HindiClass 11

Aroh

Hindi Core (Prose & Poetry)16 Chapters

Chapter notes

What you'll learn in Aroh

A quick revision map of Aroh — the core idea and five key takeaways from each chapter. Tap any chapter to read the full NCERT PDF and detailed notes.

01

Namak Ka Daroga

Chapter 1 of the Class 11 Hindi NCERT textbook (Aroh), 'Namak Ka Daroga' (नमक का दारोगा), प्रेमचंद (मूल नाम धनपत राय) द्वारा लिखित एक प्रसिद्ध कहानी है जो धन के ऊपर धर्म (ईमानदारी) की जीत का चित्रण करती है।

  • 1लेखक परिचय: प्रेमचंद (मूल नाम धनपत राय), जन्म 1880, लमही गाँव (उत्तर प्रदेश), मृत्यु 1936; हिंदी कथा-साहित्य के शिखर पुरुष माने जाते हैं।
  • 2विधा एवं प्रकाशन: 'नमक का दारोगा' एक कहानी (गद्य) है, प्रथम प्रकाशन सन् 1914 ई.।
  • 3केंद्रीय भाव: यह 'धन के ऊपर धर्म की जीत' की कहानी है — पंडित अलोपीदीन (धन) और मुंशी वंशीधर (धर्म/ईमानदारी) इसके प्रतिनिधि पात्र हैं।
  • 4मुख्य पात्र एवं घटनाएँ: वंशीधर के पिता ने 'ऊपरी आमदनी' ढूँढने की नसीहत दी; वंशीधर ने इसे अनसुना कर अपना कर्तव्य निभाया; अलोपीदीन की नमक-तस्करी पकड़ी, रिश्वत की पेशकश ठुकराई, मुअत्तली झेली, अंततः मैनेजर नियुक्त हुए।
  • 5सामाजिक यथार्थ: अदालत, प्रशासन और समाज सब धन के आगे झुक गए — 'न्याय के मैदान में धर्म और धन में युद्ध ठन गया।'
02

Miyan Nasiruddin

Chapter 2 of the Class 11 Hindi NCERT textbook (Aroh), 'Miyan Nasiruddin' (मियाँ नसीरुद्दीन), कृष्णा सोबती द्वारा उनके संग्रह 'हम-हशमत' से लिया गया शब्दचित्र है, जिसमें दिल्ली के मटियामहल के खानदानी नानबाई मियाँ नसीरुद्दीन के व्यक्तित्व और रोटी पकाने की कला का जीवंत चित्रण है।

  • 1लेखिका: कृष्णा सोबती (जन्म 18 फ़रवरी 1925, गुजरात, पश्चिमी पंजाब; मृत्यु 25 जनवरी 2019); प्रमुख सम्मान: साहित्य अकादमी सम्मान, हिंदी अकादमी का शलाका सम्मान
  • 2विधा: शब्दचित्र; पाठ कृष्णा सोबती के संग्रह 'हम-हशमत' से लिया गया है
  • 3मुख्य पात्र: मियाँ नसीरुद्दीन — छप्पन किस्म की रोटियाँ बनाने के लिए मशहूर खानदानी नानबाई; दुकान दिल्ली के मटियामहल के गढ़ैया मुहल्ले में
  • 4खानदानी परंपरा: दादा — आला नानबाई मियाँ कल्लन; पिता — मियाँ बरवफ़त शाही नानबाई गढ़ैयावाले; मियाँ नसीरुद्दीन तीसरी पीढ़ी
  • 5केंद्रीय भाव: अपने पेशे को कला का दर्जा देना और करके सीखने को असली हुनर मानना — 'तालीम की तालीम भी बड़ी चीज होती है'
03

Apu Ke Saath Dhaai Saal

Chapter 3 of the Class 11 Hindi NCERT textbook (Aroh), 'Apu Ke Saath Dhaai Saal' (अपू के साथ ढाई साल), सत्यजित राय का संस्मरण है (हिंदी भाषांतर: विलास गिते) जो उनकी पहली फिल्म 'पथेर पांचाली' (1955) की शूटिंग के ढाई साल के संघर्षपूर्ण अनुभवों पर आधारित है।

