Summary
Chapter 13 of the Class 11 Hindi NCERT textbook (Aroh), 'Gazal' (ग़ज़ल), दुष्यंत कुमार (1933–1975) की रचना है, उनके संग्रह 'साये में धूप' से ली गई, जिसके सात शेरों में समाज और राजनीति की विद्रूपताओं तथा परिवर्तन की आस को उभारा गया है।
- व्यवस्था-विरोध और विकल्प की तलाश — ग़ज़ल का केंद्रीय सूत्र है राजनीति-समाज में जो चल रहा है उसे खारिज करना और विकल्प की तलाश को मान्यता देना। खोखले वादे, बेहाल गरीब और आवाज़ दबाती सत्ता इसके निशाने पर हैं।
- ग़ज़ल विधा की बनावट — हर शेर अपने-आप में मुकम्मिल और स्वतंत्र होता है; तुक और मिजाज का निर्वाह ही उन्हें एक रचना का रूप देता है। पहले शेर की दोनों पंक्तियों में तुक मिलती है, फिर हर शेर की दूसरी पंक्ति में उसका निर्वाह होता है।
- उर्दू-हिंदी का सम्मिलन — 'चिरागाँ' बनाम 'चिराग' जैसे प्रयोग वादे और यथार्थ का अंतर उभारते हैं; उर्दू-हिंदी के मिले शब्द भाव को सघन बनाते हैं। हिंदी ग़ज़ल को साहित्यिक प्रतिष्ठा दिलाने का श्रेय दुष्यंत को है।
Key points & formulas
- 01कवि परिचय: दुष्यंत कुमार का जन्म सन् 1933 में राजपुर नवादा गाँव (उत्तर प्रदेश) में हुआ। सन् 1975 में उनका निधन हुआ। उन्होंने इलाहाबाद में साहित्यिक जीवन आरंभ किया, आकाशवाणी और मध्यप्रदेश के राजभाषा विभाग में कार्य किया।
- 02प्रमुख रचनाएँ: काव्य — सूर्य का स्वागत, आवाजों के घेरे, साये में धूप, जलते हुए वन का वसंत; गीति-नाट्य — एक कंठ विषपायी; उपन्यास — छोटे-छोटे सवाल, आँगन में एक वृक्ष, दोहरी जिंदगी।
- 03विधा — ग़ज़ल: ग़ज़ल में सभी शेर अपने-आप में मुकम्मिल और स्वतंत्र होते हैं। तुक का निर्वाह और मिजाज का निर्वाह — ये दो तत्व शेरों को एक रचना की शक्ल देते हैं। पहले शेर की दोनों पंक्तियों में तुक मिलता है और उसके बाद सभी शेरों की दूसरी पंक्ति में उस तुक का निर्वाह होता है।
- 04केंद्रीय भाव: राजनीति और समाज में जो कुछ चल रहा है उसे खारिज करने और विकल्प की तलाश को मान्यता देने का भाव इस ग़ज़ल का केंद्रीय सूत्र है।
- 05काव्य-सौंदर्य: पहले शेर में 'चिरागाँ' (बहुवचन) और 'चिराग' (एकवचन) का प्रयोग वादे और कठोर यथार्थ के बीच का अंतर उभारता है। उर्दू-हिंदी के मिले-जुले शब्दों से भाव अधिक सघन और असरदार बने हैं। हिंदी ग़ज़ल को साहित्यिक प्रतिष्ठा देने का श्रेय अकेले दुष्यंत को दिया जाता है।
- 06शब्दार्थ: मयस्सर = उपलब्ध; दरख्त = पेड़; बेकरार = बेचैन, आतुर।
- 07शब्दार्थ: मुतमइन = इतमीनान से, आश्वस्त; निजाम = राज, शासन; एहतियात = सावधानी; बहर = छंद; असर = प्रभाव।
Frequently asked questions
01NCERT Class 11 Hindi Aroh Chapter 13 'ग़ज़ल' के कवि कौन हैं?
