Class 6 Hindi

Chapter 13 — Ped ki Baat

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Overview

Summary

Chapter 13 of the Class 6 Hindi NCERT textbook (Malhar), 'Ped ki Baat' (पेड़ की बात), जगदीशचंद्र बसु द्वारा लिखा और शंकर सेन द्वारा बांग्ला से हिंदी में अनूदित एक वैज्ञानिक-साहित्यिक निबंध है, जिसमें पेड़-पौधों के बीज से मृत्यु तक के जीवन-चक्र, पोषण-प्रक्रिया और संतान के लिए आत्म-बलिदान का मार्मिक चित्रण है।

  • केंद्रीय भावपेड़ का जीवन-चक्र (बीज → अंकुर → पेड़ → फूल → बीज) और संतान के लिए आत्म-बलिदान इस निबंध का मूल भाव है। लेखक इस बलिदान की तुलना माँ की ममता और 'पारस मणि' से करते हैं।
  • पोषण-प्रक्रियापेड़ जड़ों के सूक्ष्म नलों द्वारा मिट्टी से रस और पत्तों के अनगिनत सूक्ष्म मुखों द्वारा 'अंगारक वायु' (कार्बन डाइऑक्साइड) ग्रहण करता है; सूर्य-प्रकाश उसके जीवन का मूलमंत्र है। जड़ नीचे और तना ऊपर बढ़ता है, जिसे उल्टे गमले के प्रयोग से सिद्ध किया गया।
  • प्रजनन एवं बलिदानफूल खिलाकर पेड़ मधुमक्खी और तितली को बुलाता है जो पराग-कणों का स्थानांतरण करती हैं, जिससे बीज बनते हैं। अंत में पेड़ संतान के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करके सूख जाता है।
Essentials

Key points & formulas

  1. 01लेखक: जगदीशचंद्र बसु (1858–1937), प्रसिद्ध वैज्ञानिक; बांग्ला से हिंदी अनुवाद: शंकर सेन
  2. 02विधा: वैज्ञानिक-साहित्यिक निबंध — विज्ञान के तथ्यों को सजीव साहित्यिक शैली में प्रस्तुत किया गया है
  3. 03केंद्रीय भाव: पेड़ का जीवन-चक्र (बीज → अंकुर → पेड़ → फूल → बीज) और संतान के लिए आत्म-बलिदान; माँ की ममता की 'पारस मणि' से तुलना की गई है
  4. 04जड़ सदैव नीचे और तना सदैव ऊपर की ओर बढ़ता है — गमले को उल्टा लटकाने के प्रयोग से यह सिद्ध किया गया
  5. 05पेड़ जड़ द्वारा मिट्टी से तरल रस और पत्तों के अनगिनत सूक्ष्म मुखों द्वारा 'अंगारक वायु' ग्रहण करते हैं; सूर्य-प्रकाश के अभाव में पेड़-पौधे जीवित नहीं रह सकते
  6. 06मधुमक्खी व तितली पराग-कणों का एक फूल से दूसरे फूल पर स्थानांतरण करती हैं जिससे बीज पकते हैं — वृक्ष और परागकारक जीवों की चिरकालिक घनिष्ठता
  7. 07कठिन शब्दार्थ: अंकुर = कली/नव-जीवन का चिह्न; अंगारक = कार्बन डाइऑक्साइड; पराग-कण = पुष्परज (फूल की धूल); न्योछावर = समर्पण/बलिदान; सूक्ष्मदर्शी = माइक्रोस्कोप; विषाक्त = ज़हरीला
Questions

Frequently asked questions

01

'Ped ki Baat' का सारांश क्या है?

यह निबंध जगदीशचंद्र बसु ने लिखा है। इसमें बीज के अंकुरण से पेड़ बनने, फूल खिलाने और अंत में संतान (बीज) के लिए मर जाने की पूरी यात्रा है। पेड़ जड़ से मिट्टी का रस और पत्तों से 'अंगारक वायु' (कार्बन डाइऑक्साइड) लेता है। सूर्य-प्रकाश उसके जीवन का आधार है। अंत में पेड़ अपना सब-कुछ न्योछावर करके सूख कर गिर पड़ता है — लेखक इसे माँ की ममता से जोड़ते हैं।

02

'Ped ki Baat' के लेखक कौन हैं?

इस निबंध के लेखक प्रसिद्ध वैज्ञानिक जगदीशचंद्र बसु (1858–1937) हैं। वे जीवविज्ञान, भौतिकी, वनस्पति विज्ञान और विज्ञान-कथा लेखन में रुचि रखते थे। 'पेड़ की बात' मूलतः बांग्ला में लिखी गई थी, जिसका हिंदी अनुवाद शंकर सेन ने किया है।

03

'Ped ki Baat' का अनुवाद किसने किया?

'पेड़ की बात' का बांग्ला से हिंदी में अनुवाद शंकर सेन ने किया है।

04

'Ped ki Baat' का केंद्रीय भाव क्या है?