  • 1लेखक: सत्यजित राय (जन्म 1921, कोलकाता; मृत्यु 1992); प्रमुख सम्मान: ऑस्कर, भारतरत्न, फ्रांस का लेजन डी ऑनर; प्रमुख फिल्में: पथेर पांचाली, अपराजिता, अपू का संसार
  • 2विधा: संस्मरण (memoir); बांग्ला मूल का हिंदी भाषांतर विलास गिते ने किया है
  • 3केंद्रीय भाव: पैसों की कमी और साधनहीनता के बीच पहली फिल्म बनाने का संघर्ष — 'किसी फिल्मकार के लिए उसकी पहली फिल्म एक अबूझ पहेली होती है'
  • 4मुख्य घटनाएँ: अपू की भूमिका के लिए अखबार में विज्ञापन देने के बाद भी उचित बालक नहीं मिला; अंततः पड़ोस के सुबीर बनर्जी 'अपू' बने। काशफूलों का दृश्य सात दिनों में जानवरों ने बर्बाद किया; अगले साल पूरा हुआ। एक ही सीन में दो अलग 'भूलो' कुत्ते और दो अलग 'श्रीनिवास' इस्तेमाल किए गए — दर्शकों को पता नहीं चला।
  • 5बारिश का दृश्य: अक्टूबर में शरद ऋतु में राय हर रोज बच्चों और कैमरे के साथ देहात में इंतजार करते थे; एक दिन धुआँधार बारिश हुई और वह शॉट बहुत अच्छा चित्रित हुआ
04

Vidaai Sambhashan

Chapter 4 of the Class 11 Hindi NCERT textbook (Aroh), 'Vidaai Sambhashan' (विदाई-संभाषण), बालमुकुंद गुप्त की व्यंग्य-कृति 'शिवशंभु के चिट्ठे' का अंश है, जो वायसराय लॉर्ड कर्जन को संबोधित एक विदाई-भाषण के रूप में औपनिवेशिक शासन की निरंकुशता पर तीखा व्यंग्य करता है।

  • 1लेखक: बालमुकुंद गुप्त; जन्म 1865, ग्राम गुड़ियानी, जिला रोहतक (हरियाणा); मृत्यु 1907; भारतेंदु-युग और द्विवेदी-युग के बीच की कड़ी।
  • 2विधा: व्यंग्य गद्य; पाठ बालमुकुंद गुप्त की रचना 'शिवशंभु के चिट्ठे' से लिया गया है।
  • 3केंद्रीय भाव: लॉर्ड कर्जन के शासनकाल की निरंकुशता, दिल्ली-दरबार की शान से इस्तीफे तक के पतन, और भारतीय प्रजा की व्यथा का व्यंग्यात्मक चित्रण।
  • 4मुख्य घटनाएँ: बंग-विच्छेद (आठ करोड़ प्रजा की गिड़गिड़ाकर प्रार्थना अनसुनी की गई); कौंसिल में मनपसंद अंग्रेज अधिकारी नियुक्ति विवाद में पराजय के बाद कर्जन का इस्तीफा।
  • 5'शिवशंभु की दो गायें': दुर्बल गाय ने टक्कर मारने वाली बलवाली गाय के जाने पर चारा नहीं खाया — बिछड़न-समय की करुणा और भारतीय प्रजा की भावना का प्रतीक।
05

Galta Loha

Chapter 5 of the Class 11 Hindi NCERT textbook (Aroh), 'Galta Loha' (गलता लोहा), शेखर जोशी की कहानी है जो मेधावी किंतु निर्धन ब्राह्मण युवक मोहन और लोहार धनराम के जीवन के माध्यम से समाज के जातिगत विभाजन की निरर्थकता पर टिप्पणी करती है।

