Summary
Chapter 7 of the Class 6 Hindi NCERT textbook (Malhar), 'Jalate Chalo' (जलाते चलो), कवि द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी द्वारा रचित एक प्रेरणादायक कविता है, जिसमें कवि स्नेह से भरे दीप जलाते रहने की प्रेरणा देते हैं ताकि संसार का अँधेरा मिटे और एक दिन निशा को सवेरा अवश्य मिले।
- केंद्रीय भाव — स्नेह से भरे दीप जलाते रहने से एक दिन संसार का अँधेरा मिटेगा। निराश न होकर भलाई के कार्य निरंतर करते रहना ही कविता का मूल संदेश है।
- प्रतीक-योजना — दीप = भलाई/अच्छाई; तिमिर व अमावस = बुराई, निराशा व कठिनाई; विद्युत-दिये = बिना प्रेम की भौतिक प्रगति; निशा = अँधकार; सवेरा = आशा। बिना स्नेह के जलते दिये राह नहीं दिखा सकते।
- काव्य-सौंदर्य — दीप और तूफ़ान की यह लड़ाई अनंत है — युगों से अनेक दीप बुझे पर उनकी ज्योति से उजाला फैलता रहा। 'सा/सी/से' से तुलनाएँ ('अमावस निशा-सी', 'स्वर्ण-सी जल रही') कविता को प्रभावशाली बनाती हैं।
Key points & formulas
- 01कवि: इस कविता के रचनाकार द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी (1916–1998) हैं, जो हिंदी बाल साहित्य के प्रसिद्ध कवि हैं; उनका गीत 'हम सब सुमन एक उपवन के' आज भी लोकप्रिय है।
- 02विधा: यह एक प्रेरणादायक कविता है जिसमें नियमित लय एवं तुकबंदी है; कविता की प्रत्येक पंक्ति को बोलने में लगभग समान समय लगता है।
- 03केंद्रीय भाव: स्नेह से भरे दीप जलाते रहने से एक दिन संसार का अँधेरा मिटेगा — निराश न होकर भलाई के कार्य निरंतर करते रहना ही कविता का मूल संदेश है।
- 04प्रतीक-योजना: दीप = भलाई/अच्छाई; तिमिर/अमावस = बुराई/निराशा/कठिनाई; विद्युत-दिये = बिना प्रेम की भौतिक प्रगति; निशा = अँधकार; सवेरा = उजाला/आशा।
- 05काव्य-सौंदर्य: 'सा/सी/से' का प्रयोग तुलना के लिए — 'अमावस निशा-सी', 'स्वर्ण-सी जल रही' — कविता को और अधिक प्रभावशाली बनाता है।
- 06कठिन शब्दार्थ: तिमिर = अँधेरा; स्नेह = प्रेम (और दीपक का तेल); निशा = रात; सवेरा = सुबह; पवन = हवा; निरंतर = लगातार।
- 07कठिन शब्दार्थ: अमावस/अमावस्या = वह रात जब चंद्रमा नहीं दिखता; पूर्णिमा = पूरे चंद्रमा वाली रात; विद्युत-दिये = बिजली से जलने वाले बल्ब आदि उपकरण।
Frequently asked questions
01Jalate Chalo का सारांश क्या है?
'जलाते चलो' कविता में कवि द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी मनुष्य को स्नेह से भरे दीप जलाते रहने की प्रेरणा देते हैं। दीपक और तिमिर के प्रतीकों के माध्यम से कवि बताते हैं कि बिना प्रेम के जलने वाले विद्युत-दिये पथ नहीं दिखा सकते। युगों से मनुष्य ने तिमिर को चुनौती दी है; अनेक दीप बुझे किंतु उनकी ज्योति से उजाला फैला। कवि का विश्वास है कि यदि धरा पर एक भी दीपक जलता रहे तो निशा को सवेरा अवश्य मिलेगा।
02Jalate Chalo के कवि कौन हैं?
इस कविता के कवि द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी हैं (1916–1998)। वे हिंदी के प्रसिद्ध कवि और बाल साहित्य के चर्चित रचनाकार हैं। उनका गीत 'हम सब सुमन एक उपवन के' आज भी बहुत लोकप्रिय है।
03Jalate Chalo का केंद्रीय भाव क्या है?
