलब्ध है।
  3. 03प्रथम वचन का केंद्रीय भाव: इंद्रियों पर नियंत्रण का संदेश — भूख, प्यास, नींद, क्रोध, मोह, लोभ, मद और ईर्ष्या को प्रत्यक्ष संबोधित किया गया है। स्रोत के अनुसार 'यह उपदेशात्मक न होकर प्रेम-भरा मनुहार है।'
  4. 04द्वितीय वचन का केंद्रीय भाव: एक भक्त का ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण — कवयित्री चाहती हैं कि उनकी झोली में कुछ न टिके, भीख भी न मिले और उनका 'स्व' (अहंकार) पूरी तरह नष्ट हो जाए।
  5. 05काव्य-सौंदर्य: ईश्वर को 'जूही के फूल जैसे' — एक सुकोमल, सुगंधित पुष्प — के समान बताया गया है, जो भक्त की कोमल आस्था को व्यक्त करता है। प्रत्यक्ष संबोधन शैली ('हे भूख!', 'हे मोह!', 'ओ चराचर!') भाव को जीवंत बनाती है।
  6. 06ऐतिहासिक महत्व: स्रोत के अनुसार अक्कमहादेवी की कविता 'पूरे भारतीय साहित्य में इस क्रांतिकारी चेतना का पहला सर्जनात्मक दस्तावेज है और संपूर्ण स्त्रीवादी आंदोलन के लिए एक अजस्र प्रेरणास्रोत भी।'
  7. 07शब्दार्थ (स्रोत से): पाश = जकड़; ढील = ढीला करना; मद = नशा; चराचर = जड़ और चेतन; चन्नमल्लिकार्जुन = शिव।
Questions

Frequently asked questions

01

NCERT Class 11 Hindi Aroh Chapter 14 किस कवयित्री की रचना है?

यह अध्याय अक्कमहादेवी (Akkamahadevi) की रचना है। वे 12वीं सदी में कर्नाटक के उडुतरी गाँव (जिला शिवमोगा) में जन्मी थीं और वीर शैव आंदोलन से जुड़ी प्रमुख कवयित्री थीं।

02

अक्कमहादेवी के वचनों का हिंदी अनुवाद किसने किया?

दोनों वचनों का अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद केदारनाथ सिंह ने किया है।

03

वचन विधा क्या होती है?

वचन कन्नड़ भाषा की भक्ति काव्य विधा है जो वीर शैव आंदोलन से जुड़ी है। अक्कमहादेवी इस आंदोलन की महत्वपूर्ण कवयित्री थीं।

04

'हे भूख! मत मचल' वचन में किन-किन इंद्रियों को संबोधित किया गया है?

इस वचन में भूख, प्यास, नींद, क्रोध, मोह, लोभ, मद और ईर्ष्या को प्रत्यक्ष रूप से संबोधित किया गया है। पाठ के अनुसार यह उपदेशात्मक न होकर प्रेम-भरा मनुहार है।

05

He Bhukh Mat Machal poem summary in Hindi क्या है?

'हे भूख! मत मचल' वचन में अक्कमहादेवी भूख, प्यास, नींद, क्रोध, मोह, लोभ, मद और ईर्ष्या को नियंत्रण में रहने का निवेदन करती हैं और चन्नमल्लिकार्जुन (शिव) का संदेश लेकर आने की बात कहती हैं।

06

'ओ चराचर! मत चूक अवसर' — इस पंक्ति में 'चराचर' का क्या अर्थ है?

स्रोत के अनुसार 'चराचर' का अर्थ 'जड़ और चेतन' है — अर्थात संपूर्ण सृष्टि। कवयित्री समस्त संसार को आह्वान करती हैं कि चन्नमल्लिकार्जुन का संदेश सुनने का अवसर न चूकें।

07

दूसरे वचन में ईश्वर को किस रूप में सम्बोधित किया गया है?

ईश्वर को 'जूही के फूल जैसे' बताया गया है — 'हे मेरे जूही के फूल जैसे ईश्वर।' यह तुलना भक्त की कोमल और निर्मल आस्था को व्यक्त करती है।

08

दूसरे वचन में अक्कमहादेवी ईश्वर से क्या कामना करती हैं?

वे चाहती हैं कि ईश्वर उन्हें भिखारिन बना दे, 'अपना घर' पूरी तरह भुला दे, झोली फैलाने पर भी भीख न मिले — ताकि उनका अहंकार नष्ट हो और वे ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पित हो सकें।

09

अक्कमहादेवी की कविता का ऐतिहासिक महत्व क्या है?

पाठ के अनुसार 'अक्कमहादेवी की कविता पूरे भारतीय साहित्य में इस क्रांतिकारी चेतना का पहला सर्जनात्मक दस्तावेज है और संपूर्ण स्त्रीवादी आंदोलन के लिए एक अजस्र प्रेरणास्रोत भी।'

10

'अक्क' शब्द का अर्थ क्या है?

पाठ के अनुसार कन्नड़ भाषा में 'अक्क' शब्द का अर्थ 'बहिन' होता है।

11

अक्कमहादेवी के आराध्य देव कौन थे?

चन्नमल्लिकार्जुन देव (शिव) अक्कमहादेवी के आराध्य थे।

12

क्या NCERT Class 11 Hindi Aroh Chapter 14 PDF मुफ़्त डाउनलोड कर सकते हैं?

हाँ, यह मुफ़्त है, बिना साइन-अप। आप इस पेज से NCERT Class 11 Hindi Aroh Chapter 14 PDF सीधे पढ़ और डाउनलोड कर सकते हैं।

Keep learning

More chapters in Aroh

Read Chapter 14 of Aroh, the Class 11 Hindi NCERT textbook (2026-27 edition), online for free: the complete chapter as published by NCERT with every diagram, solved example and exercise, with a chapter summary, question answers and revision notes. Open the NCERT PDF above, or browse all NCERT Class 11 textbooks.

Read offline with notes, solutions & mock tests

CBSE Prepmaster — free on iOS & Android

Get the App