  • 1लेखक: शेखर जोशी (जन्म सन् 1932, अल्मोड़ा, उत्तरांचल; निधन सन् 2022); प्रमुख संग्रह — कोसी का घटवार, दाज्यू, नौरंगी बीमार है।
  • 2विधा: कहानी (गद्य); नई कहानी आंदोलन का प्रतिनिधि नमूना; समाज के मेहनतकश और सुविधाहीन तबके को केंद्र में रखती है।
  • 3केंद्रीय भाव: जातिगत विभाजन की निरर्थकता — मोहन का जातीय अभिमान बेमानी होना और धनराम के आफर पर बैठकर लोहे का काम करना मेहनतकशों के सच्चे भाईचारे की प्रस्तावना करता है।
  • 4मुख्य पात्र: मोहन (कुशाग्र बुद्धि का ब्राह्मण युवक, वंशीधर तिवारी का पुत्र), धनराम (लोहार, गंगाराम का पुत्र), मास्टर त्रिलोक सिंह (गाँव के शिक्षक), वंशीधर (पुरोहित, मोहन के पिता), रमेश (बिरादरी का संपन्न युवक जो मोहन को लखनऊ ले गया)।
  • 5मुख्य घटनाएँ: मोहन का गाँव के स्कूल में मॉनीटर होना → लखनऊ जाकर घरेलू नौकर जैसा जीवन → सपनों का टूटना → गाँव लौटने पर धनराम के आफर पर बैठकर लोहे का काम करना।
06

Rajni

Chapter 6 of the Class 11 Hindi NCERT textbook (Aroh), 'Rajni' (रजनी), मन्नू भंडारी द्वारा रचित एक पटकथा है—बासु चटर्जी निर्देशित दूरदर्शन धारावाहिक 'रजनी' का एक अंश—जिसमें एक निडर मध्यवर्गीय महिला स्कूली शिक्षकों के जबरन ट्यूशन रैकेट के विरुद्ध संघर्ष करती है।

  • 1लेखक: मन्नू भंडारी (1931–2021), जन्म भानपुरा (मध्यप्रदेश); प्रमुख उपन्यास — आपका बंटी, महाभोज; निधन 2021।
  • 2विधा: पटकथा (teleplay) — बासु चटर्जी के निर्देशन में बना दूरदर्शन धारावाहिक 'रजनी', पिछली सदी का नवाँ दशक (1980s)।
  • 3केंद्रीय भाव: शिक्षा का व्यवसायीकरण — शिक्षकों द्वारा जबरन ट्यूशन करवाने का घिनौना रैकेट और उसके विरुद्ध एक साहसी महिला का सामाजिक संघर्ष।
  • 4मुख्य पात्र: रजनी (जुझारू, इंसाफ-पसंद मध्यवर्गीय महिला); लीला बेन (रजनी की मित्र); अमित (7वीं कक्षा का मेधावी छात्र); मिस्टर पाठक (गणित-शिक्षक); हेडमास्टर; शिक्षा-निदेशक; अखबार के संपादक।
  • 5प्रमुख घटना: अमित का पूरा पेपर सही होने पर भी केवल 72 नंबर मिलना — ट्यूशन न लेने की अप्रत्यक्ष 'सजा'।
07

Jamun Ka Ped

Chapter 7 of the Class 11 Hindi NCERT textbook (Aroh), 'Jamun Ka Ped' (जामुन का पेड़), कृश्नचंदर द्वारा लिखित एक हास्य-व्यंग्य कहानी है जिसमें सेक्रेटेरियेट के लॉन में गिरे पेड़ के नीचे दबे एक कवि को बचाने की फ़ाइल विभाग-दर-विभाग घूमती रहती है और अंततः कवि की मृत्यु हो जाती है।