इस ग़ज़ल के कवि दुष्यंत कुमार हैं। उनका जन्म सन् 1933 में राजपुर नवादा गाँव (उत्तर प्रदेश) में हुआ और निधन सन् 1975 में हुआ।
02यह ग़ज़ल किस संग्रह से ली गई है?
यह ग़ज़ल दुष्यंत कुमार के ग़ज़ल संग्रह 'साये में धूप' से ली गई है।
03ग़ज़ल विधा की क्या विशेषता है?
ग़ज़ल में सभी शेर अपने-आप में मुकम्मिल और स्वतंत्र होते हैं। तुक का निर्वाह और मिजाज का निर्वाह — ये दो तत्व शेरों को एक रचना की शक्ल देते हैं।
04Class 11 Hindi Chapter 13 Gazal का केंद्रीय भाव क्या है?
राजनीति और समाज में जो कुछ चल रहा है उसे खारिज करने और विकल्प की तलाश को मान्यता देने का भाव इस ग़ज़ल का केंद्रीय सूत्र है।
05पहले शेर में 'चिरागाँ' और 'चिराग' का क्या महत्व है?
पहले शेर में 'चिरागाँ' बहुवचन में आया है — हर घर के लिए रोशनी का वादा — और 'चिराग' एकवचन में — शहर के लिए एक दीया भी उपलब्ध नहीं। यह प्रयोग वादे और यथार्थ के बीच के अंतर को उभारता है।
06'तेरा निजाम है सिल दे जुबान शायर की' — इस शेर का आशय क्या है?
इस शेर में कवि कहता है कि सत्ता (निजाम) शायर की जुबान बंद करना चाहती है क्योंकि उसे अपने वजूद का खतरा लगता है। 'निजाम' का अर्थ राज/शासन और 'एहतियात' का अर्थ सावधानी है।
07तीसरे शेर में दुष्यंत किस तरह के लोगों की ओर इशारा करते हैं?
'न हो कमीज तो पाँवों से पेट ढँक लेंगे' — इस शेर में दुष्यंत उन लोगों की ओर इशारा करते हैं जो अभाव को स्वाभाविक मान लेते हैं और उसी में समायोजन कर लेते हैं। कवि व्यंग्य करते हुए कहते हैं कि ये लोग इस 'सफ़र' के लिए बिल्कुल उचित (मुनासिब) हैं।
08दुष्यंत कुमार का हिंदी ग़ज़ल में क्या योगदान है?
ग़ज़ल की विधा को हिंदी में प्रतिष्ठित करने का श्रेय अकेले दुष्यंत कुमार को दिया जाता है। उनके कई शेर साहित्यिक एवं राजनीतिक जमावड़ों में लोकोक्तियों की तरह दुहराए जाते हैं।
09आखिरी शेर में 'गुलमोहर' का क्या अर्थ है?
पाठ के अभ्यास प्रश्न में इसी पर विचार करने को कहा गया है — 'गुलमोहर' केवल फूलदार वृक्ष है या उसमें कोई सांकेतिक अर्थ निहित है। शेर है: 'जिएँ तो अपने बगीचे में गुलमोहर के तले, / मरें तो गैर की गलियों में गुलमोहर के लिए।'
10चौथे शेर का आशय क्या है?
चौथे शेर में — 'खुदा नहीं, न सही, आदमी का ख्वाब सही' — कवि कहता है कि ईश्वर पर भरोसा न हो तो भी आदमी का सपना तो है जो दृष्टि को एक सुंदर दृश्य (हसीन नजारा) देता है। यह उम्मीद को जीवित रखने का भाव है।
11पाँचवें शेर में 'मुतमइन' और 'बेकरार' का अर्थ क्या है?
शब्द-छवि के अनुसार: मुतमइन = इतमीनान से, आश्वस्त; बेकरार = बेचैन, आतुर। शेर में सत्ता वाले आश्वस्त हैं कि पत्थर नहीं पिघलेगा, पर कवि आवाज़ में असर (प्रभाव) के लिए बेचैन है।
12क्या NCERT Class 11 Hindi Aroh Chapter 13 PDF मुफ़्त डाउनलोड कर सकते हैं?
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