Summary
Chapter 2 of the Class 11 Hindi NCERT textbook (Aroh), 'Miyan Nasiruddin' (मियाँ नसीरुद्दीन), कृष्णा सोबती द्वारा उनके संग्रह 'हम-हशमत' से लिया गया शब्दचित्र है, जिसमें दिल्ली के मटियामहल के खानदानी नानबाई मियाँ नसीरुद्दीन के व्यक्तित्व और रोटी पकाने की कला का जीवंत चित्रण है।
- शब्दचित्र विधा — यह पाठ एक शब्दचित्र है—किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व, बोली और पेशे का शब्दों से बना जीता-जागता रेखाचित्र। लेखिका स्वयं मियाँ से मिलने जाती हैं और उनके हुनर को उन्हीं की जबान में उभारती हैं।
- पेशे को कला का दर्जा — छप्पन किस्म की रोटियाँ बनाने वाले मियाँ नसीरुद्दीन अपने नानबाई पेशे को कला मानते हैं। बावर्खानी, शीरमाल, ताफ़तान जैसी रोटियाँ उनके हुनर की गवाही देती हैं।
- खानदानी परंपरा और तालीम — दादा मियाँ कल्लन और पिता मियाँ बरवफ़त से चली आई तीसरी पीढ़ी के नानबाई मियाँ 'करके सीखने' को असली हुनर मानते हैं—'तालीम की तालीम भी बड़ी चीज़ होती है।'
Key points & formulas
- 01लेखिका: कृष्णा सोबती (जन्म 18 फ़रवरी 1925, गुजरात, पश्चिमी पंजाब; मृत्यु 25 जनवरी 2019); प्रमुख सम्मान: साहित्य अकादमी सम्मान, हिंदी अकादमी का शलाका सम्मान
- 02विधा: शब्दचित्र; पाठ कृष्णा सोबती के संग्रह 'हम-हशमत' से लिया गया है
- 03मुख्य पात्र: मियाँ नसीरुद्दीन — छप्पन किस्म की रोटियाँ बनाने के लिए मशहूर खानदानी नानबाई; दुकान दिल्ली के मटियामहल के गढ़ैया मुहल्ले में
- 04खानदानी परंपरा: दादा — आला नानबाई मियाँ कल्लन; पिता — मियाँ बरवफ़त शाही नानबाई गढ़ैयावाले; मियाँ नसीरुद्दीन तीसरी पीढ़ी
- 05केंद्रीय भाव: अपने पेशे को कला का दर्जा देना और करके सीखने को असली हुनर मानना — 'तालीम की तालीम भी बड़ी चीज होती है'
- 06पाठ में उल्लिखित रोटियों के नाम: बावर्खानी, शीरमाल, ताफ़तान, बेसनी, खमीरी, रूमाली, गाव-दीदा, गाजेबान, तुनकी
- 07शब्दार्थ: नानबाई = तरह-तरह की रोटी बनाने-बेचने का काम करने वाला; इल्म = जानकारी, ज्ञान, विद्या; वालिद = पिता; नसीहत = सीख, शिक्षा
Frequently asked questions
01मियाँ नसीरुद्दीन को नानबाइयों का मसीहा क्यों कहा गया है?
वे छप्पन किस्म की रोटियाँ बनाने की दुर्लभ कला में महारत रखते हैं और अपने खानदानी हुनर के कारण नानबाइयों में एक विशिष्ट मसीहाई अंदाज रखते हैं।
02लेखिका मियाँ नसीरुद्दीन के पास क्यों गई थीं?
लेखिका मटियामहल की ओर निकलते हुए उनकी दुकान पर रुकीं और जानना चाहती थीं कि उन्होंने विभिन्न किस्म की रोटियाँ पकाने का इल्म कहाँ से हासिल किया।
03मियाँ नसीरुद्दीन ने रोटी पकाने का हुनर कहाँ से सीखा?
उन्होंने यह हुनर अपने वालिद उस्ताद से सीखा। यह उनका खानदानी पेशा था — वालिद मरहूम के उठ जाने पर वे उन्हीं के ठीये पर आ बैठे।
04मियाँ नसीरुद्दीन के दादा और पिता कौन थे?
उनके दादा का नाम आला नानबाई मियाँ कल्लन था और पिता का नाम मियाँ बरवफ़त शाही नानबाई गढ़ैयावाले था।
05'तालीम की तालीम' से मियाँ नसीरुद्दीन का क्या आशय था?
उनका आशय था कि बड़ा काम सीखने से पहले बुनियादी काम की तालीम जरूरी है — जैसे नानबाई का हुनर सीखने से पहले बर्तन धोना, भट्टी बनाना और आँच देना सीखना पड़ता है।
06What is the genre of NCERT Class 11 Hindi Aroh Chapter 2 Miyan Nasiruddin?
यह पाठ शब्दचित्र (word-portrait) विधा में लिखा गया है और कृष्णा सोबती के संग्रह 'हम-हशमत' से लिया गया है।
07मियाँ नसीरुद्दीन ने नसीहत के बारे में क्या कहा?
उन्होंने कहा — 'काम करने से आता है, नसीहतों से नहीं।' उनके लिए हुनर व्यावहारिक अनुभव से सीखा जाता है, न कि केवल उपदेशों से।
08पाठ में किन-किन रोटियों के नाम आए हैं?
बावर्खानी, शीरमाल, ताफ़तान, बेसनी, खमीरी, रूमाली, गाव-दीदा, गाजेबान और तुनकी। मियाँ ने बताया कि तुनकी पापड़ से भी ज्यादा महीन होती है।
09मियाँ नसीरुद्दीन की दुकान कहाँ थी?
उनकी दुकान दिल्ली में जामा मस्जिद के आड़े पड़े मटियामहल के गढ़ैया मुहल्ले में थी — एक निहायत मामूली अँधेरी-सी दुकान।
10बादशाह के नाम का प्रसंग आते ही मियाँ नसीरुद्दीन की दिलचस्पी क्यों खत्म होने लगी?
जब लेखिका ने पूछा कि उनके बुजुर्ग दिल्ली के किस बादशाह के यहाँ काम करते थे, तो मियाँ ने कहा कि 'बादशाह के यहाँ काम करते थे' — यह काफ़ी है; किसका नाम लेकर 'बाल की खाल निकालने' की जरूरत नहीं।
11कृष्णा सोबती की भाषा-शैली की क्या विशेषता है?
पाठ की भूमिका के अनुसार उनकी भाषा में संस्कृतनिष्ठ तत्समता, उर्दू का बाँकपन और पंजाबी की जिंदादिली — तीनों एक साथ मौजूद हैं।
12क्या NCERT Class 11 Hindi Aroh Chapter 2 PDF मुफ़्त डाउनलोड कर सकते हैं?
हाँ, यह मुफ़्त है, बिना साइन-अप।
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