  • 1लेखक: कृश्नचंदर (जन्म 1914, पंजाब के वजीराबाद गाँव; मृत्यु 1977) — उर्दू के प्रसिद्ध कथाकार, प्रगतिशील लेखक संघ से जुड़े; साहित्य अकादमी सहित अनेक पुरस्कारों से सम्मानित।
  • 2विधा: हास्य-व्यंग्य कहानी; पाठ के अनुसार इसमें घटनाएँ अतिशयोक्तिपूर्ण और अविश्वसनीय हैं — विश्वसनीयता ऐसी रचनाओं के मूल्यांकन की कसौटी नहीं।
  • 3केंद्रीय भाव: सरकारी कार्यालयों की पदानुक्रमित, संवेदनशून्य और विवेकहीन कार्यप्रणाली पर तीखा व्यंग्य — 'कार्यालयी तौर-तरीकों में पाया जाने वाला विस्तार कितना निरर्थक और पदानुक्रम कितना हास्यास्पद है।'
  • 4मुख्य घटनाएँ: झक्कड़ में जामुन का पेड़ गिरता है → फ़ाइल व्यापार, कृषि, हॉर्टीकल्चर, मेडिकल, कल्चरल, वन और विदेश विभागों से गुज़रती है → दबे आदमी की पहचान कवि 'ओस' के रूप में → साहित्य अकादमी की सदस्यता मिलती है, पेड़ नहीं हटता → PM का आदेश आने तक कवि की मृत्यु।
  • 5कवि की पहचान: दबे हुए आदमी का उपनाम 'ओस' था; उनका गद्य-संग्रह 'ओस के फूल' हाल ही में प्रकाशित हुआ था।
08

Bharat Mata

Chapter 8 of the Class 11 Hindi NCERT textbook (Aroh), 'Bharat Mata' (भारत माता), जवाहरलाल नेहरू का निबंध है ('हिंदुस्तान की कहानी' का पाँचवाँ अध्याय, अनुवाद: हरिभाऊ उपाध्याय), जिसमें वे स्पष्ट करते हैं कि 'भारत माता' से तात्पर्य इस देश के करोड़ों लोगों से है।

  • 1लेखक: जवाहरलाल नेहरू (जन्म: 1889, इलाहाबाद; मृत्यु: 1964) — भारत के पहले प्रधानमंत्री
  • 2विधा: निबंध (गद्य) — 'हिंदुस्तान की कहानी' का पाँचवाँ अध्याय; हिंदी अनुवाद हरिभाऊ उपाध्याय ने किया
  • 3केंद्रीय भाव: 'भारत माता' कोई अमूर्त प्रतीक नहीं, बल्कि इस देश के करोड़ों लोग हैं; 'भारत माता की जय' का मतलब इन लोगों की जय
  • 4नेहरू जी किसानों को बताते थे कि नदी, पहाड़, जंगल, खेत सब प्रिय हैं, लेकिन 'आखिरकार जिनकी गिनती है, वे हैं हिंदुस्तान के लोग'
  • 5किसानों की समान समस्याएँ: गरीबी, कर्ज, जमींदार, महाजन, कड़े लगान, सूद, पुलिस का जुल्म और विदेशी शासन का ढप्पा (बोझ)
09

Kabir Ke Pad

Chapter 9 of the Class 11 Hindi NCERT textbook (Aroh), 'Kabir Ke Pad' (कबीर के पद), भक्तिकाल की निर्गुण धारा के कवि कबीर (1398–1518) की रचना है, जिसमें उन्होंने परमात्मा की एकता और सृष्टि में उसकी व्यापकता को रोज़मर्रा के उदाहरणों द्वारा प्रकट किया है।