इस कविता का केंद्रीय भाव यह है कि मनुष्य को निराश हुए बिना स्नेह से भरे दीप निरंतर जलाते रहने चाहिए। भलाई के कार्य करते रहने से एक दिन संसार का अँधेरा (बुराई, निराशा) अवश्य मिटेगा और रात के बाद सवेरा आएगा।
04Jalate Chalo summary in hindi
कवि द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी की 'जलाते चलो' कविता में दीपक और अँधेरे (तिमिर) के प्रतीकों से मनुष्य को प्रेरणा दी गई है। कवि कहते हैं कि स्नेह से भरे दिये जलाते रहो; बिना प्रेम के जलने वाले विद्युत-दिये पथ नहीं दिखा सकते। युगों से इंसान ने तिमिर की चुनौती स्वीकार की है और यदि एक भी दीपक जलता रहे तो निशा को सवेरा मिलेगा।
05'तिमिर' का अर्थ क्या है?
'तिमिर' का अर्थ है अँधेरा या अंधकार। इस कविता में 'तिमिर' बुराई, निराशा और कठिनाइयों का प्रतीक है। कवि ने 'तिमिर की शिला' (अँधेरे की चट्टान) और 'तिमिर की सरित' (अँधेरे की नदी) जैसे प्रयोग किए हैं।
06'स्नेह' का इस कविता में क्या अर्थ है?
इस कविता में 'स्नेह' के दो अर्थ हैं — एक, दीपक में डाला जाने वाला तेल; दूसरा, प्रेम और अपनापन। कवि का कहना है कि दीप प्रेम (स्नेह) से भर-भरकर जलाने चाहिए, तभी वे दूसरों का मार्ग प्रकाशित कर सकते हैं।
07'अमावस' और 'पूर्णिमा' का इस कविता में क्या प्रतीकात्मक अर्थ है?
कविता में 'अमावस' (अमावस्या) अँधेरे, निराशा और बुराई का प्रतीक है, जबकि 'पूर्णिमा' उजाले, आशा और भलाई का प्रतीक है। कवि कहते हैं कि विज्ञान में अमावस को पूर्णिमा बनाने की शक्ति है, फिर भी संसार में दिन के समय ही अमावस जैसा अँधेरा क्यों घिर रहा है।
08कविता में 'विद्युत-दिये' बुझाने की बात क्यों कही गई है?
कवि का कहना है कि बिना स्नेह (प्रेम) के जलने वाले विद्युत-दिये (बिजली के बल्ब आदि) पथ नहीं दिखा सकते। इससे उनका तात्पर्य है कि भौतिक प्रगति बिना मानवीय प्रेम और भलाई की भावना के मार्गदर्शन नहीं कर सकती।
09'दीये और तूफ़ान की यह कहानी' से कवि का क्या तात्पर्य है?
कवि का तात्पर्य है कि भलाई (दीपक) और बुराई (तूफ़ान) का संघर्ष सदा से चला आ रहा है और चलता रहेगा। जो पहली ज्योति जली, वह स्वर्ण की तरह जल रही है और जलती रहेगी — अर्थात भलाई की लौ अविनाशी है।
10'निशा' और 'सवेरा' का इस कविता में प्रतीकात्मक अर्थ क्या है?
इस कविता में 'निशा' का अर्थ केवल रात नहीं, बल्कि यह बुराई, कठिनाई और निराशा का प्रतीक है। 'सवेरा' का अर्थ केवल सुबह नहीं, बल्कि यह उजाला, आशा और सुखद परिवर्तन का प्रतीक है।
11Jalate Chalo mein kaun-sa sandesh diya gaya hai?
इस कविता में संदेश दिया गया है कि मनुष्य को निराश नहीं होना चाहिए और स्नेह (प्रेम) से भरे दीप निरंतर जलाते रहने चाहिए। दूसरों की भलाई के लिए किए गए कार्य कभी व्यर्थ नहीं जाते — यदि एक भी दीपक जलता रहे तो अँधेरी रात को सवेरा अवश्य मिलेगा।
12द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी की अन्य रचनाएँ कौन-सी हैं?
पाठ के अनुसार द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी ने बच्चों के लिए बहुत-सी रचनाएँ लिखी हैं। उनका गीत 'हम सब सुमन एक उपवन के' आज भी बहुत लोकप्रिय है।
13क्या Jalate Chalo अध्याय की PDF मुफ़्त है?
हाँ, बिना साइन-अप के मुफ़्त डाउनलोड करें।
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