Namak Ka Daroga
Chapter 1 of the Class 11 Hindi NCERT textbook (Aroh), 'Namak Ka Daroga' (नमक का दारोगा), प्रेमचंद (मूल नाम धनपत राय) द्वारा लिखित एक प्रसिद्ध कहानी है जो धन के ऊपर धर्म (ईमानदारी) की जीत का चित्रण करती है।
- 1लेखक परिचय: प्रेमचंद (मूल नाम धनपत राय), जन्म 1880, लमही गाँव (उत्तर प्रदेश), मृत्यु 1936; हिंदी कथा-साहित्य के शिखर पुरुष माने जाते हैं।
- 2विधा एवं प्रकाशन: 'नमक का दारोगा' एक कहानी (गद्य) है, प्रथम प्रकाशन सन् 1914 ई.।
- 3केंद्रीय भाव: यह 'धन के ऊपर धर्म की जीत' की कहानी है — पंडित अलोपीदीन (धन) और मुंशी वंशीधर (धर्म/ईमानदारी) इसके प्रतिनिधि पात्र हैं।
- 4मुख्य पात्र एवं घटनाएँ: वंशीधर के पिता ने 'ऊपरी आमदनी' ढूँढने की नसीहत दी; वंशीधर ने इसे अनसुना कर अपना कर्तव्य निभाया; अलोपीदीन की नमक-तस्करी पकड़ी, रिश्वत की पेशकश ठुकराई, मुअत्तली झेली, अंततः मैनेजर नियुक्त हुए।
- 5सामाजिक यथार्थ: अदालत, प्रशासन और समाज सब धन के आगे झुक गए — 'न्याय के मैदान में धर्म और धन में युद्ध ठन गया।'