  • 1कवि परिचय: कबीर का जन्म सन् 1398 में वाराणसी के पास 'लहरतारा' (उ.प्र.) में हुआ और मृत्यु सन् 1518 में बस्ती के निकट मगहर में। वे भक्तिकाल की निर्गुण धारा (ज्ञानाश्रयी शाखा) के प्रतिनिधि कवि हैं।
  • 2विधा और स्रोत: प्रस्तुत रचना 'सबद' विधा में है। पद जयदेव सिंह और वासुदेव सिंह द्वारा संकलित-संपादित 'कबीर वाङ्मय' खंड 2 (सबद) से लिया गया है। कबीर की प्रमुख कृति 'बीजक' में साखी, सबद और रमैनी संकलित हैं।
  • 3केंद्रीय भाव: ईश्वर एक है—'हम तौ एक एक करि जांनां'। जो द्वैत मानते हैं अर्थात् परमात्मा की एकता नहीं पहचानते, उन्हीं के लिए नरक (दोजग) है।
  • 4काव्य-सौंदर्य: पद में पवन, जल, ज्योति, मिट्टी, कुम्हार, बढ़ई और अग्नि जैसी रोज़मर्रा की वस्तुओं के माध्यम से गहरे आध्यात्मिक सत्य को सरल एवं प्रभावी ढंग से व्यक्त किया गया है। कबीर अपनी बात 'साफ़ एवं दो टूक शब्दों में' कहने के लिए जाने जाते हैं—इसीलिए हजारी प्रसाद द्विवेदी ने उन्हें 'वाणी का डिक्टेटर' कहा है।
  • 5संदेश: माया देखकर जगत लुभाता है और मनुष्य गर्व करता है, परंतु जो निर्भय हो जाता है उसे कुछ भी नहीं व्यापता—'निरभै भया कछू नहिं ब्यापै कहै कबीर दिवांनां।'
10

Meera Ke Pad

Chapter 10 of the Class 11 Hindi NCERT textbook (Aroh), 'Meera Ke Pad' (मीरा के पद), कृष्णभक्ति की कवयित्री मीराँबाई (1498–1546) के मुक्तक गेय पद हैं, जिनमें वे श्रीकृष्ण (गिरधर गोपाल) को अपना एकमात्र आराध्य और पति घोषित करते हुए अनन्य भक्ति-प्रेम व्यक्त करती हैं।

  • 1कवयित्री परिचय: मीराँबाई का जन्म सन् 1498 में कुड़की गाँव (मारवाड़ रियासत) में हुआ; मृत्यु सन् 1546 में हुई। प्रमुख रचनाएँ: मीरा पदावली और नरसीजी-रो-माहेरो।
  • 2विधा: मुक्तक गेय पद। पद नरोत्तम दास स्वामी द्वारा संकलित-संपादित 'मीराँ मुक्तावली' से लिया गया है। मीरा के पद लोक संगीत और शास्त्रीय संगीत दोनों में आज भी लोकप्रिय हैं।
  • 3केंद्रीय भाव: कृष्ण-भक्ति में अनन्यता — मीरा गिरधर गोपाल को अपना एकमात्र पति और आराध्य मानती हैं, कुल-मर्यादा छोड़कर संतों की संगति करती हैं और व्यर्थ कार्यों में व्यस्त लोगों के प्रति दुख प्रकट करती हैं।
  • 4काव्य-सौंदर्य: मीरा की कविता का प्रधान गुण सादगी और सरलता है। 'कला का अभाव ही उसकी सबसे बड़ी कला है।' आँसुओं से प्रेम-बेलि सींचने और दही मथकर घी निकालने जैसे ग्रामीण बिम्बों से भक्ति की तीव्रता सहज ही अनुभव होती है।
  • 5भाषा: मीरा की भाषा मूलतः राजस्थानी है तथा कहीं-कहीं ब्रजभाषा का प्रभाव भी है। साथ ही सूफ़ियों के प्रभाव को भी उनकी कविता में देखा जा सकता है।
11

Ghar Ki Yaad

Chapter 11 of the Class 11 Hindi NCERT textbook (Aroh), 'Ghar Ki Yaad' (घर की याद), भवानी प्रसाद मिश्र की एक मार्मिक कविता है जिसमें जेल-प्रवास के दौरान कवि सावन की बारिश में अपने घर, माँ, पिता और भाई-बहनों को गहराई से याद करता है।