इस निबंध का केंद्रीय भाव पेड़ का जीवन-चक्र और संतान के प्रति उसका निस्वार्थ प्रेम है। जैसे माँ की ममता मिट्टी और अंगार को भी सुंदर फूल बना देती है, वैसे ही पेड़ बीजों को पोषण देने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करके मर जाता है। साथ ही यह भी बताया गया है कि प्रकाश ही जीवन का मूलमंत्र है।

05

पेड़-पौधे अपना भोजन कैसे प्राप्त करते हैं?

पेड़-पौधे दो प्रकार से भोजन ग्रहण करते हैं — जड़ों के हज़ारों सूक्ष्म नलों द्वारा मिट्टी में घुले तरल द्रव्य (रस) सोखते हैं, और पत्तों के अनगिनत सूक्ष्म मुखों द्वारा हवा से 'अंगारक वायु' ग्रहण करते हैं। सूर्य की ऊर्जा से पत्ते इस अंगारक वायु का उपयोग करके अपना पोषण करते हैं।

06

'अंगारक वायु' क्या है और पेड़-पौधे उसे कैसे उपयोग करते हैं?

'अंगारक वायु' वह विषाक्त वायु है जो मनुष्य और जीव-जंतु श्वास छोड़ने पर निकालते हैं — अर्थात कार्बन डाइऑक्साइड। पेड़-पौधे पत्तों के सूक्ष्म मुखों द्वारा इसे ग्रहण करते हैं और सूर्य-ऊर्जा के सहारे इससे 'अंगार' (कार्बन) निकालकर अपने शरीर का संवर्द्धन करते हैं। इस प्रकार पेड़ जहरीली वायु को शुद्ध कर देते हैं।

07

पेड़ फूल क्यों खिलाता है?

पेड़ अपनी संतान (बीज) की सुरक्षा के लिए फूल खिलाता है। फूल की पंखुड़ियाँ बीज के चारों ओर एक छोटा-सा घर बनाती हैं। रंग-बिरंगे फूल और सुगंध मधुमक्खी व तितली को आकर्षित करती हैं जो पराग-कण एक फूल से दूसरे फूल तक पहुँचाती हैं — इसी प्रक्रिया से बीज पकते हैं।

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पराग-कण का क्या महत्व है?

पराग-कण के बिना बीज नहीं पक सकता। मधुमक्खियाँ और तितलियाँ एक फूल के पराग-कण दूसरे फूल पर ले जाती हैं जिससे फूल में बीज फलता है। इस प्रकार मधुमक्खी का आगमन वृक्ष के लिए उपकारी है — वृक्ष और ये परागकारक जीव चिरकाल से एक-दूसरे के सहयोगी रहे हैं।

09

'प्रकाश ही जीवन का मूलमंत्र है' — इस पंक्ति का क्या अर्थ है?

सूर्य-प्रकाश के बिना पेड़-पौधे जीवित नहीं रह सकते — वे किसी भी स्थिति में प्रकाश की ओर बढ़ते हैं। पत्ते सूर्य-ऊर्जा से अंगारक वायु का उपचार करते हैं और पेड़ के रेशे-रेशे में सूरज की किरणें आबद्ध होती हैं। ईंधन जलाने पर जो ताप और प्रकाश मिलता है, वह भी पेड़-पौधों में संचित सूर्य-ऊर्जा ही है।

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जड़ और तने में क्या अंतर है?

बीज से अंकुर निकलने पर जो भाग माटी के भीतर प्रवेश करता है उसे 'जड़' कहते हैं और जो भाग ऊपर की ओर बढ़ता है उसे 'तना' कहते हैं। जड़ हमेशा नीचे और तना हमेशा ऊपर की ओर बढ़ता है — चाहे पौधे को किसी भी दिशा में रखा जाए। लेखक ने गमले को उल्टा लटकाने का प्रयोग करके यह सिद्ध किया।

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Ped ki Baat summary in hindi

'पेड़ की बात' जगदीशचंद्र बसु का वैज्ञानिक-साहित्यिक निबंध है। बीज मिट्टी में पड़ा रहता है, वसंत और वर्षा आने पर अंकुरित होता है। पेड़ जड़ों से रस और पत्तों से कार्बन डाइऑक्साइड ग्रहण करता है; सूर्य-प्रकाश उसका जीवन-आधार है। फूल खिलाकर वह मधुमक्खी-तितली से पराग-कण स्थानांतरित कराता है ताकि बीज बन सकें। अंत में बीजों को पोषण देते-देते पेड़ सूख कर गिर जाता है — संतान के लिए माँ जैसा बलिदान।

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जगदीशचंद्र बसु के बारे में पाठ में क्या बताया गया है?

जगदीशचंद्र बसु (1858–1937) प्रसिद्ध वैज्ञानिक थे जिनका बचपन प्रकृति के अवलोकन में बीता। वे जीवविज्ञान, भौतिकी, वनस्पति विज्ञान और विज्ञान-कथा लेखन में रुचि रखते थे। उन्होंने सिद्ध किया कि पौधों का एक निश्चित जीवन-चक्र और प्रजनन-प्रणाली होती है और वे अपने परिवेश के प्रति जागरूक हैं। उन्होंने सर्वप्रथम रेडियो तरंगों द्वारा संचार स्थापित किया।

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