  • 1कवि परिचय: भवानी प्रसाद मिश्र का जन्म सन् 1913 में टिगरिया गाँव, होशंगाबाद (मध्यप्रदेश) में हुआ। मृत्यु सन् 1985। राष्ट्रीय आंदोलन में सक्रिय भागीदारी; गांधीवाद पर आस्था के कारण 'कविता का गांधी' कहलाए। साहित्य अकादमी सम्मान एवं पद्मश्री से अलंकृत।
  • 2विधा: यह एक कविता (गीतात्मक काव्य) है जो सहज बोल-चाल की भाषा में लिखी गई है।
  • 3केंद्रीय भाव: जेल-प्रवास में घर से विस्थापन की पीड़ा — कवि के स्मृति-संसार में माँ, पिता, चार भाई और चार बहनें एक-एक कर शामिल होते चले जाते हैं। 'घर की अवधारणा की सार्थक और मार्मिक याद कविता की केंद्रीय संवेदना है।'
  • 4काव्य-सौंदर्य: कविता की भाषा सहज और लोक के करीब है — बोल-चाल के गद्यात्मक-से वाक्य-विन्यास को कविता में बदलने की अद्भुत क्षमता इसे घरेलू और हृदयग्राही बनाती है। सावन की लगातार बारिश का चित्रण कवि की मन की उदासी और घर की याद को तीव्र करता है।
  • 5शब्दार्थ — परिताप: अत्यधिक दुख
12

Champa Kale Kale Akshar Nahi Chinhati

Chapter 12 of the Class 11 Hindi NCERT textbook (Aroh), 'Champa Kale Kale Akshar Nahi Chinhati' (चंपा काले काले अक्षर नहीं चीन्हती), त्रिलोचन (मूल नाम वासुदेव सिंह) की 'धरती' संग्रह की कविता है जो चंपा नामक ग्रामीण लड़की के माध्यम से पलायन, आर्थिक मजबूरी और स्त्री के सहज प्रतिरोध को चित्रित करती है।

  • 1कवि परिचय: त्रिलोचन (मूल नाम: वासुदेव सिंह), जन्म सन् 1917, जिला सुल्तानपुर (उ.प्र.), निधन सन् 2007; प्रगतिशील काव्य धारा के प्रमुख कवि; साहित्य अकादमी, शलाका सम्मान और महात्मा गांधी पुरस्कार से सम्मानित।
  • 2विधा: यह कविता त्रिलोचन के 'धरती' संग्रह में संकलित है; त्रिलोचन हिंदी में सॉनेट (अंग्रेजी छंद) को स्थापित करने वाले कवि के रूप में भी जाने जाते हैं।
  • 3केंद्रीय भाव: पलायन के लोक अनुभवों की मार्मिक अभिव्यक्ति — आर्थिक मजबूरियों के चलते घर टूटते हैं; काव्य-नायिका चंपा अनजाने ही उस शोषक व्यवस्था के प्रतिपक्ष में खड़ी हो जाती है।
  • 4काव्य-सौंदर्य: भाषा ठेठ ग्रामीण बोलचाल की है — 'कागद', 'चीन्हती', 'बालम', 'बजर' जैसे देशज शब्द कविता को जीवंत बनाते हैं; संवाद-शैली में लिखी यह कविता पात्रों की मनोस्थिति को सीधे और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती है; वस्तु और रूप की प्रस्तुति में कोई अंतर नहीं रहता।
  • 5शब्दार्थ — चीन्हती: पहचानती; चीन्हों: चिह्नों, अक्षरों
13

Gazal

Chapter 13 of the Class 11 Hindi NCERT textbook (Aroh), 'Gazal' (ग़ज़ल), दुष्यंत कुमार (1933–1975) की रचना है, उनके संग्रह 'साये में धूप' से ली गई, जिसके सात शेरों में समाज और राजनीति की विद्रूपताओं तथा परिवर्तन की आस को उभारा गया है।

  • 1कवि परिचय: दुष्यंत कुमार का जन्म सन् 1933 में राजपुर नवादा गाँव (उत्तर प्रदेश) में हुआ। सन् 1975 में उनका निधन हुआ। उन्होंने इलाहाबाद में साहित्यिक जीवन आरंभ किया, आकाशवाणी और मध्यप्रदेश के राजभाषा विभाग में कार्य किया।
  • 2प्रमुख रचनाएँ: काव्य — सूर्य का स्वागत, आवाजों के घेरे, साये में धूप, जलते हुए वन का वसंत; गीति-नाट्य — एक कंठ विषपायी; उपन्यास — छोटे-छोटे सवाल, आँगन में एक वृक्ष, दोहरी जिंदगी।
  • 3विधा — ग़ज़ल: ग़ज़ल में सभी शेर अपने-आप में मुकम्मिल और स्वतंत्र होते हैं। तुक का निर्वाह और मिजाज का निर्वाह — ये दो तत्व शेरों को एक रचना की शक्ल देते हैं। पहले शेर की दोनों पंक्तियों में तुक मिलता है और उसके बाद सभी शेरों की दूसरी पंक्ति में उस तुक का निर्वाह होता है।
  • 4केंद्रीय भाव: राजनीति और समाज में जो कुछ चल रहा है उसे खारिज करने और विकल्प की तलाश को मान्यता देने का भाव इस ग़ज़ल का केंद्रीय सूत्र है।
  • 5काव्य-सौंदर्य: पहले शेर में 'चिरागाँ' (बहुवचन) और 'चिराग' (एकवचन) का प्रयोग वादे और कठोर यथार्थ के बीच का अंतर उभारता है। उर्दू-हिंदी के मिले-जुले शब्दों से भाव अधिक सघन और असरदार बने हैं। हिंदी ग़ज़ल को साहित्यिक प्रतिष्ठा देने का श्रेय अकेले दुष्यंत को दिया जाता है।
14

He Bhukh Mat Machal, He Mere Juhi Ke Phool Jaise Ishwar

Chapter 14 of the Class 11 Hindi NCERT textbook (Aroh), 'He Bhukh Mat Machal; He Mere Juhi Ke Phool Jaise Ishwar' (हे भूख मत मचल; हे मेरे जूही के फूल जैसे ईश्वर), 12वीं सदी की कवयित्री अक्कमहादेवी के दो वचन हैं (अनुवाद: केदारनाथ सिंह) जो वीर शैव आंदोलन की भक्ति-चेतना को व्यक्त करते हैं।

  • 1कवयित्री परिचय: अक्कमहादेवी का जन्म 12वीं सदी में कर्नाटक के उडुतरी गाँव (जिला शिवमोगा) में हुआ। वे वीर शैव आंदोलन से जुड़ी महत्वपूर्ण कवयित्री थीं; उनके समकालीन कन्नड़ संत कवि बसवन्ना और अल्लामा प्रभु थे।
  • 2विधा और अनुवाद: ये रचनाएँ कन्नड़ 'वचन' (Vachana) विधा में हैं। दोनों वचनों का अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद केदारनाथ सिंह ने किया है। हिंदी में यह 'वचन सौरभ' नाम से तथा अंग्रेजी में 'स्पीकिंग ऑव शिवा' (सं. ए. के. रामानुजन) नाम से उपलब्ध है।
  • 3प्रथम वचन का केंद्रीय भाव: इंद्रियों पर नियंत्रण का संदेश — भूख, प्यास, नींद, क्रोध, मोह, लोभ, मद और ईर्ष्या को प्रत्यक्ष संबोधित किया गया है। स्रोत के अनुसार 'यह उपदेशात्मक न होकर प्रेम-भरा मनुहार है।'
  • 4द्वितीय वचन का केंद्रीय भाव: एक भक्त का ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण — कवयित्री चाहती हैं कि उनकी झोली में कुछ न टिके, भीख भी न मिले और उनका 'स्व' (अहंकार) पूरी तरह नष्ट हो जाए।
  • 5काव्य-सौंदर्य: ईश्वर को 'जूही के फूल जैसे' — एक सुकोमल, सुगंधित पुष्प — के समान बताया गया है, जो भक्त की कोमल आस्था को व्यक्त करता है। प्रत्यक्ष संबोधन शैली ('हे भूख!', 'हे मोह!', 'ओ चराचर!') भाव को जीवंत बनाती है।
15

Sabse Khatarnak

Chapter 15 of the Class 11 Hindi NCERT textbook (Aroh), 'Sabse Khatarnak' (सबसे खतरनाक), पाश (मूल नाम अवतार सिंह संधू) की एक विद्रोही राजनीतिक कविता है जो समाज में बढ़ती संवेदनहीनता और सपनों के मर जाने को सबसे बड़ा खतरा बताती है।

  • 1कवि परिचय: पाश का मूल नाम अवतार सिंह संधू है। जन्म सन् 1950 में तलवंडी सलेम गाँव, जिला जालंधर (पंजाब) में हुआ। मध्यवर्गीय किसान परिवार से आए पाश की शिक्षा अनियमित ढंग से स्नातक तक हुई और सन् 1988 में वे शहीद हुए।
  • 2विधा: यह एक समकालीन राजनीतिक कविता है। पाश समकालीन पंजाबी साहित्य के महत्वपूर्ण विद्रोही कवि माने जाते हैं जिन्होंने 'विद्रोही कविता का नया सौंदर्य विधान विकसित' किया।
  • 3केंद्रीय भाव: कविता बताती है कि बाहरी उत्पीड़न — मेहनत की लूट, पुलिस की मार, गद्दारी — से भी बड़ा खतरा भीतरी मृत्यु है। 'मुर्दा शांति से भर जाना', 'हमारे सपनों का मर जाना' और 'आत्मा का सूरज डूब जाना' — ये कवि की दृष्टि में सबसे खतरनाक स्थितियाँ हैं।
  • 4काव्य-सौंदर्य: कविता में 'सबसे खतरनाक' वाक्यांश को बार-बार दोहराकर एक प्रभावशाली लय और जोर पैदा किया गया है। 'बुरा तो है' कहकर कवि उत्पीड़न को स्वीकार करते हुए उससे भी बड़े खतरे की ओर ध्यान खींचते हैं। घड़ी, आँख, चाँद, रात, दिशा जैसी परिचित वस्तुओं के माध्यम से संवेदनहीनता की भयावहता का चित्रण हुआ है।
  • 5शब्दार्थ — गद्दारी: व्यक्ति, देश या शासन से द्रोह या धोखा।
16

Aao Milkar Bachaye

Chapter 16 of the Class 11 Hindi NCERT textbook (Aroh), 'Aao Milkar Bachaye' (आओ, मिलकर बचाएँ), निर्मला पुतुल की कविता है (संथाली से हिंदी रूपांतर: अशोक सिंह) जो संथाल समुदाय की सांस्कृतिक पहचान, प्रकृति, भाषा और जीवन-शैली को विनाश व विस्थापन से बचाने का आह्वान करती है।

  • 1कवयित्री परिचय: निर्मला पुतुल का जन्म सन् 1972 में दुमका, झारखंड के एक आदिवासी परिवार में हुआ। प्रमुख रचनाएँ — 'नगाड़े की तरह बजते शब्द' और 'अपने घर की तलाश में'।
  • 2विधा: यह कविता मूलतः संथाली भाषा में लिखी गई थी जिसका हिंदी रूपांतर अशोक सिंह ने किया है।
  • 3केंद्रीय भाव: विस्थापन और प्रकृति-विनाश के कारण संकटग्रस्त आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान, भाषा, पर्यावरण और मानवीय मूल्यों को बचाने का सामूहिक आह्वान।
  • 4काव्य-सौंदर्य: कविता में एक के बाद एक छोटी-छोटी छवियाँ — धनुष की डोरी, तीर का नुकीलापन, मिट्टी का सोंधापन — संचित होकर एक तीव्र भावनात्मक प्रभाव उत्पन्न करती हैं; बार-बार 'बचाएँ' शब्द की आवृत्ति एक आग्रहपूर्ण लय बनाती है।
  • 5शब्दार्थ — हिड़या: संथाली समाज में प्रचलित मादक पेय, जिसमें बस्ती के डूबने का भय है।

More Hindi books

Want offline access with notes & solutions?

Download CBSE Prepmaster for free — includes NCERT solutions, flashcards, mock tests & more.

Download Free App